1 जनवरी 2027 से बदलेंगे ई-कॉमर्स नियम, ऑनलाइन ग्राहकों को मिलेगा अधिक संरक्षण
News Synopsis
भारत सरकार ने तेजी से बढ़ते ऑनलाइन खरीदारी बाजार में उपभोक्ताओं के हितों को और मजबूत करने के लिए ई-कॉमर्स से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 में संशोधन करते हुए नए प्रावधान जोड़े हैं। इन बदलावों का उद्देश्य डिजिटल बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना, ग्राहकों की शिकायतों के समाधान को बेहतर बनाना और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपनाई जाने वाली ऐसी प्रक्रियाओं पर रोक लगाना है, जो उपभोक्ताओं को भ्रमित या प्रभावित कर सकती हैं।
उपभोक्ता मामलों के विभाग Department of Consumer Affairs ने उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। इनमें उपभोक्ता शिकायतों, ऑनलाइन खोज परिणामों, प्रायोजित सूची, कीमतों में कटौती, डार्क पैटर्न, विक्रेताओं की जानकारी और उपभोक्ता डेटा के इस्तेमाल से जुड़े कई नए प्रावधान शामिल हैं।
नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। सरकार का कहना है कि इन बदलावों के जरिए उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने के साथ-साथ कारोबार के लिए आसान और निष्पक्ष वातावरण बनाए रखने का प्रयास किया गया है।
ई-कॉमर्स शिकायतों की बड़ी संख्या ने बढ़ाई चिंता High Volume of E-Commerce Complaints Raises Concerns
ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन के साथ ई-कॉमर्स से जुड़ी शिकायतों की संख्या भी लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन यानी NCH को वर्ष 2025 में कुल 17,71,622 शिकायतें मिलीं। इनमें से 5,11,196 शिकायतें, यानी करीब 29 प्रतिशत, ई-कॉमर्स क्षेत्र से संबंधित थीं।
NCH से जुड़ना होगा जरूरी E-Commerce Entities Must Integrate with NCH
नए नियमों के तहत प्रत्येक ई-कॉमर्स कंपनी को राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की कन्वर्जेंस प्रक्रिया में भागीदार बनना होगा। इससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और राष्ट्रीय उपभोक्ता शिकायत निवारण व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होने की उम्मीद है।
इस व्यवस्था से ग्राहकों के लिए अपनी शिकायत दर्ज कराना और उसका समाधान प्राप्त करना आसान हो सकता है। साथ ही, ई-कॉमर्स कंपनियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।
ऑनलाइन खोज परिणामों में बढ़ेगी पारदर्शिता Greater Transparency in Online Search Results
नए नियमों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखाई देने वाले खोज परिणामों को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। ई-कॉमर्स कंपनियां ऐसे तरीके से खोज परिणामों में बदलाव नहीं कर सकेंगी, जिससे ग्राहक गुमराह हों या उनकी खोज से संबंधित महत्वपूर्ण परिणाम पीछे चले जाएं।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ता जब किसी उत्पाद या सेवा की ऑनलाइन तलाश करें तो उन्हें अधिक प्रासंगिक और भरोसेमंद परिणाम मिलें।
प्रायोजित उत्पादों की पहचान स्पष्ट होगी Sponsored Listings Must Be Clearly Identified
कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कंपनियां या विक्रेता भुगतान करके अपने उत्पादों को प्रमुख स्थान दिलाते हैं। नए नियमों के तहत ऐसी प्रायोजित सूची को स्पष्ट और प्रमुख तरीके से दिखाना होगा।
इससे ग्राहक यह समझ सकेंगे कि कौन-सा उत्पाद सामान्य खोज परिणाम के आधार पर दिखाई दे रहा है और कौन-सा भुगतान किए गए प्रचार का हिस्सा है। इससे ऑनलाइन खरीदारी के दौरान उपभोक्ताओं को अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
छूट और कीमतों को लेकर नया नियम New Rules for Discounts and Price Reductions
ऑनलाइन खरीदारी में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अक्सर कीमतों में भारी कटौती या विशेष छूट का प्रचार किया जाता है। नए नियमों में ऐसी कीमतों को लेकर भी अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है।
यदि किसी वस्तु या सेवा की कीमत कम करके दिखाई जाती है, तो ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को नई कीमत के साथ पुरानी कीमत भी दिखानी होगी।
यह पुरानी कीमत उस वस्तु या सेवा की वह सबसे कम कीमत होगी, जिस पर उसे छूट की घोषणा से पहले के 30 दिनों के दौरान पेश किया गया था। इससे ग्राहकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि दिखाई जा रही छूट वास्तव में कितनी है।
डार्क पैटर्न पर सख्ती Stronger Safeguards Against Dark Patterns
ई-कॉमर्स नियमों में डार्क पैटर्न से जुड़े प्रावधानों को भी मजबूत किया गया है। डार्क पैटर्न ऐसे ऑनलाइन डिजाइन या तरीके होते हैं, जिनका इस्तेमाल उपभोक्ताओं के फैसले को प्रभावित करने या उन्हें ऐसी कार्रवाई के लिए प्रेरित करने में किया जाता है, जिसे वे सामान्य परिस्थितियों में शायद नहीं चुनते।
सालाना स्व-मूल्यांकन जरूरी Annual Self-Audit Will Be Required
ई-कॉमर्स कंपनियों को डार्क पैटर्न की रोकथाम और नियमन के लिए 2023 में जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। इसके साथ ही उन्हें हर वर्ष अपना स्व-मूल्यांकन यानी सेल्फ-ऑडिट करना होगा।
