बायोफार्मा स्टार्टअप्स के विकास पर सरकार का जोर, पीयूष गोयल ने सुझाए नए कदम
News Synopsis
भारत में जैव-प्रौद्योगिकी और दवा निर्माण से जुड़े उद्योगों के विकास के साथ बायोफार्मा स्टार्टअप्स की भूमिका भी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ये स्टार्टअप नई दवाओं, उपचारों, जैविक उत्पादों और स्वास्थ्य से जुड़ी तकनीकों के विकास में योगदान दे सकते हैं। इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने और भारत की वैश्विक पहचान मजबूत करने के लिए सरकार अब नीतिगत सुधारों, बेहतर वित्तीय सहायता और आधुनिक अनुसंधान सुविधाओं पर जोर दे रही है।
इसी दिशा में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल Union Minister of Commerce and Industry Piyush Goyal ने मंगलवार को भारत के बायोफार्मा स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने और देश की बायोइकोनॉमी के विकास को तेज करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आयोजित इस बैठक में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और बायोफार्मा स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं और उद्यमशीलता को बेहतर अवसर देना था, ताकि देश वैश्विक जैव-अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभा सके।
भारत की बायोइकोनॉमी को मजबूत बनाने के लिए उच्चस्तरीय बैठक (High-Level Roundtable to Strengthen India's Bioeconomy)
इस बैठक का शीर्षक ‘India’s Bioeconomy Opportunity: Role of Startups in Driving Innovation and Growth’ यानी ‘भारत की बायोइकोनॉमी के अवसर: नवाचार और विकास को आगे बढ़ाने में स्टार्टअप्स की भूमिका’ रखा गया था।
DPIIT, नीति आयोग और फ्रंटियर टेक हब की संयुक्त पहल (Joint Initiative by DPIIT, NITI Aayog and Frontier Tech Hub)
इस गोलमेज बैठक का आयोजन उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) ने नीति आयोग और नीति फ्रंटियर टेक हब के सहयोग से किया। बैठक नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में आयोजित हुई।
इसमें सरकार और उद्योग जगत से जुड़े कई प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बायोफार्मा क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप्स को भी अपने अनुभव और चुनौतियां साझा करने का अवसर मिला।
बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि भारत वैश्विक बायोइकोनॉमी में अपनी स्थिति कैसे मजबूत कर सकता है और स्टार्टअप्स को अनुसंधान से लेकर व्यावसायिक स्तर पर उत्पाद तैयार करने तक किस तरह बेहतर सहयोग दिया जा सकता है।
पीयूष गोयल ने वैज्ञानिक क्षमता और उद्यमशीलता का लाभ उठाने पर दिया जोर (Piyush Goyal Emphasises Scientific Capabilities and Entrepreneurship)
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत को अपनी वैज्ञानिक क्षमताओं और उद्यमशीलता की ताकत का पूरा इस्तेमाल करना चाहिए। इससे देश को वैश्विक बायोइकोनॉमी में अग्रणी स्थान हासिल करने में मदद मिल सकती है।
तेज नियामकीय मंजूरी और वित्तीय सहायता की जरूरत (Need for Faster Regulatory Approvals and Financial Support)
मंत्री ने बायोफार्मा स्टार्टअप्स के विकास के लिए कुछ प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की बात कही। इनमें नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया तेज करना, वित्तीय संसाधनों तक आसान पहुंच और साझा अनुसंधान सुविधाओं का विकास शामिल है।
बायोफार्मा क्षेत्र में किसी नए उत्पाद या दवा को बाजार तक पहुंचाने से पहले कई तरह की जांच और नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। यदि इन प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी होती है, तो स्टार्टअप्स की लागत बढ़ सकती है और उनके नवाचार को व्यावसायिक रूप देने में समय लग सकता है।
इसलिए बैठक में मंजूरी प्रक्रिया को अधिक सरल और समयबद्ध बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
उद्योग, शिक्षा जगत और सरकार के बीच सहयोग (Collaboration Among Industry, Academia and Government)
गोयल ने उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने की जरूरत भी बताई। उनके अनुसार, वैज्ञानिक शोध को उपयोगी उत्पादों में बदलने के लिए इन सभी पक्षों का मिलकर काम करना जरूरी है।
