मारुति सुजुकी ने 1 MWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम शुरू किया
News Synopsis
भारत की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों में शामिल Maruti Suzuki India ने अपने Kharkhoda मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में 1 MWh क्षमता वाला Battery Energy Storage System (BESS) शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य सोलर एनर्जी के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना, बिजली की बचत करना और वाहन निर्माण प्रक्रिया से जुड़े कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।
Maruti Suzuki ने Kharkhoda Plant में लगाया 1 MWh Battery Energy Storage System
Maruti Suzuki ने हरित ऊर्जा और टिकाऊ मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए हरियाणा स्थित अपने Kharkhoda Manufacturing Facility में 1 MWh Battery Energy Storage System (BESS) को सफलतापूर्वक शुरू किया है।
कंपनी के अनुसार यह सिस्टम प्लांट के आंतरिक बिजली वितरण नेटवर्क के साथ जोड़ा गया है और फिलहाल इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है।
इस नई तकनीक के जरिए Maruti Suzuki का लक्ष्य अपने सोलर पावर सिस्टम से मिलने वाली अतिरिक्त बिजली को सुरक्षित रखना और जरूरत के समय उसका उपयोग करना है। इससे ऊर्जा की बर्बादी कम होगी और प्लांट की बिजली जरूरतों को अधिक प्रभावी तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
Solar Energy Utilisation को बढ़ावा देने की पहल
Kharkhoda प्लांट में Maruti Suzuki ने वर्ष 2025 में 20 MWp क्षमता वाला सोलर पावर प्लांट स्थापित किया था। यह सोलर सिस्टम फैक्ट्री के लिए नवीकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
हालांकि प्लांट की छुट्टियों या कम उत्पादन वाले समय में बिजली की मांग कम हो जाती है, जबकि सोलर पैनल लगातार बिजली का उत्पादन करते रहते हैं।
ऐसी स्थिति में अतिरिक्त ऊर्जा का सही इस्तेमाल एक चुनौती बन जाता है। इसी समस्या को हल करने के लिए कंपनी ने Battery Energy Storage System लगाया है।
BESS सिस्टम अतिरिक्त सोलर बिजली को स्टोर करेगा और जरूरत पड़ने पर इस ऊर्जा को वापस बिजली नेटवर्क में उपलब्ध कराएगा। इससे न केवल ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा का अधिकतम उपयोग भी सुनिश्चित होगा।
BESS Technology से बिजली प्रबंधन होगा बेहतर
Battery Energy Storage System आधुनिक ऊर्जा प्रबंधन तकनीक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह सिस्टम बिजली उत्पादन और खपत के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
Maruti Suzuki के Kharkhoda प्लांट में यह सिस्टम कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाएगा:
- अतिरिक्त सोलर ऊर्जा को स्टोर करना
- जरूरत के समय बिजली उपलब्ध कराना
- बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना
- ग्रिड स्थिरता में योगदान देना
- नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाना
कंपनी का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा प्रबंधन के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
हर साल 54 टन CO₂ उत्सर्जन में कमी का अनुमान
Maruti Suzuki के अनुसार इस Battery Energy Storage System की अनुमानित लाइफ लगभग 15 वर्ष होगी।
कंपनी का अनुमान है कि यह सिस्टम हर साल करीब 54 टन CO₂ उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा।
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया के दौरान ऊर्जा की खपत और उत्सर्जन एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में सोलर एनर्जी और बैटरी स्टोरेज जैसी तकनीकों का उपयोग कंपनियों को अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों को हासिल करने में मदद कर सकता है।
Maruti Suzuki लगातार अपने उत्पादन केंद्रों पर ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए कई कदम उठा रही है।
Scope 1 और Scope 2 Emissions कम करने पर कंपनी का फोकस
Maruti Suzuki ने दोहराया है कि कंपनी का लक्ष्य अपने Scope 1 और Scope 2 emissions को कम करना है।
Scope 1 emissions में कंपनी के प्रत्यक्ष उत्सर्जन शामिल होते हैं, जबकि Scope 2 emissions में खरीदी गई बिजली से होने वाला अप्रत्यक्ष उत्सर्जन शामिल होता है।
कंपनी उत्पादन क्षमता बढ़ने के बावजूद उत्सर्जन की तीव्रता और कुल उत्सर्जन दोनों को कम करने की दिशा में काम कर रही है।
Maruti Suzuki की यह रणनीति उसकी पैरेंट कंपनी Suzuki Motor Corporation के पर्यावरणीय रोडमैप के अनुरूप है।
Suzuki Motor Corporation के पर्यावरण लक्ष्य से जुड़ा कदम
Suzuki Motor Corporation ने वित्त वर्ष 2030-31 तक Scope 1 और Scope 2 CO₂ उत्सर्जन में FY2022-23 के स्तर की तुलना में 42% कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
Maruti Suzuki का BESS प्रोजेक्ट इसी व्यापक पर्यावरण रणनीति का हिस्सा है।
कंपनी का मानना है कि उत्पादन बढ़ने के बावजूद स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल और ऊर्जा दक्षता में सुधार के जरिए कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित किया जा सकता है।
हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये लक्ष्य कुछ अनुमान और भविष्य से जुड़ी योजनाओं पर आधारित हैं।
Maruti Suzuki का Green Manufacturing की ओर बढ़ता कदम
ऑटोमोबाइल सेक्टर में इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित तकनीकों के बढ़ते प्रभाव के बीच वाहन निर्माता कंपनियां अब अपनी मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने पर ध्यान दे रही हैं।
Maruti Suzuki का Kharkhoda प्लांट इस दिशा में कंपनी की नई पहल का उदाहरण है।
Battery Energy Storage System जैसे समाधान भविष्य में फैक्ट्रियों को अधिक ऊर्जा स्वतंत्र बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
कंपनी पहले से ही सोलर पावर, ऊर्जा दक्षता और उत्सर्जन नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में निवेश कर रही है।
Maruti Suzuki के Managing Director और CEO Hisashi Takeuchi ने कहा कि Kharkhoda Facility में Battery Energy Storage System की शुरुआत कंपनी के लगातार चल रहे पर्यावरणीय प्रयासों का हिस्सा है।
उन्होंने बताया कि लगभग 15 वर्षों के जीवनकाल वाला यह सिस्टम हर साल लगभग 54 टन CO₂ उत्सर्जन कम करने में मदद करेगा।
कंपनी का मानना है कि इस तरह की पहल भविष्य में टिकाऊ और जिम्मेदार मैन्युफैक्चरिंग मॉडल तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
भविष्य में Maruti Suzuki की Green Energy Strategy
Maruti Suzuki आने वाले वर्षों में अपने उत्पादन केंद्रों पर नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को और बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।
Kharkhoda Plant में शुरू किया गया BESS प्रोजेक्ट कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण है, जिससे भविष्य में बड़े ऊर्जा भंडारण समाधानों को लागू करने में मदद मिल सकती है।
भारत में ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए पर्यावरणीय जिम्मेदारी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में Maruti Suzuki का यह कदम कंपनी को टिकाऊ मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेगा।


