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Success Motivation

लेखन करें और आलोचनाओं से निराश न हों

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लेखन करें और आलोचनाओं से निराश न हों

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Post Highlights

आज हम आपको इस लेख के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि अगर आप लेखन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं, तो प्रतिक्रियाओं से ना डरे, किसी की अच्छी या बुरी प्रतिक्रिया से निराश ना हो, प्रतिक्रिया आपको भटकाती नहीं है, बल्कि सही रास्ता दिखाती है।

लेखन के क्षेत्र से जुड़ा हर व्यक्ति अपनी 100 प्रतिशत क्षमता के साथ लेखन को पाठकों के सामने प्रस्तुत करता है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि लेखन कर रहे व्यक्ति इस बात से कई बार निराश हो जाते हैं कि जो वह लिख रहे हैं उसे लोग पसंद कर रहे हैं या नहीं?

कई बार लेखन के क्षेत्र में जब किसी लेख को जनता के सामने प्रस्तुत किया जाता है तो उसे पढ़कर लोगों की प्रतिक्रिया अच्छी और बुरी दोनों ही हो सकती है। प्रतिक्रिया जो भी हो लेखन लिख रहे व्यक्ति को कभी निराश नहीं होना चाहिए। किसी की प्रतिक्रिया से आपके आत्मविश्वास में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। क्योंकि आप जो लिख रहे हैं, शायद कुछ लोग उसे नापसंद कर सकते हैं। जरूरी नहीं है कि हर लेखन को हर व्यक्ति पसंद करे, एक बात अच्छी तरह समझ लीजिए कि सब की मानसिकता अलग होती है और सब अपनी-अपनी मानसिकता के साथ किसी भी चीज को पसंद या नापसंद करते हैं। तो किसी के द्वारा गलत प्रतिक्रिया देने से हमें निराश होने की आवश्यकता बिल्कुल भी नहीं है। कुछ लोग आपकी आलोचना इसलिए भी कर सकते हैं, क्योंकि वह आप में और निखार देखना चाहते हैं। 

आज हम आपको इस लेख के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि अगर आप लेखन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं, तो प्रतिक्रियाओं से ना डरें, किसी की अच्छी या बुरी प्रतिक्रिया से ज्यादा ख़ुश या ज्यादा निराश ना हो, प्रतिक्रिया आपको भटकाती नहीं है, बल्कि सही रास्ता दिखाती है।

सबसे बड़ा कारण है, मानसिकता का फर्क  

लेखन के क्षेत्र से जुड़े लोग और सभी पाठक अलग-अलग क्षेत्रों से होते हैं। सभी की मानसिकता भिन्न होती है। हो सकता है कि कोई ऐसा लेख हो जो 100 लोगों को पसंद आए, लेकिन 10 लोगों को नापसंद हो, तो इसमें मानसिकता का फर्क हो सकता है। वहीं अगर कोई लेख 10 लोगों को पसंद आए और 100 लोगों को नापसंद आए तो भी निराश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह भी मानसिकता का ही फर्क है। हर समय पाठकों से मानसिकता का तालमेल बिठा पाना काफी मुश्किल हो सकता है। आप बस इस बात पर जोर दीजिए की, सच में जो जरूरी कमियां हैं उन कमियों को अवश्य दूर कीजिए। केवल कुछ जरूरी कमियों को दूर करके आप सभी के मन पर छा जाएंगे। 

इस तरह की परेशानी को दूर करने के लिए अपने लेख को प्रकाशित होने से पहले अपने कुछ साथियों के साथ साझा करें, उनकी प्रतिक्रिया आपके लिए लाभकारी होगी, प्रतिक्रिया के मुताबिक छोटे-मोटे फेरबदल कर आप जब लेख को प्रकाशित करेंगे तो आपको बदलाव जरूर नजर आएगा।

अपने क्षेत्र की भाषा का पड़ता है फर्क 

अगर आप लेखन के क्षेत्र में रुचि रखते हैं तो आप अपने लेख को पूरे भारत या विदेश में प्रकाशित करते होंगे। ऐसे में आपकी भाषा और किसी दूसरे राज्य की भाषा या देश विदेश में बोली जानें वाली भाषा से तालमेल बिठा पाना काफी मुश्किल होता है। क्योंकि सब की भाषा विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग होती है और बोली भी भिन्न होती है। उदाहरण के रूप में समझा जाए, तो अगर आप किसी एक भाषा, जिसमें आप अपने पाठकों के लिए लिख रहे हैं उस पर बात करते हैं... मान कर चलें कि अगर आप हिंदी में लिख रहे हैं तो हिंदी आपके पाठकों को जरूर समझ में आती होगी, लेकिन वह जिस क्षेत्र में है, जिस तरह की बोली वह बोलते हैं, उसके मुताबिक कई बार आपका लेख उनकी समझ से परे हो सकता है। तो इससे निराश होने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि जिस भी क्षेत्र के लिए आप लेख लिख रहे हैं। उसके मुताबिक अपने लेखन को इतना साधारण और सरल बनाएं कि निराश होने की गुंजाइश ही ना बचे।

