भारतीय कंपनियाँ और AI: नैसकॉम प्रमुख ने बताया कि AI को लागू करने में 10 साल क्यों लग सकते हैं

Share Us

53
भारतीय कंपनियाँ और AI: नैसकॉम प्रमुख ने बताया कि AI को लागू करने में 10 साल क्यों लग सकते हैं
25 Sep 2026
7 min read

News Synopsis

भारतीय कंपनियों के पास आज उपलब्ध कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI तकनीक को पूरी तरह लागू करने के लिए अगले पांच से दस साल तक का समय हो सकता है। ऐसा तब भी हो सकता है, अगर आज के बाद AI तकनीक में कोई बड़ी नई प्रगति न हो। यह बात नैसकॉम के चेयरपर्सन और Fractal के Group Chief Executive Officer श्रीकांत वेलामकन्नी ने कही है।

उन्होंने यह टिप्पणी नैसकॉम एजेंटिक AI कॉन्फ्लुएंस 2026 NASSCOM Agentic AI Confluence 2026 से इतर की। वेलामकन्नी ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि वर्तमान AI तकनीक जितना काम करने में सक्षम है और कंपनियां वास्तव में जितनी AI तकनीक अपने कारोबार में इस्तेमाल कर रही हैं, उनके बीच अभी काफी अंतर है।

नैसकॉम के चेयरपर्सन और फ्रैक्टल समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीकांत वेलमकन्नी Srikanth Velamakanni, Chairperson of NASSCOM and Group Chief Executive Officer of Fractal के अनुसार, भारतीय कंपनियों के सामने तत्काल चुनौती जरूरी नहीं कि नए और अधिक शक्तिशाली AI मॉडल तक पहुंच हासिल करना हो। बड़ी चुनौती यह है कि पहले से उपलब्ध AI तकनीक को कारोबारी प्रक्रियाओं में बड़े स्तर पर किस तरह प्रभावी ढंग से शामिल किया जाए।

कंपनियों में AI अपनाने के सामने अब भी कई बाधाएं Enterprise AI Adoption Still Faces Major Barriers

AI को लेकर कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों और निदेशक मंडलों की रुचि तेजी से बढ़ी है। इसके बावजूद कई संगठनों के लिए AI को बड़े स्तर पर लागू करना अभी भी आसान नहीं है।

वेलामकन्नी ने इस अंतर को कई तरह की “एंटरप्राइज फ्रिक्शन” यानी कारोबारी स्तर की बाधाओं से जोड़ा। इनमें सीमित बजट, डेटा की तैयारी की कमी, कुशल कर्मचारियों की कमी, कानूनी और नियामकीय चिंताएं, AI के परिणामों की सटीकता तथा कंपनी की प्रतिष्ठा से जुड़े संभावित जोखिम शामिल हैं।

इन सभी चुनौतियों के कारण कंपनियों के लिए AI के छोटे प्रयोगों से आगे बढ़कर उसे पूरे कारोबार में लागू करना धीमा हो सकता है।

मौजूदा AI को लागू करने में लग सकते हैं कई साल Existing AI Could Take Years to Implement

वेलामकन्नी के अनुसार, अगर AI तकनीक में आगे कोई नई प्रगति भी न हो, तब भी कंपनियों को आज उपलब्ध सबसे अच्छी AI तकनीक का पूरा लाभ उठाने में पांच से दस साल लग सकते हैं।

यह अनुमान बताता है कि कंपनियों के पास मौजूदा AI साधनों से ही उत्पादकता बढ़ाने और कारोबारी प्रक्रियाओं में सुधार करने की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। यानी अगली बड़ी तकनीकी सफलता का इंतजार करने के बजाय कंपनियां आज उपलब्ध AI को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करके भी महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती हैं।

“Enterprise Friction” AI को कारोबार में पहुंचने से रोक रहा है Enterprise Friction Is Slowing AI Deployment

बड़ी कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक AI को मौजूदा तकनीकी ढांचे में शामिल करना है।

