कपड़ा मंत्रालय की बड़ी पहल, जीआई उत्पादों के लिए लॉन्च होगा डिजिटल हैंडलूम एटलस

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कपड़ा मंत्रालय की बड़ी पहल, जीआई उत्पादों के लिए लॉन्च होगा डिजिटल हैंडलूम एटलस
04 Aug 2026
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News Synopsis

भारत सरकार का कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles) देश के GI (Geographical Indication) टैग वाले हस्तकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले GI & Beyond 2.0 Summit के दौरान मंत्रालय डिजिटल हैंडलूम एटलस (Digital Handloom Atlas) लॉन्च करेगा।

इस समिट का उद्देश्य भारत की पारंपरिक बुनाई और हस्तशिल्प कला को देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाना, कारीगरों और बुनकरों को नए खरीदारों से जोड़ना तथा निर्यात को बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम का आयोजन डेवलपमेंट कमिश्नर (हैंडलूम) कार्यालय और हैंडलूम एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (HEPC) के सहयोग से किया जा रहा है।

इस समिट में विदेशी खरीदार, निर्यातक, उद्योग विशेषज्ञ, ई-कॉमर्स कंपनियां, सरकारी अधिकारी, शैक्षणिक संस्थान और GI उत्पादों से जुड़े प्रतिनिधि भाग लेंगे। साथ ही 100 से अधिक GI-पंजीकृत हस्तकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। यह पहल भारत की समृद्ध वस्त्र विरासत को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए वैश्विक बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

वैश्विक खरीदार और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि होंगे शामिल। (Global Buyers and Industry Leaders to Participate)

भारत के GI & Beyond 2.0 Summit में इस बार दुनिया भर के खरीदारों और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों की बड़ी भागीदारी देखने को मिलेगी। यह आयोजन भारत के हस्तकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

लगभग 10 देशों के विदेशी खरीदार होंगे मौजूद। (Overseas Buyers from Nearly 10 Countries Will Participate)

इस समिट में लगभग 10 देशों से विदेशी खरीदार शामिल होंगे। यह दर्शाता है कि भारतीय हस्तकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की मांग लगातार वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है।

विदेशी खरीदारों की मौजूदगी से भारतीय बुनकरों, कारीगरों और निर्यातकों को अपने उत्पाद सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। इससे नए व्यापारिक समझौते होने और निर्यात बढ़ने की संभावना भी मजबूत होगी।

उद्योग जगत के कई प्रमुख प्रतिनिधि भी होंगे शामिल। (Leading Industry Stakeholders Will Also Participate)

समिट में केवल विदेशी खरीदार ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया के कई बड़े उद्योग प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल होंगे।

GI & Beyond 2.0 Summit समिट में भाग लेने वाले प्रमुख प्रतिनिधि। (Key Participants at the Summit)

  • निर्यातक (Exporters)।
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियां (Multinational Corporations)।
  • GI उत्पादों के स्वामी (GI Product Proprietors)।
  • वरिष्ठ सरकारी अधिकारी (Senior Government Officials)।
  • टेक्सटाइल ब्रांड (Textile Brands)।
  • रिटेल चेन (Retail Chains)।
  • ई-कॉमर्स कंपनियां (E-commerce Companies)।
  • शैक्षणिक संस्थान (Academic Institutions)।
  • उद्योग विशेषज्ञ (Industry Experts)।

इन सभी हितधारकों की भागीदारी से नए व्यापारिक अवसर, निर्यात साझेदारियां और दीर्घकालिक व्यावसायिक सहयोग विकसित होने की उम्मीद है।

कारीगरों और खरीदारों के बीच सीधे संवाद का मिलेगा अवसर। (Direct Interaction Between Artisans and Buyers)

यह समिट भारतीय कारीगरों, बुनकरों, निर्माताओं और विदेशी खरीदारों को एक ही मंच पर लाएगा।

इससे कारीगरों को यह समझने में मदद मिलेगी कि वैश्विक बाजार में ग्राहकों की पसंद, गुणवत्ता की अपेक्षाएं और नए डिजाइन ट्रेंड क्या हैं। वहीं खरीदारों को भारत की पारंपरिक कला और उत्कृष्ट शिल्प कौशल को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।

100 से अधिक GI-पंजीकृत उत्पादों की प्रदर्शनी। (More Than 100 GI-Registered Products to Be Displayed)

इस समिट का सबसे बड़ा आकर्षण भारत के विभिन्न राज्यों से आए 100 से अधिक GI-पंजीकृत हस्तकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी होगी।

