2030 तक भारत में AI का दैनिक इस्तेमाल लगभग दोगुना हो सकता है: एरिक्सन रिपोर्ट

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2030 तक भारत में AI का दैनिक इस्तेमाल लगभग दोगुना हो सकता है: एरिक्सन रिपोर्ट
27 Oct 2026
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News Synopsis

भारत में मल्टीमॉडल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का रोजाना इस्तेमाल वर्ष 2030 तक तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल उपकरणों पर AI आधारित सेवाओं का बढ़ता उपयोग इस बदलाव की प्रमुख वजह बन सकता है। एरिक्सन कंज्यूमरलैब की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में रोजाना मल्टीमॉडल AI का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी मौजूदा 22 प्रतिशत से बढ़कर 2030 तक 43 प्रतिशत होने का अनुमान है।

यह अनुमान वैश्विक स्तर पर होने वाली संभावित वृद्धि से भी अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में रोजाना मल्टीमॉडल AI का उपयोग करने वाले लोगों की हिस्सेदारी इसी अवधि में 10 प्रतिशत से बढ़कर 30 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

एरिक्सन कंज्यूमरलैब Ericsson ConsumerLab की एक नई रिपोर्ट के ये आंकड़े बताते हैं कि AI अब केवल सवालों के जवाब पाने या जानकारी खोजने तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले वर्षों में लोग इसका इस्तेमाल बातचीत करने, तस्वीरें और वीडियो तैयार करने, जानकारी समझने और रोजमर्रा के कामों में मदद लेने के लिए अधिक कर सकते हैं। इस बदलाव से मोबाइल नेटवर्क पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है, क्योंकि AI सेवाओं को अलग-अलग जगहों और उपकरणों पर लगातार इस्तेमाल किया जाएगा।

मल्टीमॉडल AI क्या है? (What Is Multimodal AI?)

मल्टीमॉडल AI ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक है, जो अलग-अलग प्रकार की जानकारी को समझने और उनके साथ काम करने में सक्षम होती है। इसमें लिखे हुए शब्द, आवाज, तस्वीरें और वीडियो जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस तकनीक की मदद से लोग AI के साथ केवल लिखकर ही नहीं, बल्कि बोलकर, तस्वीरें दिखाकर और दूसरे माध्यमों से भी बातचीत कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति किसी तस्वीर के बारे में सवाल पूछ सकता है, आवाज के जरिए निर्देश दे सकता है या किसी वीडियो की जानकारी समझने में AI की मदद ले सकता है। इस तरह मल्टीमॉडल AI डिजिटल सेवाओं को अधिक सुविधाजनक और उपयोगी बना सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, AI का इस्तेमाल कभी-कभार किए जाने वाले काम से आगे बढ़कर नियमित गतिविधि बनने की दिशा में है। स्मार्टफोन और दूसरे जुड़े हुए उपकरणों पर इसका उपयोग बढ़ने से मोबाइल नेटवर्क की जरूरतें भी बदल सकती हैं। खासकर यात्रा करते समय, कार्यालय से बाहर या घर से दूर AI सेवाओं का इस्तेमाल करने पर स्थिर और भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्शन का महत्व बढ़ जाएगा।

AI का बढ़ता इस्तेमाल मोबाइल नेटवर्क पर दबाव बढ़ाएगा। (Rising AI Adoption Will Increase Network Demands)

जैसे-जैसे लोग AI की मदद से सामग्री तैयार करेंगे, तस्वीरें और वीडियो साझा करेंगे तथा आवाज के जरिए सेवाओं का इस्तेमाल करेंगे, मोबाइल नेटवर्क पर डेटा के आवागमन का तरीका भी बदल सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, AI से जुड़ा डेटा ट्रैफिक अधिक मात्रा में अपलोड पर निर्भर हो सकता है। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ता केवल इंटरनेट से जानकारी डाउनलोड नहीं करेंगे, बल्कि AI को तस्वीरें, वीडियो, आवाज और अन्य जानकारियां भेजने का काम भी अधिक करेंगे। इस कारण नेटवर्क की अपलोड क्षमता, जवाब देने की गति और कनेक्शन की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण हो जाएगी।

