ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा: भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का प्रमाण, बोले राजनाथ सिंह

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ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा: भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का प्रमाण, बोले राजनाथ सिंह
14 Sep 2026
7 min read

News Synopsis

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि BRICS 2026 का ऐतिहासिक नई दिल्ली घोषणा-पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत ने वैश्विक दक्षिण यानी Global South को केंद्र में रखते हुए अधिक समावेशी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और संतुलित विश्व व्यवस्था की दिशा में अपनी भूमिका को मजबूत किया है।

राजनाथ सिंह ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच X पर BRICS शिखर सम्मेलन की सफलता को लेकर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में सामने रखा गया। उनके अनुसार, भारत ने इन प्राथमिकताओं को केवल नीतिगत चर्चाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि BRICS सहयोग को आम लोगों से सीधे जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया।

उन्होंने BRICS नई दिल्ली घोषणा-पत्र 2026 BRICS New Delhi Declaration 2026 को सम्मेलन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक बताते हुए कहा कि यह केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का बयान है।

नई दिल्ली घोषणा-पत्र को राजनाथ सिंह ने बताया बड़ी उपलब्धि Rajnath Singh Calls New Delhi Declaration a Major Achievement

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह Defence Minister Rajnath Singh ने अपने संदेश में कहा कि ऐतिहासिक BRICS शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भारत ने BRICS अध्यक्ष के रूप में Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया।

BRICS सहयोग को आम लोगों से जोड़ने पर जोर Focus on Connecting BRICS Cooperation with Common People

राजनाथ सिंह के अनुसार, भारत की अध्यक्षता की एक प्रमुख विशेषता यह रही कि BRICS सहयोग को सीधे आम लोगों से जोड़ने का प्रयास किया गया। उन्होंने इस दृष्टिकोण को समावेशी और मानव-केंद्रित बताया।

भारत ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग का लाभ केवल सरकारों या बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका असर आम नागरिकों, किसानों, उद्यमियों, युवाओं, महिलाओं और समाज के अन्य वर्गों तक भी पहुंचना चाहिए।

मानव-केंद्रित दृष्टिकोण बना सम्मेलन की पहचान Human-Centric Approach Became the Hallmark of the Summit

नई दिल्ली में आयोजित BRICS सम्मेलन में मानव-केंद्रित सोच को विशेष महत्व दिया गया। भारत का प्रयास रहा कि आर्थिक, तकनीकी और विकास से जुड़े सहयोग को लोगों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाए।

राजनाथ सिंह ने कहा कि इसी समावेशी दृष्टिकोण ने नई दिल्ली BRICS शिखर सम्मेलन को एक अलग पहचान दी।

वैश्विक दक्षिण को केंद्र में लाने की भारत की कोशिश India’s Effort to Place the Global South at the Centre

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने Global South को वैश्विक व्यवस्था के हाशिये पर रखने के बजाय उसके केंद्र में लाने का प्रयास किया है। उन्होंने इसे अधिक समावेशी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और संतुलित विश्व व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

भारत लंबे समय से विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में अधिक महत्व देने की वकालत करता रहा है। BRICS मंच के माध्यम से भी भारत ने विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को सामने रखने और उनके बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

अधिक संतुलित विश्व व्यवस्था की वकालत Advocating a More Balanced World Order

राजनाथ सिंह के अनुसार, भारत का उद्देश्य ऐसी वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा देना है जिसमें विभिन्न क्षेत्रों और विकास के अलग-अलग स्तर वाले देशों को उचित प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने कहा कि भारत ने BRICS की अध्यक्षता के दौरान इस दिशा में अपनी भूमिका को आगे बढ़ाया।

उनके मुताबिक, भारत का दृष्टिकोण अपनी सभ्यतागत सोच “वसुधैव कुटुम्बकम्” से भी जुड़ा है, जिसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है।

“नेतृत्व सबसे ऊंची आवाज नहीं, मजबूत सहमति है” “Leadership Is Not the Loudest Voice but the Strongest Consensus”