शब्दों का तालमेल

लेखन में हमेशा शब्दों के तालमेल का बड़ा असर होता है। कई बार हम जो तालमेल बिठाते हैं वह शायद पाठकों को हमेशा पसंद ना आए, हमेशा लेखन के क्षेत्र में उपयोग आने वाले शब्दों का तालमेल सरल और साधारण रखें। शब्दों का सरल, सहज और साधारण तालमेल आपको लोगों की गलत प्रतिक्रिया से जरूर बचाएगा।

अनावश्यक गलतियां निकालने वालों को नज़रंदाज़ करें

कई बार आपको ऐसे लोग भी मिलेंगे जो अनावश्यक रूप से गलतियां निकालने की कोशिश करेंगे, लेकिन आपको इससे निराश होने की जरूरत नहीं है। ऐसे लोगों को आप नज़रंदाज़ करें और अपने काम पर ध्यान दें। यही आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प साबित होगा। ऐसे लोग केवल आपका वक्त बरबाद करते हैं। लेखन के क्षेत्र में आपको आपसे जलने वाले भी मिल सकते हैं, उन्हें जलने दीजिए और अपने आप को सरल बना कर रखिए। आपसे जलने वालो की अग्नि खुद ब खुद शांत हो जायेगी।

प्रतियोगियों से डरे नहीं...

देश और दुनिया में लेखन हर जगह प्रचलित है। आपके इस क्षेत्र में काफी प्रतियोगी हो सकते हैं। प्रतियोगियों से डरे नहीं, क्योंकि प्रतियोगियों से डर गए तो आप इस क्षेत्र में कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। हमेशा लोगों को आगे बढ़ाने की सोचें और प्रतियोगियों की प्रतिक्रिया से हमेशा कुछ सीखने की कोशिश करें। इस बात का अहम कभी ना आने दें कि आप बहुत अच्छा लिखते हैं, क्योंकि अहम आपको बुरी दिशा में ही लेकर जाएगा। 

अगर आप से बड़ा या छोटा कोई भी व्यक्ति आपको कोई सलाह दे, तो उसे हमेशा अच्छी सलाह मानकर स्वीकार करें, यही आपको लेखन के क्षेत्र में आगे बढ़ाएगा।

हम  जानते हैं आप लेखन के क्षेत्र में अच्छा लिख रहे होंगे। उम्मीद करते हैं इस लेख को पढ़कर आपको अच्छी ऊर्जा महसूस हुई हो और आज के बाद आपको किसी की अच्छी या बुरी प्रतिक्रिया निराश ना करें।

 

लेखन के क्षेत्र से जुड़ा हर व्यक्ति अपनी 100 प्रतिशत क्षमता के साथ लेखन को पाठकों के सामने प्रस्तुत करता है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि लेखन कर रहे व्यक्ति इस बात से कई बार निराश हो जाते हैं कि जो वह लिख रहे हैं उसे लोग पसंद कर रहे हैं या नहीं?

कई बार लेखन के क्षेत्र में जब किसी लेख को जनता के सामने प्रस्तुत किया जाता है तो उसे पढ़कर लोगों की प्रतिक्रिया अच्छी और बुरी दोनों ही हो सकती है। प्रतिक्रिया जो भी हो लेखन लिख रहे व्यक्ति को कभी निराश नहीं होना चाहिए। किसी की प्रतिक्रिया से आपके आत्मविश्वास में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। क्योंकि आप जो लिख रहे हैं, शायद कुछ लोग उसे नापसंद कर सकते हैं। जरूरी नहीं है कि हर लेखन को हर व्यक्ति पसंद करे, एक बात अच्छी तरह समझ लीजिए कि सब की मानसिकता अलग होती है और सब अपनी-अपनी मानसिकता के साथ किसी भी चीज को पसंद या नापसंद करते हैं। तो किसी के द्वारा गलत प्रतिक्रिया देने से हमें निराश होने की आवश्यकता बिल्कुल भी नहीं है। कुछ लोग आपकी आलोचना इसलिए भी कर सकते हैं, क्योंकि वह आप में और निखार देखना चाहते हैं। 

आज हम आपको इस लेख के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि अगर आप लेखन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं, तो प्रतिक्रियाओं से ना डरें, किसी की अच्छी या बुरी प्रतिक्रिया से ज्यादा ख़ुश या ज्यादा निराश ना हो, प्रतिक्रिया आपको भटकाती नहीं है, बल्कि सही रास्ता दिखाती है।