यह प्रदर्शनी भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा, क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत और सदियों पुरानी बुनाई कला का शानदार प्रदर्शन करेगी।

भारत की विविध हस्तकरघा परंपरा का होगा प्रदर्शन। (Showcasing India's Rich Handloom Heritage)

प्रदर्शनी में ऐसे उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे जो भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट पहचान और पारंपरिक शिल्प कौशल को दर्शाते हैं।

इन उत्पादों के माध्यम से आगंतुक यह जान सकेंगे कि भारत के प्रत्येक राज्य और क्षेत्र की अपनी अलग बुनाई शैली, डिज़ाइन, रंग संयोजन और सांस्कृतिक विशेषताएं हैं।

सदियों पुरानी बुनाई कला को मिलेगा वैश्विक मंच। (Centuries-Old Weaving Traditions to Get Global Recognition)

प्रदर्शनी में प्रदर्शित वस्त्र केवल कपड़े नहीं होंगे, बल्कि वे भारत की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक बुनाई कला का प्रतिनिधित्व करेंगे।

यह आयोजन दुनिया भर के खरीदारों को भारतीय हस्तकरघा उद्योग की गुणवत्ता और विविधता से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

लाइव डेमो में दिखेगी पारंपरिक बुनाई और हस्तशिल्प कला। (Live Demonstrations of Traditional Weaving and Handicrafts)

उत्पादों की प्रदर्शनी के साथ-साथ समिट में लाइव डेमो भी आयोजित किए जाएंगे।

आगंतुक देख सकेंगे कारीगरों की बारीक कला। (Visitors Can Witness Traditional Craftsmanship Live)

इन लाइव प्रस्तुतियों के दौरान अनुभवी कारीगर पारंपरिक बुनाई, हस्तशिल्प निर्माण और अन्य कलात्मक तकनीकों का प्रदर्शन करेंगे।

इससे आगंतुक यह समझ सकेंगे कि एक उत्कृष्ट हस्तकरघा उत्पाद तैयार करने में कितनी मेहनत, समय और कौशल लगता है।

डिजिटल हैंडलूम एटलस से वैश्विक बाजार तक बढ़ेगी पहुंच। (Digital Handloom Atlas to Strengthen Global Market Access)

समिट के उद्घाटन सत्र का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण डिजिटल हैंडलूम एटलस (Digital Handloom Atlas) का शुभारंभ होगा।

यह डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत के हस्तकरघा उद्योग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराएगा और भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच को मजबूत करेगा।

क्या है डिजिटल हैंडलूम एटलस? (What Is the Digital Handloom Atlas?)

डिजिटल हैंडलूम एटलस कपड़ा मंत्रालय द्वारा विकसित एक आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य भारत के हस्तकरघा उद्योग को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है।

इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी।

प्लेटफॉर्म पर कौन-कौन सी जानकारी मिलेगी?(What Information Will the Platform Provide?)

  • GI टैग वाले हस्तकरघा उत्पादों की जानकारी।
  • विभिन्न राज्यों के बुनकर क्लस्टरों का विवरण।
  • पारंपरिक बुनाई तकनीकों की जानकारी।
  • क्षेत्रवार हस्तकरघा उत्पादों का डिजिटल रिकॉर्ड।
  • कारीगरों और उत्पादकों से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं।

घरेलू और वैश्विक खरीदारों के लिए बनेगा उपयोगी प्लेटफॉर्म। (A Valuable Platform for Domestic and Global Buyers)

इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारत और विदेश के खरीदार आसानी से विभिन्न GI टैग वाले उत्पादों, उनके निर्माताओं और संबंधित बुनकर समूहों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

इससे भारतीय हस्तकरघा उत्पादों की दृश्यता बढ़ेगी और नए व्यापारिक अवसर भी विकसित होंगे।

कारीगरों को मिलेगा बड़ा डिजिटल बाजार। (Helping Artisans Access Wider Digital Markets)

डिजिटल हैंडलूम एटलस के माध्यम से कारीगर, सहकारी समितियां और उत्पादक सीधे निर्यातकों, रिटेल कंपनियों और वैश्विक ग्राहकों से जुड़ सकेंगे।

यह पहल बाजार तक पहुंच आसान बनाएगी, बिचौलियों पर निर्भरता कम करेगी और कारीगरों की आय बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकती है।

पारंपरिक कला और आधुनिक तकनीक का होगा संगम। (Bridging Traditional Craftsmanship with Modern Technology)

डिजिटल हैंडलूम एटलस का उद्देश्य केवल जानकारी उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि भारत की पारंपरिक हस्तकरघा कला को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ना भी है।

