भारत का एनुअल फ़ूड एक्सपोर्ट 5 लाख करोड़ के करीब: पीयूष गोयल

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भारत का एनुअल फ़ूड एक्सपोर्ट 5 लाख करोड़ के करीब: पीयूष गोयल
11 Mar 2026
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News Synopsis

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने खाद्य, कृषि और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के स्टेकहोल्डर्स से मिलकर काम करने का आह्वान किया, ताकि भारत को कृषि और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का दुनिया का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर बनाया जा सके। उन्होंने भारत के बढ़ते व्यापार समझौतों और भारतीय उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग से पैदा हुए विशाल अवसरों पर भी रोशनी डाली।

राष्ट्रीय राजधानी में ‘AAHAR – The International Food & Hospitality Fair’ के 40वें एडिशन के उद्घाटन समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के खाद्य और कृषि उत्पादों — जिसमें खेती की पैदावार और मछली पालन शामिल हैं, और एक्सपोर्ट सालाना लगभग 5 लाख करोड़ रुपये (55 अरब डॉलर से ज़्यादा) तक पहुँच गया है। इससे भारत दुनिया में कृषि उत्पादों का सातवां सबसे बड़ा एक्सपोर्टर बन गया है।

उन्होंने बताया कि पिछले 11 सालों में 2014 से 2025 तक भारत के कृषि और खाद्य एक्सपोर्ट में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है। प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का एक्सपोर्ट चार गुना बढ़ गया है, फलों और दालों का एक्सपोर्ट तीन गुना, प्रोसेस्ड सब्जियों का एक्सपोर्ट चार गुना, कोको का एक्सपोर्ट तीन गुना और अनाज का एक्सपोर्ट दो गुना हो गया है। इस दौरान अकेले चावल के एक्सपोर्ट में 62 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

पीयूष गोयल ने कहा कि ये उपलब्धियाँ भारत को कृषि और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के एक्सपोर्ट में दुनिया में टॉप पर पहुँचने के लिए प्रेरित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न के अनुरूप है कि भारत को “दुनिया की खाद्य टोकरी” बनना चाहिए।

पीयूष गोयल Piyush Goyal ने बताया कि पिछले साढ़े तीन सालों में भारत ने जो नौ मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) किए हैं, उनसे 38 विकसित और समृद्ध देशों तक पहुँच खुली है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए बाज़ार के विशाल अवसर उपलब्ध हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत के पास वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक तरजीही बाज़ार पहुँच है, जिससे एक आकर्षक निवेश स्थल के रूप में भारत की स्थिति मज़बूत होती है, और भारतीय व्यवसायों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में शामिल होने में मदद मिलती है।

पीयूष गोयल ने कहा कि FTAs ​​पर बातचीत करते समय सरकार ने घरेलू हितधारकों—विशेष रूप से किसानों, मछुआरों और MSMEs—के हितों की सावधानीपूर्वक रक्षा की है। उन्होंने कहा कि भारत ने डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा है, जहाँ विदेशी उत्पादकों को कोई रियायत नहीं दी गई है। इसी तरह आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) उत्पादों को भी शुल्क में कोई रियायत या बाज़ार तक पहुँच नहीं दी गई है।

उन्होंने कहा कि चावल, गेहूँ, मक्का, सोया मील और दालों की कई किस्मों जैसी प्रमुख कृषि वस्तुओं को व्यापार वार्ताओं में सुरक्षित रखा गया है। चीनी क्षेत्र में आम तौर पर कोई रियायत नहीं दी गई है, ताकि ऐसे आयात को रोका जा सके जिसका भारत के गन्ना किसानों और घरेलू उत्पादकों पर बुरा असर पड़ सकता है।

पीयूष गोयल ने कहा कि इन उपायों से यह सुनिश्चित होता है, कि भारत की घरेलू ताकतें सुरक्षित रहें, जबकि भारतीय उत्पादों के लिए नए वैश्विक अवसर भी पैदा हों। उन्होंने उद्योग और व्यापार जगत से जुड़े हितधारकों से आग्रह किया कि वे जमीनी स्तर पर इस बारे में जागरूकता फैलाएं कि भारत के FTA (मुक्त व्यापार समझौते) किस तरह राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापार के अवसरों का विस्तार करते हैं।

पीयूष गोयल ने किसानों और उद्यमियों को 1 लाख करोड़ रुपये के 'कृषि अवसंरचना कोष' (Agriculture Infrastructure Fund) का लाभ उठाने और खाद्य प्रसंस्करण तथा 'वैल्यू एडिशन' (मूल्य संवर्धन) पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया, इससे किसानों को उच्च-मूल्य वाले वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में छोटे उद्यम अब खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पहली बार 'आहार' (AAHAR) प्रदर्शनी में इटली एक 'साझेदार देश' के रूप में शामिल हुआ है। साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि यह प्रदर्शनी 13 मार्च को और शनिवार पूरे दिन आम जनता के लिए खुली रहेगी, इससे आगंतुकों—विशेष रूप से युवाओं—को भारत और दुनिया भर के खाद्य, पेय और आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) क्षेत्रों की ताकत और क्षमताओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।