TRAI के नए नियम लागू, टेलीकॉम कंपनियों के लिए 24 घंटे शिकायत सेवा अनिवार्य
News Synopsis
भारत में मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही टेलीकॉम कंपनियों के ग्राहक सहायता केंद्रों पर शिकायतों और सेवा संबंधी समस्याओं का दबाव भी बढ़ा है। कई बार ग्राहकों को अपनी समस्या का समाधान पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। वहीं, कंपनियों द्वारा स्वचालित प्रणालियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने से मानवीय सहायता की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए ग्राहक शिकायतों के समाधान से जुड़े नियमों को सख्त किया है। नए प्रावधानों के तहत कंपनियों को 24 घंटे शिकायत सहायता उपलब्ध करानी होगी, जबकि मानवीय प्रतिनिधियों की सहायता रोजाना कम से कम 16 घंटे तक जरूरी होगी।
शिकायतों को गलत तरीके से निपटाने पर कंपनियों को आर्थिक जुर्माना भी देना पड़ सकता है। इसके अलावा, TRAI ने टेलीकॉम सेवाओं में AI के जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए अलग से मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन कदमों का उद्देश्य तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ग्राहकों के अधिकारों, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।
TRAI ने टेलीकॉम कंपनियों पर ₹20 लाख तक जुर्माने का प्रावधान किया (TRAI Introduces Penalties of Up to ₹20 Lakh for Telecom Operators)
2 नवंबर 2026 को TRAI ने दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथा संशोधन) विनियम, 2026 Telecommunication Consumer Grievance Redressal (Fourth Amendment) Regulations, 2026 को अधिसूचित किया। इन संशोधित नियमों के तहत यदि कोई टेलीकॉम कंपनी ग्राहकों की शिकायतों या अपीलों का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समाधान नहीं करती है, तो उस पर आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है।
शिकायत और अपील के गलत निपटारे पर लगेगा जुर्माना (Penalties for Improper Disposal of Complaints and Appeals)
नए नियमों के तहत आर्थिक दंड की व्यवस्था इस प्रकार है:
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प्रति शिकायत ₹1,000: यदि किसी ग्राहक की शिकायत का गलत तरीके से निपटारा किया जाता है, तो प्रत्येक ऐसी शिकायत पर कंपनी को ₹1,000 का आर्थिक दंड देना पड़ सकता है।
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प्रति अपील ₹5,000: निर्धारित नियमों का पालन किए बिना किसी अपील का निपटारा करने पर प्रत्येक मामले में ₹5,000 का दंड लगाया जा सकता है।
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अधिकतम ₹20 लाख: इन उल्लंघनों के लिए प्रत्येक तिमाही में किसी लाइसेंस प्राप्त या अधिकृत सेवा क्षेत्र के हिसाब से कुल जुर्माने की सीमा ₹20 लाख रखी गई है।
रिपोर्ट जमा करने में देरी पर भी कार्रवाई (Penalties for Delayed Performance Reports)
टेलीकॉम कंपनियों को अपनी तिमाही प्रदर्शन रिपोर्ट समय पर जमा करनी होगी। रिपोर्ट जमा करने में देरी होने पर भी आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
पहले 15 दिनों की देरी के लिए प्रतिदिन ₹5,000 तक का दंड हो सकता है। इसके बाद देरी जारी रहने पर प्रतिदिन ₹20,000 तक का दंड लगाया जा सकता है। हालांकि, प्रत्येक मामले में प्रति सेवा क्षेत्र अधिकतम जुर्माने की सीमा ₹10 लाख होगी।
TRAI कंपनियों की शिकायत निपटाने की प्रक्रिया की जांच ऑडिट, निरीक्षण, रिपोर्ट और ग्राहकों से मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर भी कर सकता है।
अब 24 घंटे मिलेगी शिकायत सहायता, मानवीय मदद भी जरूरी (24-Hour Complaint Support and Mandatory Human Assistance)
संशोधित नियमों में एक बड़ा बदलाव शिकायत केंद्रों के कामकाज के समय को लेकर किया गया है। अब टेलीकॉम कंपनियों को अपने शिकायत केंद्र 24 घंटे चालू रखने होंगे। इससे पहले शिकायत सहायता के लिए 16 घंटे की व्यवस्था थी।
