IIT खड़गपुर में बनेगा भारत का पहला फिजिकल AI स्कूल, 35 करोड़ रुपये होंगे खर्च

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IIT खड़गपुर में बनेगा भारत का पहला फिजिकल AI स्कूल, 35 करोड़ रुपये होंगे खर्च
27 Oct 2026
7 min read

News Synopsis

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर (IIT Kharagpur) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। संस्थान ने देश का पहला समर्पित फिजिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्कूल (Physical AI School) स्थापित करने की घोषणा की है। इस परियोजना पर कुल 35 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। नए संस्थान का नाम बेंजामिन गुप्ता स्कूल ऑफ फिजिकल AI (Benjamin Gupta School of Physical AI) रखा गया है।

यह स्कूल रोबोटिक्स, अपने आप काम करने वाली मशीनों, वैज्ञानिक अनुसंधान और वास्तविक दुनिया में काम करने वाली AI तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करेगा। इसका उद्देश्य ऐसी बुद्धिमान मशीनें विकसित करना है, जो अपने आसपास के वातावरण को समझकर सुरक्षित और प्रभावी तरीके से काम कर सकें।

इस पहल से छात्रों, शोधकर्ताओं और विभिन्न उद्योगों में काम करने वाले पेशेवरों को नई तकनीकों का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, भारत में AI आधारित नवाचार और आधुनिक तकनीकी शिक्षा को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

IIT खड़गपुर के फिजिकल AI स्कूल में 35 करोड़ रुपये का निवेश (₹35 Crore Investment in IIT Kharagpur's Physical AI School)

IIT खड़गपुर ने इस नए स्कूल की स्थापना के लिए संस्थान के पूर्व छात्र और समाजसेवी विनोद गुप्ता तथा IITKGP Foundation USA के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस समझौते के अंतर्गत स्कूल की स्थापना, शैक्षणिक गतिविधियों और शोध कार्यों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

फिजिकल AI स्कूल को कहां से मिलेगी आर्थिक सहायता? (Funding Sources for the Physical AI School)

कुल 35 करोड़ रुपये की राशि तीन स्रोतों से प्राप्त होगी।

  • 12.5 करोड़ रुपये: विनोद गुप्ता के परिवार की ओर से दिए जाएंगे।

  • 10 करोड़ रुपये: संस्थान के एक पूर्व छात्र देंगे, जिन्होंने अपना नाम सार्वजनिक नहीं किया है।

  • 12.5 करोड़ रुपये: IIT खड़गपुर स्वयं उपलब्ध कराएगा।

इस स्कूल का नाम विनोद गुप्ता के दिवंगत बेटे बेंजामिन गुप्ता की स्मृति में रखा गया है।

नए संस्थान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभाग भी शामिल होगा, जिससे विभिन्न विषयों में AI की पढ़ाई और शोध को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

फिजिकल AI क्या है और यह सामान्य AI से कैसे अलग है? (What Is Physical AI and How Is It Different From Traditional AI?)

फिजिकल AI कृत्रिम बुद्धिमत्ता की ऐसी तकनीक है, जो मशीनों को वास्तविक दुनिया को समझने और उसके अनुसार काम करने में सक्षम बनाती है।

सामान्य AI मुख्य रूप से जानकारी का विश्लेषण करने, सवालों के जवाब देने और डिजिटल माध्यम में काम करने के लिए इस्तेमाल होता है।

इसके विपरीत, फिजिकल AI मशीनों को अपने आसपास की वस्तुओं, गतिविधियों और परिस्थितियों को पहचानकर निर्णय लेने में मदद करता है।

फिजिकल AI कैसे काम करता है? (How Does Physical AI Work?)

फिजिकल AI में सेंसर, वैज्ञानिक सिद्धांतों, मशीन लर्निंग और स्वचालित नियंत्रण तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

इनकी सहायता से मशीनें आसपास की जानकारी प्राप्त करती हैं, उसका विश्लेषण करती हैं और आवश्यक कार्रवाई करती हैं।

फिजिकल AI के प्रमुख उपयोग (Major Applications of Physical AI)

फिजिकल AI का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा सकता है।

  • उद्योग: कारखानों में काम करने वाले स्मार्ट रोबोट।

  • स्वास्थ्य सेवाएं: मरीजों की देखभाल और चिकित्सा उपकरणों में सहायता।

  • परिवहन: अपने आप चलने वाली गाड़ियां और मशीनें।

  • लॉजिस्टिक्स: सामान की पहचान, छंटाई और आवाजाही का प्रबंधन।

  • वैज्ञानिक शोध: वास्तविक परिस्थितियों का अध्ययन और प्रयोग।

इन तकनीकों से कई कार्यों को अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सकता है।

IIT खड़गपुर के नए AI स्कूल में किन विषयों पर होगा शोध? (Key Research Areas at IIT Kharagpur's Physical AI School)

नया स्कूल आधुनिक AI तकनीकों के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों पर शोध करेगा।

1. बुद्धिमान रोबोटिक्स और स्वचालित मशीनें (Intelligent Robotics and Autonomous Systems)

इस क्षेत्र में ऐसे रोबोट विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा, जो अपने आसपास की परिस्थितियों को पहचान सकें और कम मानवीय सहायता से काम कर सकें।

