PM-PRANAM योजना से बढ़ेगी टिकाऊ खेती, रासायनिक उर्वरकों पर घटेगी निर्भरता
News Synopsis
भारत सरकार देश में कृषि को अधिक टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी उद्देश्य से PM-PRANAM (PM Programme for Restoration, Awareness Generation, Nourishment and Amelioration of Mother Earth) योजना लागू की गई है। यह योजना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने तथा जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।
जून 2023 में कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) द्वारा स्वीकृत इस योजना का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता कम करना, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना और दीर्घकालिक कृषि विकास सुनिश्चित करना है। यह योजना भारत के खाद्य सुरक्षा लक्ष्य को मजबूत करने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
संतुलित उर्वरक उपयोग क्यों है आवश्यक? (Why Balanced Fertilizer Use Matters)
रासायनिक उर्वरकों ने पिछले कई दशकों में भारत की कृषि उत्पादन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन यूरिया (Urea), डीएपी (DAP), एनपीके (NPK) और म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) जैसे उर्वरकों का अत्यधिक और असंतुलित उपयोग धीरे-धीरे मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
लगातार अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरक इस्तेमाल करने से मिट्टी की उर्वरता कम हो सकती है, पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है और पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
संतुलित उर्वरक प्रबंधन का अर्थ है कि फसलों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सही मात्रा और सही प्रकार के पोषक तत्व उपलब्ध कराए जाएं। इससे मिट्टी की सेहत बनी रहती है, फसल उत्पादन बढ़ता है और किसानों की अनावश्यक लागत भी कम होती है।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने संतुलित उर्वरक उपयोग को अपनी कृषि नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।
PM-PRANAM योजना के प्रमुख उद्देश्य (Objectives of the PM-PRANAM Scheme)
टिकाऊ खेती और बेहतर मिट्टी की सेहत पर विशेष जोर (Focus on Sustainable Farming and Soil Health)
PM-PRANAM योजना का मुख्य उद्देश्य राज्यों को कृषि उत्पादन प्रभावित किए बिना रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
यह योजना निम्न क्षेत्रों को बढ़ावा देती है।
- संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग।
- वैकल्पिक उर्वरकों को अपनाना।
- जैविक खेती को बढ़ावा देना।
- प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना।
- प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण वाली तकनीकों का उपयोग।
- मिट्टी की सेहत में सुधार।
सरकार का मानना है कि टिकाऊ खेती अपनाने से कृषि उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को मिलेगा वित्तीय प्रोत्साहन (Performance-Based Incentives for States)
रासायनिक उर्वरकों की खपत घटाने पर मिलेगा इनाम (Financial Rewards for Reducing Chemical Fertilizer Consumption)
PM-PRANAM योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसका प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (Performance-Based Incentive) मॉडल है।
जो राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पिछले तीन वित्तीय वर्षों की औसत खपत की तुलना में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने में सफल होंगे, उन्हें केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा।
सरकार ऐसे राज्यों को उर्वरक सब्सिडी में हुई बचत का 50 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के रूप में प्रदान करेगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य राज्यों को किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने, संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने और पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
PKVY के माध्यम से जैविक खेती को मिल रहा बढ़ावा (Promoting Organic Farming Through PKVY)
लाखों किसानों को मिला जैविक खेती अपनाने का लाभ (PKVY Helping Farmers Adopt Organic Farming)
परंपरागत कृषि विकास योजना (Paramparagat Krishi Vikas Yojana - PKVY) भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य देशभर में जैविक खेती को बढ़ावा देना है।
यह योजना किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना खेती करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और कृषि की स्थिरता में सुधार होता है।
PKVY के तहत अब तक।
- ₹2,811 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता जारी की गई है।
- लगभग 18.93 लाख हेक्टेयर भूमि को जैविक खेती के दायरे में लाया गया है।
- करीब 33.63 लाख किसानों को इस योजना का लाभ मिला है।
इस योजना से किसानों की उत्पादन लागत कम होती है और जैविक कृषि उत्पादों की बढ़ती मांग का लाभ भी उन्हें मिलता है।
पूर्वोत्तर भारत में जैविक खेती को मिल रहा विशेष प्रोत्साहन (Supporting Organic Agriculture in North-East India)
MOVCDNER योजना से मजबूत हो रही है पूर्वोत्तर की जैविक कृषि (MOVCDNER Strengthening Organic Farming in North-East India)
मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन (Mission Organic Value Chain Development for North Eastern Region - MOVCDNER) विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है।
यह योजना उत्पादन से लेकर विपणन (मार्केटिंग) तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने और किसानों को टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।
इस योजना की प्रमुख उपलब्धियां हैं।
- ₹1,548 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता।
- लगभग 2.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया गया।
- करीब 2.74 लाख किसानों को लाभ मिला।
इस पहल से किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने और पूर्वोत्तर भारत को जैविक कृषि का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद मिल रही है।
किसानों और पर्यावरण के लिए लाभ (Benefits for Farmers and the Environment)
PM-PRANAM योजना और इससे जुड़ी अन्य कृषि योजनाओं के संयुक्त क्रियान्वयन से किसानों और पर्यावरण दोनों को लंबे समय तक कई महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है।
इन योजनाओं से मिलने वाले प्रमुख लाभ (Major Benefits of These Initiatives)
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मिट्टी की उर्वरता में सुधार।
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रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता में कमी।
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खेती की लागत में कमी।
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फसल उत्पादकता में वृद्धि।
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पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा।
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किसानों की आय में सुधार।
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टिकाऊ कृषि विकास को प्रोत्साहन।
इन पहलों से जल, मिट्टी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। साथ ही जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने में भी किसानों को मदद मिलेगी। प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग के कारण खेती अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बन सकेगी।
भारत के टिकाऊ कृषि लक्ष्यों को मिलेगा समर्थन (Supporting India's Sustainable Agriculture Goals)
भारत सरकार की यह व्यापक रणनीति नीति समर्थन, वित्तीय प्रोत्साहन, वैज्ञानिक नवाचार और किसानों में जागरूकता बढ़ाने जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को एक साथ जोड़ती है।
टिकाऊ कृषि के लिए सरकार की प्रमुख रणनीति (Government's Strategy for Sustainable Agriculture)
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संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना।
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जैविक खेती को प्रोत्साहित करना।
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प्राकृतिक खेती का विस्तार करना।
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वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देना।
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किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देना।
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प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना।
सरकार का उद्देश्य ऐसा कृषि तंत्र विकसित करना है जो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी, जल और जैव विविधता की भी रक्षा करे। इससे भविष्य में खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास को गति मिलेगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
PM-PRANAM योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY), मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन (MOVCDNER) और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) जैसी पहलें भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देकर सरकार मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
आने वाले वर्षों में इन योजनाओं के विस्तार से कृषि उत्पादन को अधिक टिकाऊ बनाने, पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसानों के जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है। इससे भारत की कृषि प्रणाली अधिक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक सक्षम बन सकेगी।