AI और स्वचालित प्रणालियों के साथ मानव प्रतिनिधि भी उपलब्ध होंगे (Human Representatives Alongside AI and Automated Systems)
कंपनियां ग्राहकों को सहायता देने के लिए मानव प्रतिनिधियों, स्वचालित प्रणालियों, AI एजेंट या इन सभी के मिले-जुले तरीके का इस्तेमाल कर सकती हैं। हालांकि, नए नियमों के अनुसार मानवीय सहायता रोजाना कम से कम 16 घंटे उपलब्ध रहनी चाहिए।
इसका अर्थ है कि कंपनियां पूरी तरह से चैटबॉट या स्वचालित जवाब देने वाली प्रणालियों पर निर्भर नहीं रह सकतीं। ग्राहकों को जरूरत पड़ने पर किसी वास्तविक कर्मचारी से बात करने का विकल्प मिलना जरूरी होगा।
इसके साथ ही, AI और स्वचालित प्रणालियों के कामकाज पर उचित मानवीय निगरानी भी रखनी होगी। यदि ग्राहक किसी AI एजेंट से बातचीत कर रहा है, तो कंपनी को उसे इसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा।
मोबाइल ऐप से भी दर्ज करा सकेंगे शिकायत (Consumers Can Register Complaints Through Mobile Apps)
ग्राहकों को शिकायत, अपील और सेवा संबंधी अनुरोध दर्ज कराने के लिए अधिक विकल्प भी दिए गए हैं। अब वे टेलीकॉम कंपनी की मोबाइल ऐप के माध्यम से भी अपनी समस्या दर्ज करा सकेंगे।
इससे पहले से उपलब्ध वेबसाइट और ग्राहक सेवा केंद्र जैसे माध्यम भी जारी रहेंगे। इसका उद्देश्य ग्राहकों के लिए शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को आसान और सुविधाजनक बनाना है।
TRAI ने शिकायत और अपील की प्रक्रिया में किए बदलाव (TRAI Changes the Consumer Complaint and Appeal Process)
TRAI ने ग्राहकों की शिकायतों और अपीलों के निपटारे की समय-सीमा में भी बदलाव किया है। नए नियमों के तहत शिकायत का समाधान होने के बाद उससे असंतुष्ट ग्राहक को अपील करने के लिए अब पहले की तुलना में कम समय मिलेगा।
अपील के लिए अब मिलेंगे 15 दिन (Consumers Will Have 15 Days to File an Appeal)
पहले ग्राहकों को शिकायत के निपटारे के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिन का समय मिलता था। संशोधित नियमों के तहत यह अवधि घटाकर 15 दिन कर दी गई है।
वहीं, टेलीकॉम कंपनियों के अपीलीय प्राधिकरण को अपील प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपना अंतिम निर्णय ग्राहक को बताना होगा।
उपभोक्ता शिकायत निवारण निगरानी समितियों का गठन (Formation of Consumer Grievance Redressal Oversight Committees)
TRAI ने अपीलों के समाधान के लिए पहले से मौजूद सलाहकार समिति की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। इसके स्थान पर टेलीकॉम कंपनियों को उपभोक्ता शिकायत निवारण निगरानी समितियां बनानी होंगी। इनमें सेवा प्रदाताओं के प्रतिनिधियों के साथ पंजीकृत उपभोक्ता संगठनों को भी शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा, कंपनियों को कुछ अन्य जिम्मेदारियां भी निभानी होंगी:
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शिकायत और अपील बंद होने के बाद ऑनलाइन प्रतिक्रिया सर्वेक्षण कराना होगा।
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ग्राहकों से मिली प्रतिक्रिया के नतीजे हर तिमाही प्रकाशित करने होंगे।
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शिकायतों से जुड़ी तिमाही रिपोर्ट अपने CEO या निदेशक मंडल को देनी होगी।
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दिव्यांग व्यक्तियों के लिए वेबसाइट, मोबाइल ऐप और सहायता माध्यमों पर शिकायत दर्ज कराने की सुविधाएं सुलभ बनानी होंगी।
इन बदलावों का उद्देश्य शिकायत निवारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और कंपनियों की जवाबदेही तय करना है।
टेलीकॉम कंपनियों के लिए TRAI के प्रस्तावित AI दिशा-निर्देश क्या हैं? (What Are TRAI's Proposed AI Guidelines for Telecom Companies?)