इनका उपयोग कारखानों, अस्पतालों, गोदामों और अन्य उद्योगों में किया जा सकता है।

2. वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित मशीन लर्निंग (Physics-Informed Machine Learning and Scientific AI)

इस तकनीक में मशीन लर्निंग को भौतिक विज्ञान के नियमों के साथ जोड़ा जाता है।

इसका उद्देश्य ऐसे AI मॉडल तैयार करना है, जो वैज्ञानिक समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ सकें और अधिक विश्वसनीय परिणाम दे सकें।

3. डिजिटल ट्विन और आधुनिक सेंसर तकनीक (Digital Twins and Advanced Sensing)

डिजिटल ट्विन किसी वास्तविक मशीन, वस्तु या प्रक्रिया का आभासी मॉडल होता है।

इसकी सहायता से वैज्ञानिक मशीनों के काम करने के तरीके का अध्ययन कर सकते हैं और वास्तविक बदलाव करने से पहले संभावित परिणामों का परीक्षण कर सकते हैं।

4. AI की मदद से वैज्ञानिक प्रयोग (AI-Enabled Scientific Experimentation)

नया संस्थान वैज्ञानिक प्रयोगों में AI के उपयोग पर भी शोध करेगा।

इससे प्रयोगों के परिणामों का विश्लेषण तेज हो सकता है और नई वैज्ञानिक खोजों में सहायता मिल सकती है।

सुरक्षित और भरोसेमंद AI विकसित करने पर विशेष ध्यान (Focus on Safe, Reliable and Explainable AI)

बेंजामिन गुप्ता स्कूल ऑफ फिजिकल AI का एक प्रमुख उद्देश्य सुरक्षित और विश्वसनीय AI तकनीक विकसित करना होगा।

स्वास्थ्य सेवाओं, औद्योगिक मशीनों और स्वचालित परिवहन जैसे क्षेत्रों में AI की छोटी गलती भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

इसलिए संस्थान ऐसी तकनीकों पर शोध करेगा, जिनके निर्णयों को समझा जा सके और जो बदलती परिस्थितियों में भी सही तरीके से काम कर सकें।

AI के फैसलों को समझना क्यों जरूरी है? (Why Is Explainable AI Important?)

कई AI प्रणालियों में यह समझना मुश्किल होता है कि मशीन ने कोई विशेष निर्णय क्यों लिया।

इसे अक्सर ब्लैक-बॉक्स समस्या कहा जाता है।

नए स्कूल में AI के निर्णयों को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया जाएगा।

अगले शैक्षणिक सत्र से शुरू हो सकती है पढ़ाई (Academic Programmes May Begin Next Session)

IIT खड़गपुर की योजना आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद आगामी शैक्षणिक सत्र से नए स्कूल में पढ़ाई शुरू करने की है।

यहां इंजीनियरिंग, भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान और चिकित्सा जैसे अलग-अलग विषयों से जुड़े छात्रों को अध्ययन के अवसर मिल सकते हैं।

छात्रों और पेशेवरों को क्या फायदा होगा? (Benefits for Students and Working Professionals)

नए स्कूल में छात्रों के साथ शोधकर्ताओं और नौकरी करने वाले पेशेवरों को भी नई तकनीकों का ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिलने की उम्मीद है।

इससे उन्हें AI आधारित उद्योगों की जरूरतों के अनुसार अपने कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी।

विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ मिलकर वास्तविक समस्याओं के तकनीकी समाधान भी खोज सकेंगे।

भारत में फिजिकल AI के भविष्य को नई दिशा (IIT Kharagpur's Vision for the Future of Physical AI)

IIT खड़गपुर के निदेशक सुमन चक्रवर्ती के अनुसार, AI के विकास का अगला चरण केवल डिजिटल कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा।

भविष्य में AI इस बात को भी बदलेगा कि मनुष्य वास्तविक दुनिया को कैसे समझते हैं और उसके साथ किस प्रकार काम करते हैं।

संस्थान का लक्ष्य वैज्ञानिक ज्ञान और AI तकनीकों को जोड़कर भारत को इस क्षेत्र में आगे बढ़ाने में योगदान देना है।

उद्योगों और शोध संस्थानों के साथ सहयोग (Collaboration With Industries and Research Institutions)

नए स्कूल से उद्योगों, अस्पतालों, स्टार्टअप, शोध प्रयोगशालाओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग की भी उम्मीद है।

इससे नई तकनीकों को विकसित करने और उनका वास्तविक जीवन में उपयोग बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

IIT खड़गपुर का 35 करोड़ रुपये की लागत से फिजिकल AI स्कूल स्थापित करने का निर्णय भारत में आधुनिक तकनीकी शिक्षा और वैज्ञानिक शोध के लिए महत्वपूर्ण कदम है।

बेंजामिन गुप्ता स्कूल ऑफ फिजिकल AI में रोबोटिक्स, स्वचालित मशीनों, डिजिटल ट्विन और वैज्ञानिक AI जैसी तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

यह पहल छात्रों को नई तकनीक सीखने, शोध करने और भविष्य के उद्योगों के लिए जरूरी कौशल विकसित करने के अवसर प्रदान कर सकती है। हालांकि, इसकी सफलता शैक्षणिक कार्यक्रमों के संचालन, शोध की गुणवत्ता और उद्योगों के साथ प्रभावी सहयोग पर निर्भर करेगी।