ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए बड़ा कदम, फोनपे और डीपीसीजीसी ने किया समझौता

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ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए बड़ा कदम, फोनपे और डीपीसीजीसी ने किया समझौता
08 Oct 2026
6 min read

News Synopsis

डिजिटल भुगतान कंपनी फोनपे और डिजिटल पब्लिशर कंटेंट ग्रीवांस काउंसिल (DPCGC) Digital Publisher Content Grievances Council (DPCGC) ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य OTT प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट पब्लिशर्स को स्व-नियामक आवश्यकताओं को समझने और उनका पालन करने में मदद करना है।

8 अक्टूबर को घोषित की गई इस साझेदारी के तहत डिजिटल कंटेंट से जुड़े कारोबारों के बीच नियामकीय जिम्मेदारियों को लेकर जागरूकता बढ़ाने और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा। यह पहल मौजूदा और नए व्यापारियों यानी मर्चेंट्स को किसी मान्यता प्राप्त स्व-नियामक संगठन (SRO) की सदस्यता से जुड़ी आवश्यकताओं को समझने में सहायता कर सकती है।

भारत में OTT और ऑनलाइन कंटेंट का बाजार लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्लेटफॉर्म्स के लिए केवल मनोरंजन और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें लागू नियमों, आचार संहिता और उपभोक्ता शिकायतों के समाधान से जुड़ी जिम्मेदारियों को भी समझना जरूरी हो गया है।

फोनपे मर्चेंट ऑनबोर्डिंग के दौरान SRO अनुपालन में करेगा सहयोग PhonePe to Support SRO Compliance During Merchant Onboarding

इस साझेदारी के तहत PhonePe अपने मर्चेंट्स को SRO सदस्यता से जुड़े लागू नियामकीय नियमों और आवश्यकताओं के बारे में जानकारी देगा। इसका उद्देश्य डिजिटल कंटेंट से जुड़े कारोबारों के लिए अनुपालन की प्रक्रिया को अधिक आसान और समझने योग्य बनाना है।

DPCGC के माध्यम से प्रमाणन की सुविधा Certification Support Through DPCGC

PhonePe अपने Payment Gateway के लिए मर्चेंट ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया के दौरान DPCGC के माध्यम से प्रमाणन की सुविधा भी उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

इस व्यवस्था से OTT और ऑनलाइन कंटेंट कारोबारों को शुरुआत में ही यह समझने में सहायता मिल सकती है कि उन्हें किन नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करना है। जागरूकता और प्रमाणन को ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया का हिस्सा बनाने से कंपनियों को बाद में अनुपालन से जुड़ी परेशानियों का सामना करने की संभावना कम हो सकती है।

इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य यह है कि डिजिटल कंटेंट से जुड़े व्यवसाय अपने कारोबार की शुरुआत से ही आवश्यक नियमों और जिम्मेदारियों पर ध्यान दें।

DPCGC डिजिटल कंटेंट के स्व-नियमन में निभाता है महत्वपूर्ण भूमिका DPCGC Plays a Role in Digital Content Self-Regulation

डिजिटल पब्लिशर कंटेंट ग्रीवांस काउंसिल (DPCGC) Digital Publisher Content Grievances Council सूचना प्रौद्योगिकी यानी IT से जुड़े Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के तहत स्थापित लेवल-II स्व-नियामक संगठन है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ पंजीकृत संगठन Organisation Registered With the Ministry of Information and Broadcasting

DPCGC भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ पंजीकृत है और डिजिटल प्रकाशकों तथा OTT प्लेटफॉर्म्स से जुड़े नियामकीय ढांचे के भीतर काम करता है।

संगठन ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट उपलब्ध कराने वाले प्लेटफॉर्म्स के लिए स्व-नियमन व्यवस्था और शिकायत निवारण प्रक्रियाओं को लागू करने में भूमिका निभाता है। इसका उद्देश्य डिजिटल कंटेंट उद्योग में जिम्मेदार व्यवहार और शिकायतों के समाधान के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था को बढ़ावा देना है।

OTT और OCCP मर्चेंट्स के बीच बढ़ेगी नियमों की जागरूकता Partnership to Increase Awareness Among OTT and OCCP Merchants

PhonePe और DPCGC की साझेदारी का एक बड़ा उद्देश्य OTT और ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट पब्लिशर (OCCP) मर्चेंट्स के बीच SRO से जुड़ी आवश्यकताओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

कंपनियों के अनुसार, साझेदारी के जरिए डिजिटल कंटेंट कारोबारों को शिकायत निवारण व्यवस्था को बेहतर तरीके से समझने में भी मदद मिलेगी।

उपभोक्ता शिकायतों के लिए बेहतर व्यवस्था पर जोर Focus on Better Consumer Grievance Handling

OTT प्लेटफॉर्म्स पर बड़ी संख्या में लोग फिल्में, वेब सीरीज, कार्यक्रम और अन्य डिजिटल सामग्री देखते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं की शिकायतों और चिंताओं को सही तरीके से दर्ज करना और उनका समाधान करना महत्वपूर्ण हो जाता है।

साझेदारी के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपनी शिकायत निवारण प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। इससे उपयोगकर्ताओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बेहतर व्यवस्था मिल सकती है।

OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए आचार संहिता पर भी ध्यान Focus on the Code of Ethics for OTT Platforms

PhonePe और DPCGC की साझेदारी का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए लागू आचार संहिता (Code of Ethics) के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