कंपनियों को नियमों के अनुपालन का प्रमाणपत्र भी प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। इससे उपभोक्ताओं को यह जानने में मदद मिलेगी कि संबंधित प्लेटफॉर्म ने डार्क पैटर्न से जुड़े नियमों के पालन की समीक्षा की है।
शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया होगी अधिक पारदर्शी Consumer Grievance Process to Become More Transparent
नए नियमों में शिकायत निवारण प्रक्रिया को लेकर भी बदलाव किए गए हैं। ई-कॉमर्स कंपनी के शिकायत अधिकारी द्वारा दर्ज की गई शिकायत की एक प्रति शिकायतकर्ता को उपलब्ध करानी होगी।
इस प्रावधान से ग्राहकों को यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि उनकी शिकायत किस रूप में दर्ज की गई है और उस पर कंपनी की ओर से क्या कार्रवाई की जा रही है। इससे शिकायत निवारण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ सकती है।
खरीदारी से पहले मिलेगी अधिक महत्वपूर्ण जानकारी Consumers to Get More Information Before Purchase
बाजार में काम करने वाले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को उत्पादों और सेवाओं के बारे में उपभोक्ताओं को महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
इसमें उत्पाद की बेस्ट-बिफोर या यूज-बिफोर तारीख, वापसी और धनवापसी की नीति, वारंटी की जानकारी, डिलीवरी से जुड़ी जानकारी और भुगतान की शर्तें शामिल होंगी।
इसका उद्देश्य यह है कि ग्राहक खरीदारी करने से पहले उत्पाद या सेवा से संबंधित जरूरी शर्तों को समझ सकें और अधिक जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें।
उपभोक्ता जानकारी के इस्तेमाल पर भी नियंत्रण Restrictions on the Use of Consumer Information
नए नियम उपभोक्ताओं की जानकारी के इस्तेमाल को लेकर भी महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान करते हैं। मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म निर्धारित उद्देश्यों के लिए उपभोक्ता की जानकारी का इस्तेमाल उसकी स्पष्ट और सकारात्मक सहमति के बिना नहीं कर सकेंगे।
यह प्रावधान डिजिटल बाजार में उपभोक्ता जानकारी के जिम्मेदार इस्तेमाल और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अतिरिक्त और असंबंधित शुल्क पर रोक Restrictions on Unrelated Bundled Fees
मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स कंपनियों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से सीधे संबंधित न होने वाली सेवाओं के लिए ग्राहकों पर बंडल शुल्क लगाने से भी रोका गया है। हालांकि, निर्धारित अपवाद के तहत वफादारी या सदस्यता कार्यक्रमों से जुड़े शुल्क की अनुमति होगी।
इससे ग्राहकों को खरीदारी के दौरान लगने वाले अतिरिक्त शुल्क के बारे में अधिक स्पष्टता मिल सकेगी।
आयातित उत्पादों की जानकारी देना जरूरी Importer and Country-of-Origin Details to Be Disclosed
विदेश से आयात किए गए उत्पादों को लेकर भी नए नियमों में पारदर्शिता बढ़ाई गई है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को ऐसे उत्पादों के मामले में आयातक की जानकारी और उत्पाद के मूल देश का विवरण उपलब्ध कराना होगा।
इससे ग्राहक यह जान सकेंगे कि जिस वस्तु को वे ऑनलाइन खरीद रहे हैं, वह किस देश से संबंधित है और उसे भारत में कौन-सा आयातक ला रहा है।
उपभोक्ता संरक्षण और कारोबार के बीच संतुलन Balancing Consumer Protection with Ease of Doing Business
उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत लागू किया गया था। इसका उद्देश्य तेजी से विकसित हो रहे ई-कॉमर्स क्षेत्र में उपभोक्ताओं को अनुचित व्यापारिक गतिविधियों से सुरक्षा देना था।
अब डिजिटल कारोबार के बदलते स्वरूप और ऑनलाइन खरीदारी की नई चुनौतियों को देखते हुए नियमों में संशोधन किया गया है। सरकार का उद्देश्य केवल कंपनियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां डालना नहीं, बल्कि ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए उनकी जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट करना और डिजिटल बाजार में कारोबार के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना भी है।
1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए नियम New Rules to Come Into Force from January 1, 2027
उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियम, 2026 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इनका प्रभाव ऑनलाइन खरीदारी करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के साथ-साथ ई-कॉमर्स कंपनियों, विक्रेताओं और डिजिटल बाजार से जुड़े अन्य पक्षों पर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, नए नियमों का जोर पारदर्शिता, जवाबदेही, उपभोक्ता जानकारी, शिकायत निवारण और निष्पक्ष ऑनलाइन व्यापार पर है। ई-कॉमर्स क्षेत्र के लगातार विस्तार के बीच यह बदलाव उपभोक्ताओं को अधिक जानकारी के साथ खरीदारी का निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं। वहीं, कंपनियों के लिए भी स्पष्ट नियम डिजिटल बाजार में भरोसा बढ़ाने और लंबे समय में अधिक जिम्मेदार कारोबार को बढ़ावा देने का आधार बन सकते हैं।


