8 नवंबर से लागू होंगे SEBI के नए नियम, जानें कॉल रिकॉर्डिंग में क्या बदलेगा

Share Us

69
8 नवंबर से लागू होंगे SEBI के नए नियम, जानें कॉल रिकॉर्डिंग में क्या बदलेगा
24 Oct 2026
7 min read

News Synopsis

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शोध विश्लेषकों (Research Analysts) को राहत देते हुए संस्थागत निवेशकों के साथ होने वाली बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग अनिवार्य रूप से सुरक्षित रखने की शर्त हटा दी है। इस फैसले का उद्देश्य नियामकीय अनुपालन से जुड़ी जिम्मेदारियों को कम करना और कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। हालांकि, इसके साथ ही प्रतिभूति बाजार में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने पर भी ध्यान दिया गया है।

SEBI के जारी परिपत्र के अनुसार, अब शोध विश्लेषकों और शोध संस्थाओं को संस्थागत निवेशकों के साथ हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग अनिवार्य रूप से सुरक्षित रखने की जरूरत नहीं होगी। संशोधित नियम 8 नवंबर से लागू होंगे।

यह बदलाव पिछले महीने SEBI के बोर्ड की ओर से इस प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद किया गया है। हालांकि, नियामक ने ग्राहकों और संभावित ग्राहकों के साथ हुई जरूरी बातचीत का रिकॉर्ड रखने की व्यापक जिम्मेदारी को बरकरार रखा है। इसका मतलब है कि कॉल रिकॉर्डिंग अनिवार्य नहीं होने के बावजूद शोध विश्लेषकों को अपने ग्राहकों से संबंधित संवाद का उचित और सत्यापन योग्य दस्तावेजी रिकॉर्ड बनाए रखना होगा।

SEBI ने बातचीत का रिकॉर्ड रखने के लिए वैकल्पिक तरीके मंजूर किए (SEBI Allows Alternative Methods of Maintaining Communication Records)

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) Securities and Exchange Board of India (SEBI) के संशोधित नियमों के तहत, शोध विश्लेषक अब ग्राहकों के साथ हुई बातचीत का रिकॉर्ड रखने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इन तरीकों से संबंधित दस्तावेजों का कानूनी रूप से सत्यापन किया जा सकना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

SEBI की ओर से स्वीकार किए गए रिकॉर्ड रखने के तरीकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • ग्राहकों के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज: बातचीत या सहमति से संबंधित कागजी दस्तावेज, जिन पर ग्राहक के हस्ताक्षर हों।

  • कॉल रिकॉर्डिंग: जहां उपलब्ध हो, वहां बातचीत की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जा सकती है।

  • ईमेल: ग्राहकों के पंजीकृत ईमेल पते से भेजे गए संदेशों को रिकॉर्ड के रूप में रखा जा सकता है।

  • SMS संदेश: मोबाइल पर भेजे गए संदेशों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सकता है।

  • अन्य कानूनी रूप से सत्यापन योग्य दस्तावेज: बातचीत का प्रमाण देने वाले दूसरे स्वीकार्य तरीकों का भी उपयोग किया जा सकता है।

इस व्यवस्था से शोध विश्लेषकों को बातचीत के माध्यम और उसकी प्रकृति के अनुसार रिकॉर्ड रखने का उपयुक्त तरीका चुनने की सुविधा मिलेगी। उदाहरण के लिए, यदि ग्राहक के साथ ईमेल के माध्यम से बातचीत हुई है, तो उस ईमेल को सुरक्षित रखना संवाद का प्रमाण उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।

SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईमेल जैसे माध्यमों से हुई बातचीत के लिए अलग से कॉल रिकॉर्डिंग रखना अनिवार्य नहीं है। ऐसे माध्यम पहले से ही डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करते हैं। हालांकि, शोध विश्लेषकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास मौजूद रिकॉर्ड पर्याप्त हों और जरूरत पड़ने पर उनका सत्यापन किया जा सके।

सभी ग्राहकों के लिए दस्तावेजी रिकॉर्ड रखना जरूरी (Documentation Requirements Continue for All Clients)

संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग अनिवार्य रखने की शर्त में छूट दिए जाने के बावजूद, शोध विश्लेषकों को सभी ग्राहकों और संभावित ग्राहकों के साथ हुई जरूरी बातचीत का रिकॉर्ड बनाए रखना होगा।

यह जिम्मेदारी उन चर्चाओं पर भी लागू होती है, जो किसी संभावित ग्राहक के औपचारिक रूप से ग्राहक बनने से पहले होती हैं। यदि बातचीत शोध विश्लेषक की सेवाओं, उनके कामकाज या संबंधित विषयों से जुड़ी है, तो उसका रिकॉर्ड किसी उपयुक्त और कानूनी रूप से सत्यापन योग्य तरीके से सुरक्षित रखना जरूरी होगा।

इस नियम का उद्देश्य ग्राहकों के साथ होने वाले व्यवहार में पारदर्शिता बनाए रखना है। यदि भविष्य में किसी बातचीत, सेवा या सहमति को लेकर सवाल उठता है अथवा विवाद पैदा होता है, तो उपलब्ध दस्तावेज तथ्यों की जांच करने में मदद कर सकते हैं।

इसलिए संशोधित व्यवस्था को रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी खत्म करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें मुख्य बदलाव केवल इतना है कि शोध विश्लेषकों को हर बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के बजाय दूसरे स्वीकार्य तरीकों से भी प्रमाण रखने की अनुमति दी गई है।

