Ather Energy ने भारत में 700 Experience Centres का आंकड़ा पार किया
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Ather CEO Tarun Mehta ने सरकार की PLI योजना पर साधा निशाना
भारत की ऑटोमोबाइल प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना को लेकर बहस तेज हो गई है, जब Ather Energy के CEO Tarun Mehta ने सरकार की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स को योजना से बाहर रखना भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) भविष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
PLI नीति पर सरकार के रुख से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि PLI योजनाएं “ग्लोबल चैंपियंस” के लिए बनाई गई हैं, स्टार्टअप्स के लिए नहीं। इस बयान के बाद इलेक्ट्रिक-फर्स्ट कंपनियों के PLI लाभ से बाहर होने की स्थिति स्पष्ट हो गई।
वर्तमान ऑटो PLI योजना, जिसे भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाता है, में कड़े पात्रता मानदंड शामिल हैं। कंपनियों को कम से कम ₹10,000 करोड़ का वैश्विक ऑटोमोबाइल राजस्व और ₹3,000 करोड़ की फिक्स्ड एसेट्स दिखानी होती हैं। इन शर्तों के कारण अधिकांश EV स्टार्टअप्स योजना से बाहर हो जाते हैं।
तरुण मेहता ने कहा कि यह समझना मुश्किल है कि नीति निर्माता ऐसे समय में स्टार्टअप्स को बाहर कर रहे हैं, जब भारत के EV इकोसिस्टम को उन्होंने ही आगे बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि पिछले दशक में स्टार्टअप्स ने प्रोडक्ट डेवलपमेंट, सॉफ्टवेयर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और लोकलाइजेशन में भारी निवेश किया है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने भारत में एक मजबूत और जीवंत EV मार्केट तैयार किया है।
EV क्रांति में स्टार्टअप्स की बड़ी भूमिका
तरुण मेहता ने कहा कि आज कई नए EV स्टार्टअप्स न केवल इनोवेशन में आगे हैं, बल्कि बिक्री और मार्केट शेयर में भी मजबूत स्थिति में हैं।
उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी Ather Energy ने रिसर्च और डेवलपमेंट तथा मैन्युफैक्चरिंग में हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया है। कंपनी में 4,000 से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं।
इसके अलावा कंपनी ने महाराष्ट्र में एक नए ग्रीनफील्ड प्लांट के लिए लगभग ₹2,000 करोड़ का निवेश भी प्रतिबद्ध किया है, वह भी बिना PLI सपोर्ट के।
लागत असंतुलन और नीति की संरचनात्मक समस्या
तरुण मेहता के अनुसार वर्तमान नीति में एक बड़ा संरचनात्मक असंतुलन है। उनके अनुसार पारंपरिक कंपनियों को प्राथमिकता देने से EV स्टार्टअप्स को लगभग 13–16% की लागत में नुकसान होता है।
यह अंतर लंबे समय में बाजार को प्रभावित कर सकता है और बैटरी सिस्टम, स्वदेशी प्लेटफॉर्म और सॉफ्टवेयर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश को हतोत्साहित कर सकता है—जहां स्टार्टअप्स पहले से ही अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
अधिक लचीली नीति की मांग
तरुण मेहता ने सरकार से PLI फ्रेमवर्क को “कैलिब्रेट” करने की अपील की है। उन्होंने सुझाव दिया कि पात्रता मानदंड को केवल बड़े पैमाने पर आधारित न रखकर R&D और घरेलू वैल्यू एडिशन (DVA) जैसे मानकों पर आधारित होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकलाइजेशन के मामले में स्टार्टअप्स किसी से पीछे नहीं हैं और कई मामलों में वे अधिक स्वदेशी विकास कर रहे हैं।
