डीओआरडी-पीएफआरडीए MoU: पेंशन सखियों के जरिए ग्रामीण भारत में बढ़ेगी पेंशन की पहुंच

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डीओआरडी-पीएफआरडीए MoU: पेंशन सखियों के जरिए ग्रामीण भारत में बढ़ेगी पेंशन की पहुंच
15 Sep 2026
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News Synopsis

ग्रामीण भारत में पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग (Department of Rural Development - DoRD) और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। दोनों संस्थाओं ने एक समझौता ज्ञापन यानी Memorandum of Understanding (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेंशन को लेकर जागरूकता बढ़ाना, अधिक लोगों को पेंशन योजनाओं से जोड़ना और सेवानिवृत्ति से जुड़ी वित्तीय सहायता तक उनकी पहुंच आसान बनाना है।

इस साझेदारी के तहत ग्रामीण समुदायों में पहले से मौजूद नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा, ताकि उन परिवारों तक भी पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की जानकारी पहुंचाई जा सके, जो अब तक औपचारिक वित्तीय सेवाओं से पर्याप्त रूप से नहीं जुड़ पाए हैं। इस पूरी पहल में ‘Pension Sakhis’ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

ये सामुदायिक स्तर पर काम करने वाली प्रतिनिधि ग्रामीण लोगों को पेंशन योजनाओं की जानकारी देने के साथ नामांकन की प्रक्रिया में भी सहायता करेंगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में पेंशन जागरूकता बढ़ाने पर जोर (Focus on Pension Awareness in Rural Areas)

ग्रामीण विकास विभाग Department of Rural Development - DoRD और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) के बीच हुई यह साझेदारी खासतौर पर उन ग्रामीण लोगों तक पेंशन की जानकारी पहुंचाने पर केंद्रित है, जिनकी औपचारिक वित्तीय और सेवानिवृत्ति योजना सेवाओं तक पहुंच सीमित है।

ग्रामीण परिवारों को पेंशन योजनाओं की जानकारी मिलेगी (Rural Households to Receive Information on Pension Schemes)

इस पहल के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को उपलब्ध पेंशन उत्पादों और योजनाओं के बारे में समझाया जाएगा। इसके साथ ही पात्र लोगों को नामांकन प्रक्रिया पूरी करने में सहायता दी जाएगी।

कार्यक्रम में Self Help Group (SHG) यानी स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों, ग्रामीण महिलाओं, Lakhpati Didis और अन्य ऐसे वर्गों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से बाहर रह सकते हैं।

इस पहल का व्यापक उद्देश्य पेंशन सेवाओं को लोगों के करीब लाना है, ताकि ग्रामीण परिवारों को जानकारी और सहायता के लिए दूर स्थित वित्तीय संस्थानों पर पूरी तरह निर्भर न रहना पड़े।

Pension Sakhis घर-घर पहुंचाएंगी पेंशन की जानकारी (Pension Sakhis to Provide Doorstep Pension Support)

इस MoU का एक प्रमुख हिस्सा Pension Sakhis का नेटवर्क तैयार करना और उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय करना है। ये सामुदायिक प्रतिनिधि लोगों को पेंशन योजनाओं को समझने में मदद करेंगी और पात्र लोगों को नामांकन तथा उससे जुड़ी अन्य प्रक्रियाओं के बारे में मार्गदर्शन देंगी।

DAY-NRLM के मौजूदा नेटवर्क का होगा इस्तेमाल (Existing DAY-NRLM Network to Be Leveraged)

इस कार्यक्रम को Deendayal Antyodaya Yojana-National Rural Livelihoods Mission (DAY-NRLM) के तहत विकसित सामुदायिक संस्थाओं और नेटवर्क से मजबूती मिलेगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से काम कर रहीं Banking Correspondent (BC) Sakhis और अन्य प्रशिक्षित सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों को भी इस पहल में सहयोग देने के लिए जोड़ा जा सकता है।

दूरदराज के गांवों में पहुंच आसान बनाने की कोशिश (Effort to Improve Access in Remote Villages)

कई ग्रामीण इलाकों में वित्तीय सेवाओं की जानकारी और संस्थानों तक भौगोलिक पहुंच अब भी एक चुनौती है। ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर मौजूद Pension Sakhis लोगों और औपचारिक वित्तीय व्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती हैं।

उनकी मदद से लोगों को पेंशन विकल्पों की जानकारी अपने ही गांव या आसपास के क्षेत्र में मिल सकेगी। इससे दूरी, जानकारी की कमी और औपचारिक प्रक्रियाओं को लेकर झिझक जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

DAY-NRLM नेटवर्क से बढ़ेगा पेंशन का प्रचार-प्रसार (DAY-NRLM Network to Strengthen Pension Outreach)

सरकार और PFRDA ग्रामीण क्षेत्रों में पेंशन सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए DAY-NRLM के व्यापक नेटवर्क का उपयोग करेंगे। स्वयं सहायता समूह और उनके सदस्य कई गांवों में पहले से सामुदायिक स्तर पर सक्रिय हैं।

SHG सदस्यों के जरिए ग्रामीण परिवारों तक पहुंच (Reaching Rural Households Through SHG Members)

SHG नेटवर्क का उपयोग करने से पेंशन और सेवानिवृत्ति योजना से जुड़ी जानकारी अधिक लोगों तक आसानी से पहुंचाई जा सकती है। Pension Sakhis लोगों को अलग-अलग पेंशन विकल्प समझाने, नामांकन से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने और संबंधित सहायता प्राप्त करने में मदद करेंगी।

यह तरीका उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, जो नियमित रूप से बैंक या अन्य औपचारिक वित्तीय संस्थानों से संपर्क नहीं करते हैं।