डिजिटल कंटेंट से जुड़े कारोबारों के लिए यह समझना जरूरी है कि भारत के डिजिटल मीडिया ढांचे के तहत उनकी क्या जिम्मेदारियां हैं और उन्हें किस तरह के नियमों का पालन करना चाहिए।

IAMAI ने साझेदारी को बताया उपयोगी कदम IAMAI Highlights the Importance of the Partnership

Internet and Mobile Association of India (IAMAI) के अध्यक्ष डॉ. सुभो रे ने कहा कि यह साझेदारी नियामकीय अपेक्षाओं के बारे में व्यापक जागरूकता बढ़ाने में योगदान दे सकती है।

उनके अनुसार, इससे OTT प्लेटफॉर्म्स को लागू आचार संहिता को समझने और उसका पालन करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। डिजिटल प्रकाशकों के बीच नियमों को लेकर बेहतर समझ विकसित होने से कंपनियां अपनी जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी तरीके से पूरा कर सकती हैं।

PhonePe ने ग्राहक शिकायत निवारण को बताया महत्वपूर्ण PhonePe Highlights Customer Grievance Redressal

PhonePe के Payments प्रमुख दीप अग्रवाल ने कहा कि यह समझौता OTT प्लेटफॉर्म्स को नियामकीय अनुपालन और ग्राहकों की शिकायतों के समाधान से जुड़ी आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगा।

यह साझेदारी केवल नियमों के बारे में जानकारी देने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य डिजिटल कंटेंट से जुड़े कारोबारों को PhonePe की भुगतान सेवाओं के साथ जुड़ने के दौरान संबंधित SRO आवश्यकताओं को पूरा करने का एक रास्ता उपलब्ध कराना भी है।

उपभोक्ता विश्वास बनाए रखने में शिकायत निवारण की भूमिका Role of Grievance Redressal in Building Consumer Trust

किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए ग्राहक शिकायतों का समय पर और उचित समाधान करना महत्वपूर्ण है। बेहतर शिकायत निवारण व्यवस्था से उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत हो सकता है।

साथ ही, स्पष्ट प्रक्रियाएं कंपनियों को लागू नियमों के अनुरूप काम करने में भी सहायता कर सकती हैं। इसलिए OTT और ऑनलाइन कंटेंट कारोबार के बढ़ने के साथ शिकायत निवारण की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।

PhonePe-DPCGC साझेदारी का OTT प्लेटफॉर्म्स पर क्या असर होगा? What the PhonePe-DPCGC Partnership Means for OTT Platforms

यह MoU एक बड़ी डिजिटल भुगतान कंपनी और मान्यता प्राप्त स्व-नियामक संस्था को एक साथ लाता है। दोनों का उद्देश्य ऑनलाइन कंटेंट से जुड़े कारोबारों के सामने मौजूद अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को समझने में सहायता करना है।

SRO सदस्यता और प्रमाणन प्रक्रिया हो सकती है आसान SRO Membership and Certification Could Become Easier

OTT प्लेटफॉर्म्स और OCCPs के लिए इस पहल से SRO सदस्यता से जुड़ी आवश्यकताओं को समझना और DPCGC के माध्यम से प्रमाणन सहायता प्राप्त करना आसान हो सकता है।

यह पहल कंपनियों को अपनी आंतरिक शिकायत निवारण व्यवस्था मजबूत करने के लिए भी प्रोत्साहित कर सकती है। इससे कारोबारों को नियमों का पालन करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं की चिंताओं पर बेहतर तरीके से काम करने का अवसर मिलेगा।

PhonePe के लिए यह साझेदारी उसके मर्चेंट ऑनबोर्डिंग ढांचे में अनुपालन से जुड़ी एक अतिरिक्त व्यवस्था जोड़ती है, खासकर उन कारोबारों के लिए जो डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में काम करते हैं।

भारत के डिजिटल कंटेंट क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम Strengthening India’s Digital Content Ecosystem

PhonePe और DPCGC की साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब भारत का OTT और ऑनलाइन प्रकाशन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। डिजिटल मनोरंजन और ऑनलाइन कंटेंट की बढ़ती मांग के साथ नियामकीय जागरूकता और उपभोक्ता शिकायतों के प्रभावी समाधान की जरूरत भी बढ़ रही है।

अनुपालन और उपभोक्ता संरक्षण पर बढ़ेगा जोर Greater Focus on Compliance and Consumer Protection

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को यदि स्व-नियमन से जुड़ी जिम्मेदारियों की बेहतर जानकारी होगी, तो वे अपने कारोबार में अनुपालन प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से लागू कर सकेंगे।

भुगतान कंपनियों, उद्योग संगठनों और स्व-नियामक संस्थाओं के बीच इस तरह की साझेदारियां डिजिटल कारोबारों को बदलते नियमों को समझने में मदद कर सकती हैं। साथ ही, इससे उपभोक्ताओं के लिए शिकायत दर्ज कराने और समाधान पाने की व्यवस्था भी मजबूत हो सकती है।

आने वाले समय में जैसे-जैसे OTT, ऑनलाइन प्रकाशन और डिजिटल मनोरंजन का विस्तार होगा, नियमों का पालन, आचार संहिता और शिकायत निवारण व्यवस्था डिजिटल कंटेंट उद्योग के लिए और महत्वपूर्ण हो सकते हैं। PhonePe और DPCGC का यह समझौता इसी दिशा में एक कदम माना जा सकता है, जिसका लक्ष्य डिजिटल कारोबारों के लिए अनुपालन को अधिक सुलभ बनाना और एक अधिक व्यवस्थित डिजिटल कंटेंट वातावरण को बढ़ावा देना है।