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ऑटो उद्योग भारत की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बना हुआ है: SIAM

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ऑटो उद्योग भारत की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बना हुआ है: SIAM
04 Sep 2026
6 min read

News Synopsis

भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग देश की आर्थिक वृद्धि में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफ़ैक्चरर्स (SIAM) Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) के अध्यक्ष शैलेश चंद्र ने कहा कि ऑटो उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था में 22.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक का योगदान देता है और देश के कुल GST संग्रह में इसकी हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत है।

Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए शैलेश चंद्र ने कहा कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है। इसके अलावा, इस उद्योग का असर इससे जुड़े कई अन्य क्षेत्रों और पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ता है।

यानी वाहन उद्योग की वृद्धि का लाभ केवल वाहन बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कलपुर्जे, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सर्विस, बीमा और अन्य संबंधित क्षेत्रों को भी मिलता है।

ऑटो उद्योग की मजबूत वृद्धि जारी Automobile Industry Continues Strong Growth

भारतीय ऑटो उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान घरेलू बिक्री और निर्यात दोनों क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन किया। कई वाहन श्रेणियों में बिक्री अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।

यात्री वाहनों, दोपहिया वाहनों, तिपहिया वाहनों और वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में वृद्धि दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि घरेलू बाजार में वाहनों की मांग मजबूत बनी हुई है और भारतीय वाहन निर्माता वैश्विक बाजारों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।

यात्री वाहन बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड Passenger Vehicle Sales Hit a New Record

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में यात्री वाहनों की बिक्री 46 लाख यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 7.9 प्रतिशत अधिक है।

यात्री वाहनों के निर्यात में भी मजबूत वृद्धि देखने को मिली। इस श्रेणी में निर्यात 9.1 लाख यूनिट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17.5 प्रतिशत अधिक है।

यह वृद्धि भारतीय वाहन कंपनियों की बढ़ती उत्पादन क्षमता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय वाहनों की मांग को दर्शाती है।

दोपहिया वाहनों की बिक्री भी रिकॉर्ड स्तर पर Two-Wheeler Sales Also Reach Record Levels

भारत के दोपहिया वाहन बाजार ने भी वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया। घरेलू बिक्री 10.7 प्रतिशत बढ़कर 2.171 करोड़ यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

दोपहिया वाहनों के निर्यात में भी तेज वृद्धि हुई। निर्यात 23.4 प्रतिशत बढ़कर 51.8 लाख यूनिट हो गया।

भारत दुनिया के प्रमुख दोपहिया वाहन बाजारों में शामिल है और घरेलू मांग के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है।

तिपहिया वाहनों में निर्यात की तेज रफ्तार Three-Wheeler Exports Grow Rapidly

तिपहिया वाहनों की घरेलू बिक्री वित्त वर्ष 2025-26 में 12.8 प्रतिशत बढ़कर 8.4 लाख यूनिट हो गई।

हालांकि, इस श्रेणी में सबसे तेज वृद्धि निर्यात में देखने को मिली। तिपहिया वाहनों का निर्यात 50.1 प्रतिशत बढ़कर 3.1 लाख यूनिट से 4.6 लाख यूनिट तक पहुंच गया।

यह वृद्धि भारतीय तिपहिया वाहन निर्माताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती संभावनाओं का संकेत देती है।

वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर Commercial Vehicle Sales Reach Record High

वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र ने भी वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत प्रदर्शन किया। घरेलू बाजार में वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 10.80 लाख यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.6 प्रतिशत अधिक है।

वहीं, वाणिज्यिक वाहनों का निर्यात 17.4 प्रतिशत बढ़कर 95,000 यूनिट हो गया।

ट्रक, बस और अन्य वाणिज्यिक वाहन आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इनकी मांग में वृद्धि को अक्सर निर्माण, लॉजिस्टिक्स, परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत के रूप में देखा जाता है।

ऑटो उद्योग में टिकाऊ विकास पर जोर Automobile Industry Focuses on Sustainable Growth

ऑटो उद्योग की वृद्धि के साथ-साथ कंपनियां पर्यावरण संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी और वाहन सुरक्षा से जुड़े राष्ट्रीय और वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप भी आगे बढ़ रही हैं।

