गूगल-एप्पल क्यों चाहते हैं बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े कानूनों में बदलाव?

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गूगल-एप्पल क्यों चाहते हैं बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े कानूनों में बदलाव?
05 Oct 2026
7 min read

News Synopsis

गूगल-एप्पल अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में ऐसे कानूनों के लिए पैरवी कर रहे हैं, जिनसे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ तकनीकी कंपनियों को कानूनी मुकदमों से सुरक्षा मिल सके। Politico की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों बड़ी तकनीकी कंपनियां राज्य के lawmakers से ऐसे नियमों का समर्थन करने की अपील कर रही हैं, जिनमें बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों और उम्र की जांच को लेकर जिम्मेदारी तय की जाए, लेकिन ऐप स्टोर कंपनियों पर सीधे मुकदमे का खतरा सीमित रहे।

यह प्रयास ऐसे समय में हो रहा है जब बड़ी तकनीकी कंपनियों को बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े कई मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों का आरोप है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल उनके या उनके बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हुआ है। दूसरी ओर, अमेरिका के कई राज्यों में बच्चों को उम्र के अनुसार ऑनलाइन सामग्री तक पहुंच देने के लिए age-verification यानी उम्र सत्यापन से जुड़े कानून भी बनाए जा रहे हैं।

गूगल-एप्पल की बढ़ती कानूनी चुनौतियां Growing Legal Challenges for Google and Apple

Google और Apple पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर कानूनी दबाव लगातार बढ़ रहा है। दोनों कंपनियां ऐसे कई मुकदमों का सामना कर रही हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म या ऐप से बच्चों को नुकसान पहुंचा।

Meta के साथ बढ़ी विधायी प्रतिस्पर्धा Legislative Competition With Meta

इस मामले में Google और Apple अकेले नहीं हैं। Meta Platforms भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े कानूनों को लेकर राज्यों में सक्रिय रूप से पैरवी कर रही है।

Meta का तर्क है कि बच्चों की उम्र की जांच की जिम्मेदारी अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म के बजाय app stores को दी जानी चाहिए। कंपनी ऐसे नियमों का समर्थन कर रही है, जिनके तहत ऐप स्टोर उपयोगकर्ता की उम्र की पुष्टि करें और नाबालिगों को उनकी उम्र के लिए अनुपयुक्त सामग्री वाले ऐप्स तक पहुंचने से रोकने में भूमिका निभाएं।

इस तरह Google, Apple और Meta के बीच यह मुद्दा केवल बच्चों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण हो गया है कि उम्र की जांच की जिम्मेदारी आखिर किसकी होनी चाहिए।

ऐप स्टोर अकाउंटेबिलिटी एक्ट पर जोर क्यों है? Why Is the App Store Accountability Act Important?

Google और Apple की मौजूदा पैरवी का मुख्य केंद्र App Store Accountability Act (ASAA) है। यह प्रस्तावित कानून ऐप स्टोर कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उम्र की जांच और माता-पिता की अनुमति जरूरी Age Verification and Parental Consent

ASAA के तहत ऐप स्टोर को उपयोगकर्ताओं की उम्र की जांच करनी होगी। यदि कोई नाबालिग किसी ऐप को डाउनलोड करना या उसके भीतर खरीदारी करना चाहता है, तो कुछ परिस्थितियों में माता-पिता की अनुमति भी आवश्यक होगी।

इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे बिना उचित निगरानी के ऐसे ऐप्स तक न पहुंच सकें, जो उनकी उम्र के लिए उपयुक्त नहीं हैं। हालांकि, प्रस्तावित नियमों में ऐप स्टोर कंपनियों पर महत्वपूर्ण कानूनी जिम्मेदारी भी डाली जा रही है।

इस कानून के अलग-अलग रूप इस साल Georgia, Arizona और Kansas में पेश किए गए हैं। इससे पता चलता है कि अमेरिका के कई राज्यों में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर कानून बनाने की कोशिश तेज हो गई है।

गूगल और एप्पल ने पेश किया अलग रास्ता Google and Apple Propose an Alternative Approach

ASAA के जवाब में Google और Apple की ओर से जुड़े lobbyists ने कानून के वैकल्पिक प्रारूप का प्रस्ताव रखा है। इन प्रस्तावों का एक प्रमुख उद्देश्य कंपनियों को सीधे मुकदमों से बचाना है।

राज्य के अटॉर्नी जनरल को मिले कार्रवाई का अधिकार Enforcement Could Be Left to State Attorneys General

तकनीकी कंपनियों द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक प्रारूपों में कानूनी कार्रवाई की जिम्मेदारी मुख्य रूप से state attorneys general यानी राज्यों के अटॉर्नी जनरल पर रखने की बात सामने आई है।

इन विकल्पों में उपयोगकर्ताओं से खुद अपनी उम्र बताने या पुष्टि करने पर भी काफी भरोसा किया जाता है। इसे self-attestation कहा जाता है। उदाहरण के लिए, कोई उपयोगकर्ता केवल अपनी जन्मतिथि बताकर यह घोषित कर सकता है कि वह किसी विशेष उम्र का है।

