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मानवीय भावनाओं को रोबोटिक दुनिया तक ले जाना कितना सही?

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मानवीय भावनाओं को रोबोटिक दुनिया तक ले जाना कितना सही?
02 Sep 2021
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आज का दौर पिछले दौर से बिल्कुल अलग और एकदम विपरीत है। कौन जानता था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुनिया को जिस तरह से हम हॉलीवुड की काल्पनिक फिल्मों में देखते थे वही कल्पना आज के समय की हक़ीक़त बनकर उभरेगी। वैज्ञानिक जगत इतना आगे बढ़ जायेगा किसी को नहीं पता था, पहले हम रोबोट को बनाने के लिए माथापच्ची में लगे हुए थे और अब हम रोबोट में भावनाओं का माध्यम डालने की होड़ में लगे हुए हैं। वैज्ञानिक जिस तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कारों और साधनों की बात करते थे, अब उनको और बेहतर करने में लगे हुए हैं। ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपनी बेहतरी से मानवीय भावनाओं को समझ कर कार्य करे जैसे एक वास्तविक कार चालक करता है कि कैसे सड़क पर वाहन चालान है जिससे दुर्घटना न हो या नाम मात्र हों। 

वहीँ अब विश्व के तमाम देशों की सेनाओं में भी यही होड़ लगी है कि कैसे रोबोट की सहायता से आर्मी का विस्तार किया जाए। परन्तु एक चिंता का विषय ये है कि रोबोट द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले हथियार से मानव जाति का हित होगा या अहित। आगे क्या होता है क्या नहीं ये तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या रोबोटिक दुनिया का भविष्य तय करेगा। 

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