BRICS में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश बढ़ाने के लिए निजी पूंजी जरूरी: निर्मला सीतारमण

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BRICS में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश बढ़ाने के लिए निजी पूंजी जरूरी: निर्मला सीतारमण
13 Aug 2026
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News Synopsis

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने BRICS देशों से निजी पूंजी को बड़े स्तर पर आकर्षित करने के लिए मजबूत, स्थिर और भरोसेमंद नीतिगत ढांचा तैयार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि निवेशकों का भरोसा बढ़ाना और निवेश से जुड़े जोखिमों को कम करना जरूरी है, ताकि बुनियादी ढांचे और विकास से जुड़ी परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की लगातार भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

सीतारमण ने New Development Bank (NDB) की ओर से निजी पूंजी जुटाने की भूमिका पर आयोजित एक सेमिनार में यह बात कही। उन्होंने कहा कि BRICS देश वैश्विक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, लेकिन इन देशों के सामने निजी पूंजी को बड़े स्तर पर आकर्षित करने से जुड़ी कई समान चुनौतियां भी हैं।

वित्त मंत्री के अनुसार, केवल पर्याप्त पूंजी उपलब्ध होना ही काफी नहीं है। निवेशकों को ऐसे बाजारों की भी जरूरत होती है जहां नीतियां स्थिर हों, संस्थाएं विश्वसनीय हों और भविष्य को लेकर पर्याप्त स्पष्टता हो।

न्यू डेवलपमेंट बैंक निवेश जोखिम कम करने में मदद कर सकता है (New Development Bank Can Help Reduce Investment Risks)

निर्मला सीतारमण Union Finance Minister Nirmala Sitharaman ने विकास परियोजनाओं में निजी पूंजी लाने में Multilateral Development Banks (MDBs) की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास बैंक परियोजनाओं से जुड़े जोखिमों को कम करके उन्हें निजी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बना सकते हैं।

विकास संस्थाएं परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता सुधारने, जोखिम साझा करने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। इससे ऐसी परियोजनाओं में भी निजी पूंजी आ सकती है जहां निवेशकों को सामान्य परिस्थितियों में अधिक जोखिम दिखाई देता है।

सरकार, विकास संस्थाओं और निजी कंपनियों के बीच सहयोग जरूरी (Cooperation Between Governments, Development Institutions and Private Companies Is Essential)

वित्त मंत्री ने कहा कि BRICS देशों में विकास वित्त को बड़े स्तर पर बढ़ाने के लिए सरकारों, विकास संस्थाओं और निजी कंपनियों के बीच बेहतर सहयोग आवश्यक होगा।

जयपुर में आयोजित BRICS Finance Ministers and Central Bank Governors Meeting के साथ यह सेमिनार आयोजित किया गया था। पूर्व ब्राजील राष्ट्रपति और NDB की अध्यक्ष Dilma Rousseff ने भी कार्यक्रम में विशेष संबोधन दिया।

सार्वजनिक निवेश को निजी पूंजी के लिए उत्प्रेरक बनना चाहिए (Public Investment Should Encourage Private Capital)

भारत में बुनियादी ढांचे के विकास का उदाहरण देते हुए सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक निवेश का उद्देश्य निजी निवेश को खत्म करना नहीं, बल्कि उसे प्रोत्साहित और आकर्षित करना होना चाहिए।

पिछले एक दशक में भारत सरकार ने हाईवे, रेलवे, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र जैसी परियोजनाओं में सार्वजनिक निवेश बढ़ाया है।

सरकार का प्रयास ऐसा बुनियादी ढांचा और नीतिगत वातावरण तैयार करना रहा है, जिससे निजी कंपनियां और संस्थागत निवेशक बड़ी परियोजनाओं में भाग लेने के लिए आगे आएं।

सरकारी निवेश से बनता है निजी क्षेत्र के लिए आधार (Public Investment Creates a Foundation for Private Participation)

बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में शुरुआती सरकारी निवेश से सड़क, परिवहन, बिजली और डिजिटल नेटवर्क जैसी सुविधाएं विकसित होती हैं। इसके बाद निजी कंपनियां इन क्षेत्रों में अपनी पूंजी और विशेषज्ञता के साथ भाग ले सकती हैं।

इस मॉडल से सरकार पर पूरा वित्तीय बोझ डालने की जरूरत कम हो सकती है और परियोजनाओं को तेजी से विकसित करने में मदद मिल सकती है।