शिकायत निवारण से जुड़े संशोधनों के अलावा TRAI ने 30 अक्टूबर 2026 को टेलीकॉम क्षेत्र में AI के जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टेलीकॉम कंपनियां AI तकनीक का इस्तेमाल करते समय सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन और जवाबदेही से जुड़े उचित नियमों का पालन करें।
AI सिस्टम का जोखिम के आधार पर वर्गीकरण (AI Risk Classification)
प्रस्ताव के अनुसार, AI प्रणालियों को उनके काम और संभावित प्रभाव के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा:
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उच्च जोखिम (High Risk)
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मध्यम जोखिम (Medium Risk)
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कम जोखिम (Low Risk)
यह वर्गीकरण इस बात पर निर्भर करेगा कि कोई AI प्रणाली टेलीकॉम सेवाओं के संचालन के लिए कितनी महत्वपूर्ण है, उसका ग्राहकों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है और वह सेवा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को किस तरह प्रभावित करती है।
मानवीय निगरानी और आंतरिक नीति जरूरी (Mandatory Human Oversight and Internal Policy)
प्रस्तावित नियमों के तहत संबंधित टेलीकॉम कंपनियों को AI के इस्तेमाल के लिए एक आंतरिक नीति बनानी होगी। इस नीति को कंपनी के निदेशक मंडल या उसके समकक्ष शासी निकाय से मंजूरी लेनी होगी।
इसके अलावा, कंपनियों को ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति करनी होगी, जो AI तकनीक के इस्तेमाल की निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि निर्धारित नियमों का पालन हो रहा है।
AI से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग (AI Incident Reporting)
कंपनियों को AI से जुड़ी घटनाओं का रिकॉर्ड रखने के लिए एक केंद्रीय डेटाबेस तैयार करना होगा। किसी समस्या या गड़बड़ी की सूचना मिलने पर उसकी जांच करना भी जरूरी होगा।
गंभीर और उच्च स्तर की घटनाओं की जानकारी TRAI को देनी होगी। इससे नियामक को AI प्रणालियों से जुड़े जोखिमों और उनके प्रभाव पर नजर रखने में मदद मिल सकती है।
ग्राहकों की सुरक्षा और कंपनियों की जवाबदेही (Consumer Protection and Accountability)
प्रस्तावित दिशा-निर्देशों में AI के कारण ग्राहकों को होने वाले नुकसान या परेशानी से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए भी व्यवस्था बनाने की बात कही गई है। कंपनियों को ऐसी शिकायतों का उचित समय-सीमा के भीतर निपटारा करना होगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि कोई AI प्रणाली किसी तीसरे पक्ष की कंपनी या विक्रेता ने विकसित की है, तब भी उसके इस्तेमाल से होने वाले परिणामों की जिम्मेदारी टेलीकॉम सेवा प्रदाता की ही होगी।
इसके अलावा, AI से जुड़ी आंतरिक नीतियों को लागू करने और उनकी निगरानी के लिए AI गवर्नेंस एंड सेफ्टी कमेटी बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
इन मसौदा दिशा-निर्देशों पर संबंधित पक्ष 27 नवंबर 2026 तक अपनी टिप्पणियां और सुझाव TRAI को भेज सकते हैं।
TRAI ने टेलीकॉम नियम सख्त क्यों किए? (Why Has TRAI Tightened Telecom Regulations?)
TRAI के इन कदमों के पीछे ग्राहकों की बढ़ती शिकायतें और टेलीकॉम सेवाओं में डिजिटल तथा स्वचालित प्रणालियों का बढ़ता इस्तेमाल प्रमुख कारण हैं।
पिछले वर्षों में बढ़ीं उपभोक्ता शिकायतें (Consumer Complaints Have Increased in Recent Years)
TRAI की परामर्श प्रक्रिया में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान नियामक को सीधे ग्राहकों से 73,081 शिकायतें मिलीं। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक थी।
आंकड़ों के अनुसार:
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2025-26: 73,081 शिकायतें
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2024-25: 55,978 शिकायतें
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2023-24: 44,733 शिकायतें
इन आंकड़ों से पता चलता है कि टेलीकॉम सेवाओं से जुड़ी शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ी है। ऐसे में शिकायतों का समय पर समाधान करना और ग्राहकों को उचित सहायता उपलब्ध कराना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
टेलीकॉम कंपनियां ग्राहक सहायता के लिए AI और स्वचालित प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि तकनीक के कारण ग्राहकों को मानवीय सहायता से वंचित न होना पड़े।
निष्कर्ष (Conclusion)
TRAI के नए टेलीकॉम नियम ग्राहक शिकायतों के समाधान और कंपनियों की जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। 24 घंटे शिकायत सहायता, रोजाना कम से कम 16 घंटे मानवीय सहायता और शिकायतों के गलत निपटारे पर आर्थिक दंड जैसे प्रावधान ग्राहकों को बेहतर सेवा दिलाने में मदद कर सकते हैं।
वहीं, AI के जिम्मेदार इस्तेमाल से जुड़े प्रस्तावित दिशा-निर्देश टेलीकॉम कंपनियों के लिए जोखिम प्रबंधन, मानवीय निगरानी और ग्राहक सुरक्षा को अधिक महत्वपूर्ण बनाएंगे। यदि इन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो भारत में टेलीकॉम सेवाओं की शिकायत निवारण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बन सकती है।