पांच साल तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का नियम जारी (Five-Year Record Retention Rule Remains in Place)

SEBI ने संबंधित बातचीत और दस्तावेजों को पांच साल तक सुरक्षित रखने की मौजूदा शर्त में कोई बदलाव नहीं किया है। इसका अर्थ है कि शोध विश्लेषकों को ग्राहकों के साथ हुई जरूरी बातचीत से संबंधित रिकॉर्ड निर्धारित अवधि तक संभालकर रखने होंगे।

यदि किसी मामले में विवाद पैदा हो जाता है, तो संबंधित रिकॉर्ड को उस विवाद का समाधान होने तक सुरक्षित रखना होगा। इसके अलावा, यदि नियामक किसी विशेष मामले में दस्तावेजों को अधिक समय तक रखने का निर्देश देता है, तो शोध विश्लेषकों को उस निर्देश का पालन करना होगा।

इन प्रावधानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जरूरत पड़ने पर नियामकीय जांच, संभावित अनियमितताओं की पड़ताल या विवाद के समाधान के लिए संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध रहें।

दस्तावेजों को व्यवस्थित और सुरक्षित रखने से शोध विश्लेषकों को यह साबित करने में भी मदद मिल सकती है कि उन्होंने ग्राहकों के साथ बातचीत और सेवाएं प्रदान करते समय लागू नियमों का पालन किया है। इसलिए कॉल रिकॉर्डिंग की अनिवार्यता हटने के बाद भी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना और समय पर उपलब्ध करा पाना महत्वपूर्ण बना रहेगा।

SEBI ने कॉल रिकॉर्डिंग की अनिवार्यता क्यों हटाई? (Why SEBI Has Relaxed the Call Recording Requirement)

SEBI के इस फैसले का प्रमुख उद्देश्य शोध विश्लेषकों की परिचालन और नियामकीय जिम्मेदारियों से जुड़ा बोझ कम करना है। संस्थागत निवेशकों के साथ होने वाली हर बातचीत की रिकॉर्डिंग करना और उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना अतिरिक्त तकनीकी व्यवस्था, भंडारण क्षमता, प्रशासनिक प्रक्रियाओं तथा संसाधनों की मांग कर सकता है।

कॉल रिकॉर्डिंग की अनिवार्यता में छूट देकर SEBI ने शोध विश्लेषकों को संवाद का प्रमाण सुरक्षित रखने के लिए अधिक विकल्प दिए हैं। अब वे बातचीत के प्रकार और उपलब्ध माध्यम के आधार पर उचित दस्तावेजी तरीका अपना सकते हैं।

हालांकि, इस बदलाव का अर्थ यह नहीं है कि शोध विश्लेषकों को जवाबदेही से छूट मिल गई है। उन्हें अब भी ऐसे विश्वसनीय रिकॉर्ड रखने होंगे, जिनकी नियामकीय जांच के दौरान पुष्टि की जा सके और जो संभावित विवादों के समाधान में मददगार हों।

यह फैसला नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। इसके जरिए अनुपालन की प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाने के साथ-साथ निवेशकों और प्रतिभूति बाजार के हितों की रक्षा के लिए जरूरी सुरक्षा उपायों को बनाए रखने का प्रयास किया गया है।

संशोधित SEBI नियम 8 नवंबर से लागू होंगे (Revised SEBI Rules to Take Effect on November 8)

SEBI के अनुसार, संशोधित प्रावधान 8 नवंबर से प्रभावी होंगे। इसलिए शोध विश्लेषकों और शोध संस्थाओं को अपने मौजूदा दस्तावेजी रिकॉर्ड रखने की प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी व्यवस्था नए नियमों के अनुरूप हो।

उन्हें यह भी जांचना चाहिए कि ग्राहकों के साथ हुई जरूरी बातचीत, जिसमें ग्राहक बनने से पहले की चर्चाएं भी शामिल हैं, का रिकॉर्ड उचित तरीके से रखा जा रहा है। इसके साथ ही, रिकॉर्ड को निर्धारित पांच साल की अवधि तक सुरक्षित रखने और विवाद या नियामकीय निर्देश की स्थिति में लागू अतिरिक्त शर्तों का पालन करने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।

समय रहते प्रक्रियाओं में जरूरी बदलाव करने से शोध विश्लेषकों को नए नियमों के अनुसार काम करने और अनुपालन से जुड़ी संभावित समस्याओं से बचने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

SEBI ने संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत करने वाले शोध विश्लेषकों के लिए अनिवार्य कॉल रिकॉर्डिंग की शर्त हटाकर अनुपालन प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाने का प्रयास किया है। इस फैसले से रिकॉर्ड रखने और सुरक्षित रखने से जुड़ा परिचालन बोझ कम हो सकता है।

हालांकि, सभी ग्राहकों और संभावित ग्राहकों के साथ हुई जरूरी बातचीत का दस्तावेजी रिकॉर्ड रखना अब भी अनिवार्य है। पांच साल तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की शर्त भी जारी रहेगी। इसलिए शोध विश्लेषकों को अपने रिकॉर्ड रखने के तरीकों में बदलाव करते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी जरूरी दस्तावेज विश्वसनीय, पर्याप्त और कानूनी रूप से सत्यापन योग्य हों।

8 नवंबर से लागू होने वाले संशोधित नियम कारोबार को आसान बनाने के साथ-साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय निगरानी बनाए रखने पर जोर देते हैं।