एयर इंडिया ने घरेलू उड़ानों में 22% की कटौती की, जानें पूरा कारण

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एयर इंडिया ने घरेलू उड़ानों में 22% की कटौती की, जानें पूरा कारण
28 May 2026
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News Synopsis

एयर इंडिया ने बढ़ते विमानन ईंधन (ATF) की कीमतों और परिचालन लागत में लगातार वृद्धि के कारण अपनी घरेलू उड़ान सेवाओं में अस्थायी रूप से 22% की कटौती की है। यह निर्णय एयरलाइन के वित्तीय दबाव और नेटवर्क समायोजन के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।

घरेलू उड़ान नेटवर्क में बड़ी कटौती

Air India ने अपनी घरेलू उड़ान सेवाओं में लगभग 22% की कमी लागू की है। वर्तमान में एयरलाइन लगभग 4,400 साप्ताहिक उड़ानें संचालित करती है, जिनमें से करीब 3,600 घरेलू सेवाएं हैं।

नए बदलावों के तहत गर्मी के पीक ट्रैवल सीजन के दौरान 790 से अधिक साप्ताहिक घरेलू उड़ानें प्रभावित होने की संभावना है। एयरलाइन ने इसे “अस्थायी रूप से उड़ान आवृत्तियों का पुनर्संतुलन (rationalisation)” बताया है।

यह कदम परिचालन दक्षता बनाए रखने और मौजूदा मांग व लागत परिस्थितियों के अनुसार क्षमता समायोजित करने की रणनीति का हिस्सा है।

चयनित रूट्स पर परिचालन पुनर्गठन

यह कटौती पूरे नेटवर्क पर समान रूप से लागू नहीं की गई है, बल्कि उन चुनिंदा घरेलू रूट्स पर केंद्रित है, जहां मांग और लागत में अधिक असंतुलन देखा गया है।

एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है, कि कुछ सेक्टर्स में उड़ानों की संख्या कम की जाएगी, लेकिन सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य आवश्यक कनेक्टिविटी बनाए रखना है।

विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर एयरलाइंस अब इस तरह का रूट पुनर्गठन बढ़ती लागत और कम लाभ वाले मार्गों को संतुलित करने के लिए कर रही हैं।

बढ़ती ईंधन कीमतों से एयरलाइन पर दबाव

इस निर्णय का मुख्य कारण लगातार बढ़ती एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें हैं। ईंधन लागत किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का एक बड़ा हिस्सा होती है।

मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे ईंधन दरें लगातार प्रभावित हो रही हैं।

एयर इंडिया पहले से ही टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद पुनर्गठन प्रक्रिया से गुजर रही है, जिससे इस दबाव का असर और बढ़ गया है।

वैश्विक विमानन चुनौतियां भी जिम्मेदार

एयरलाइन उद्योग इस समय कई बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें हवाई क्षेत्र प्रतिबंध, मौसम संबंधी बाधाएं और अंतरराष्ट्रीय मांग में उतार-चढ़ाव शामिल हैं।

दुनिया भर की एयरलाइंस लाभप्रदता बनाए रखने के लिए अपनी उड़ान क्षमता को पुनः समायोजित कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है, कि बढ़ते ईंधन खर्च और अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों ने हाल के वर्षों में विमानन उद्योग को सबसे कठिन दौर में पहुंचा दिया है।

पहले ही अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती

घरेलू उड़ानों में कटौती से पहले एयर इंडिया ने अंतरराष्ट्रीय सेवाओं में भी बड़ी कमी की घोषणा की थी।

एयरलाइन ने जून से अगस्त 2026 के बीच अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 27% कटौती की योजना बनाई थी। कई लंबी दूरी और क्षेत्रीय मार्गों पर सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी गई हैं।

प्रभावित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रूट्स:

  • दिल्ली–शिकागो
  • दिल्ली–न्यूआर्क
  • मुंबई–न्यूयॉर्क
  • दिल्ली–शंघाई
  • चेन्नई–सिंगापुर
  • मुंबई–ढाका
  • दिल्ली–माले

यह कदम लागत नियंत्रण और अधिक मांग वाले रूट्स पर फोकस बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

यात्रियों के लिए सहायता व्यवस्था

प्रभावित यात्रियों की सुविधा के लिए एयर इंडिया ने कई राहत उपायों की घोषणा की है।

इनमें शामिल हैं:

  • वैकल्पिक उड़ानों में पुनः बुकिंग
  • बिना अतिरिक्त शुल्क के तारीख बदलने की सुविधा
  • जरूरत पड़ने पर पूर्ण धनवापसी

एयरलाइन ने कहा है, कि उसकी ग्राहक सेवा टीमें यात्रियों की सहायता के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।

वित्तीय दबाव और कंपनी की स्थिति

सिंगापुर एयरलाइंस की हालिया रिपोर्ट के अनुसार एयर इंडिया को वित्तीय वर्ष मार्च 2026 तक 26,700 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

सिंगापुर एयरलाइंस, जिसके पास एयर इंडिया में 25.1% हिस्सेदारी है, ने भी मुनाफे में गिरावट दर्ज की है, जिसका एक कारण एयर इंडिया का प्रदर्शन और विस्तारा मर्जर का प्रभाव बताया गया है।

विश्लेषकों का मानना है, कि एयरलाइन अभी भी ट्रांजिशन फेज में है, जहां पुनर्गठन का असर वित्तीय परिणामों पर दिख रहा है।

उद्योग का भविष्य दृष्टिकोण

विशेषज्ञों के अनुसार यदि ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आगे भी क्षमता में ऐसे समायोजन देखे जा सकते हैं।

भारत में घरेलू हवाई यात्रा की मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन लागत बढ़ने से विस्तार की गति धीमी हो सकती है।

एयर इंडिया से उम्मीद है, कि ईंधन कीमतों में स्थिरता आने पर धीरे-धीरे अपनी पूरी क्षमता बहाल करेगी।

निष्कर्ष:

एयर इंडिया द्वारा घरेलू उड़ानों में 22% की कटौती यह दर्शाती है, कि बढ़ती ईंधन कीमतें और आर्थिक दबाव विमानन उद्योग को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। यह कदम अस्थायी है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जा रहा है।