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मानवीय भावनाओं को रोबोटिक दुनिया तक ले जाना कितना सही?

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मानवीय भावनाओं को रोबोटिक दुनिया तक ले जाना कितना सही?
21 Jan 2023
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Latest Updated on 21 January 2023

Xiaomi ने अपना पहला ह्यूमनॉइड रोबोट Humanoid Robot साइबरवन CyberOne जारी किया। साइबरवन में मानव जैसी क्षमताएं हैं, जिसमें मानवीय भावनाओं को समझने की क्षमता भी शामिल है। विज्ञान जगत के लोग इसे लेकर उत्साहित हैं। क्योंकि यह संचार और सहानुभूति जैसी चीजों को बहुत आसान बना सकता है। भविष्य में इस तकनीक का उपयोग कैसे किया जा सकता है, क्योंकि गलत तरीके से उपयोग किए जाने पर यह खतरनाक हो सकता है।

बहुत से लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस Artifical Intelligence के बारे में बात कर रहे हैं, और कुछ लोग सोचते हैं। कि यह मानव जाति Mankind के लिए खतरा हो सकता है। इसलिए रोबोट के बाज़ार में रिलीज़ होने के बाद हमें यकीन है, कि इसके बारे में बहुत सारे प्रश्न होंगे। यह रोबोट वास्तव में मानवीय भावनाओं को समझ सकता है। इसलिए कुछ लोग एक बार सोच सकते हैं, कि यह खतरनाक है।

साइबरवन की लंबाई 177 सेंटीमीटर और वजन 52 किलोग्राम है। इसकी बांह की लंबाई 168 सेमी है। यह 1.5 किलो तक का भार उठाने में भी सक्षम है। साइबरवन 3डी स्पेस को समझ सकता है। इसमें एआई-संचालित सिमेंटिक्स रिकॉग्निशन इंजन Semantics Recognition Engine के साथ-साथ वोकल इमोशन आइडेंटिफिकेशन इंजन Vocal Emotion Identification Engine भी है। जिसका अर्थ है, कि यह 85 प्रकार की पर्यावरणीय ध्वनियों Environmental Sounds और मानवीय भावनाओं Human Emotions के 45 वर्गीकरणों को पहचान सकता है।

Last Updated on 02 September 2021

आज का दौर पिछले दौर से बिल्कुल अलग और एकदम विपरीत है। कौन जानता था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुनिया को जिस तरह से हम हॉलीवुड की काल्पनिक फिल्मों में देखते थे वही कल्पना आज के समय की हक़ीक़त बनकर उभरेगी। वैज्ञानिक जगत इतना आगे बढ़ जायेगा किसी को नहीं पता था, पहले हम रोबोट को बनाने के लिए माथापच्ची में लगे हुए थे और अब हम रोबोट में भावनाओं का माध्यम डालने की होड़ में लगे हुए हैं। वैज्ञानिक जिस तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कारों और साधनों की बात करते थे, अब उनको और बेहतर करने में लगे हुए हैं। ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपनी बेहतरी से मानवीय भावनाओं को समझ कर कार्य करे जैसे एक वास्तविक कार चालक करता है कि कैसे सड़क पर वाहन चालान है जिससे दुर्घटना न हो या नाम मात्र हों। 

वहीँ अब विश्व के तमाम देशों की सेनाओं में भी यही होड़ लगी है कि कैसे रोबोट की सहायता से आर्मी का विस्तार किया जाए। परन्तु एक चिंता का विषय ये है कि रोबोट द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले हथियार से मानव जाति का हित होगा या अहित। आगे क्या होता है क्या नहीं ये तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या रोबोटिक दुनिया का भविष्य तय करेगा। 

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