एथेनॉल ब्लेंडिंग से पेट्रोल की कीमत ₹125 प्रति लीटर तक जाने से बची, सरकार का दावा

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एथेनॉल ब्लेंडिंग से पेट्रोल की कीमत ₹125 प्रति लीटर तक जाने से बची, सरकार का दावा
01 Aug 2026
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News Synopsis

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) ने भारत के एथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) कार्यक्रम का जोरदार बचाव करते हुए कहा है कि इस पहल से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों का असर काफी हद तक कम हुआ और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली।

मंत्रालय के अनुसार, E20 पेट्रोल, जिसमें 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है, ने हाल के वर्षों में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के दौरान पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण से न केवल कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटी, बल्कि आम उपभोक्ताओं को ईंधन पर होने वाले खर्च में भी अच्छी-खासी बचत हुई।

सरकार का दावा- पेट्रोल ₹125 प्रति लीटर तक पहुंच सकता था (Petrol Could Have Reached ₹125 Per Litre)

सरकार का सबसे बड़ा दावा यह है कि यदि एथेनॉल ब्लेंडिंग नहीं होती, तो पेट्रोल की कीमतें कहीं अधिक बढ़ जातीं।

पेट्रोलियम मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) के मुताबिक, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तब यदि तेल विपणन कंपनियां केवल पारंपरिक पेट्रोल पर निर्भर रहतीं, तो दिल्ली में पेट्रोल की खुदरा कीमत लगभग ₹125 प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी।

लेकिन E20 कार्यक्रम के तहत ईंधन में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाए जाने के कारण उपभोक्ताओं को उसी समय ₹94.77 प्रति लीटर की दर से पेट्रोल उपलब्ध कराया गया।

मंत्रालय का अनुमान है कि वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान एथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण उपभोक्ताओं पर लगभग ₹30 प्रति लीटर का अतिरिक्त बोझ पड़ने से बच गया।

एथेनॉल ब्लेंडिंग से ईंधन की लागत कैसे कम होती है? (How Ethanol Blending Helps Reduce Fuel Costs)

एथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जिसे मुख्य रूप से गन्ना, मक्का (मकई) और अन्य स्वीकृत कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।

एथेनॉल मिश्रण के प्रमुख लाभ (Major Benefits of Ethanol Blending)

  • आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम होती है।

  • विदेशी मुद्रा की बचत होती है।

  • तेल कंपनियों की खरीद लागत घटती है।

  • वैश्विक तेल कीमतों का असर कम पड़ता है।

  • किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है।

  • नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को बढ़ावा मिलता है।

सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडिंग को भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।

खाद्यान्न के दुरुपयोग के आरोपों को सरकार ने किया खारिज (Government Rejects Foodgrain Diversion Allegations)

एथेनॉल उत्पादन को लेकर उठ रहे खाद्यान्न के उपयोग संबंधी सवालों पर भी पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपनी स्थिति स्पष्ट की।

कुछ आलोचकों का आरोप था कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और कल्याणकारी योजनाओं के लिए निर्धारित खाद्यान्न को एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है।

सरकार ने क्या कहा? (Government's Clarification)

  • भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा सब्सिडी पर उपलब्ध कराया गया चावल एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल नहीं किया जा रहा।

  • खाद्य सुरक्षा योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

  • एथेनॉल उत्पादन केवल स्वीकृत स्रोतों से ही किया जा रहा है।

सरकार ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है।

वैश्विक तेल संकट के दौरान कैसे नियंत्रित रहीं कीमतें? (Fuel Prices During Global Crude Oil Volatility)

मंत्रालय ने पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के दौरान अपनाई गई ईंधन मूल्य नीति का भी उल्लेख किया।

सरकार के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए क्षेत्रीय तनाव के बाद लगभग 75 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव जारी था।

इसके बाद मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई।

सरकार का कहना है कि यदि एथेनॉल ब्लेंडिंग नहीं होती, तो कीमतों में इससे कहीं अधिक वृद्धि करनी पड़ सकती थी।