कई बड़ी कंपनियां वर्षों पुरानी तकनीक, स्थापित कारोबारी प्रक्रियाओं और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूद बड़ी मात्रा में डेटा का इस्तेमाल करती हैं। ऐसे वातावरण में AI को जोड़ने के लिए विस्तृत योजना, निवेश और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की आवश्यकता पड़ सकती है।

इसके अलावा, कंपनियों को AI लागू करने से पहले डेटा सुरक्षा, मॉडल की सटीकता, नियमों का पालन और जवाबदेही जैसे सवालों पर भी ध्यान देना पड़ता है।

अगर AI का इस्तेमाल ग्राहक सेवा, वित्तीय निर्णय या किसी अन्य महत्वपूर्ण कारोबारी काम में किया जा रहा है, तो गलत परिणाम कंपनी के लिए आर्थिक नुकसान के साथ-साथ उसकी प्रतिष्ठा को भी प्रभावित कर सकते हैं।

वेलामकन्नी के अनुसार, ये समस्याएं केवल भारतीय कंपनियों तक सीमित नहीं हैं। दुनिया भर में कंपनियां AI को बड़े स्तर पर लागू करते समय इसी तरह की बाधाओं का सामना कर रही हैं।

Capex से Opex की ओर बढ़ रहा AI का खर्च AI Is Shifting From Capex to Opex

वेलामकन्नी ने AI अपनाने की अर्थव्यवस्था में हो रहे एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर भी इशारा किया। उनके अनुसार, AI का इस्तेमाल अब धीरे-धीरे बड़े शुरुआती Capex यानी पूंजीगत खर्च से हटकर Opex यानी परिचालन खर्च के रूप में किया जा रहा है।

इस बदलाव से भारतीय कंपनियों के लिए AI अपनाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

पहले कंपनियों को नई तकनीक के लिए महंगा हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और अन्य तकनीकी ढांचा तैयार करने में बड़ा शुरुआती निवेश करना पड़ता था। भारत में कंपनियां ऐसे बड़े निवेश को लेकर सावधानी बरतती रही हैं, खासकर तब जब कर्मचारियों की लागत तकनीकी निवेश की तुलना में कम रही हो।

अब क्लाउड और सदस्यता आधारित AI सेवाओं के बढ़ने से कंपनियों को हर तकनीकी सुविधा के लिए अपना पूरा ढांचा तैयार करने की जरूरत कम हो रही है।

AI सेवाएं कंपनियों के लिए हो सकती हैं अधिक सुलभ AI Services Could Become More Economically Accessible

कंपनियां अब महंगा तकनीकी ढांचा खुद तैयार करने के बजाय बाजार में उपलब्ध AI प्लेटफॉर्म और सेवाओं का इस्तेमाल कर सकती हैं।

इससे कंपनियों को पहले छोटे स्तर पर AI का परीक्षण करने, सफल प्रयोगों को आगे बढ़ाने और धीरे-धीरे अपना खर्च बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।

यह तरीका उन कंपनियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, जो बड़े स्तर के तकनीकी निवेश को लेकर पहले आश्वस्त नहीं थीं।

बड़ी कंपनियों और छोटे कारोबारों की चुनौतियां अलग Large Companies and SMEs Face Different Challenges

AI अपनाने की प्रक्रिया बड़ी कंपनियों और छोटे तथा मध्यम कारोबारों में अलग-अलग हो सकती है।

बड़ी कंपनियों के पास ग्राहक सेवा, आंकड़ों के विश्लेषण, सॉफ्टवेयर विकास, संचालन और निर्णय लेने जैसे क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल करने के कई अवसर हैं। लेकिन इन कंपनियों को पुरानी तकनीकी प्रणालियों, नियमों, आंतरिक मंजूरी और वार्षिक बजट प्रक्रिया जैसी अतिरिक्त चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।

दूसरी ओर, छोटे और मध्यम कारोबार कई AI मॉडल और सेवाओं का इस्तेमाल किसी एक खास काम के लिए कर सकते हैं। उन्हें हर बार पूरे कारोबार की तकनीकी व्यवस्था बदलने की जरूरत नहीं होती।

