भारत में टेलीकॉम ग्राहकों की संख्या 135 करोड़ के पार: ट्राई रिपोर्ट

Share Us

41
भारत में टेलीकॉम ग्राहकों की संख्या 135 करोड़ के पार: ट्राई रिपोर्ट
01 Sep 2026
min read

News Synopsis

भारत के दूरसंचार क्षेत्र ने जुलाई 2026 में भी विकास की गति बनाए रखी। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के अंत तक देश में कुल दूरसंचार ग्राहकों की संख्या बढ़कर 1,354.28 मिलियन यानी करीब 135.43 करोड़ हो गई। जून 2026 के अंत में यह संख्या 1,348.08 मिलियन थी।

इस तरह एक महीने के दौरान कुल दूरसंचार ग्राहकों की संख्या में 0.46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ग्राहकों की संख्या बढ़ने के साथ देश का कुल टेली-घनत्व (Tele-Density) भी जून के 94.31 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई में 94.68 प्रतिशत हो गया।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि मोबाइल फोन और इंटरनेट सेवाएं भारत की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी का लगातार महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं। मोबाइल संचार से लेकर डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन शिक्षा, सरकारी सेवाओं और व्यवसायों तक, दूरसंचार नेटवर्क की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

वायरलेस और वायरलाइन कनेक्शन में भी बढ़ोतरी Wireless and Wireline Connections Also Increase

जुलाई में भारत के दूरसंचार क्षेत्र के दोनों प्रमुख हिस्सों, यानी वायरलेस और वायरलाइन कनेक्शन में वृद्धि देखी गई।

वायरलेस ग्राहक, जिनमें मोबाइल और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) कनेक्शन शामिल हैं, जून के 1,300.25 मिलियन से बढ़कर जुलाई में 1,306.27 मिलियन हो गए। इसका मतलब है कि देश में मोबाइल और अन्य वायरलेस सेवाओं की मांग लगातार बनी हुई है।

इसी अवधि में वायरलाइन यानी स्थिर टेलीफोन कनेक्शन की संख्या भी बढ़ी। जून में वायरलाइन ग्राहकों की संख्या 47.82 मिलियन थी, जो जुलाई में बढ़कर 48.01 मिलियन हो गई।

वायरलेस कनेक्शन अभी भी भारत के दूरसंचार बाजार का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, लेकिन वायरलाइन सेवाओं में हुई वृद्धि भी यह दिखाती है कि अलग-अलग प्रकार की कनेक्टिविटी की जरूरत बनी हुई है।

सक्रिय मोबाइल ग्राहकों की संख्या 1.2 अरब के पार Active Mobile Subscribers Cross 1.2 Billion

TRAI के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में सक्रिय वायरलेस ग्राहकों की संख्या 1,204.01 मिलियन यानी करीब 120.4 करोड़ रही।

यह संख्या पीक विजिटर लोकेशन रजिस्टर यानी VLR के आधार पर मापी गई है। यह आंकड़ा उन मोबाइल कनेक्शनों की बड़ी संख्या को दर्शाता है, जो वास्तव में नेटवर्क पर सक्रिय हैं।

भारत में मोबाइल फोन अब केवल बातचीत का साधन नहीं रह गए हैं। इंटरनेट, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन खरीदारी, मनोरंजन, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं के लिए भी लोग मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर हैं। इसलिए सक्रिय मोबाइल ग्राहकों की इतनी बड़ी संख्या भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की मांग बनी रही Demand for Mobile Number Portability Remains Strong

जुलाई 2026 में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) के लिए भी बड़ी संख्या में अनुरोध प्राप्त हुए।

TRAI के अनुसार, पूरे महीने में करीब 15.98 मिलियन यानी 1.598 करोड़ ग्राहकों ने अपना मोबाइल नंबर बदले बिना सेवा प्रदाता बदलने के लिए अनुरोध किया।

इनमें जोन-1 से 8.89 मिलियन और जोन-2 से 7.09 मिलियन अनुरोध आए।

मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की बड़ी संख्या यह बताती है कि ग्राहक अपने सेवा प्रदाता को लेकर विकल्पों की तुलना करते हैं। बेहतर नेटवर्क, कीमत, इंटरनेट गति, सेवा गुणवत्ता और उपलब्ध योजनाएं ग्राहकों के लिए सेवा प्रदाता चुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या में 0.64 प्रतिशत वृद्धि Broadband Subscriber Base Grows by 0.64 Percent

जुलाई में ब्रॉडबैंड क्षेत्र ने कुल दूरसंचार बाजार की तुलना में थोड़ी तेज वृद्धि दर्ज की।

भारत में कुल ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या जून के 1,087.50 मिलियन से बढ़कर जुलाई में 1,094.48 मिलियन हो गई। इस तरह महीने के दौरान ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या में 0.64 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

तेज इंटरनेट की मांग लगातार बढ़ रही है। घरों में वीडियो, ऑनलाइन शिक्षा और मनोरंजन से लेकर कंपनियों के कामकाज और सरकारी डिजिटल सेवाओं तक, इंटरनेट की आवश्यकता पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है।

जियो और एयरटेल ब्रॉडबैंड बाजार में आगे Jio and Airtel Lead the Broadband Market

जुलाई 2026 में रिलायंस जियो इन्फोकॉम देश की सबसे बड़ी ब्रॉडबैंड सेवा प्रदाता कंपनी बनी रही। उसके पास 535.12 मिलियन यानी करीब 53.51 करोड़ ब्रॉडबैंड ग्राहक थे।

इसके बाद भारती एयरटेल दूसरे स्थान पर रही, जिसके ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 384.23 मिलियन यानी करीब 38.42 करोड़ थी।