निजी निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार की कई पहल (Government Initiatives to Attract Private Investment)

वित्त मंत्री ने उन कई व्यवस्थाओं का उल्लेख किया, जिन्हें बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निजी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

वायबिलिटी गैप फंडिंग से महत्वपूर्ण परियोजनाओं को सहायता (Viability Gap Funding Supports Important Projects)

Viability Gap Funding (VGF) ऐसी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है जो सामाजिक या आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन केवल व्यावसायिक आय के आधार पर पूरी तरह वित्तीय रूप से व्यवहार्य नहीं हो सकतीं।

सरकारी सहायता से ऐसी परियोजनाओं की वित्तीय कमी को कम किया जा सकता है और निजी निवेशकों के लिए निवेश का मामला अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।

हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल से जोखिम का बंटवारा (Hybrid Annuity Model Helps Share Risks)

सड़क और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में Hybrid Annuity Model (HAM) का इस्तेमाल किया गया है। इसके तहत परियोजना से जुड़े कुछ वित्तीय और निर्माण संबंधी जोखिम सरकार और निजी डेवलपर के बीच साझा किए जाते हैं।

इससे निजी कंपनियों पर पूरा वित्तीय जोखिम नहीं आता और परियोजनाओं में निजी भागीदारी को बढ़ावा मिल सकता है।

क्रेडिट एन्हांसमेंट से परियोजनाओं की वित्तीय क्षमता मजबूत (Credit Enhancement Strengthens Project Bankability)

सरकार और संबंधित संस्थाओं ने क्रेडिट एन्हांसमेंट जैसे उपायों का भी इस्तेमाल किया है। इनका उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की वित्तीय मजबूती और bankability को बेहतर बनाना है।

मजबूत वित्तीय संरचना से बैंकों और संस्थागत निवेशकों के लिए परियोजनाओं में पूंजी लगाना आसान हो सकता है।

InvITs से लंबे समय की पूंजी आकर्षित करने की कोशिश (InvITs Help Attract Long-Term Institutional Investment)

Infrastructure Investment Trusts (InvITs) मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर परिसंपत्तियों से पूंजी को दोबारा उपयोग में लाने का एक माध्यम हैं।

इनके जरिए मौजूदा परियोजनाओं से पूंजी को मुक्त करके नई परियोजनाओं में लगाया जा सकता है। साथ ही, लंबे समय के संस्थागत निवेशकों को इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश का अवसर मिलता है।

एनआईपी और पीएम गति शक्ति से निवेश की बेहतर जानकारी (NIP and PM Gati Shakti Improve Investment Visibility)

National Infrastructure Pipeline (NIP) निवेशकों को भविष्य में आने वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की बेहतर जानकारी देता है।

वहीं PM Gati Shakti National Master Plan का उद्देश्य अलग-अलग परिवहन माध्यमों और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। इससे परियोजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार हो सकता है।

Budget 2026-27 से निवेश के नए अवसर (Budget 2026-27 Opens New Investment Opportunities)

सीतारमण ने कहा कि Union Budget 2026-27 में घोषित कई उपायों का उद्देश्य देश की इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता बढ़ाना और निजी क्षेत्र के लिए नए निवेश अवसर पैदा करना है।

इनमें नए Dedicated Freight Corridors, High-Speed Rail Corridors, अतिरिक्त National Waterways के विकास और संचालन तथा Coastal Cargo Promotion Scheme जैसी पहल शामिल हैं।

फ्रेट और रेल परियोजनाओं से लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा (Freight and Rail Projects Can Strengthen Logistics)

Dedicated Freight Corridors और High-Speed Rail जैसी परियोजनाएं देश के परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने में मदद कर सकती हैं।

बेहतर परिवहन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से माल की आवाजाही तेज हो सकती है, लागत कम हो सकती है और उद्योगों के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा हो सकते हैं।

राष्ट्रीय जलमार्ग और तटीय कार्गो पर जोर (Focus on National Waterways and Coastal Cargo)

National Waterways और तटीय माल परिवहन को बढ़ावा देने से सड़क और रेल नेटवर्क पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में निजी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के लिए नए निवेश अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

BRICS देशों के सामने निजी पूंजी जुटाने की समान चुनौतियां (BRICS Countries Face Similar Capital Mobilisation Challenges)