इससे भारतीय हैंडलूम उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप खुद को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना पाएगा।

GI उत्पाद स्वामियों और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को किया जाएगा सम्मान। (Recognition for GI Product Proprietors and Authorized Users)

GI & Beyond 2.0 समिट में केवल नए व्यावसायिक अवसरों पर ही चर्चा नहीं होगी, बल्कि उन व्यक्तियों और संस्थाओं को भी सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने भारत के GI (Geographical Indication) उत्पादों के संरक्षण, प्रचार और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

यह पहल भारत की पारंपरिक कला, शिल्प और बुनाई विरासत को संरक्षित करने वाले कारीगरों और संगठनों का मनोबल बढ़ाने का काम करेगी।

GI प्रमाणपत्र किए जाएंगे प्रदान। (GI Certificates to Be Presented)

समिट के उद्घाटन समारोह के दौरान पंजीकृत GI उत्पाद स्वामियों (Registered Proprietors) और नए अधिकृत उपयोगकर्ताओं (Authorized Users) को GI प्रमाणपत्र (GI Certificates) प्रदान किए जाएंगे।

ये प्रमाणपत्र यह सुनिश्चित करते हैं कि संबंधित व्यक्ति या संस्था को उस विशेष GI उत्पाद के उत्पादन, विपणन और बिक्री का कानूनी अधिकार प्राप्त है।

पारंपरिक उत्पादों की पहचान को मिलेगा कानूनी संरक्षण। (Legal Protection for Traditional Products)

GI प्रमाणन से किसी उत्पाद की क्षेत्रीय पहचान और मौलिकता सुरक्षित रहती है।

GI प्रमाणन के प्रमुख लाभ। (Key Benefits of GI Certification)

  • पारंपरिक उत्पादों की मौलिक पहचान सुरक्षित रहती है।

  • नकली और डुप्लीकेट उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलती है।
  • स्थानीय कारीगरों और बुनकरों के अधिकारों की रक्षा होती है।
  • उपभोक्ताओं को असली GI उत्पादों की पहचान करने में सुविधा मिलती है।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ती है।

सरकार का मानना है कि इस प्रकार का सम्मान कारीगरों को अपनी पारंपरिक तकनीकों को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रेरित करेगा।

HEPC के डायमंड जुबिली लोगो का होगा अनावरण। (HEPC to Unveil Diamond Jubilee Logo)

GI & Beyond 2.0 समिट के दौरान हैंडलूम एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (HEPC) अपने डायमंड जुबिली (Diamond Jubilee) लोगो का भी अनावरण करेगी।

यह अवसर HEPC की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने का प्रतीक होगा।

60 वर्षों की उपलब्धियों का होगा सम्मान। (Celebrating Six Decades of Excellence)

HEPC पिछले छह दशकों से भारतीय हस्तकरघा उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

इस दौरान संस्था ने—

  • भारतीय निर्यातकों को प्रोत्साहित किया।
  • नए विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता की।
  • उत्पादों की विविधता बढ़ाने के प्रयास किए।
  • भारत के हैंडलूम निर्यात को मजबूत बनाया।

भविष्य के लिए नई रणनीति पर भी रहेगा फोकस। (Focus on Future Growth Strategy)

डायमंड जुबिली समारोह केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं होगा, बल्कि भविष्य की रणनीतियों पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।

प्रमुख लक्ष्य। (Key Objectives)

  • हस्तकरघा निर्यात में वृद्धि।
  • डिजिटल मार्केटिंग को बढ़ावा।
  • वैश्विक ब्रांडिंग को मजबूत करना।
  • नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाना।
  • नवाचार और तकनीक को अपनाना।

GI इकोसिस्टम को मजबूत बनाएगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)। (Artificial Intelligence to Support the GI Ecosystem)

इस वर्ष के GI & Beyond 2.0 समिट की एक प्रमुख विशेषता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence - AI) भी होगी।

सरकार का उद्देश्य पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों से जोड़कर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।

IIT मद्रास देगा AI आधारित विशेष प्रस्तुति। (IIT Madras to Deliver Special AI Presentation)

समिट के दौरान IIT Madras के विशेषज्ञ GI इकोसिस्टम में AI के उपयोग पर विशेष प्रस्तुति देंगे।

इस प्रस्तुति में बताया जाएगा कि AI तकनीक पारंपरिक उत्पादों की गुणवत्ता, पहचान और विपणन को कैसे बेहतर बना सकती है।

AI से होंगे कई महत्वपूर्ण लाभ। (How AI Can Benefit the GI Ecosystem)