मंत्री ने बैठक में हुई चर्चाओं और सामने आई सिफारिशों पर तय समय-सीमा के भीतर कार्रवाई करने का भी आह्वान किया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैठक में दिए गए सुझाव केवल चर्चा तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
बायोफार्मा स्टार्टअप्स के लिए नियामकीय सुधारों पर चर्चा (Discussion on Regulatory Reforms for Biopharma Startups)
बैठक में बायोफार्मा स्टार्टअप्स के सामने आने वाली नियामकीय चुनौतियों को कम करने के उपायों पर विस्तार से विचार किया गया। प्रतिभागियों ने माना कि नई तकनीकों और उत्पादों के विकास को बढ़ावा देने के लिए मंजूरी की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना जरूरी है।
रेगुलेटरी सैंडबॉक्स और सिंगल विंडो क्लीयरेंस का प्रस्ताव (Proposal for Regulatory Sandbox and Single Window Clearance)
चर्चा में कई महत्वपूर्ण सुधारों पर ध्यान दिया गया:
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तेज मंजूरी प्रक्रिया: नए बायोफार्मा उत्पादों और तकनीकों से जुड़ी नियामकीय मंजूरी को समयबद्ध और सरल बनाने की जरूरत।
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रेगुलेटरी सैंडबॉक्स: स्टार्टअप्स को नियंत्रित परिस्थितियों में नए उत्पादों और तकनीकों का परीक्षण करने के लिए विशेष व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव।
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सिंगल विंडो क्लीयरेंस: अलग-अलग विभागों से मंजूरी लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एकीकृत व्यवस्था पर विचार।
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वैश्विक मानकों के अनुरूप नियम: भारत की नियामकीय व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ बेहतर तालमेल में लाने की आवश्यकता।
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पेटेंट आवेदन प्रक्रिया में सरलता: नए आविष्कारों और तकनीकों को बौद्धिक संपदा संरक्षण दिलाने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर।
इन सुधारों का उद्देश्य स्टार्टअप्स के लिए कारोबार और अनुसंधान से जुड़ी बाधाओं को कम करना है।
बायोफार्मा शक्ति की भूमिका पर भी विचार (Role of Biopharma SHAKTI)
प्रतिभागियों ने केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित बायोफार्मा शक्ति योजना की भूमिका पर भी चर्चा की। इस पहल को भारत के जैव-औषधि क्षेत्र को मजबूत बनाने के प्रयासों से जोड़ा गया।
बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि इस योजना के माध्यम से देश में बायोफार्मा उद्योग की क्षमताओं को कैसे बढ़ाया जा सकता है और स्टार्टअप्स को विकास के अधिक अवसर कैसे दिए जा सकते हैं।
साझा प्रयोगशालाओं और अनुसंधान सुविधाओं के विकास पर जोर (Focus on Shared Laboratories and Research Infrastructure)
बायोफार्मा स्टार्टअप्स के लिए आधुनिक प्रयोगशालाओं, परीक्षण केंद्रों और क्लिनिकल ट्रायल सुविधाओं की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, ऐसी सुविधाएं स्थापित करना छोटे स्टार्टअप्स के लिए महंगा हो सकता है।
परिचालन लागत कम करने में मददगार होंगी साझा सुविधाएं (Shared Facilities Can Reduce Operational Costs)
बैठक में साझा बुनियादी ढांचे के विकास को प्रमुख प्राथमिकता के रूप में सामने रखा गया। इसके तहत ऐसी प्रयोगशालाएं और परीक्षण सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया गया, जिनका इस्तेमाल एक से अधिक स्टार्टअप्स और अनुसंधान संस्थान कर सकें।
इससे छोटे उद्यमों को महंगे उपकरण और परीक्षण सुविधाएं खुद स्थापित करने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही, वे अपने संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए अनुसंधान और उत्पाद विकास पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
क्लिनिकल ट्रायल से जुड़ी सुविधाओं का विकास भी महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि नई दवाओं और उपचारों की प्रभावशीलता तथा सुरक्षा का मूल्यांकन करने में इनकी अहम भूमिका होती है।
नीति आयोग के विशेषज्ञों ने शोध और नवाचार को बढ़ावा देने की बात कही (NITI Aayog Experts Emphasise Research and Innovation)