TRAI के अनुसार, देश के पांच सबसे बड़े ब्रॉडबैंड सेवा प्रदाताओं के पास मिलकर बाजार का 98.59 प्रतिशत हिस्सा था। इससे पता चलता है कि भारत का ब्रॉडबैंड बाजार कुछ प्रमुख कंपनियों के बीच काफी केंद्रित है।

मशीन-टू-मशीन कनेक्शन भी बढ़े Machine-to-Machine Connections Also Rise

दूरसंचार क्षेत्र में केवल मोबाइल और ब्रॉडबैंड कनेक्शन ही नहीं बढ़ रहे हैं। मशीन-टू-मशीन (M2M) कनेक्शन की संख्या में भी जुलाई के दौरान वृद्धि हुई।

TRAI के आंकड़ों के अनुसार, सेलुलर M2M मोबाइल कनेक्शन जून के 134.73 मिलियन से बढ़कर जुलाई में 137.70 मिलियन हो गए।

M2M तकनीक में उपकरण और मशीनें सेलुलर नेटवर्क के माध्यम से एक-दूसरे से जानकारी साझा कर सकती हैं। इसमें हर बार सीधे मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती।

एयरटेल का M2M क्षेत्र में सबसे बड़ा हिस्सा Airtel Holds the Largest M2M Market Share

जुलाई में भारती एयरटेल M2M कनेक्शन के मामले में सबसे आगे रही। कंपनी के पास इस क्षेत्र का 61.33 प्रतिशत बाजार हिस्सा था।

M2M कनेक्शन का बढ़ना इस बात का संकेत है कि भारत में जुड़े हुए उपकरणों और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। स्मार्ट बुनियादी ढांचे, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक स्वचालन और अन्य क्षेत्रों में ऐसी तकनीक की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।

शहरी और ग्रामीण टेली-घनत्व में बड़ा अंतर Wide Gap Between Urban and Rural Tele-Density

TRAI के जुलाई के आंकड़े भारत में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच दूरसंचार पहुंच के अंतर को भी सामने रखते हैं।

जुलाई में शहरी टेली-घनत्व 154.12 प्रतिशत रहा, जबकि ग्रामीण टेली-घनत्व केवल 61.05 प्रतिशत था।

100 प्रतिशत से अधिक टेली-घनत्व संभव है क्योंकि यह आंकड़ा आबादी की तुलना में टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या को दर्शाता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आबादी के हर व्यक्ति के पास एक से अधिक मोबाइल फोन हैं।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच इतना बड़ा अंतर यह बताता है कि देश के ग्रामीण और कम सेवा वाले इलाकों में बेहतर, विश्वसनीय और सस्ती दूरसंचार सेवाओं का विस्तार अभी भी महत्वपूर्ण है।

दिल्ली में सबसे अधिक टेली-घनत्व Delhi Records the Highest Tele-Density

जुलाई 2026 में विभिन्न लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्रों यानी LSAs में दिल्ली का टेली-घनत्व सबसे अधिक रहा। दिल्ली में यह आंकड़ा 368.33 प्रतिशत दर्ज किया गया।

इसके विपरीत, बिहार में टेली-घनत्व सबसे कम 64.19 प्रतिशत रहा।

राज्यों और सेवा क्षेत्रों के बीच यह अंतर आबादी की संरचना, मोबाइल कनेक्शन की संख्या, नेटवर्क उपलब्धता और दूरसंचार सेवाओं की मांग जैसे कई कारकों से प्रभावित हो सकता है।

दूरसंचार क्षेत्र भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण Telecom Sector Supports India’s Digital Economy

भारत में दूरसंचार ग्राहकों की बढ़ती संख्या देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार से सीधे जुड़ी हुई है। मोबाइल और ब्रॉडबैंड सेवाओं का इस्तेमाल अब केवल संचार के लिए नहीं किया जाता, बल्कि डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-कॉमर्स, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं तक पहुंच के लिए भी किया जाता है।

ब्रॉडबैंड ग्राहकों की लगातार वृद्धि तेज और विश्वसनीय इंटरनेट की बढ़ती मांग को दिखाती है। वहीं, M2M कनेक्शन में वृद्धि यह संकेत देती है कि भारत में मशीनों और उपकरणों के आपस में जुड़े होने वाली तकनीकों का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।

फिर भी, ग्रामीण और शहरी टेली-घनत्व के बीच बड़ा अंतर एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। डिजिटल अर्थव्यवस्था का लाभ देश के हर हिस्से तक पहुंचाने के लिए ग्रामीण कनेक्टिविटी को और मजबूत करना जरूरी होगा।

निष्कर्ष। Conclusion.

भारत का दूरसंचार क्षेत्र जुलाई 2026 में भी विस्तार की राह पर रहा। देश में कुल दूरसंचार ग्राहकों की संख्या बढ़कर 1.354 अरब हो गई, जबकि टेली-घनत्व 94.68 प्रतिशत तक पहुंच गया। वायरलेस, वायरलाइन, ब्रॉडबैंड और M2M कनेक्शन सभी में वृद्धि दर्ज की गई।

ब्रॉडबैंड क्षेत्र में जियो और एयरटेल का दबदबा बना रहा, जबकि M2M कनेक्शन में एयरटेल सबसे आगे रहा। दूसरी ओर, शहरी और ग्रामीण टेली-घनत्व के बीच बड़ा अंतर यह याद दिलाता है कि देश में डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार अभी पूरा नहीं हुआ है।

आने वाले समय में 5G, ब्रॉडबैंड, फिक्स्ड वायरलेस सेवाओं और जुड़े हुए उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ दूरसंचार क्षेत्र भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।