सरकार का PLI योजना पर बचाव
दूसरी ओर सरकार ने PLI योजना को सफल बताया है। अधिकारियों के अनुसार इस योजना के तहत ऑटो सेक्टर में ₹35,000 करोड़ से अधिक निवेश हुआ है।
इसके अलावा लगभग 14 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन हुआ है और करीब 49,000 नौकरियां भी पैदा हुई हैं। प्रमुख लाभार्थियों में Tata Motors, Mahindra & Mahindra और Maruti Suzuki शामिल हैं।
EV नीति के भविष्य पर बहस जारी
यह पूरा विवाद भारत की EV नीति के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। एक ओर जहां बड़े ऑटो निर्माता उत्पादन क्षमता और स्केल प्रदान करते हैं, वहीं स्टार्टअप्स इनोवेशन और तकनीकी विकास को आगे बढ़ाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है, कि दोनों का संतुलित समर्थन ही भारत को EV क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिला सकता है।
निष्कर्ष:
Ather Energy CEO के बयान ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है, कि क्या भारत की EV नीति को अधिक समावेशी और संतुलित बनाने की जरूरत है। उद्योग जगत का मानना है, कि यदि स्टार्टअप्स को भी उचित अवसर दिया जाए, तो भारत तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का वैश्विक केंद्र बन सकता है।
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भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाने वाली बड़ी कंपनी Ather Energy ने घोषणा की कि उसने ऑफिशियली देश भर में 700 एक्सपीरियंस सेंटर्स का माइलस्टोन पार कर लिया है। यह एग्रेसिव स्केलिंग स्ट्रैटेजी, ब्रांड की एक्सेसिबिलिटी को बेहतर बनाने और इलेक्ट्रिक गाड़ी के ज़्यादा से ज़्यादा कंज्यूमर्स तक पहुंचने के कमिटमेंट को दिखाती है।
तेज़ी से रिटेल विस्तार और ऑपरेशन्स का स्केलिंग
पिछले फाइनेंशियल ईयर में 700 एक्सपीरियंस सेंटर्स तक का सफ़र तेज़ी से आगे बढ़ा है। Ather ने सिर्फ़ पिछले एक साल में 350 से ज़्यादा नए Experience Centres जोड़े हैं। इससे कंपनी का रिटेल नेटवर्क असल में दोगुना हो गया है, जो 31 मार्च 2025 तक भारत में 351 सेंटर्स पर था।
यह बड़ी एक्सपेंशन स्ट्रेटेजी अलग-अलग मार्केट्स में एथर की ग्रोथ को बढ़ाने में मददगार रही है। अपनी मौजूदगी को फिजिकली बढ़ाकर कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स की एक्सेसिबिलिटी को सफलतापूर्वक बेहतर बनाया है, और मौजूदा जगहों और बिल्कुल नए मार्केट में ऑपरेशन्स को अच्छे से बढ़ाने में मदद की है।
मार्केट शेयर में बढ़त और Ather Rizta की सफलता
कंज्यूमर टचपॉइंट्स (ग्राहकों तक पहुँचने के माध्यमों) में बढ़ोतरी का सीधा नतीजा बिक्री और मार्केट में पहुँच में ज़बरदस्त उछाल के रूप में सामने आया है। पिछले एक साल में रिटेल नेटवर्क के विस्तार ने Ather को ग्राहकों के एक बहुत बड़े वर्ग तक पहुँचने में मदद की है। Vahan के डेटा के अनुसार मार्च 2026 में कंपनी का राष्ट्रीय मार्केट शेयर बढ़कर 18.7% हो गया।
बिक्री के इन शानदार आँकड़ों के पीछे एक बड़ा कारण Ather Rizta की लॉन्चिंग और उसके बाद मिली सफलता है। Ather के पहले 'फ़ैमिली स्कूटर' के तौर पर पेश किया गया Rizta ज़बरदस्त हिट रहा है, लॉन्च होने के बाद से अब तक इसकी 2.8 लाख से ज़्यादा यूनिट्स बिक चुकी हैं। यह खास मॉडल Ather की पहुँच को ग्राहकों के बिल्कुल नए वर्गों तक पहुँचाने और नए बाज़ारों में दबी हुई माँग को सामने लाने में बेहद अहम साबित हुआ है।
