भारत-यूरोपीय संघ FTA पर जोर, पीयूष गोयल ने जर्मनी के उद्योग जगत से की चर्चा

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भारत-यूरोपीय संघ FTA पर जोर, पीयूष गोयल ने जर्मनी के उद्योग जगत से की चर्चा
24 Oct 2026
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News Synopsis

भारत और जर्मनी के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 22 अक्टूबर को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन बैठकों में जर्मनी की आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्री कैथरीना राइश के साथ द्विपक्षीय चर्चा, जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (DGAP) में इंडिया सेंटर का संयुक्त उद्घाटन, भारत-जर्मनी व्यापार गोलमेज बैठक और बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में भागीदारी शामिल रही।

इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करना, उद्योगों के लिए सहयोग के नए अवसर तलाशना और व्यापार तथा निवेश को बढ़ावा देना था। चर्चाओं में प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया गया। इस समझौते से भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक गतिविधियों को विस्तार देने तथा निवेश के नए रास्ते खोलने की उम्मीद है।

पीयूष गोयल की जर्मनी यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब भारत विभिन्न देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी भूमिका बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। बर्लिन में हुई बैठकों में सरकार और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने व्यापार, तकनीक तथा औद्योगिक साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

भारत-जर्मनी वार्ता में औद्योगिक सहयोग और मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा। (India–Germany Talks Focus on Industrial Collaboration and Free Trade Agreement Opportunities)

पीयूष गोयल और कैथरीना राइश की द्विपक्षीय बैठक। (Bilateral Meeting Between Piyush Goyal and Katherina Reiche)

बर्लिन में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल Union Minister of Commerce and Industry Piyush Goyal ने जर्मनी की संघीय आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्री कैथरीना राइश के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इसमें दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग को और गहरा करने तथा व्यापार और निवेश की संभावनाओं का विस्तार करने पर चर्चा हुई। दोनों मंत्रियों ने इस बात पर विचार किया कि भारत और जर्मनी की औद्योगिक क्षमताओं का बेहतर उपयोग करके आर्थिक संबंधों को किस तरह मजबूत बनाया जा सकता है।

बैठक में प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। इस समझौते के माध्यम से भारतीय और यूरोपीय कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंचने, व्यापारिक गतिविधियां बढ़ाने और निवेश के अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके वास्तविक लाभ समझौते की शर्तों और उसे लागू करने की प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे।

बर्लिन में इंडिया सेंटर का संयुक्त उद्घाटन। (Joint Inauguration of the India Centre in Berlin)

पीयूष गोयल और कैथरीना राइश ने जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (DGAP) German Council on Foreign Relations (DGAP) के इंडिया सेंटर का संयुक्त रूप से उद्घाटन भी किया। भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस केंद्र का उद्देश्य भारत-जर्मनी संबंधों से जुड़े विषयों पर नीतिगत शोध को बढ़ावा देना और दोनों देशों के बीच संवाद को मजबूत करना है।

यह केंद्र भारत और जर्मनी के बीच आपसी समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके माध्यम से व्यापार, विदेश नीति, आर्थिक सहयोग और औद्योगिक विकास जैसे विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान करने के अवसर मिलेंगे। इससे दोनों देशों के नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को साझा मुद्दों पर चर्चा करने में मदद मिल सकती है।

व्यापार गोलमेज बैठक में नए अवसरों की तलाश। (Business Roundtable Explores New Trade and Investment Opportunities)

जर्मन कंपनियों के प्रमुखों के साथ आर्थिक संबंधों पर चर्चा। (Discussion on Economic Ties With German Business Leaders)

पीयूष गोयल और कैथरीना राइश ने DGAP तथा जर्मन व्यवसाय के एशिया-प्रशांत समिति (APA) के सहयोग से आयोजित भारत-जर्मनी व्यापार गोलमेज बैठक की संयुक्त अध्यक्षता की। इस बैठक में जर्मनी की कई कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रमुख कारोबारी प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक और औद्योगिक संबंधों को मजबूत करने के लिए नए रास्ते तलाशना था।

बैठक के दौरान कारोबारियों ने व्यापार बढ़ाने, निवेश की संभावनाओं का पता लगाने और उद्योगों के बीच सहयोग को आगे ले जाने से जुड़े विषयों पर विचार किया। भारत और जर्मनी के उद्योगों की जरूरतों तथा क्षमताओं को देखते हुए ऐसी चर्चाएं दोनों देशों की कंपनियों के लिए नए व्यावसायिक अवसर तैयार करने में मदद कर सकती हैं।

मुक्त व्यापार समझौते को व्यावहारिक अवसरों में बदलने पर जोर। (Focus on Turning the Free Trade Agreement Into Practical Opportunities)

अपने मुख्य संबोधनों में पीयूष गोयल ने आर्थिक विकास को तेज करने और व्यापार के एक नए दौर की शुरुआत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, कैथरीना राइश ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को औद्योगिक क्षेत्र में व्यावहारिक रूप देने पर ध्यान केंद्रित किया।

बैठक के बाद हुई चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को केवल नीतिगत चर्चा तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे व्यापार और निवेश के ठोस अवसरों में बदला जाए। इसके लिए कंपनियों के बीच संपर्क बढ़ाना, कारोबारी जरूरतों को समझना और उद्योगों के लिए सहयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान करना महत्वपूर्ण हो सकता है।

यदि यह समझौता आगे बढ़ता है, तो इससे भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंधों को विस्तार देने की संभावनाएं बन सकती हैं। साथ ही, दोनों देशों के उद्योगों को एक-दूसरे के बाजारों और क्षमताओं को समझने का अवसर मिल सकता है।

बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में भरोसे और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं पर जोर। (Goyal Highlights Trust and Resilient Supply Chains at Berlin Global Dialogue)