विशेषज्ञ बताएंगे कि AI का उपयोग निम्न क्षेत्रों में किया जा सकता है।

AI के प्रमुख उपयोग।(Major Applications of AI)

  • उत्पादों की प्रमाणिकता (Product Authentication) सुनिश्चित करना।

  • सप्लाई चेन मैनेजमेंट को अधिक कुशल बनाना।
  • डिजिटल दस्तावेज़ीकरण को आसान बनाना।
  • बाजार विश्लेषण (Market Intelligence) को बेहतर करना।
  • नकली उत्पादों की पहचान करना।
  • उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाना।
  • GI पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना।

AI के उपयोग से पारंपरिक उद्योग आधुनिक तकनीक के साथ बेहतर तालमेल स्थापित कर सकेंगे।

तकनीकी सत्रों के माध्यम से जागरूकता और बाजार विस्तार। (Technical Sessions to Promote Awareness and Market Expansion)

GI & Beyond 2.0 समिट में विशेषज्ञों द्वारा कई तकनीकी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।

इन सत्रों का उद्देश्य कारीगरों, उद्यमियों और निर्यातकों को GI उत्पादों से जुड़े कानूनी, तकनीकी और व्यावसायिक पहलुओं की जानकारी देना है।

कई महत्वपूर्ण विषयों पर होगी चर्चा। (Key Topics of Discussion)

विशेषज्ञ निम्न विषयों पर विस्तृत जानकारी देंगे।

तकनीकी सत्रों के प्रमुख विषय। (Major Technical Session Topics)

  • GI पंजीकरण प्रक्रिया।
  • बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights)।
  • ब्रांडिंग और मार्केटिंग रणनीति।
  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार विस्तार।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग।
  • निर्यात बढ़ाने के नए अवसर।
  • उपभोक्ता जागरूकता अभियान।

कारीगरों और उद्यमियों को मिलेगा व्यावहारिक मार्गदर्शन। (Practical Guidance for Artisans and Entrepreneurs)

इन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि बदलते वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कैसे की जाए, ब्रांड वैल्यू कैसे बढ़ाई जाए और डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग कैसे किया जाए।

भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और हस्तकरघा उद्योग को मिलेगी मजबूती। (Strengthening India's Traditional Crafts Industry)

GI & Beyond 2.0 समिट कपड़ा मंत्रालय की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए कारीगरों के लिए स्थायी आर्थिक अवसर तैयार करना है।

उद्योग के विकास को मिलेगा नया प्रोत्साहन। (Boost to the Growth of the Industry)

सरकार का मानना है कि यह पहल कई स्तरों पर हस्तकरघा और हस्तशिल्प उद्योग को मजबूत बनाएगी।

संभावित लाभ। (Expected Benefits)

  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बेहतर पहुंच।
  • GI उत्पादों को मजबूत कानूनी संरक्षण।
  • निर्यात में वृद्धि।
  • डिजिटल तकनीकों का व्यापक उपयोग।
  • कारीगरों की आय में बढ़ोतरी।
  • नए उद्यमिता अवसर।
  • पारंपरिक कला का संरक्षण।

डिजिटल हैंडलूम एटलस बनेगा बदलाव का माध्यम। (Digital Handloom Atlas Will Drive Transformation)

डिजिटल हैंडलूम एटलस के माध्यम से कारीगर सीधे खरीदारों, निर्यातकों और वैश्विक ग्राहकों से जुड़ सकेंगे।

इससे बाजार तक पहुंच आसान होगी, डिजिटल परिवर्तन को गति मिलेगी और भारत के पारंपरिक हस्तकरघा उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नई पहचान मिलेगी।

निष्कर्ष (Conclusion)

GI & Beyond 2.0 समिट के दौरान डिजिटल हैंडलूम एटलस का लॉन्च भारत के हस्तकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है। यह पहल केवल भारत की समृद्ध वस्त्र और शिल्प विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि कारीगरों, बुनकरों और उद्यमियों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से नए व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी बड़ा कदम है।

समिट में विदेशी खरीदारों की भागीदारी, 100 से अधिक GI-पंजीकृत उत्पादों की प्रदर्शनी, AI आधारित समाधान, GI प्रमाणन, तकनीकी सत्र और डिजिटल हैंडलूम एटलस जैसी पहलें भारत के हस्तकरघा उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

यदि इन पहलों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो भारत न केवल GI उत्पादों के निर्यात में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा, बल्कि लाखों कारीगरों और बुनकरों की आय बढ़ाने तथा देश की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में भी बड़ी सफलता हासिल कर सकेगा।