ग्रीन हाइड्रोजन की ओर भारत का बड़ा कदम, चार रिफाइनरियों में शुरू होगा उत्पादन

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ग्रीन हाइड्रोजन की ओर भारत का बड़ा कदम, चार रिफाइनरियों में शुरू होगा उत्पादन
12 Aug 2026
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News Synopsis

इस मिशन का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाना है। औद्योगिक प्रक्रियाओं में ग्रीन हाइड्रोजन को शामिल करके सरकार उन क्षेत्रों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना चाहती है, जहां कार्बन उत्सर्जन कम करना अपेक्षाकृत कठिन है।

इसके साथ ही भारत में स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ा घरेलू इकोसिस्टम विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

रिफाइनिंग क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोजन की क्षमता बढ़ाने से भारत को स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के व्यावहारिक इस्तेमाल का अनुभव मिलेगा। इससे आने वाले समय में अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी ग्रीन हाइड्रोजन को अपनाने का रास्ता आसान हो सकता है।

रिफाइनरियों को 30 KTPA ग्रीन हाइड्रोजन क्षमता आवंटित (30 KTPA Green Hydrogen Capacity Awarded to Refineries)

सरकार ने Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition (SIGHT) Mode 2B कार्यक्रम के तहत रिफाइनिंग क्षेत्र के लिए कुल 30 किलो टन प्रति वर्ष (Kilo Tonnes Per Annum - KTPA) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता आवंटित की है।

यह क्षमता देश की चार प्रमुख रिफाइनरी परियोजनाओं के बीच बांटी गई है।

आवंटन इस प्रकार है:

  • इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL), पानीपत रिफाइनरी: 10 KTPA।
  • भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL), बीना रिफाइनरी: 5 KTPA।
  • हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL), विशाखापत्तनम रिफाइनरी: 5 KTPA।
  • नुमालीगढ़ रिफाइनरीज लिमिटेड (NRL), नुमालीगढ़ रिफाइनरी: 10 KTPA।

इन चार परियोजनाओं की कुल क्षमता भारत के रिफाइनिंग क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

चार रिफाइनरियों में क्षमता का वितरण (Capacity Distribution Across Four Refineries)

पानीपत और नुमालीगढ़ रिफाइनरियों को सबसे अधिक 10-10 KTPA क्षमता मिली है। वहीं बीना और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों को 5-5 KTPA क्षमता आवंटित की गई है।

इससे अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं को विकसित करने में मदद मिलेगी और देश के रिफाइनिंग सेक्टर में इसके इस्तेमाल का अनुभव बढ़ेगा।

पानीपत रिफाइनरी को मिली 10 KTPA क्षमता (Panipat Refinery Gets 10 KTPA Allocation)

इंडियन ऑयल की पानीपत रिफाइनरी को 10 KTPA ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है।

यह परियोजना रिफाइनरी में अधिक स्वच्छ औद्योगिक प्रक्रियाओं को अपनाने में मदद कर सकती है। साथ ही, इतनी बड़ी पेट्रोलियम रिफाइनरी में ग्रीन हाइड्रोजन को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने का व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा।

रिफाइनिंग प्रक्रिया में स्वच्छ हाइड्रोजन का इस्तेमाल (Using Clean Hydrogen in Refining Operations)

पानीपत परियोजना से यह समझने में मदद मिल सकती है कि मौजूदा रिफाइनरी इंफ्रास्ट्रक्चर में नवीकरणीय ऊर्जा से तैयार हाइड्रोजन को किस तरह प्रभावी ढंग से शामिल किया जा सकता है।

इस तरह की परियोजनाओं से तकनीक, संचालन और लागत से जुड़े महत्वपूर्ण अनुभव भी प्राप्त हो सकते हैं।

नुमालीगढ़ रिफाइनरी को भी 10 KTPA आवंटन (Numaligarh Refinery Receives 10 KTPA)

नुमालीगढ़ रिफाइनरीज लिमिटेड (NRL) की नुमालीगढ़ रिफाइनरी को भी 10 KTPA ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता दी गई है।

यह परियोजना SIGHT Mode 2B के तहत आवंटित कुल 30 KTPA क्षमता का एक बड़ा हिस्सा है।

पूर्वोत्तर भारत में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा (Boosting Clean Energy in Northeast India)

नुमालीगढ़ परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है।

इसके जरिए रिफाइनिंग क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल के साथ-साथ भारत के व्यापक हाइड्रोजन इकोसिस्टम को भी मजबूत करने की संभावना है।

बीना और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों को 5-5 KTPA (Bina and Vizag Refineries Get 5 KTPA Each)

दो अन्य प्रमुख रिफाइनरियों को भी ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है।

भारत पेट्रोलियम की बीना रिफाइनरी को 5 KTPA, जबकि हिंदुस्तान पेट्रोलियम की विशाखापत्तनम रिफाइनरी को भी 5 KTPA क्षमता मिली है।