बैठक में नीति आयोग से जुड़े विशेषज्ञों ने भी भारत के बायोफार्मा क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सुझाव दिए।
स्टार्टअप्स और उद्योग के बीच सहयोग जरूरी: देबजानी घोष (Collaboration Is Essential: Debjani Ghosh)
नीति आयोग की विशिष्ट फेलो देबजानी घोष ने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बायोइकोनॉमी विकसित करने के लिए स्टार्टअप्स, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और सरकार के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है।
उनके अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों की विशेषज्ञता को एक साथ लाकर नवाचार को गति दी जा सकती है। इससे नए विचारों को विकसित करने और उन्हें बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
वैज्ञानिक खोजों को व्यावसायिक उत्पादों में बदलने पर जोर: प्रोफेसर गोबर्धन दास (Turning Scientific Discoveries into Marketable Products: Professor Gobardhan Das)
नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर गोबर्धन दास ने अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खोजों को ऐसे उत्पादों में बदलना महत्वपूर्ण है, जिनका व्यावहारिक और व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा सके।
इसका अर्थ है कि केवल शोध करना पर्याप्त नहीं है। अनुसंधान के परिणामों को उपयोगी दवाओं, तकनीकों और उत्पादों में बदलने के लिए उद्योग और स्टार्टअप्स की भागीदारी भी जरूरी है।
स्वदेशी जीवन विज्ञान निर्माण और सरकारी सहायता को आसान बनाने पर चर्चा (Discussion on Domestic Life Sciences Manufacturing and Easier Government Support)
बैठक में भारत में जीवन विज्ञान से जुड़े उत्पादों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के उपायों पर भी विचार किया गया। इसका उद्देश्य देश की विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना और स्टार्टअप्स को जरूरी संसाधनों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है।
प्रयोगशाला उपकरणों और रसायनों की सीमा शुल्क प्रक्रिया सरल बनाने की जरूरत (Simplifying Customs Clearance for Laboratory Equipment and Reagents)
प्रतिभागियों ने प्रयोगशाला में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और रिएजेंट्स यानी परीक्षण तथा अनुसंधान में उपयोग किए जाने वाले रसायनों की सीमा शुल्क मंजूरी को तेज करने की जरूरत बताई।
इसके अलावा, सरकारी योजनाओं और नियामकीय सहायता तक स्टार्टअप्स की पहुंच आसान बनाने पर भी चर्चा हुई। कई बार जटिल आवेदन प्रक्रियाओं और अलग-अलग विभागों से संपर्क करने की जरूरत के कारण छोटे उद्यमों को सरकारी सहायता प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
इसलिए इन प्रक्रियाओं को सरल बनाने और कंपनियों को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता (Need for Stronger Coordination Among Ministries)
प्रतिभागियों ने विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत भी बताई। उनका मानना था कि नीतियों में एकरूपता और समय पर निर्णय लेने से बायोफार्मा क्षेत्र की चुनौतियों का तेजी से समाधान किया जा सकता है।
इस तरह का तालमेल स्टार्टअप्स के लिए नियामकीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने में मदद कर सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
भारत के बायोफार्मा स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए आयोजित यह बैठक देश की बढ़ती बायोइकोनॉमी को नई दिशा देने की कोशिश है। पीयूष गोयल ने वैज्ञानिक क्षमता, उद्यमशीलता, तेज नियामकीय मंजूरी, वित्तीय सहायता और साझा अनुसंधान सुविधाओं के महत्व पर जोर दिया।
वहीं, नीति आयोग के विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने अनुसंधान को व्यावसायिक उत्पादों में बदलने तथा उद्योग, शिक्षा जगत और सरकार के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई। Biopharma SHAKTI, नियामकीय सुधार और घरेलू जीवन विज्ञान निर्माण को बढ़ावा देने जैसे प्रयास भारत को वैश्विक बायोफार्मा क्षेत्र में मजबूत पहचान दिलाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इन सुझावों का वास्तविक प्रभाव उनके प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।