इसके साथ ही कंपनी को अपनी परफ़ॉर्मेंस-ओरिएंटेड Ather 450 सीरीज़ के लिए भी लगातार और बनी हुई माँग देखने को मिल रही है। परिवार पर केंद्रित Rizta और परफ़ॉर्मेंस-ड्रिवेन 450 सीरीज़ की मिली-जुली सफलता ने सभी क्षेत्रों में लगातार ग्रोथ को बढ़ावा दिया है।
मध्य भारत और टियर-2 शहरों पर स्ट्रेटेजिक फोकस
एथर ने बस ऐसे ही विस्तार नहीं किया, FY26 में इसका रिटेल विस्तार स्ट्रेटेजिकली मिडिल इंडिया और बाकी भारत पर फोकस था। एथर के क्लासिफिकेशन के अनुसार मिडिल इंडिया में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा राज्य शामिल हैं।
इस टारगेटेड अप्रोच से इन खास मार्केट में तेज़ी से स्केल-अप हुआ है, जिससे आखिर में मार्केट शेयर में अच्छा-खासा फायदा हुआ है। इस रणनीति से कंपनी को ज़बरदस्त गति मिली है, और Ather ने इन क्षेत्रों में अपनी गति में लगभग 2 गुना वृद्धि देखी है।
'मिडिल इंडिया' में ज़ोरदार ढंग से विस्तार करते हुए भी, कंपनी ने अपने मुख्य बाज़ारों की उपेक्षा नहीं की है। Ather दक्षिण भारत में अपनी मौजूदा उपस्थिति को और मज़बूत करना जारी रखे हुए है। साथ ही यह ज़्यादा बैलेंस्ड और बड़े पैमाने पर नेशनल पहचान बनाने के लिए Tier-2 और Tier-3 शहरों में तेज़ी से विस्तार कर रहा है।
भविष्य की ग्रोथ पर लीडरशिप के विचार
कंपनी की लीडरशिप इस रिटेल स्ट्रेटेजी को मौजूदा और भविष्य की सफलता का एक बुनियादी आधार मानती है। Ather Energy के Chief Business Officer Ravneet Singh Phokela ने कहा कि पिछला साल रिटेल नेटवर्क को बढ़ाने पर बहुत ज़्यादा केंद्रित रहा है, जिसे ग्रोथ के लिए एक अहम ज़रिया माना गया है।
Ravneet Phokela ने बताया कि जहाँ सभी इलाकों में Experience Centre की संख्या बढ़ी है, वहीं मध्य भारत और बाकी भारत में यह विस्तार खास तौर पर बहुत तेज़ी से हुआ है। इस तेज़ी की वजह से ब्रांड नए इलाकों और सेग्मेंट्स को टारगेट कर पाया है, जिससे सीधे तौर पर बिक्री की मात्रा और मार्केट शेयर में मज़बूत बढ़त मिली है। Ravneet Phokela ने कहा कि कंपनी के पास अभी भी ग्रोथ की काफी गुंजाइश है, और वह अगले कुछ तिमाहियों तक इसी रास्ते पर आगे बढ़ती रहेगी।
ओनरशिप इकोसिस्टम को मज़बूत करना
इलेक्ट्रिक गाड़ी बेचने के लिए एक मज़बूत सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत होती है, और एथर ने एक आसान ओनरशिप एक्सपीरियंस को सपोर्ट करने के लिए अपने रिटेल नेटवर्क के साथ-साथ अपने इकोसिस्टम को भी बढ़ाया है।
पिछले महीने कंपनी ने अनाउंस किया कि पूरे भारत में उसके ऑफिशियली 500 ऑथराइज़्ड सर्विस सेंटर हो गए हैं। यह उपलब्धि इस बात को पक्का करती है, कि Ather जिन भी शहरों में काम करता है, वहाँ भरोसेमंद आफ्टर-सेल्स सपोर्ट उपलब्ध है।
इसके अलावा इन वाहनों को चार्ज रखने में Ather Grid मदद करता है, जो भारत का सबसे बड़ा टू-व्हीलर फास्ट-चार्जिंग नेटवर्क है। 31 दिसंबर 2025 तक यह नेटवर्क बढ़कर दुनिया भर में 4,357 से ज़्यादा फास्ट-चार्जिंग और नेबरहुड चार्जिंग पॉइंट तक पहुँच गया है, जिससे राइडर्स के लिए चार्जिंग के बेहद सुविधाजनक और आसानी से उपलब्ध विकल्प मौजूद हैं।