सबसे बड़ा कारण है, मानसिकता का फर्क  

लेखन के क्षेत्र से जुड़े लोग और सभी पाठक अलग-अलग क्षेत्रों से होते हैं। सभी की मानसिकता भिन्न होती है। हो सकता है कि कोई ऐसा लेख हो जो 100 लोगों को पसंद आए, लेकिन 10 लोगों को नापसंद हो, तो इसमें मानसिकता का फर्क हो सकता है। वहीं अगर कोई लेख 10 लोगों को पसंद आए और 100 लोगों को नापसंद आए तो भी निराश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह भी मानसिकता का ही फर्क है। हर समय पाठकों से मानसिकता का तालमेल बिठा पाना काफी मुश्किल हो सकता है। आप बस इस बात पर जोर दीजिए की, सच में जो जरूरी कमियां हैं उन कमियों को अवश्य दूर कीजिए। केवल कुछ जरूरी कमियों को दूर करके आप सभी के मन पर छा जाएंगे। 

इस तरह की परेशानी को दूर करने के लिए अपने लेख को प्रकाशित होने से पहले अपने कुछ साथियों के साथ साझा करें, उनकी प्रतिक्रिया आपके लिए लाभकारी होगी, प्रतिक्रिया के मुताबिक छोटे-मोटे फेरबदल कर आप जब लेख को प्रकाशित करेंगे तो आपको बदलाव जरूर नजर आएगा।

अपने क्षेत्र की भाषा का पड़ता है फर्क 

अगर आप लेखन के क्षेत्र में रुचि रखते हैं तो आप अपने लेख को पूरे भारत या विदेश में प्रकाशित करते होंगे। ऐसे में आपकी भाषा और किसी दूसरे राज्य की भाषा या देश विदेश में बोली जानें वाली भाषा से तालमेल बिठा पाना काफी मुश्किल होता है। क्योंकि सब की भाषा विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग होती है और बोली भी भिन्न होती है। उदाहरण के रूप में समझा जाए, तो अगर आप किसी एक भाषा, जिसमें आप अपने पाठकों के लिए लिख रहे हैं उस पर बात करते हैं... मान कर चलें कि अगर आप हिंदी में लिख रहे हैं तो हिंदी आपके पाठकों को जरूर समझ में आती होगी, लेकिन वह जिस क्षेत्र में है, जिस तरह की बोली वह बोलते हैं, उसके मुताबिक कई बार आपका लेख उनकी समझ से परे हो सकता है। तो इससे निराश होने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि जिस भी क्षेत्र के लिए आप लेख लिख रहे हैं। उसके मुताबिक अपने लेखन को इतना साधारण और सरल बनाएं कि निराश होने की गुंजाइश ही ना बचे।

शब्दों का तालमेल

लेखन में हमेशा शब्दों के तालमेल का बड़ा असर होता है। कई बार हम जो तालमेल बिठाते हैं वह शायद पाठकों को हमेशा पसंद ना आए, हमेशा लेखन के क्षेत्र में उपयोग आने वाले शब्दों का तालमेल सरल और साधारण रखें। शब्दों का सरल, सहज और साधारण तालमेल आपको लोगों की गलत प्रतिक्रिया से जरूर बचाएगा।

अनावश्यक गलतियां निकालने वालों को नज़रंदाज़ करें

कई बार आपको ऐसे लोग भी मिलेंगे जो अनावश्यक रूप से गलतियां निकालने की कोशिश करेंगे, लेकिन आपको इससे निराश होने की जरूरत नहीं है। ऐसे लोगों को आप नज़रंदाज़ करें और अपने काम पर ध्यान दें। यही आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प साबित होगा। ऐसे लोग केवल आपका वक्त बरबाद करते हैं। लेखन के क्षेत्र में आपको आपसे जलने वाले भी मिल सकते हैं, उन्हें जलने दीजिए और अपने आप को सरल बना कर रखिए। आपसे जलने वालो की अग्नि खुद ब खुद शांत हो जायेगी।

प्रतियोगियों से डरे नहीं...

देश और दुनिया में लेखन हर जगह प्रचलित है। आपके इस क्षेत्र में काफी प्रतियोगी हो सकते हैं। प्रतियोगियों से डरे नहीं, क्योंकि प्रतियोगियों से डर गए तो आप इस क्षेत्र में कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। हमेशा लोगों को आगे बढ़ाने की सोचें और प्रतियोगियों की प्रतिक्रिया से हमेशा कुछ सीखने की कोशिश करें। इस बात का अहम कभी ना आने दें कि आप बहुत अच्छा लिखते हैं, क्योंकि अहम आपको बुरी दिशा में ही लेकर जाएगा। 

अगर आप से बड़ा या छोटा कोई भी व्यक्ति आपको कोई सलाह दे, तो उसे हमेशा अच्छी सलाह मानकर स्वीकार करें, यही आपको लेखन के क्षेत्र में आगे बढ़ाएगा।

हम  जानते हैं आप लेखन के क्षेत्र में अच्छा लिख रहे होंगे। उम्मीद करते हैं इस लेख को पढ़कर आपको अच्छी ऊर्जा महसूस हुई हो और आज के बाद आपको किसी की अच्छी या बुरी प्रतिक्रिया निराश ना करें।

 







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