WhatsApp ने नया पेरेंट-मैनेज्ड अकाउंट फीचर लॉन्च किया
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WhatsApp ने टेस्ट किया नया ‘After Reading’ टाइमर फीचर, बढ़ेगी चैट प्राइवेसी
WhatsApp एक नए प्राइवेसी फीचर “After Reading” टाइमर का परीक्षण कर रहा है, जो डिसअपीयरिंग मैसेजेस पर उपयोगकर्ताओं को अधिक नियंत्रण प्रदान करेगा। यह अपडेट चैट की सुरक्षा और लचीलापन बढ़ाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।
WhatsApp ने डिसअपीयरिंग मैसेजेस में नया अपग्रेड शुरू किया
WhatsApp कथित तौर पर अपने डिसअपीयरिंग मैसेज फीचर का एक उन्नत संस्करण विकसित कर रहा है, जिसमें नया विकल्प “After Reading” टाइमर जोड़ा गया है। यह फीचर फिलहाल चुनिंदा बीटा यूजर्स के लिए टेस्ट किया जा रहा है, जैसा कि WABetaInfo की रिपोर्ट में बताया गया है।
इस अपडेट का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की प्राइवेसी को बेहतर बनाना है, जिससे मैसेज केवल एक तय समय के बजाय पढ़े जाने के बाद डिलीट हो सकें।
पहले यह फीचर Android बीटा यूजर्स के लिए विकसित किया गया था, और अब इसे धीरे-धीरे iOS बीटा टेस्टर्स तक भी पहुंचाया जा रहा है।
डिसअपीयरिंग मैसेजेस कैसे काम करते हैं (वर्तमान सिस्टम)
WhatsApp पहले से ही डिसअपीयरिंग मैसेजेस फीचर देता है, जिससे चैट में भेजे गए मैसेज एक निश्चित समय के बाद अपने आप डिलीट हो जाते हैं।
वर्तमान टाइमर विकल्प:
उपयोगकर्ता चुन सकते हैं:
- 24 घंटे
- 7 दिन
- 90 दिन
एक बार एक्टिवेट करने पर चैट के नए मैसेज तय समय के बाद खुद ही हट जाते हैं। यह फीचर:
- व्यक्तिगत चैट
- ग्रुप चैट
- नए चैट के डिफॉल्ट सेटिंग्स
पर लागू किया जा सकता है।
इसका उद्देश्य लंबे समय तक मैसेज स्टोरेज को कम करना और चैट को अधिक प्राइवेसी देना है।
नया ‘After Reading’ टाइमर फीचर क्या है?
नया “After Reading” विकल्प एक अधिक एडवांस्ड सिस्टम पेश करता है, जिसमें मैसेज का टाइमर भेजने के समय से नहीं बल्कि पढ़े जाने के बाद शुरू होता है।
मुख्य अवधारणा
- मैसेज पढ़े जाने तक उपलब्ध रहेगा
- पढ़ने के बाद टाइमर शुरू होगा
- यूजर को अधिक कंट्रोल मिलेगा
यह फीचर पारंपरिक टाइम-आधारित सिस्टम की तुलना में अधिक प्राइवेसी-केंद्रित है।
‘After Reading’ टाइमर कैसे काम करेगा
WhatsApp इस फीचर में अलग-अलग टाइमर विकल्पों का परीक्षण कर रहा है। इसे एक्टिवेट करने के बाद यूजर चुन सकते हैं कि मैसेज पढ़े जाने के बाद कितनी देर तक रहेगा।
संभावित टाइमर विकल्प:
- 5 मिनट
- 1 घंटा
- 12 घंटे
उदाहरण
अगर कोई यूजर 5 मिनट का After Reading टाइमर सेट करता है, तो मैसेज तब तक दिखाई देगा जब तक उसे खोला नहीं जाता। जैसे ही मैसेज पढ़ा जाएगा, 5 मिनट की गिनती शुरू हो जाएगी और उसके बाद मैसेज अपने आप डिलीट हो जाएगा।
लेकिन अगर मैसेज कभी नहीं खोला जाता, तो वह 24 घंटे बाद अपने आप हट जाएगा।
बेहतर प्राइवेसी और यूजर कंट्रोल
यह नया फीचर यूजर्स को चैट पर अधिक नियंत्रण देने के लिए डिजाइन किया गया है। यह केवल फिक्स टाइमिंग पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि यूजर के व्यवहार (मैसेज पढ़ने) पर आधारित है।
प्राइवेसी के फायदे:
- मैसेज लंबे समय तक सेव नहीं रहेंगे
- डिजिटल डेटा फुटप्रिंट कम होगा
- संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रहेगी
- पढ़ने के बाद ऑटो-डिलीट सुविधा
ऑप्शनल फीचर और मैनुअल एक्टिवेशन
WhatsApp ने इस फीचर को पूरी तरह वैकल्पिक रखा है।
सेटिंग्स व्यवहार:
- डिफॉल्ट रूप से बंद रहेगा
- यूजर को मैनुअली ऑन करना होगा
- चैट-टू-चैट एक्टिवेट किया जा सकता है।
- पुराने चैट पर कोई असर नहीं होगा
इससे यूजर को पूरी स्वतंत्रता मिलती है, कि वे इसे कब और कैसे उपयोग करें।
बीटा टेस्टिंग और उपलब्धता
फिलहाल यह फीचर सीमित बीटा यूजर्स के लिए उपलब्ध है। शुरुआत में इसे Android पर टेस्ट किया गया था और अब iOS बीटा यूजर्स को भी शामिल किया जा रहा है।
यह संकेत देता है, कि WhatsApp इसे जल्द ही व्यापक स्तर पर लॉन्च कर सकता है, हालांकि अंतिम बदलाव यूजर फीडबैक पर निर्भर होंगे।
WhatsApp यूजर्स के लिए यह फीचर क्यों महत्वपूर्ण है।
WhatsApp लगातार अपने प्राइवेसी फीचर्स को मजबूत कर रहा है।