शैलेश चंद्र ने बताया कि 1 अप्रैल 2025 से पूरा ऑटोमोबाइल उद्योग E20-अनुरूप पेट्रोल वाहनों के निर्माण की दिशा में पूरी तरह परिवर्तित हो गया।

E20-अनुरूप वाहनों को ऐसे ईंधन के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया है जिसमें पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण होता है।

E20 वाहनों से ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा E20 Vehicles Support Energy Security

ऑटो उद्योग के अनुसार, E20-अनुरूप वाहनों की ओर बदलाव से कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करने और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा, कई वाहन निर्माताओं ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के वाणिज्यिक लॉन्च और प्रदर्शन भी किए हैं। ऐसे वाहन एक से अधिक प्रकार के ईंधन या अलग-अलग अनुपात में ईंधन मिश्रण के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किए जाते हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ी Electric Vehicle Adoption Continues to Rise

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भी तेजी से आगे बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में यात्री वाहनों, दोपहिया और तिपहिया वाहनों सहित कई श्रेणियों में नए पंजीकरण में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।

देश में कुल इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकरण वित्त वर्ष 2024-25 के 19.7 लाख यूनिट से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 25 लाख यूनिट हो गया। यानी इसमें 24.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय उपभोक्ताओं के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर रुचि लगातार बढ़ रही है।

सरकार और उद्योग के सहयोग से बढ़ रहा EV अपनाव Government-Industry Collaboration Boosts EV Adoption

शैलेश चंद्र ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी के पीछे सरकार और ऑटो उद्योग के बीच लगातार हो रहे सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की PM E-DRIVE योजना ने भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में बदलाव को महत्वपूर्ण गति दी है।

इस योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, चार्जिंग से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करना और देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है।

ऑटो उद्योग का अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव Automobile Industry Has a Wide Economic Impact

ऑटोमोबाइल उद्योग की भूमिका केवल वाहनों के उत्पादन और बिक्री तक सीमित नहीं है। यह देश के विनिर्माण क्षेत्र, रोजगार, कर संग्रह, निर्यात और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

वाहन उद्योग से जुड़े कलपुर्जा निर्माता, डीलर, सर्विस सेंटर, परिवहन कंपनियां, लॉजिस्टिक्स सेवाएं, बीमा कंपनियां और अन्य व्यवसाय भी इससे लाभान्वित होते हैं। इसलिए ऑटो उद्योग में वृद्धि का व्यापक आर्थिक प्रभाव देखने को मिलता है।

भारत में वाहन बिक्री और निर्यात में लगातार वृद्धि से यह संकेत मिलता है कि देश का ऑटो क्षेत्र घरेलू मांग के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी अपनी स्थिति मजबूत करने की क्षमता रखता है।

भारत के लिए ऑटो उद्योग क्यों है महत्वपूर्ण Why the Automobile Industry Matters to India

ऑटोमोबाइल क्षेत्र भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करता है और कई अन्य उद्योगों को साथ लेकर चलता है। SIAM के अनुसार, यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है।

इसके अलावा, 22.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक योगदान और GST संग्रह में लगभग 15 प्रतिशत हिस्सेदारी इसे भारत की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल करती है।

बढ़ते निर्यात, इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार, वैकल्पिक ईंधन और बेहतर वाहन सुरक्षा के साथ भारतीय ऑटो उद्योग आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास के साथ-साथ तकनीकी बदलाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

निष्कर्ष Conclusion

भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में यात्री वाहनों, दोपहिया वाहनों, तिपहिया वाहनों और वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री तथा निर्यात में दर्ज मजबूत वृद्धि ने इस क्षेत्र की क्षमता को एक बार फिर सामने रखा है।

इसके साथ ही, E20-अनुरूप वाहनों का विस्तार, फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग यह दिखाती है कि भारतीय ऑटो उद्योग तेजी से बदल रहा है।

सरकार की नीतियों और उद्योग के बीच सहयोग के साथ यदि विनिर्माण, तकनीक, निर्यात और हरित मोबिलिटी पर लगातार ध्यान दिया जाता है, तो ऑटोमोबाइल क्षेत्र भारत की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।