रक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी पहल, सर्वम एआई विकसित करेगी स्वदेशी AI तकनीक

Share Us

28
रक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी पहल, सर्वम एआई विकसित करेगी स्वदेशी AI तकनीक
28 Oct 2026
7 min read

News Synopsis

भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी सर्वम AI (Sarvam AI) ने भारतीय रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय (Headquarters Integrated Defence Staff – HQ IDS) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना के लिए स्वदेशी AI आधारित तकनीक और उपयोगी प्रणालियां विकसित करना है।

इस समझौते के तहत सैन्य अभियानों, जवानों के प्रशिक्षण, सूचनाओं के विश्लेषण और महत्वपूर्ण फैसले लेने में सहायता करने वाले AI समाधान तैयार किए जाएंगे। इन तकनीकों का उपयोग तीनों सेनाओं के साथ संयुक्त रक्षा संगठनों की जरूरतों के अनुसार भी किया जा सकेगा।

यह पहल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम करने और संवेदनशील रक्षा प्रणालियों पर भारत का नियंत्रण बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

सर्वम AI और HQ IDS के बीच समझौते का उद्देश्य (Key Objectives of Sarvam AI and HQ IDS Partnership)

इस समझौते के अंतर्गत सर्वम AI भारतीय सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई AI प्रणालियों का डिजाइन, विकास और उपयोग शुरू करने में सहायता करेगी।

कंपनी इन प्रणालियों के लागू होने के बाद जरूरी तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराएगी, ताकि उनका रखरखाव और संचालन बेहतर तरीके से किया जा सके।

तीनों सेनाओं के लिए विकसित होंगे AI समाधान (AI Solutions to Be Developed for All Three Armed Services)

इस साझेदारी का लाभ भारतीय थलसेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना को मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा, HQ IDS के अंतर्गत काम करने वाले संयुक्त और एकीकृत रक्षा संगठनों की जरूरतों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

यह समझौता किसी एक AI उपकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से भविष्य में कई अलग-अलग परियोजनाओं पर काम करने की व्यवस्था तैयार की गई है।

सैन्य जरूरतों के अनुसार तैयार होगी तकनीक (Technology to Be Developed According to Military Requirements)

हर सैन्य सेवा की जिम्मेदारियां और कार्य करने की परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए AI प्रणालियों को भी उनकी विशेष आवश्यकताओं के अनुसार विकसित किया जाएगा।

HQ IDS इस प्रक्रिया में विभिन्न सेनाओं और संबंधित संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करने में सहायता करेगा।

सैन्य अभियानों और प्रशिक्षण में AI का उपयोग (Use of AI in Military Operations and Training)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बड़ी मात्रा में उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण करने और उसमें महत्वपूर्ण बदलाव या विशेष पैटर्न पहचानने में सहायता कर सकता है।

रक्षा क्षेत्र में ऐसी तकनीक सैन्य अधिकारियों को परिस्थितियों को बेहतर समझने और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर निर्णय लेने में मदद कर सकती है।

सैन्य अधिकारियों को फैसले लेने में मिलेगी सहायता (AI to Support Military Decision-Making)

नई AI प्रणालियों का उद्देश्य सैन्य अधिकारियों को उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना और जटिल आंकड़ों के विश्लेषण को आसान बनाना है।

इससे अधिकारियों को विभिन्न परिस्थितियों का आकलन करने और संभावित विकल्पों को समझने में सहायता मिल सकती है।

हालांकि, AI द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी का उपयोग किस तरह किया जाएगा, यह संबंधित सैन्य जरूरतों और निर्धारित प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।

जवानों के प्रशिक्षण में भी मददगार होगी तकनीक (AI Technology to Support Military Training)

इस साझेदारी में सैन्य प्रशिक्षण से संबंधित AI समाधान विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

ऐसी प्रणालियां प्रशिक्षण सामग्री को व्यवस्थित करने, जानकारी का विश्लेषण करने और प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियों को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकती हैं।

इनका वास्तविक उपयोग संबंधित परियोजनाओं के विकास और परीक्षण के बाद निर्धारित किया जाएगा।

तीनों सेनाओं को मिलेगा साझा AI तकनीकी ढांचा (Shared AI Infrastructure for Army, Navy and Air Force)

इस समझौते की एक महत्वपूर्ण विशेषता तीनों सेनाओं के लिए साझा AI तकनीकी क्षमताएं विकसित करना है।

इसमें फाउंडेशन मॉडल, एजेंट आधारित तकनीकी ढांचा, भू-स्थानिक प्रणालियां और जानकारी पहचानने वाली तकनीकें शामिल हो सकती हैं।

फाउंडेशन मॉडल और एजेंट आधारित तकनीक (Foundation Models and Agent-Based AI Infrastructure)

फाउंडेशन मॉडल ऐसी AI प्रणालियां होती हैं, जिन्हें बड़ी मात्रा में जानकारी पर प्रशिक्षित किया जाता है। इन्हें अलग-अलग कार्यों के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है।

वहीं, एजेंट आधारित AI तकनीक निर्धारित निर्देशों के अनुसार विभिन्न कार्यों को पूरा करने और जानकारी को व्यवस्थित करने में सहायता कर सकती है।

साझा तकनीक से सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय (Shared Technology to Improve Coordination Among Armed Forces)

