TransUnion CIBIL रिपोर्ट: भारत में 74% लोगों तक पहुंचा औपचारिक रिटेल क्रेडिट
News Synopsis
भारत में औपचारिक (Formal) रिटेल क्रेडिट तक लोगों की पहुंच पिछले एक दशक में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। TransUnion CIBIL की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2017 में जहां केवल 35% पात्र उपभोक्ताओं ने कम-से-कम एक बार औपचारिक ऋण (Formal Credit) लिया था, वहीं मार्च 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 74% हो गया। यह बदलाव देश में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion), डिजिटल बैंकिंग और संगठित ऋण प्रणाली के विस्तार का स्पष्ट संकेत है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में भारत की क्रेडिट-योग्य (Credit Eligible) आबादी भी लगभग 79 करोड़ से बढ़कर 89 करोड़ हो गई। इसके बावजूद औपचारिक क्रेडिट तक पहुंच में हुई तेज वृद्धि दर्शाती है कि अधिक लोग अब बैंक, एनबीएफसी और अन्य विनियमित वित्तीय संस्थानों की सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं।
नौ वर्षों में सक्रिय उधारकर्ताओं की संख्या दोगुनी से अधिक हुई (Active Borrowers More Than Doubled in Nine Years)
TransUnion CIBIL की रिपोर्ट बताती है कि केवल औपचारिक क्रेडिट तक पहुंच ही नहीं बढ़ी, बल्कि ऐसे लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है जो सक्रिय रूप से ऋण उत्पादों (Credit Products) का उपयोग कर रहे हैं।
मार्च 2017 में जहां केवल 11% लोग सक्रिय उधारकर्ता (Active Borrowers) थे, वहीं मार्च 2026 तक यह संख्या बढ़कर 28% हो गई।
यह दर्शाता है कि लोग केवल बैंक खाते या क्रेडिट सुविधाएं ही नहीं ले रहे, बल्कि अपनी व्यक्तिगत, पारिवारिक और उपभोक्ता जरूरतों को पूरा करने के लिए औपचारिक ऋण का नियमित उपयोग भी कर रहे हैं।
यह प्रवृत्ति संगठित वित्तीय संस्थानों पर बढ़ते भरोसे और भारत में रिटेल क्रेडिट की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
उपभोग आधारित ऋण बने रिटेल क्रेडिट वृद्धि का सबसे बड़ा आधार (Consumption Credit Emerges as the Biggest Driver of Retail Lending Growth)
भारत में रिटेल क्रेडिट की तेज वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण उपभोग (Consumption) आधारित ऋणों की बढ़ती मांग रही है।
किन ऋण उत्पादों की मांग सबसे अधिक बढ़ी? (Which Credit Products Witnessed the Highest Growth?)
रिपोर्ट के अनुसार, निम्नलिखित ऋण उत्पाद पहली बार ऋण लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए सबसे लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरे हैं—
- पर्सनल लोन (Personal Loans)
- क्रेडिट कार्ड (Credit Cards)
- कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन (Consumer Durable Loans)
इन उत्पादों ने लाखों नए ग्राहकों को पहली बार औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ा।
उपभोग ऋण लेने वाले ग्राहकों की हिस्सेदारी बढ़ी (Share of Consumption Credit Borrowers Increased Significantly)
रिपोर्ट बताती है कि 2017 में जहां केवल 34% सक्रिय उधारकर्ताओं के पास उपभोग आधारित ऋण थे, वहीं 2026 तक यह हिस्सेदारी बढ़कर 51% हो गई।
इसी अवधि में इन उत्पादों का उपयोग करने वाले ग्राहकों की संख्या लगभग चार गुना बढ़ गई।
यह दर्शाता है कि भारतीय परिवार अब केवल घर या वाहन खरीदने के लिए ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों, शिक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और लाइफस्टाइल खर्चों के लिए भी औपचारिक ऋण का उपयोग कर रहे हैं।
पूरे देश में तेजी से बढ़ रहा है वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion Continues to Expand Across India)
रिपोर्ट के अनुसार, औपचारिक क्रेडिट का विस्तार केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहा।
देश के कई छोटे शहरों, अर्ध-शहरी (Semi-Urban) और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बैंकिंग और ऋण सेवाओं की पहुंच तेजी से बढ़ी है।
उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में उल्लेखनीय वृद्धि (Northern and Central States Witness Significant Growth)