Ericsson India के प्रबंध निदेशक नितिन बंसल ने कहा कि AI अब लोगों के जानकारी खोजने, सामग्री बनाने और बातचीत करने के तरीकों का अहम हिस्सा बन रहा है। जैसे-जैसे AI सेवाएं अलग-अलग उपकरणों पर और विभिन्न स्थानों पर इस्तेमाल होंगी, उपयोगकर्ता चाहेंगे कि ये सेवाएं हर जगह भरोसेमंद तरीके से काम करें।

बंसल ने भारत के मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे को AI के अगले चरण के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनके अनुसार, बेहतर प्रदर्शन करने वाले नेटवर्क नई AI सेवाओं के लिए जरूरी क्षमता, गति और विश्वसनीयता उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएंगे।

AI सुपर यूजर्स बढ़ाएंगे AI गतिविधियों का बड़ा हिस्सा। (AI Super Users Could Drive Most AI Activity)

Ericsson ConsumerLab की रिपोर्ट में उन लोगों की बढ़ती भूमिका पर भी ध्यान दिया गया है, जो AI का बहुत अधिक इस्तेमाल करते हैं। इन्हें “AI सुपर यूजर्स” कहा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल दुनिया भर के उपभोक्ताओं में इनकी हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत है। अनुमान है कि 2030 तक यह आंकड़ा बढ़कर 30 प्रतिशत हो सकता है। हालांकि, उपभोक्ताओं का एक अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा होने के बावजूद, इन लोगों से कुल AI गतिविधियों में 80 प्रतिशत से अधिक योगदान की उम्मीद है।

यह अनुमान बताता है कि AI का इस्तेमाल सभी लोग एक जैसी मात्रा में नहीं करेंगे। कुछ उपभोक्ता इसका इस्तेमाल केवल सामान्य सवालों के जवाब पाने के लिए कर सकते हैं, जबकि दूसरे लोग इसे रोजमर्रा के कई कामों, सामग्री निर्माण और डिजिटल सेवाओं के लिए लगातार इस्तेमाल कर सकते हैं।

AI सुपर यूजर्स के लिए नेटवर्क की गति क्यों जरूरी है? (Why Network Speed Matters for AI Super Users)

रिपोर्ट के मुताबिक, नेटवर्क का प्रदर्शन AI सुपर यूजर्स के अनुभव पर विशेष प्रभाव डालता है। इन उपयोगकर्ताओं के लिए नेटवर्क से मिलने वाले जवाब का समय, सामान्य उपयोगकर्ताओं की तुलना में नेटवर्क संतुष्टि पर 2.5 गुना अधिक प्रभाव डालता है।

AI सेवाओं में देरी होने पर उपयोगकर्ता को जवाब मिलने, आवाज के जरिए बातचीत करने या किसी काम को पूरा करने में परेशानी हो सकती है। इसलिए तेज और तुरंत प्रतिक्रिया देने वाला नेटवर्क AI पर अधिक निर्भर लोगों के लिए खास तौर पर जरूरी हो सकता है।

जैसे-जैसे AI रोजमर्रा की डिजिटल गतिविधियों का हिस्सा बनेगा, नेटवर्क की गुणवत्ता केवल इंटरनेट की सामान्य गति तक सीमित नहीं रहेगी। जवाब मिलने में लगने वाला समय और कनेक्शन का लगातार काम करना भी महत्वपूर्ण होगा।

कई उपकरणों और चलते-फिरते AI इस्तेमाल में तीन गुना वृद्धि का अनुमान। (Multi-Device and On-the-Go AI Use Expected to Triple)

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक दुनिया भर में रोजाना मल्टीमॉडल AI का इस्तेमाल, कई उपकरणों पर AI का उपयोग और चलते-फिरते AI सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले स्थानों की संख्या—इन सभी में लगभग तीन गुना वृद्धि होने की उम्मीद है।