डिजिटल व्यवस्था से Pension Sakhis के काम की निगरानी (Digital Systems to Monitor Pension Sakhis)

पेंशन कवरेज बढ़ाने की इस पहल में डिजिटल तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य कार्यक्रम की प्रगति, जागरूकता गतिविधियों और नामांकन की स्थिति पर बेहतर नजर रखना है।

डिजिटल डैशबोर्ड और मोबाइल प्लेटफॉर्म का उपयोग (Use of Digital Dashboards and Mobile Platforms)

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, डिजिटल डैशबोर्ड के साथ मोबाइल और वेब आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए जागरूकता अभियान, नामांकन और अन्य गतिविधियों की निगरानी की जाएगी।

इसके अलावा, Central Recordkeeping Agencies के माध्यम से Unique Identifier आधारित ट्रैकिंग व्यवस्था का इस्तेमाल पेंशन से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाएगा।

योजना की प्रगति को मापना होगा आसान (Tracking Programme Progress)

डिजिटल निगरानी व्यवस्था से अधिकारियों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि Pension Sakhis के माध्यम से कितने लोगों तक जानकारी पहुंच रही है, कितने लोग पेंशन योजनाओं में शामिल हो रहे हैं और किन क्षेत्रों में अभी अधिक प्रयास की जरूरत है।

ग्रामीण सामाजिक सुरक्षा को समावेशी विकास से जोड़ना (Linking Rural Social Security with Inclusive Growth)

ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव Rohit Kansal ने सामाजिक सुरक्षा को समावेशी विकास के व्यापक लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।

आर्थिक जोखिम से निपटने में सामाजिक सुरक्षा की भूमिका (Role of Social Security in Managing Financial Risks)

सामाजिक सुरक्षा ग्रामीण परिवारों को भविष्य की आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने में मदद कर सकती है। खासकर SHG से जुड़े परिवारों के लिए पेंशन जैसी व्यवस्था लंबे समय में आर्थिक मजबूती और वित्तीय सुरक्षा बढ़ाने में सहायक हो सकती है।

पेंशन तक बेहतर पहुंच से ग्रामीण परिवारों को अपने भविष्य की वित्तीय जरूरतों के लिए पहले से योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

PFRDA ने सेवानिवृत्ति योजना की जरूरत बताई (PFRDA Highlights the Need for Retirement Planning)

PFRDA की Whole Time Member (Economics) Mamta Shankar ने बढ़ती जीवन प्रत्याशा और बदलती जनसांख्यिकीय परिस्थितियों के बीच सेवानिवृत्ति योजना के महत्व पर जोर दिया।

लंबी उम्र के साथ बढ़ी वित्तीय योजना की जरूरत (Longer Lifespans Increase the Need for Financial Planning)

आज लोग पहले की तुलना में अधिक लंबे समय तक जीवन जी रहे हैं। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय रहते योजना बनाना जरूरी हो जाता है।

इस साझेदारी से ग्रामीण परिवारों को पेंशन उत्पादों, खासकर National Pension System (NPS) के बारे में जानकारी प्राप्त करने और अपनी जरूरत के अनुसार विकल्प तलाशने के लिए प्रोत्साहित करने की उम्मीद है।

ग्रामीण महिलाओं और वंचित वर्गों पर विशेष ध्यान (Focus on Rural Women and Underserved Communities)

इस पहल के प्रमुख लाभार्थियों में ग्रामीण महिलाएं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं शामिल हो सकती हैं। स्थानीय स्तर पर महिला प्रतिनिधियों की भागीदारी लोगों के बीच विश्वास और बेहतर संवाद बनाने में मदद कर सकती है।

Lakhpati Didis और अन्य वंचित समूहों तक पहुंच (Reaching Lakhpati Didis and Other Underserved Groups)

Pension Sakhis ग्रामीण लोगों को उनकी परिचित भाषा और सामुदायिक वातावरण में पेंशन योजनाओं की जानकारी दे सकती हैं। इससे उन लोगों के लिए औपचारिक वित्तीय प्रक्रियाओं को समझना आसान हो सकता है, जिन्हें बैंकिंग और पेंशन से जुड़ी प्रक्रियाएं जटिल लगती हैं।

Lakhpati Didis और अन्य ऐसे ग्रामीण समूहों को भी इस अभियान के दायरे में लाने की कोशिश की जाएगी, जिनकी सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच अभी सीमित है।

वित्तीय समावेशन को मजबूत करना सरकार का लक्ष्य (Government Aims to Strengthen Financial Inclusion)

ग्रामीण विकास विभाग ने MoU को लागू करने और देशभर में Pension Sakhis की तैनाती में सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई है। इस साझेदारी का उद्देश्य केवल पेंशन योजनाओं में नामांकन बढ़ाना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेंशन से जुड़ी समझ और वित्तीय जागरूकता को भी मजबूत करना है।

DoRD और PFRDA को उम्मीद है कि यह पहल ग्रामीण समुदायों में वित्तीय समावेशन, पेंशन जागरूकता और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने में योगदान देगी।

कुल मिलाकर, DoRD और PFRDA का यह MoU पेंशन और सेवानिवृत्ति योजना को ग्रामीण परिवारों के और करीब लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। Pension Sakhis, DAY-NRLM के सामुदायिक नेटवर्क और डिजिटल निगरानी व्यवस्था के माध्यम से सरकार उन लोगों तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रही है, जो अब तक औपचारिक पेंशन व्यवस्था से पर्याप्त रूप से नहीं जुड़ पाए हैं। यदि यह पहल प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे ग्रामीण परिवारों को भविष्य की वित्तीय जरूरतों के लिए बेहतर तैयारी करने और लंबे समय में सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।