इन दोनों परियोजनाओं की संयुक्त क्षमता 10 KTPA है।

ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन आधार होगा मजबूत (Strengthening India's Green Hydrogen Production Base)

इन परियोजनाओं से भारत में ग्रीन हाइड्रोजन की कुल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। साथ ही, औद्योगिक क्षेत्र में पारंपरिक ईंधन के स्थान पर कम-कार्बन विकल्पों के इस्तेमाल को प्रोत्साहन मिल सकता है।

परियोजनाएं BOO मॉडल के तहत विकसित होंगी (Projects to Follow the BOO Model)

ग्रीन हाइड्रोजन की इन परियोजनाओं को Build Own Operate (BOO) मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है।

इस मॉडल में निजी डेवलपर्स परियोजनाओं को स्थापित करने, उनका स्वामित्व रखने और उनका संचालन करने की जिम्मेदारी लेते हैं।

निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा (Encouraging Private-Sector Participation)

BOO मॉडल का उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में निजी निवेश और भागीदारी को बढ़ाना है।

इससे कंपनियों को उत्पादन सुविधाओं में निवेश करने और व्यावसायिक स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं को विकसित करने का अवसर मिल सकता है।

ग्रीन हाइड्रोजन औद्योगिक उत्सर्जन कम करने में मदद कर सकता है (Green Hydrogen Can Help Cut Industrial Emissions)

रिफाइनरियों में ग्रीन हाइड्रोजन का बढ़ता इस्तेमाल भारत के औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन नवीकरणीय बिजली की मदद से पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए किया जाता है। इसके उत्पादन में पारंपरिक जीवाश्म ईंधन आधारित तरीकों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन काफी कम हो सकता है, खासकर तब जब इस्तेमाल होने वाली बिजली नवीकरणीय स्रोतों से आए।

रिफाइनिंग उद्योग क्यों महत्वपूर्ण है (Why the Refining Industry Matters)

रिफाइनरियों में हाइड्रोजन का पहले से ही कई प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होता है। इसलिए इस क्षेत्र में पारंपरिक हाइड्रोजन को ग्रीन हाइड्रोजन से बदलने की संभावनाएं महत्वपूर्ण हैं।

यदि यह बदलाव बड़े स्तर पर सफल रहता है, तो इससे औद्योगिक क्षेत्र में स्वच्छ हाइड्रोजन की मांग बढ़ सकती है।

भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को मिलेगा समर्थन (Supporting India’s Clean Energy Transition)

ग्रीन हाइड्रोजन क्षमता का विकास भारत के व्यापक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का हिस्सा है।

सरकार घरेलू स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और इस्तेमाल को बढ़ाकर ऐसा इकोसिस्टम बनाना चाहती है, जो कम-कार्बन ऊर्जा की जरूरत वाले उद्योगों को समर्थन दे सके।

मौजूदा औद्योगिक ढांचे में नई तकनीक (Integrating New Technology Into Existing Industrial Infrastructure)

रिफाइनरी परियोजनाएं यह दिखाने में मदद कर सकती हैं कि मौजूदा औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर में ग्रीन हाइड्रोजन को किस तरह जोड़ा जा सकता है।

इन परियोजनाओं से मिलने वाला अनुभव भविष्य में अन्य उद्योगों में ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

ग्रीन हाइड्रोजन से ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती (Strengthening Energy Security Through Green Hydrogen)

ग्रीन हाइड्रोजन भारत के ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों में भी योगदान दे सकता है।

देश में स्वच्छ हाइड्रोजन का उत्पादन बढ़ने से कुछ क्षेत्रों में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने में मदद मिल सकती है।

घरेलू ऊर्जा स्रोतों का विस्तार (Expanding Domestic Energy Sources)

भारत की ऊर्जा मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नवीकरणीय बिजली और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे घरेलू ऊर्जा विकल्पों का विकास देश के ऊर्जा मिश्रण को अधिक विविध बनाने में मदद कर सकता है।

यह लंबी अवधि में ऊर्जा आयात पर निर्भरता को कम करने की दिशा में भी योगदान दे सकता है।

भारत के नेट-जीरो लक्ष्य में ग्रीन हाइड्रोजन की भूमिका (Supporting India’s Net-Zero Ambitions)

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन भारत के दीर्घकालिक जलवायु और डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों से भी जुड़ा हुआ है।

ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन और इस्तेमाल बढ़ने से उद्योगों को धीरे-धीरे अधिक कार्बन-गहन ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

रिफाइनिंग सेक्टर क्यों अहम है (Why the Refining Sector Is Important)

रिफाइनिंग उद्योग ऊर्जा की बड़ी मात्रा का इस्तेमाल करता है और हाइड्रोजन इसकी कई प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसलिए इस क्षेत्र में स्वच्छ हाइड्रोजन का इस्तेमाल बढ़ाने से औद्योगिक उत्सर्जन कम करने की अच्छी संभावना हो सकती है।