इसका अर्थ है कि भविष्य में लोग दिन के अलग-अलग समय और परिस्थितियों में AI का इस्तेमाल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति घर पर स्मार्टफोन से AI की मदद ले सकता है, यात्रा के दौरान आवाज के जरिए निर्देश दे सकता है और कार्यालय में दूसरे उपकरण से किसी काम को पूरा कर सकता है।

इस तरह AI का इस्तेमाल किसी एक जगह या उपकरण तक सीमित नहीं रह सकता। उपयोगकर्ता चाहेंगे कि घर, यात्रा और कार्यस्थल पर उनकी डिजिटल सेवाएं आसानी से उपलब्ध रहें।

इस बदलाव के लिए मोबाइल नेटवर्क को अलग-अलग समय पर बढ़ने वाले डेटा ट्रैफिक को संभालना होगा। साथ ही, नेटवर्क को लगातार अच्छा प्रदर्शन बनाए रखना होगा, ताकि उपयोगकर्ताओं को अलग-अलग जगहों पर AI सेवाओं का इस्तेमाल करते समय बार-बार परेशानी न हो। इस कारण नेटवर्क क्षमता और तुरंत प्रतिक्रिया देने की योग्यता भविष्य के AI अनुभव में अहम भूमिका निभा सकती है।

एजेंटिक AI का इस्तेमाल भी बढ़ने की उम्मीद। (Agentic AI Adoption Expected to Increase)

Ericsson ConsumerLab की रिपोर्ट में एजेंटिक AI के संभावित विकास का भी उल्लेख किया गया है। एजेंटिक AI ऐसे AI सिस्टम को कहा जाता है, जो उपयोगकर्ता की ओर से कुछ काम पूरे कर सकते हैं। इनमें बुकिंग करना, अलग-अलग उत्पादों की तुलना करना और समय-सारणी व्यवस्थित करना जैसे काम शामिल हो सकते हैं।

रिपोर्ट में शामिल बाजारों के सर्वेक्षण के अनुसार, फिलहाल केवल 4 प्रतिशत स्मार्टफोन उपयोगकर्ता एजेंटिक AI का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, वर्ष 2030 तक यह हिस्सेदारी बढ़कर 38 प्रतिशत होने की उम्मीद है। सर्वेक्षण में शामिल लोगों का यह भी अनुमान है कि ऐसे उपकरण हर दिन उनके स्क्रीन इस्तेमाल के समय में लगभग एक घंटे की बचत कर सकते हैं।

एजेंटिक AI किस तरह बदल सकता है डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल? (How Agentic AI Could Change the Use of Digital Services)

सामान्य AI किसी सवाल का जवाब दे सकता है या किसी काम के लिए सुझाव दे सकता है। इसके विपरीत, एजेंटिक AI को कुछ कार्यों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यह यात्रा के विकल्पों की तुलना करने, अपॉइंटमेंट की बुकिंग में सहायता करने या किसी व्यक्ति की दिनभर की गतिविधियों को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है।

यदि इसका इस्तेमाल अनुमान के अनुसार बढ़ता है, तो लोगों के डिजिटल सेवाओं के साथ बातचीत करने का तरीका बदल सकता है। उपयोगकर्ताओं को हर चरण खुद पूरा करने के बजाय कुछ काम AI की मदद से पूरे करने का विकल्प मिल सकता है।

हालांकि, ऐसे सिस्टम की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी सही जानकारी देते हैं, उपयोगकर्ता की अनुमति के अनुसार काम करते हैं और निजी जानकारी को कितनी सुरक्षित तरीके से संभालते हैं।

नकली AI असिस्टेंट और डिजिटल सुरक्षा को लेकर चिंता। (Concerns About Fake AI Assistants and Digital Trust)

AI सेवाओं में बढ़ती दिलचस्पी के बावजूद सुरक्षा और भरोसे से जुड़ी चिंताएं बनी हुई हैं। सर्वेक्षण में शामिल रोजाना AI का इस्तेमाल करने वाले आधे से अधिक लोगों ने नकली या हैक किए गए AI असिस्टेंट को लेकर गंभीर चिंता जताई।