बड़े उद्यमों में लागू करना अधिक जटिल Large Enterprises Face Greater Implementation Friction

वेलामकन्नी के अनुसार, बड़ी कंपनियों में AI की संभावनाएं काफी व्यापक हैं, लेकिन इसे लागू करने की प्रक्रिया भी उतनी ही जटिल हो सकती है।

ऐसी कंपनियों के लिए डेटा ढांचे को मजबूत करना, कर्मचारियों में AI से जुड़ी विशेषज्ञता विकसित करना और स्पष्ट AI गवर्नेंस व्यवस्था बनाना महत्वपूर्ण हो सकता है।

इसके बाद ही AI आधारित सेवाओं को अलग-अलग विभागों में बड़े स्तर पर लागू करना आसान हो सकता है।

भारत AI अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है India Is Closing the AI Adoption Gap

भारतीय कंपनियों में AI को लेकर रुचि तेजी से बढ़ी है। हालांकि, भारत अभी अमेरिका जैसे कुछ तेजी से AI अपनाने वाले बाजारों के स्तर तक नहीं पहुंचा है।

भारतीय कंपनियों के CEO और निदेशक मंडल AI के संभावित उपयोग को लेकर पहले की तुलना में अधिक सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। लेकिन केवल रुचि बढ़ना और वास्तविक रूप से AI लागू करना दो अलग-अलग बातें हैं।

अगला चरण कंपनियों के लिए यह तय करना होगा कि मौजूदा AI साधनों का इस्तेमाल किन क्षेत्रों में किया जाए, जहां उनसे स्पष्ट और मापने योग्य कारोबारी लाभ मिल सके।

AI विकास को लेकर वैश्विक चर्चा जारी Global Debate Over AI Development Continues

वेलामकन्नी की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनियाभर में AI के विकास की गति और दिशा को लेकर चर्चा जारी है।

बड़ी तकनीकी कंपनियां और उद्योग जगत के नेता AI के संभावित लाभों और जोखिमों पर विचार कर रहे हैं। इनमें अधिक सक्षम AI प्रणालियों और एजेंटिक AI जैसे स्वायत्त तकनीकी साधनों से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।

कुछ तकनीकी क्षेत्र के नेताओं ने AI विकास की गति को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है। वहीं, वेलामकन्नी ने एक अलग लेकिन महत्वपूर्ण चुनौती पर ध्यान केंद्रित किया है—कंपनियों को अभी उन AI तकनीकों को ही बड़े स्तर पर लागू करने के लिए काफी काम करना बाकी है, जो पहले से उपलब्ध हैं।

मौजूदा AI को प्रभावी तरीके से लागू करना बड़ा अवसर Closing the Gap Is the Immediate Opportunity

भारतीय कंपनियों के लिए निकट भविष्य में AI का अवसर केवल अगली बड़ी तकनीकी सफलता का इंतजार करने में नहीं, बल्कि मौजूदा तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करने में भी हो सकता है।

बेहतर डेटा तैयारी, कर्मचारियों का प्रशिक्षण, जिम्मेदार AI गवर्नेंस और मौजूदा कारोबारी प्रणालियों के साथ AI का सही एकीकरण कंपनियों को छोटे AI प्रयोगों से बड़े स्तर पर उपयोग की ओर ले जा सकता है।

वेलामकन्नी द्वारा बताए गए पांच से दस साल के संभावित कार्यान्वयन समय से यह संकेत मिलता है कि आज उपलब्ध AI तकनीक का पूरी तरह कारोबारी उपयोग करने में भी कंपनियों के सामने लंबी प्रक्रिया हो सकती है। इस दौरान AI तकनीक लगातार विकसित होती रहेगी, लेकिन भारतीय कंपनियों के लिए मौजूदा AI क्षमताओं को वास्तविक कारोबारी काम में बदलना भी एक महत्वपूर्ण अवसर बना रहेगा।