कई राज्यों ने औपचारिक क्रेडिट अपनाने में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।
उदाहरण के लिए—
- उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 8% से बढ़कर 11% हो गई।
- मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 4% से बढ़कर 6% पहुंच गई।
- बिहार की हिस्सेदारी 3% से बढ़कर 5% हो गई।
ये आंकड़े बताते हैं कि अब औपचारिक बैंकिंग और ऋण सुविधाएं देश के दूर-दराज क्षेत्रों तक भी तेजी से पहुंच रही हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और सरकारी योजनाओं ने निभाई अहम भूमिका (Digital Platforms and Government Initiatives Played a Key Role)
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण रहे हैं—
- डिजिटल बैंकिंग का विस्तार
- ऑनलाइन लोन प्लेटफॉर्म
- सरकारी वित्तीय समावेशन योजनाएं
- बेहतर बैंकिंग नेटवर्क
- डिजिटल पहचान और क्रेडिट मूल्यांकन प्रणाली
इन पहलों ने लाखों लोगों को पहली बार औपचारिक वित्तीय सेवाओं से जोड़ने में मदद की है।
पहली बार ऋण लेने वाले छोटे असुरक्षित लोन को दे रहे हैं प्राथमिकता (First-Time Borrowers Prefer Small Unsecured Loans)
भारत में उपभोक्ताओं की उधार लेने की आदतों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
अब होम लोन नहीं, छोटे लोन बन रहे हैं पहली पसंद (Small Loans Replace Home Loans as the First Credit Choice)
पहले जहां अधिकांश लोग अपने पहले ऋण के रूप में घर या वाहन खरीदने के लिए सुरक्षित (Secured) लोन लेते थे, वहीं आज के युवा और नए ग्राहक छोटे Unsecured Loans को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इन ऋणों का उपयोग मुख्य रूप से किया जा रहा है—
- स्मार्टफोन खरीदने के लिए
- उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स
- घरेलू उपकरण
- लाइफस्टाइल उत्पाद
- शिक्षा संबंधी खर्च
- आपातकालीन वित्तीय जरूरतें
इन ऋणों की लोकप्रियता का मुख्य कारण है—
- तेज स्वीकृति (Quick Approval)
- कम दस्तावेज़ी प्रक्रिया
- पूरी तरह डिजिटल आवेदन
- आसान उपलब्धता
कई युवाओं के लिए यही ऋण औपचारिक वित्तीय प्रणाली में उनका पहला कदम बन रहे हैं।
महिलाओं और ग्रामीण उपभोक्ताओं की औपचारिक ऋण तक पहुंच बढ़ी (Women and Rural Consumers Gain Greater Access to Formal Credit)
रिपोर्ट में एक और सकारात्मक रुझान सामने आया है कि अब महिलाओं की भागीदारी भी औपचारिक ऋण (Formal Credit) प्रणाली में लगातार बढ़ रही है।
बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों ने महिलाओं के लिए विशेष ऋण योजनाएं, डिजिटल बैंकिंग सेवाएं और वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिससे अधिक महिलाएं औपचारिक वित्तीय सेवाओं का लाभ उठा रही हैं।
इसके साथ ही, अर्ध-शहरी (Semi-Urban) और ग्रामीण क्षेत्रों (Rural Areas) में भी औपचारिक ऋण की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इससे लोगों की अनौपचारिक या महंगे ब्याज वाले ऋणदाताओं (Moneylenders) पर निर्भरता कम हो रही है।
संस्थागत ऋण तक बेहतर पहुंच से परिवारों को पारदर्शी ब्याज दरों पर वित्तीय सहायता मिल रही है और जिम्मेदार उधारी (Responsible Borrowing) को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह बदलाव देश के विभिन्न आय वर्गों और क्षेत्रों में संतुलित आर्थिक विकास को मजबूत करने में मदद कर रहा है।
रिटेल क्रेडिट भारत की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था को दे रहा है मजबूती (Retail Credit Is Strengthening India's Consumer Economy)
भारत में रिटेल लेंडिंग (Retail Lending) का तेजी से विस्तार अब उपभोक्ता-आधारित अर्थव्यवस्था (Consumption-Driven Economy) का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।
जैसे-जैसे अधिक लोगों को औपचारिक ऋण की सुविधा मिल रही है, वैसे-वैसे उनकी खरीदारी क्षमता (Purchasing Power) भी बढ़ रही है। इससे कई उद्योगों में मांग बढ़ रही है और आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है।
रिटेल क्रेडिट किन क्षेत्रों में बढ़ा रहा है खर्च? (Which Sectors Are Benefiting from Retail Credit?)