साझा तकनीकी ढांचा तैयार होने से एक सैन्य सेवा के लिए विकसित समाधान और उससे प्राप्त अनुभव दूसरी सेवा की परियोजनाओं में भी उपयोगी हो सकते हैं।

इससे तकनीकी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और संयुक्त रक्षा संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

भू-स्थानिक तकनीक और आंकड़ों के विश्लेषण पर जोर (Focus on Geospatial Technology and Data Analysis)

समझौते में भू-स्थानिक तकनीक और जानकारी की पहचान करने वाली प्रणालियों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

भू-स्थानिक तकनीक किसी स्थान से जुड़ी जानकारी को समझने और उसका विश्लेषण करने में सहायता करती है।

रक्षा योजना बनाने में उपयोगी हो सकता है AI (AI May Support Defence Planning)

भू-स्थानिक जानकारी को अन्य उपलब्ध आंकड़ों के साथ जोड़कर AI प्रणालियां सैन्य अधिकारियों को परिस्थितियों का बेहतर आकलन करने में मदद कर सकती हैं।

ऐसी तकनीक का उपयोग सूचनाओं के विश्लेषण और परिचालन योजना से जुड़े कार्यों में किया जा सकता है।

हालांकि, समझौते के अंतर्गत विकसित होने वाले विशिष्ट उपकरणों और उनकी तैनाती के बारे में विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी मजबूती (Strengthening Atmanirbhar Bharat in Defence Technology)

सर्वम AI और HQ IDS की साझेदारी भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की नीति के अनुरूप है।

सरकार का उद्देश्य महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों और तकनीकों का विकास देश के भीतर बढ़ाना है, ताकि रणनीतिक जरूरतों के लिए विदेशी समाधानों पर निर्भरता कम हो सके।

संवेदनशील रक्षा जानकारी पर घरेलू नियंत्रण (Domestic Control Over Sensitive Defence Information)

रक्षा क्षेत्र में उपयोग होने वाली AI प्रणालियों के लिए जानकारी की सुरक्षा और तकनीकी नियंत्रण विशेष महत्व रखते हैं।

भारत में विकसित और घरेलू नियंत्रण वाले तकनीकी ढांचे पर चलने वाली प्रणालियां संवेदनशील जानकारी के प्रबंधन में अधिक नियंत्रण उपलब्ध करा सकती हैं।

इससे राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुसार तकनीक में बदलाव करना भी आसान हो सकता है।

सैन्य AI प्रणालियों में मानवीय निगरानी रहेगी महत्वपूर्ण (Human Oversight to Remain Important in Military AI Systems)

रक्षा मंत्रालय की AI संबंधी प्राथमिकताओं में निर्णय लेने में सहायता, लक्ष्यों की पहचान और अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त जानकारी का विश्लेषण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

हालांकि, सैन्य गतिविधियों में AI का उपयोग करते समय मानवीय निगरानी बनाए रखना एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

अंतिम फैसलों में मानव की भूमिका (Role of Human Oversight in Military Decisions)

AI प्रणालियां उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करके अधिकारियों के सामने उपयोगी जानकारी प्रस्तुत कर सकती हैं।

लेकिन सैन्य निर्णयों में इन प्रणालियों की भूमिका स्पष्ट रूप से निर्धारित करना जरूरी है।

इस साझेदारी में मानवीय निगरानी के महत्व को स्वीकार किया गया है। प्रत्येक परियोजना के लिए सुरक्षा उपाय और संचालन प्रक्रियाएं उसके उद्देश्य तथा उपयोग के अनुसार तय की जाएंगी।

सर्वम AI का चाणक्य विभाग संभालेगा रक्षा परियोजनाएं (Sarvam AI's Chanakya Division to Lead Defence Projects)

इस समझौते से जुड़ी रक्षा परियोजनाओं की जिम्मेदारी सर्वम AI के विशेष विभाग चाणक्य (Chanakya) को दी जाएगी।

यह विभाग राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र के लिए AI आधारित तकनीक विकसित करने पर केंद्रित है।

Sarvam 105B फाउंडेशन मॉडल का होगा इस्तेमाल (Sarvam 105B Foundation Model to Support Development)

चाणक्य विभाग कंपनी की मौजूदा AI तकनीकों का उपयोग करेगा, जिनमें Sarvam 105B फाउंडेशन मॉडल भी शामिल है।

इन तकनीकों के आधार पर भारतीय रक्षा जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित किए जाएंगे।

सर्वम AI के सह-संस्थापक प्रतीक कुमार (Pratyush Kumar) ने इस साझेदारी पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि देश की तीनों सेनाओं के साथ राष्ट्रीय रक्षा के लिए काम करना सम्मान और गर्व की बात है।

उन्होंने कंपनी पर भरोसा जताने के लिए HQ IDS का आभार भी व्यक्त किया।

निष्कर्ष: भारत की स्वदेशी रक्षा AI तकनीक को मिलेगा बढ़ावा (Conclusion: A Step Towards Indigenous Defence AI Capabilities)

सर्वम AI और HQ IDS के बीच हुआ समझौता भारतीय सशस्त्र बलों के लिए स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रणालियां विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस साझेदारी से सैन्य प्रशिक्षण, सूचना विश्लेषण, परिचालन गतिविधियों और निर्णय लेने में सहायता करने वाली नई तकनीकों के विकास का रास्ता खुल सकता है।

हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भविष्य में इन परियोजनाओं को किस तरह विकसित, परीक्षण और लागू किया जाता है।

TWN Exclusive