वित्त मंत्री ने कहा कि BRICS देश वैश्विक आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण इंजन हैं। इसके बावजूद इन देशों को बड़े स्तर पर निजी पूंजी आकर्षित करने में कई समान चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

उनके अनुसार, समस्या केवल यह नहीं है कि बाजार में पर्याप्त पैसा उपलब्ध है या नहीं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निवेशकों को उस बाजार में कितना भरोसा है जहां वे अपनी पूंजी लगाने जा रहे हैं।

निवेशकों के लिए स्थिर नीतियां जरूरी (Stable Policies Are Important for Investors)

विश्वसनीय नीतियां, मजबूत संस्थाएं और लंबे समय तक चलने वाले नियम निवेश से जुड़ी अनिश्चितता को कम कर सकते हैं।

जब निवेशकों को नीतियों और संस्थागत व्यवस्था पर भरोसा होता है, तो वे लंबी अवधि की विकास परियोजनाओं में पूंजी लगाने के लिए अधिक तैयार हो सकते हैं।

सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग बढ़ाना जरूरी (Public and Private Sectors Need Greater Cooperation)

सीतारमण ने कहा कि भविष्य में विकास वित्त की सफलता काफी हद तक सरकारों, बहुपक्षीय संस्थाओं और निजी निवेशकों के बीच साझेदारी पर निर्भर करेगी।

हर पक्ष विकास प्रक्रिया में अलग-अलग योगदान कर सकता है। सरकार नीतिगत सहायता और सार्वजनिक निवेश उपलब्ध करा सकती है। विकास संस्थाएं जोखिम कम करने में मदद कर सकती हैं। वहीं निजी निवेशक पूंजी, विशेषज्ञता और संचालन क्षमता लेकर आ सकते हैं।

मजबूत संस्थागत ढांचा लंबे समय के निवेश के लिए जरूरी (Strong Institutional Frameworks Are Essential for Long-Term Investment)

आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने भी मजबूत और लचीले संस्थागत तथा नीतिगत ढांचे के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि पूंजी जुटाने की क्षमता केवल अनुकूल बाजार परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। इसके लिए लंबे समय तक काम करने वाली संस्थागत व्यवस्था और स्पष्ट नीतियों की आवश्यकता होती है।

BRICS सेमिनार में नीति निर्माताओं और निवेशकों ने चर्चा की (BRICS Seminar Brings Policymakers and Investors Together)

जयपुर में आयोजित सेमिनार में BRICS देशों के वरिष्ठ नीति निर्माता, वित्तीय संस्थान, विकास विशेषज्ञ और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हुए।

पैनल चर्चा में IRDAI Chairman Ajay Seth, NDB Vice-President Roman Serov, Sertrading के Alessandro Teixeira, Tencent के Senior Advisor Yongping Zhai और Tata Capital Decarbonisation Fund के Pankaj Sindwani सहित कई प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी फंडिंग बढ़ाने पर चर्चा (Discussion on Increasing Private Funding for Infrastructure)

चर्चा का मुख्य विषय यह था कि विकास वित्त संस्थाएं निवेश जोखिम को कैसे कम कर सकती हैं और परियोजनाओं को निजी निवेश के लिए अधिक व्यवहार्य कैसे बना सकती हैं।

इसके अलावा, BRICS देशों की विकास प्राथमिकताओं के लिए निजी पूंजी को बड़े स्तर पर आकर्षित करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।

निष्कर्ष (Conclusion)

निर्मला सीतारमण के बयान से स्पष्ट है कि BRICS देशों के लिए निजी पूंजी को बड़े स्तर पर आकर्षित करने के लिए भरोसेमंद और स्थिर निवेश वातावरण बनाना महत्वपूर्ण है। मजबूत संस्थाएं, जोखिम साझा करने की व्यवस्थाएं और लंबे समय तक चलने वाली नीतियां इंफ्रास्ट्रक्चर और सतत विकास के लिए अधिक पूंजी जुटाने में मदद कर सकती हैं।

भारत के अनुभव से यह भी पता चलता है कि सार्वजनिक निवेश को निजी पूंजी का विकल्प बनाने के बजाय उसे आकर्षित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। VGF, HAM, InvITs, NIP और PM Gati Shakti जैसी व्यवस्थाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। आने वाले समय में BRICS देशों के बीच बेहतर सहयोग इन व्यवस्थाओं को और मजबूत कर सकता है तथा विकास परियोजनाओं के लिए निजी निवेश का दायरा बढ़ा सकता है