ऐसे मामलों में किसी असली AI असिस्टेंट की नकल करके उपयोगकर्ताओं को गुमराह किया जा सकता है या किसी असुरक्षित सिस्टम के जरिए उनकी जानकारी तक पहुंचने का प्रयास किया जा सकता है। जैसे-जैसे AI को काम पूरे करने और डिजिटल सेवाओं तक पहुंचने की अधिक क्षमता मिलेगी, उसकी पहचान की पुष्टि करना और भी जरूरी हो सकता है।

AI असिस्टेंट की पहचान की पुष्टि में दूरसंचार कंपनियों की भूमिका। (Role of Telecom Providers in Verifying AI Assistants)

रिपोर्ट के अनुसार, AI असिस्टेंट की पहचान की पुष्टि करने के लिए दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को सबसे भरोसेमंद संगठनों के रूप में स्थान दिया गया। इससे संकेत मिलता है कि भविष्य में दूरसंचार कंपनियां सुरक्षित AI सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ उपयोगकर्ता यह जानना चाहेंगे कि जिस असिस्टेंट से वे बातचीत कर रहे हैं, वह असली और भरोसेमंद है या नहीं। खासकर तब, जब AI को व्यक्तिगत जानकारी तक पहुंचने या उपयोगकर्ता की ओर से कोई काम करने की अनुमति दी जाती है।

इसलिए AI के विस्तार के साथ डिजिटल सुरक्षा, पहचान की पुष्टि और उपयोगकर्ताओं का भरोसा बनाए रखना भी जरूरी होगा।

एरिक्सन कंज्यूमरलैब रिपोर्ट: सर्वेक्षण की जानकारी। (Ericsson ConsumerLab Report: Survey Details)

इस रिपोर्ट के निष्कर्ष 27 बाजारों में 15 से 69 वर्ष की आयु के 43,000 से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं से मिले जवाबों पर आधारित हैं। इनमें भारत भी शामिल है।

रिपोर्ट में मल्टीमॉडल AI, नेटवर्क के प्रदर्शन, एजेंटिक AI और डिजिटल सुरक्षा को लेकर उपभोक्ताओं की बदलती अपेक्षाओं का अध्ययन किया गया है। इसके अनुमान बताते हैं कि AI का बढ़ता इस्तेमाल ऐसे मोबाइल नेटवर्क की मांग को मजबूत कर सकता है, जो तेज प्रतिक्रिया दें, भरोसेमंद हों और अधिक मात्रा में डेटा संभाल सकें।

हालांकि, ये आंकड़े भविष्य के संभावित रुझानों का अनुमान हैं। वास्तविक वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि उपभोक्ता AI सेवाओं को कितनी तेजी से अपनाते हैं और इन सेवाओं को इस्तेमाल करने के लिए जरूरी तकनीकी सुविधाएं कितनी उपलब्ध होती हैं।

भविष्य की संभावनाएं। (Outlook)

भारत में वर्ष 2030 तक रोजाना मल्टीमॉडल AI के इस्तेमाल में अनुमानित वृद्धि देश को AI आधारित उपभोक्ता सेवाओं के लिए एक बड़े बाजार के रूप में स्थापित करने की संभावनाएं दिखाती है। स्मार्टफोन और अन्य जुड़े उपकरणों पर AI की बढ़ती उपलब्धता लोगों के जानकारी खोजने, बातचीत करने और डिजिटल सामग्री तैयार करने के तरीकों को बदल सकती है।

हालांकि, इस विकास का पूरा लाभ उठाने के लिए बेहतर नेटवर्क प्रदर्शन, अधिक अपलोड क्षमता और मजबूत डिजिटल सुरक्षा जरूरी होगी। खासकर उन सेवाओं के लिए, जिन्हें तस्वीरों, वीडियो और आवाज जैसी बड़ी मात्रा में जानकारी भेजने और प्राप्त करने की आवश्यकता होती है।

एजेंटिक AI और कई उपकरणों पर AI के इस्तेमाल में संभावित वृद्धि से भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्टिविटी का महत्व भी बढ़ सकता है। यदि नेटवर्क और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा किया जाता है, तो AI लोगों के संचार, सामग्री निर्माण और रोजमर्रा के कामों को आसान बनाने में अधिक उपयोगी साबित हो सकता है।