हालांकि, बच्चों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले कुछ संगठनों का मानना है कि यह तरीका पर्याप्त मजबूत नहीं है। उनका कहना है कि नाबालिग आसानी से गलत जन्मतिथि दर्ज करके उम्र की पाबंदी को पार कर सकते हैं।

उम्र सत्यापन को लेकर निजता की चिंता Privacy Concerns Over Age Verification

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए उम्र की जांच जरूरी मानी जा रही है, लेकिन इसके साथ निजता से जुड़ी चिंताएं भी सामने आ रही हैं।

बच्चों की निजी जानकारी सुरक्षित रखने की चुनौती The Challenge of Protecting Children's Personal Information

ASAA में ऐप स्टोर को उम्र की पुष्टि के लिए बाजार में उपलब्ध तकनीकों और तरीकों का इस्तेमाल करने की बात कही गई है। इसका मतलब है कि कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए अधिक जानकारी जुटानी पड़ सकती है कि उपयोगकर्ता बच्चा है या वयस्क।

निजता की रक्षा करने वाले कुछ lawmakers और संगठन इस व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं। उनका तर्क है कि उम्र सत्यापन के नाम पर बच्चों की निजी जानकारी का डिजिटल रूप से संग्रह या प्रसंस्करण उनकी निजता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

यही वजह है कि बच्चों की सुरक्षा और उनकी निजी जानकारी की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना कानून बनाने वालों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

कई राज्यों में कानून पारित, लेकिन कानूनी लड़ाई जारी Laws Passed in Several States, but Legal Battles Continue

ASAA से मिलते-जुलते कानून Utah, Louisiana और Alabama में पारित किए जा चुके हैं। हालांकि, इन कानूनों को लेकर तकनीकी उद्योग से जुड़े संगठनों ने अदालत का रुख किया है।

कंपनियों ने पहले संशोधन का मुद्दा उठाया Companies Raise First Amendment Concerns

तकनीकी उद्योग से जुड़े समूहों का कहना है कि ऐसे कानून नाबालिगों की First Amendment के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं।

उनका तर्क है कि यदि बच्चों को कई ऐप्स इस्तेमाल करने से पहले माता-पिता की मंजूरी लेना अनिवार्य किया जाता है, तो ऐसे ऐप्स भी प्रभावित हो सकते हैं जो विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति और जानकारी साझा करने का माध्यम हैं।

इस कारण अमेरिका में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर बनाई जा रही नीतियों के सामने एक जटिल सवाल खड़ा हो गया है—बच्चों को नुकसानदायक सामग्री से कैसे बचाया जाए, लेकिन उनकी निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी प्रभावित न हो।

Meta का 1.8 अरब डॉलर का समझौता Meta's $1.8 Billion Child-Safety Settlement

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर तकनीकी कंपनियों पर बढ़ते दबाव का एक बड़ा उदाहरण Meta से जुड़ा मामला है।

फेसबुक और इंस्टाग्राम को लेकर गंभीर आरोप Serious Claims Involving Facebook and Instagram

अगस्त में Meta ने राज्यों और अमेरिकी क्षेत्रों के साथ 1.8 अरब डॉलर के समझौते पर सहमति जताई थी। यह मामला इस आरोप से जुड़ा था कि Facebook और Instagram ने बच्चों को नुकसान पहुंचाया।

कैलिफोर्निया के एक न्यायाधीश ने इस समझौते को मंजूरी दे दी। इसे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामलों में Meta की ओर से किया गया अब तक का सबसे बड़ा भुगतान बताया गया है।

यह मामला इस बात का संकेत है कि अमेरिका में तकनीकी कंपनियों की बच्चों के प्रति जिम्मेदारी और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका पर कानूनी निगरानी लगातार बढ़ रही है।

बच्चों की सुरक्षा और तकनीकी कंपनियों की जिम्मेदारी Child Safety and the Responsibility of Technology Companies

Google और Apple की ओर से कानूनों में बदलाव की पैरवी और Meta से जुड़ा बड़ा समझौता यह दिखाता है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा अब तकनीकी उद्योग और सरकारों के बीच एक महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दा बन चुकी है।

एक तरफ सरकारें चाहती हैं कि बच्चों को उम्र के अनुरूप डिजिटल सामग्री मिले और उन्हें ऑनलाइन खतरों से बचाया जाए। दूसरी तरफ तकनीकी कंपनियां ऐसे नियमों से चिंतित हैं, जिनसे उन पर व्यापक कानूनी जिम्मेदारी आ सकती है।

आने वाले समय में अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में बनने वाले कानून यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं कि उम्र की जांच कौन करेगा, माता-पिता की अनुमति कैसे ली जाएगी, बच्चों की निजी जानकारी कितनी सुरक्षित रहेगी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नुकसान होने की स्थिति में कानूनी जिम्मेदारी किसकी होगी।