News In Brief Motivation
News In Brief Motivation

एपीजे अब्दुल कलाम जयंती: अमित शाह, राजनाथ सिंह और एस. जयशंकर ने याद किया उनका योगदान

Share Us

40
एपीजे अब्दुल कलाम जयंती: अमित शाह, राजनाथ सिंह और एस. जयशंकर ने याद किया उनका योगदान
15 Oct 2026
7 min read

News Synopsis

पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर गुरुवार को केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। नेताओं ने भारत की वैज्ञानिक प्रगति, रक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाने और देश के विकास में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि कलाम का जीवन, उनकी दूरदर्शी सोच और देशसेवा के प्रति समर्पण आज भी युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करता है।

डॉ. कलाम को देशभर में ‘जनता के राष्ट्रपति’ और ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से याद किया जाता है। विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में उनके योगदान के साथ-साथ शिक्षा, नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों ने भी देश पर गहरी छाप छोड़ी। नेताओं ने इस अवसर पर उनके विचारों को अपनाने और भारत को मजबूत तथा विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में काम करने का संदेश दिया।

अमित शाह ने कलाम को बताया ‘जनता का राष्ट्रपति’ Amit Shah Calls Kalam the ‘People’s President’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम Dr. A.P.J. Abdul Kalam को श्रद्धांजलि देते हुए उनके वैज्ञानिक योगदान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि कलाम ने अपनी असाधारण वैज्ञानिक प्रतिभा का इस्तेमाल भारत को एक मजबूत रणनीतिक शक्ति बनाने के लिए किया।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर शाह ने लिखा, “जनता के राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि। कलाम जी ने भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक शक्ति बनाने के लिए अपनी असाधारण वैज्ञानिक प्रतिभा समर्पित की और भारत के राष्ट्रपति के रूप में सर्वोच्च लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखा। भारत के मिसाइल मैन एक ऐसे आदर्श बने रहेंगे, जो युवा पीढ़ी को राष्ट्रसेवा में अपना पूरा योगदान देने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।”

शाह के संदेश में कलाम की वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को भी रेखांकित किया गया। कलाम का जीवन इस बात का उदाहरण है कि विज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल देश की सुरक्षा तथा विकास को मजबूत बनाने के लिए कैसे किया जा सकता है।

राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को याद किया Rajnath Singh Recalls Kalam’s Contribution to Defence Self-Reliance

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने और युवाओं के बीच वैज्ञानिक सोच तथा आत्मविश्वास को बढ़ावा देने में कलाम के योगदान को महत्वपूर्ण बताया।

सिंह ने कहा, “भारत के पूर्व राष्ट्रपति और प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में उनका योगदान अविस्मरणीय है।”

रक्षा मंत्री ने कलाम की सादगी और बच्चों तथा युवाओं के साथ उनके विशेष जुड़ाव को भी याद किया। उनके अनुसार, कलाम के आदर्श और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित करते रहेंगे।

एस. जयशंकर और जी. किशन रेड्डी ने दी श्रद्धांजलि S. Jaishankar and G. Kishan Reddy Pay Tribute

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी डॉ. कलाम के योगदान को याद करते हुए कहा कि देश के प्रति उनकी दूरदर्शिता, प्रतिबद्धता और समर्पण आज भी लोगों को प्रेरणा देते हैं। एक्स पर अपने संदेश में उन्होंने भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी।

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कलाम को अग्रणी वैज्ञानिक, दूरदर्शी नेता और सम्मानित राष्ट्रपति बताया। उन्होंने कहा कि कलाम ने अपना जीवन भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को आगे बढ़ाने और युवाओं की आकांक्षाओं को प्रोत्साहित करने में समर्पित किया।

रेड्डी ने ज्ञान, नवाचार और शिक्षा की शक्ति में कलाम के अटूट विश्वास को याद किया। उन्होंने कहा कि कलाम की सोच लोगों को बड़े सपने देखने और मजबूत, प्रगतिशील तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करती है।

योगी आदित्यनाथ ने भारत की रक्षा क्षमताओं में योगदान को सराहा Yogi Adityanath Praises Kalam’s Contribution to India’s Defence Capabilities

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें मजबूत भारत का दूरदर्शी विचारक बताया। उन्होंने अपने हिंदी संदेश में कहा कि कलाम के वैज्ञानिक ज्ञान और नेतृत्व ने देश की रक्षा क्षमताओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कलाम का प्रेरणादायक जीवन हमेशा देशवासियों को राष्ट्रहित में काम करने की प्रेरणा देता रहेगा। उनकी उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि ज्ञान, मेहनत और समर्पण के माध्यम से देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

देवेंद्र फडणवीस ने ‘वाचन प्रेरणा दिवस’ का किया उल्लेख Devendra Fadnavis Highlights ‘Vachan Prerna Divas’