यह फीचर दर्शाता है:
- बेहतर प्राइवेसी की बढ़ती मांग
- मैसेज कंट्रोल की जरूरत
- अन्य मैसेजिंग ऐप्स से प्रतिस्पर्धा
निष्कर्ष:
WhatsApp का “After Reading” टाइमर फीचर डिसअपीयरिंग मैसेजेस को एक नए स्तर पर ले जाता है। यह फीचर उपयोगकर्ताओं को पढ़े जाने के बाद मैसेज डिलीट करने का नियंत्रण देता है, जिससे प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा।
अगर यह फीचर सफलतापूर्वक लॉन्च होता है, तो यह WhatsApp के सबसे उपयोगी अपडेट्स में से एक साबित हो सकता है।
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मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp ने अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नया 'पेरेंट-मैनेज्ड अकाउंट' मॉडल पेश किया है। इस फीचर के जरिए अब छोटे बच्चे भी ऐप का इस्तेमाल कर सकेंगे, लेकिन पूरी निगरानी उनके माता-पिता या अभिभावकों के हाथ में रहेगी। यह बदलाव इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि अभी तक ऐप इस्तेमाल करने की न्यूनतम उम्र 13 साल तय थी। हालांकि टेक कंपनियों को लंबे समय से यह महसूस हो रहा था, कि कई बच्चे पहले से ही किसी न किसी तरीके से मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में कंपनी ने इस उपयोग को अधिक सुरक्षित और नियंत्रित बनाने का रास्ता चुना है।
क्या है, पेरेंट-मैनेज्ड अकाउंट मॉडल?
Meta Platforms के स्वामित्व वाले WhatsApp के इस नए फीचर में माता-पिता अपने बच्चों के लिए अकाउंट सेटअप कर पाएंगे। इस मॉडल में बच्चों को ऐप के सभी फीचर्स की पूरी आजादी नहीं होगी। बच्चे मुख्य रूप से मैसेजिंग और कॉलिंग जैसे बेसिक फीचर्स का ही इस्तेमाल कर पाएंगे। इसके अलावा कई अन्य फीचर्स सीमित या पूरी तरह बंद रहेंगे। कंपनी का कहना है, कि यह सिस्टम परिवारों और डिजिटल सेफ्टी एक्सपर्ट्स की सलाह के बाद तैयार किया गया है, ताकि बच्चे सुरक्षित माहौल में ऑनलाइन बातचीत कर सकें।
पैरेंट्स के पास होगा पूरा कंट्रोल
इस नए मॉडल की सबसे खास बात यह है, कि बच्चों के अकाउंट पर पैरेंट्स का मजबूत कंट्रोल रहेगा। माता-पिता तय करेंगे कि बच्चा किन लोगों से बात कर सकता है, और किनसे नहीं। यानी कॉन्टैक्ट लिस्ट भी वही मैनेज करेंगे।
इसके अलावा अनजान लोगों से चैट करने या किसी अनजाने ग्रुप में जुड़ने जैसी गतिविधियों पर भी पाबंदी लगाई जा सकेगी। प्राइवेसी सेटिंग्स बदलने का अधिकार भी केवल पैरेंट्स के पास होगा। इन सभी सेटिंग्स को सुरक्षित रखने के लिए कंपनी ने पेरेंट पिन का विकल्प भी दिया है।
क्या पैरेंट्स पढ़ पाएंगे बच्चों के मैसेज?
हालांकि पैरेंट्स को अकाउंट कंट्रोल मिलेगा, लेकिन बच्चों की निजी बातचीत सुरक्षित रहेगी। कंपनी ने साफ किया है, कि मैसेज पहले की तरह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहेंगे। इसका मतलब है, कि संदेश केवल भेजने वाले और पाने वाले के बीच ही रहेंगे। यानी पैरेंट्स कॉन्टैक्ट और सेटिंग्स को नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन वे बच्चों के निजी मैसेज को सीधे पढ़ नहीं पाएंगे। कंपनी का कहना है, कि इस व्यवस्था से बच्चों की सुरक्षा और उनकी प्राइवेसी दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।
फेज में रोलआउट होगा नया फीचर
कंपनी इस फीचर को धीरे-धीरे दुनिया भर में जारी कर रही है। आने वाले कुछ हफ्तों में यह ज्यादा देशों में उपलब्ध हो सकता है। टेक इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है, कि यह कदम बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। हालांकि कुछ प्राइवेसी एक्सपर्ट्स अभी भी बच्चों के डेटा की सुरक्षा और सोशल मीडिया के शुरुआती इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
अलग सिम कार्ड या फोन की जरूरत होगी?
मेटा कंपनी ने पेरेंट मैनेज्ड WhatsApp अकाउंट के लिए अलग सिम कार्ड को लेकर अभी जानकारी नहीं दी है, लेकिन नियम बनाया है, कि बच्चा जिस मोबाइल सेट पर WhatsApp चलाएगा, वह माता-पिता के मेन अकाउंट से लिंक रहेगा। कंपनी WhatsApp के नए फीचर को धीरे-धीरे लॉन्च करेगी। आने वाले कुछ हफ्तों या दिनों में यह नया फीचर दुनियाभर के व्हाट्सऐप यूजर्स के लिए उपलब्ध हो जाएगा।