राजनाथ सिंह ने अपने संदेश में भारत की नेतृत्व शैली को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि नेतृत्व का अर्थ केवल सबसे ऊंची आवाज में अपनी बात रखना नहीं है, बल्कि ऐसी मजबूत सहमति तैयार करना है जिसे अलग-अलग देश स्वीकार कर सकें।

उन्होंने भारत की भूमिका को इसी सोच से जोड़ते हुए कहा कि जब भारत नेतृत्व करता है तो दुनिया उसकी बात सुनती है। उनके अनुसार, BRICS शिखर सम्मेलन की सफलता ने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को और स्पष्ट किया है।

BRICS 2026 शिखर सम्मेलन में भारत की चार प्राथमिकताएं India’s Four Priorities at BRICS 2026 Summit

भारत ने 2026 में BRICS की अध्यक्षता के दौरान चार प्रमुख प्राथमिकताओं को सामने रखा। इनमें लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता शामिल रहे।

लचीलेपन के तहत स्वास्थ्य, आपूर्ति श्रृंखला और संकटों से निपटने की क्षमता मजबूत करने पर ध्यान दिया गया। नवाचार के तहत नई तकनीकों और अनुसंधान को बढ़ावा देने की बात सामने आई। सहयोग के तहत BRICS देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर रहा।

स्थिरता के क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास जैसे विषयों को महत्व दिया गया।

आम लोगों और विकासशील देशों के लिए सहयोग Cooperation for Common People and Developing Nations

भारत ने BRICS सहयोग को व्यापक समाज से जोड़ने के लिए किसानों, छोटे उद्यमों, युवाओं, महिलाओं, शोधकर्ताओं और उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किया। इससे BRICS के आर्थिक और विकास संबंधी एजेंडे को जमीनी स्तर से जोड़ने की कोशिश दिखाई दी।

BRICS नई दिल्ली घोषणा-पत्र में प्रमुख मुद्दे शामिल Key Issues Covered in the BRICS New Delhi Declaration

भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का समापन नई दिल्ली घोषणा-पत्र को अपनाने के साथ हुआ।

घोषणा-पत्र में वैश्विक शासन, आर्थिक सहयोग, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया गया।

वैश्विक संस्थानों में सुधार पर ध्यान Focus on Reforming Global Institutions

BRICS देशों की ओर से अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और संतुलित बनाने की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया जाता रहा है। नई दिल्ली घोषणा-पत्र में भी वैश्विक व्यवस्था में सुधार से जुड़े विषयों को महत्वपूर्ण स्थान मिला।

इसका उद्देश्य बदलती वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में विकासशील देशों की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाना है।

BRICS में भारत की बढ़ती भूमिका का व्यापक महत्व Broader Significance of India’s Growing Role in BRICS

नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन भारत के लिए केवल BRICS की अध्यक्षता से जुड़ा आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती सक्रियता को भी सामने रखा।

भारत ने आर्थिक सहयोग के साथ-साथ स्वास्थ्य, तकनीक, जलवायु, ऊर्जा, व्यापार और विकास जैसे क्षेत्रों में साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने की कोशिश की। इससे BRICS को विकासशील देशों की साझा प्राथमिकताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में मजबूत करने का प्रयास दिखाई देता है।

राजनाथ सिंह ने सम्मेलन की सफलता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की उपलब्धि बताते हुए कहा कि इसके परिणामों ने वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत छाप छोड़ी है।

निष्कर्ष Conclusion

BRICS 2026 का नई दिल्ली शिखर सम्मेलन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने की उसकी कोशिश को दर्शाता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, नई दिल्ली घोषणा-पत्र भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

भारत ने BRICS अध्यक्षता के दौरान लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए Global South को केंद्र में रखने की कोशिश की। नई दिल्ली घोषणा-पत्र में वैश्विक शासन, अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, जलवायु और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार जैसे विषयों को शामिल किया जाना इस व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

आने वाले समय में BRICS के भीतर भारत की भूमिका इस बात से भी महत्वपूर्ण होगी कि इन घोषणाओं को किस तरह ठोस सहयोग और वास्तविक परिणामों में बदला जाता है।