E20 और प्रीमियम पेट्रोल की मौजूदा कीमतें (Current Prices of E20 and Premium Petrol)

फिलहाल दिल्ली में 91 ऑक्टेन वाला E20 पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर की कीमत पर उपलब्ध है।

वहीं, 100 ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल की कीमत ₹169 प्रति लीटर है।

सरकार देशभर में E20 पेट्रोल की उपलब्धता लगातार बढ़ा रही है।

नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल को लेकर दूर की शंकाएं (Nitin Gadkari Addresses Concerns About E20 Fuel)

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में E20 पेट्रोल को लेकर उठाए गए कई सवालों का जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि E20 पेट्रोल से वाहन के इंजन को कोई नुकसान नहीं होता।

हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ वाहनों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से माइलेज में हल्की कमी आ सकती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुराने वाहनों में केवल कुछ छोटे पुर्जों को बदलने की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन इंजन में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होती।

अध्ययन में सामने आई माइलेज में हल्की कमी (Study Finds Slight Reduction in Mileage)

लोकसभा में दिए गए लिखित उत्तर में नितिन गडकरी ने एक संयुक्त अध्ययन का उल्लेख किया, जिसे निम्न संस्थाओं ने मिलकर तैयार किया—

अध्ययन करने वाली संस्थाएं (Organizations Conducting the Study)

अध्ययन के अनुसार, E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले वाहनों में 2% से 6% तक माइलेज कम हो सकता है।

यह कमी वाहन की उम्र, इंजन तकनीक और ड्राइविंग परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

E20 पेट्रोल के पर्यावरण और प्रदर्शन संबंधी फायदे (E20 Petrol Offers Performance and Environmental Benefits)

सरकार का कहना है कि माइलेज में मामूली कमी के बावजूद E20 पेट्रोल के कई बड़े फायदे हैं।

बेहतर वाहन प्रदर्शन (Improved Vehicle Performance)

अध्ययन के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण से कई परिस्थितियों में—

  • इंजन की प्रतिक्रिया बेहतर होती है।

  • एक्सेलरेशन में सुधार होता है।

  • ड्राइविंग अनुभव बेहतर बनता है।

कार्बन उत्सर्जन में कमी (Lower Carbon Emissions)

E20 पेट्रोल का सबसे बड़ा पर्यावरणीय लाभ यह है कि इससे लगभग 30 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन कम हो सकता है।

सरकार का मानना है कि यह भारत के जलवायु परिवर्तन और सतत विकास (Sustainability) लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पुराने वाहनों में कुछ पुर्जे बदलने पड़ सकते हैं (Odler Vehicles May Need Minor Component Replacement)

नितिन गडकरी ने बताया कि 2016 से पहले बने BS-III वाहनों में E20 पेट्रोल का नियमित उपयोग करने पर कुछ रबर होज़, सील और गैस्केट जैसे छोटे पुर्जे बदलने पड़ सकते हैं।

इन पुर्जों को अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए मूल रूप से डिजाइन नहीं किया गया था।

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल सामान्य रखरखाव (Maintenance) का हिस्सा है और E20 पेट्रोल से इंजन को कोई नुकसान नहीं होता।

BS-VI मानकों वाले नए वाहनों में ऐसी समस्याएं काफी कम देखने को मिलती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

सरकार का मानना है कि भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से लाभदायक साबित हुआ है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, यदि पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण नहीं किया जाता, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के दौरान उपभोक्ताओं को लगभग ₹125 प्रति लीटर तक पेट्रोल खरीदना पड़ सकता था।

हालांकि विभिन्न अध्ययनों में E20 पेट्रोल के उपयोग से 2% से 6% तक माइलेज कम होने की बात सामने आई है, लेकिन सरकार का कहना है कि कम ईंधन लागत, बेहतर इंजन प्रदर्शन, लगभग 30% कम कार्बन उत्सर्जन, किसानों को लाभ और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता में कमी जैसे फायदे इन छोटी कमियों की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ईंधन नीति में एथेनॉल ब्लेंडिंग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है।