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी पूर्व राष्ट्रपति को याद किया। उन्होंने शिक्षा और युवाओं में पढ़ने की आदत विकसित करने पर कलाम के जोर का उल्लेख किया।

फडणवीस ने एक्स पर लिखा कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति और ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर उन्हें सम्मानपूर्वक याद किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में इस दिन को ‘वाचन प्रेरणा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, ताकि लोगों, खासकर युवाओं में पढ़ने और ज्ञान हासिल करने की आदत को बढ़ावा दिया जा सके।

पवन कल्याण ने कलाम के संघर्ष और वैज्ञानिक उपलब्धियों को किया याद Pawan Kalyan Recalls Kalam’s Journey and Scientific Achievements

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और अभिनेता पवन कल्याण ने डॉ. कलाम के जीवन को शिक्षा, अनुशासन, मेहनत और दृढ़ संकल्प की मिसाल बताया। उन्होंने याद किया कि रामेश्वरम के एक साधारण परिवार से निकलकर कलाम देश के सबसे सम्मानित वैज्ञानिकों में शामिल हुए और भारत के राष्ट्रपति बने।

कल्याण ने भारत के स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-III (SLV-III), अग्नि और पृथ्वी मिसाइल कार्यक्रमों तथा 1998 के पोखरण-II परमाणु परीक्षणों में कलाम के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने उनकी ‘टेक्नोलॉजी विजन 2020’ पहल को भी याद किया, जिसका उद्देश्य तकनीक और नवाचार के माध्यम से भारत के विकास को गति देना था।

पवन कल्याण ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से कलाम के आदर्शों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का उनका सपना हर नागरिक के लिए एक जिम्मेदारी है। युवाओं को उद्देश्य के साथ सपने देखने, दृढ़ निश्चय के साथ काम करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की जरूरत है। उन्होंने वैज्ञानिक सोच, आत्मनिर्भरता, जीवनभर सीखते रहने और देश की प्रगति के प्रति समर्पण को कलाम की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

15 अक्टूबर को मनाई जाती है डॉ. कलाम की जयंती Dr. Kalam’s Birth Anniversary Is Observed on October 15

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। उनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था। साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, ज्ञान और वैज्ञानिक प्रतिभा के बल पर देश और दुनिया में विशेष पहचान बनाई।

कलाम ने वर्ष 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। अपनी सादगी, सहज व्यवहार और विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद के कारण वे बेहद लोकप्रिय रहे। उन्हें युवाओं के बीच रहना और उन्हें शिक्षा तथा विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना पसंद था। उनकी जयंती पर शिक्षण संस्थान भी शिक्षा, अध्ययन और वैज्ञानिक नवाचार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करते हैं। 15 अक्टूबर को उनके सम्मान में व्यापक रूप से ‘विश्व विद्यार्थी दिवस’ के रूप में भी जाना जाता है।

DRDO से ISRO तक: भारत के वैज्ञानिक विकास में अहम भूमिका From DRDO to ISRO: A Key Role in India’s Scientific Progress

कलाम ने वर्ष 1960 में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की। इसके बाद वर्ष 1969 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से जुड़े। इसरो में उन्होंने सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-III परियोजना का नेतृत्व किया। इस परियोजना ने स्वदेशी प्रक्षेपण यान के माध्यम से उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने की भारत की क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बाद में उन्होंने भारत के मिसाइल विकास कार्यक्रम में अहम योगदान दिया। एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम के तहत अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइल प्रणालियों के विकास को आगे बढ़ाया गया। रक्षा और मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में उनके योगदान के कारण उन्हें ‘भारत का मिसाइल मैन’ कहा जाने लगा।

वर्ष 1998 में पोखरण-II परमाणु परीक्षणों के दौरान भी कलाम ने वैज्ञानिक और संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय वे रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार थे। विज्ञान, तकनीक और राष्ट्रीय विकास में योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1981 में पद्म भूषण, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

कलाम की विरासत आज भी युवाओं को देती है प्रेरणा Kalam’s Legacy Continues to Inspire Young People

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ-साथ शिक्षा, नवाचार और युवा सशक्तीकरण के प्रति समर्पण के लिए भी याद किया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, लगातार सीखते रहने और अपनी क्षमताओं का उपयोग देश की प्रगति के लिए करने का संदेश दिया।

उनकी जयंती पर नेताओं की श्रद्धांजलि इस बात को रेखांकित करती है कि कलाम के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। विज्ञान के प्रति जिज्ञासा, शिक्षा में विश्वास, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रसेवा के मूल्य भारत के भविष्य को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनकी जीवन यात्रा आने वाली पीढ़ियों को यह प्रेरणा देती रहेगी कि साधारण शुरुआत के बावजूद ज्ञान, मेहनत और दृढ़ संकल्प से असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।