रिटेल क्रेडिट के कारण निम्न क्षेत्रों में उपभोक्ता खर्च बढ़ा है—
- उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स (Consumer Electronics)
- घरेलू उपकरण (Home Appliances)
- शिक्षा (Education)
- स्वास्थ्य सेवाएं (Healthcare)
- यात्रा एवं पर्यटन (Travel)
- लाइफस्टाइल उत्पाद (Lifestyle Products)
उपभोक्ताओं का बढ़ता खर्च व्यवसायों की बिक्री बढ़ाता है, नए रोजगार पैदा करता है और समग्र आर्थिक विकास को गति देता है। साथ ही अधिक लोग औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ते हैं, जिससे उपभोक्ताओं और ऋणदाताओं दोनों को लाभ मिलता है।
तकनीक ने औपचारिक ऋण विस्तार में निभाई बड़ी भूमिका (Technology Has Played a Major Role in Credit Expansion)
भारत में डिजिटल परिवर्तन (Digital Transformation) ने औपचारिक ऋण प्रणाली के विस्तार को काफी तेज कर दिया है।
नई तकनीकों की मदद से बैंक और वित्तीय संस्थान अब—
- ऋण आवेदन तेजी से प्रोसेस कर रहे हैं।
- क्रेडिट मूल्यांकन (Credit Assessment) बेहतर बना रहे हैं।
- अधिक लोगों तक अपनी सेवाएं पहुंचा रहे हैं।
- पेपरलेस लोन अप्रूवल (Paperless Loan Approval) दे रहे हैं।
- ग्राहकों का अनुभव (Customer Experience) बेहतर बना रहे हैं।
फिनटेक कंपनियों, डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म और उन्नत क्रेडिट सूचना प्रणालियों (Credit Information Systems) ने पहली बार ऋण लेने वालों के लिए प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है। इन नवाचारों ने ऋण वितरण को अधिक तेज, पारदर्शी और कुशल बनाया है।
भारत के रिटेल क्रेडिट बाजार का भविष्य (Future Outlook for India's Retail Credit Market)
भारत के औपचारिक रिटेल क्रेडिट बाजार का भविष्य काफी सकारात्मक दिखाई देता है।
स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग, डिजिटल वित्तीय ढांचे (Digital Financial Infrastructure) के विस्तार और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहलों के कारण आने वाले वर्षों में औपचारिक ऋण लेने वाले लोगों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
वित्तीय संस्थान डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) की मदद से ग्राहकों के लिए अधिक व्यक्तिगत (Personalized) ऋण उत्पाद भी पेश कर सकते हैं।
जैसे-जैसे जिम्मेदार ऋण वितरण (Responsible Lending) मजबूत होगा और लोगों के लिए ऋण लेना आसान बनेगा, रिटेल क्रेडिट भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख आधार बनने की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
भारत की औपचारिक रिटेल क्रेडिट प्रणाली ने पिछले एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति की है। ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट बताती है कि देश में संस्थागत ऋण तक पहुंच रखने वाले लोगों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है, जबकि ऋण लेने के योग्य आबादी भी लगातार बढ़ी है।
व्यक्तिगत ऋण, क्रेडिट कार्ड और उपभोक्ता वित्त (Consumer Finance) जैसे उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता ने वित्तीय समावेशन को नई गति दी है। महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि औपचारिक वित्तीय सेवाएं अब समाज के बड़े हिस्से तक पहुंच रही हैं।
डिजिटल लेंडिंग, फिनटेक और सरकारी पहलों के साथ भारत का रिटेल क्रेडिट बाजार आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होने की संभावना है। इससे घरेलू खर्च बढ़ेगा, वित्तीय समावेशन मजबूत होगा और देश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक गति मिलेगी।