अंतरराष्ट्रीय साझेदारी में भरोसे की अहम भूमिका। (The Important Role of Trust in International Partnerships)

पीयूष गोयल ने बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में भी हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने “नया दौर, नए गठबंधन: क्या कोई तीसरा रास्ता है?” (New Era, New Alliances: The Third Path?) विषय पर आयोजित परिचर्चा में भाग लिया। इस सत्र में जर्मन चांसलर के निवेश संबंधी व्यक्तिगत प्रतिनिधि मार्टिन ब्लेसिंग, सिंगापुर के मानव संसाधन मंत्री और ऊर्जा तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मामलों के प्रभारी मंत्री डॉ. टैन सी लेंग और मार्सेगाग्लिया स्टील की अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी एम्मा मार्सेगाग्लिया शामिल थीं। परिचर्चा का संचालन प्रोफेसर डॉ. लार्स-हेंड्रिक रॉलर ने किया।

चर्चा के दौरान गोयल ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए आपसी भरोसे, एक-दूसरे की आर्थिक क्षमताओं के पूरक उपयोग और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व को रेखांकित किया। उनके अनुसार, देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए यह जरूरी है कि वे एक-दूसरे की ताकत को समझें और साझा हितों के आधार पर काम करें।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने की जरूरत। (The Need to Strengthen Global Supply Chains)

आपूर्ति श्रृंखलाएं किसी उत्पाद के निर्माण से लेकर उसके बाजार तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया से जुड़ी होती हैं। इनमें कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन, परिवहन और वितरण जैसे कई चरण शामिल होते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन प्रक्रियाओं में व्यवधान आने से कारोबार और उद्योग प्रभावित हो सकते हैं।

ऐसे में भरोसेमंद साझेदारों के साथ सहयोग और विभिन्न देशों की औद्योगिक क्षमताओं का बेहतर उपयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में हुई चर्चा ने इस बात को सामने रखा कि भारत और जर्मनी जैसे देश व्यापार, तकनीक और औद्योगिक सहयोग के जरिए अधिक मजबूत आर्थिक संबंध विकसित कर सकते हैं।

उद्योग जगत के प्रमुखों से मुलाकात, कारोबारी सहयोग पर चर्चा। (Meetings With Industry Leaders to Explore Business Cooperation)

दवा, निर्माण सामग्री और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के साथ बैठकें। (Meetings With Companies in Pharmaceuticals, Building Materials and Healthcare)

बर्लिन यात्रा के दौरान पीयूष गोयल ने कई प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें भी कीं। इनमें बायर एजी के प्रबंधन बोर्ड के सदस्य और उसके दवा कारोबार विभाग के अध्यक्ष स्टीफन ओएलरिख, नॉफ ग्रुप के प्रबंध साझेदार मुरात अकील्दिज और फ्रेसेनियस एसई एंड कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल सेन शामिल थे।

इन बैठकों में कारोबार और निवेश के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। उद्देश्य यह पता लगाना था कि भारतीय और जर्मन कंपनियां अपने व्यावसायिक संबंधों को किस तरह आगे बढ़ा सकती हैं। ऐसी बातचीत से कंपनियों को एक-दूसरे के बाजारों, व्यावसायिक जरूरतों और संभावित साझेदारी के क्षेत्रों को समझने में मदद मिल सकती है।

भारत और जर्मनी के बीच औद्योगिक संबंधों को आगे बढ़ाने में निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। कंपनियों के बीच संवाद बढ़ने से नए निवेश, तकनीकी सहयोग और व्यापारिक साझेदारी के अवसर तलाशे जा सकते हैं। हालांकि, इन बैठकों के बाद किसी विशेष निवेश या समझौते की घोषणा की जानकारी जारी प्रेस विज्ञप्ति में नहीं दी गई है।

भारतीय कारोबारियों और स्टार्टअप्स का प्रतिनिधिमंडल भी यात्रा में शामिल। (Delegation of Indian Businesses and Startups Joins the Visit)

पीयूष गोयल की जर्मनी और नीदरलैंड यात्रा में लगभग 100 भारतीय कारोबारियों और स्टार्टअप्स का प्रतिनिधिमंडल भी उनके साथ है। इस प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कारोबारी समुदाय से जुड़ने और संभावित साझेदारियों की तलाश करने का अवसर दे सकती है।

बर्लिन में हुई उच्चस्तरीय बैठकें भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं। इन प्रयासों में व्यापार, निवेश, तकनीक और औद्योगिक सहयोग को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

भारत-जर्मनी आर्थिक संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये बैठकें? (Why Are These Meetings Important for India–Germany Economic Relations?)

भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए सरकारी स्तर पर बातचीत के साथ-साथ कंपनियों और उद्योग संगठनों की भागीदारी भी जरूरी है। बर्लिन में हुई बैठकों में इन दोनों पहलुओं पर ध्यान दिया गया। एक ओर मंत्रियों ने व्यापार और औद्योगिक सहयोग के अवसरों पर चर्चा की, वहीं दूसरी ओर कारोबारी प्रतिनिधियों ने निवेश और साझेदारी की संभावनाओं को समझने का प्रयास किया।

प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। इस समझौते से जुड़े अवसरों को वास्तविक व्यापारिक लाभ में बदलने के लिए नीतिगत स्पष्टता, उद्योगों के बीच सहयोग और बाजार की जरूरतों को समझना जरूरी होगा।

कुल मिलाकर, पीयूष गोयल की बर्लिन यात्रा भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को आर्थिक स्तर पर आगे बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाती है। आने वाले समय में इन चर्चाओं का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रस्तावित समझौते, कारोबारी बातचीत और औद्योगिक सहयोग कितनी ठोस साझेदारियों में बदलते हैं।