भारत में घरेलू ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम तैयार करने की कोशिश (Building a Domestic Green Hydrogen Ecosystem)

सरकार का लक्ष्य केवल ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन बढ़ाना नहीं है। इसके साथ एक मजबूत घरेलू ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम तैयार करना भी महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

इसमें तकनीक का विकास, निजी निवेश, औद्योगिक मांग, उत्पादन सुविधाएं और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

उत्पादन से लेकर इस्तेमाल तक पूरी वैल्यू चेन (Building the Entire Value Chain From Production to Use)

रिफाइनरी परियोजनाएं ग्रीन हाइड्रोजन की मांग पैदा करने के साथ डेवलपर्स को इसके उत्पादन और औद्योगिक इस्तेमाल का अनुभव भी देंगी।

समय के साथ इससे उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़ी तकनीकों में सुधार की संभावना बढ़ सकती है।

क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए नए अवसर (Creating Opportunities for Clean Energy Technologies)

ग्रीन हाइड्रोजन क्षमता बढ़ने से स्वच्छ ऊर्जा की पूरी वैल्यू चेन में काम करने वाली कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

इनमें शामिल हो सकते हैं:

  • नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक।
  • इलेक्ट्रोलाइजर निर्माता।
  • हाइड्रोजन तकनीक कंपनियां।
  • इंजीनियरिंग कंपनियां।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स।
  • ऊर्जा भंडारण और संबंधित तकनीक कंपनियां।

निजी निवेश बढ़ने की संभावना (Potential for Increased Private Investment)

जैसे-जैसे ग्रीन हाइड्रोजन की मांग बढ़ेगी, निजी कंपनियां उत्पादन और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने में अधिक रुचि दिखा सकती हैं।

इससे भारत में स्वच्छ ऊर्जा तकनीक और औद्योगिक क्षमता के विकास को बढ़ावा मिल सकता है।

भारत को ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने का लक्ष्य (India’s Ambition to Become a Global Green Hydrogen Hub)

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का व्यापक उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।

रिफाइनिंग जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में घरेलू परियोजनाओं का विकास इस लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकता है।

वैश्विक हाइड्रोजन बाजार में भारत की भूमिका (India’s Role in the Global Hydrogen Market)

यदि भारत उत्पादन क्षमता, तकनीक, लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में प्रतिस्पर्धी स्थिति हासिल करता है, तो वह भविष्य के अंतरराष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रिफाइनरी परियोजनाओं का भारत के लिए क्या मतलब है (What the Refinery Projects Mean for India)

चार रिफाइनरियों को कुल 30 KTPA ग्रीन हाइड्रोजन क्षमता का आवंटन भारत के पेट्रोलियम उद्योग में स्वच्छ हाइड्रोजन को शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इन परियोजनाओं का महत्व केवल अतिरिक्त हाइड्रोजन उत्पादन तक सीमित नहीं है। इनके जरिए यह भी पता चलेगा कि नवीकरणीय ऊर्जा से तैयार हाइड्रोजन का बड़े औद्योगिक संयंत्रों में व्यावसायिक स्तर पर कितना प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है।

पायलट प्रोजेक्ट से बड़े स्तर पर अपनाने की ओर (From Pilot Projects to Wider Industrial Adoption)

इन परियोजनाओं की सफलता से ग्रीन हाइड्रोजन को छोटे प्रयोगों से आगे बढ़ाकर बड़े औद्योगिक उपयोग तक ले जाने का रास्ता मजबूत हो सकता है।

इनकी प्रगति से लागत, तकनीक, संचालन और व्यावसायिक व्यवहार्यता के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन भारत के रिफाइनिंग क्षेत्र में स्वच्छ हाइड्रोजन के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। SIGHT Mode 2B के तहत चार रिफाइनरियों को कुल 30 KTPA ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है।

पानीपत और नुमालीगढ़ रिफाइनरियों को 10-10 KTPA, जबकि बीना और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों को 5-5 KTPA क्षमता मिली है। इन परियोजनाओं को BOO मॉडल के तहत विकसित किया जाना निजी क्षेत्र की भागीदारी और व्यावसायिक निवेश के लिए भी महत्वपूर्ण है।

ग्रीन हाइड्रोजन रिफाइनिंग उद्योग में पारंपरिक हाइड्रोजन के अधिक स्वच्छ विकल्प के रूप में काम कर सकता है। इससे औद्योगिक उत्सर्जन कम करने, ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं का प्रदर्शन यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि भारत रिफाइनिंग सहित अन्य कठिन-से-डीकार्बोनाइज होने वाले क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन को कितनी तेजी से बड़े स्तर पर अपना सकता है। इससे भारत के घरेलू ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम को मजबूती मिलने के साथ देश के वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन हब बनने के लक्ष्य को भी समर्थन मिल सकता है।