TRAI के नए नियम: AI से पहचाने गए स्पैमर्स पर बिना शिकायत भी होगी कार्रवाई
News Synopsis
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी TRAI ने अनचाही व्यावसायिक कॉल और संदेशों यानी स्पैम पर लगाम लगाने के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है। नए नियमों के तहत अब टेलीकॉम कंपनियों को उन संदिग्ध स्पैमर्स के खिलाफ भी कार्रवाई करनी होगी, जिनकी पहचान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग आधारित प्रणालियों से हुई है। इसके लिए उपभोक्ता की ओर से शिकायत दर्ज किया जाना जरूरी नहीं होगा।
ये बदलाव टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशंस कस्टमर प्रेफरेंस (तीसरा संशोधन) रेगुलेशंस, 2026 Telecom Commercial Communications Customer Preference (Third Amendment) Regulations, 2026 के तहत किए गए हैं। नए प्रावधानों का उद्देश्य स्पैम की पहचान और उस पर कार्रवाई की प्रक्रिया को अधिक सक्रिय बनाना है। अब टेलीकॉम कंपनियां केवल उपभोक्ताओं की शिकायतों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी तकनीक आधारित निगरानी प्रणालियों से मिले संकेतों के आधार पर भी संदिग्ध गतिविधियों की जांच कर सकेंगी।
टेलीकॉम कंपनियों को दो घंटे में सूचना साझा करनी होगी Telecom Operators Must Share Information Within Two Hours
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी Telecom Regulatory Authority of India,TRAI के नए नियमों के तहत यदि किसी टेलीकॉम कंपनी की AI आधारित प्रणाली किसी आने वाली कॉल को संदिग्ध स्पैम के रूप में पहचानती है, तो उस कॉल की जानकारी उस सेवा प्रदाता को भेजनी होगी, जहां से कॉल शुरू हुई थी।
संदिग्ध कॉल की जानकारी देने की समय सीमा Time Limit for Reporting a Suspected Call
इस जानकारी को संदिग्ध गतिविधि की पहचान होने के दो घंटे के भीतर साझा करना होगा। इसके बाद संबंधित मूल टेलीकॉम ऑपरेटर की जिम्मेदारी होगी कि वह उपलब्ध KYC यानी ग्राहक पहचान संबंधी जानकारी के आधार पर संदेश या कॉल भेजने वाले की पहचान करे।
एक बार संदिग्ध भेजने वाले की पहचान हो जाने के बाद उसकी जानकारी दूसरे टेलीकॉम ऑपरेटरों के साथ भी साझा करनी होगी। यह जानकारी एक कारोबारी दिन के भीतर साझा करनी होगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे लोगों या संस्थाओं की पहचान करना है जो बड़े पैमाने पर अनचाही व्यावसायिक कॉल कर रहे हैं, भले ही कॉल पाने वाले उपभोक्ता ने अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज न की हो।
दूसरे टेलीकॉम कनेक्शन की भी होगी जांच Other Telecom Connections Will Also Be Examined
नए नियमों में टेलीकॉम कंपनियों को केवल उस नंबर की जांच तक सीमित नहीं रखा गया है, जिससे संदिग्ध कॉल की गई थी। कंपनियों को यह भी देखना होगा कि संदिग्ध भेजने वाले ने पिछले 10 दिनों में उनके नेटवर्क पर दूसरे टेलीकॉम कनेक्शनों का इस्तेमाल तो नहीं किया।
इस प्रावधान का उद्देश्य उन लोगों पर रोक लगाना है जो स्पैम गतिविधि के लिए बार-बार नए नंबर या अलग-अलग टेलीकॉम संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं।
पांच या उससे अधिक नंबरों पर कार्रवाई का आधार Five or More Flagged CLIs Can Trigger Action
यदि किसी भेजने वाले से जुड़े पांच या उससे अधिक Called Line Identifications यानी CLIs निर्धारित अवधि के दौरान संदिग्ध या स्पैम के रूप में चिन्हित किए जाते हैं, तो टेलीकॉम कंपनियों को उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू करनी होगी।
इससे कार्रवाई केवल किसी एक फोन नंबर तक सीमित नहीं रहेगी। किसी संदिग्ध स्पैमर से जुड़े दूसरे टेलीकॉम संसाधनों को भी जांच और नियामकीय कार्रवाई के दायरे में लाया जा सकेगा।
पहली AI-आधारित पहचान पर 15 दिन की रोक First AI-Detected Violation Can Lead to a 15-Day Block
नए नियमों में AI आधारित प्रणाली से पहचाने गए उल्लंघनों के लिए अलग-अलग स्तर की कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
यदि किसी भेजने वाले की पहली बार पहचान नियमों का उल्लंघन करते हुए होती है, तो उससे जुड़े सभी आउटगोइंग यानी बाहर जाने वाले संचार सेवाओं को 15 दिनों तक बंद किया जा सकता है।
खास बात यह है कि यह रोक केवल उसी कनेक्शन तक सीमित नहीं होगी, जिससे संदिग्ध स्पैम संदेश या कॉल भेजी गई थी। संबंधित भेजने वाले से जुड़े दूसरे टेलीकॉम संसाधनों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई संदिग्ध भेजने वाला दूसरे नंबर या अन्य टेलीकॉम संसाधन का इस्तेमाल करके कार्रवाई से बच न सके।
बार-बार उल्लंघन पर एक साल तक प्रतिबंध Repeat Offenders Can Face One-Year Restrictions
बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले भेजने वालों के लिए कार्रवाई और कड़ी होगी। ऐसे मामलों में SIM कार्ड, Primary Rate Interface (PRI) कनेक्शन और Session Initiation Protocol (SIP) ट्रंक जैसे टेलीकॉम संसाधनों को एक साल तक बंद किया जा सकता है।
ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है Senders Can Also Be Blacklisted
दोबारा उल्लंघन करने वाले भेजने वाले को ब्लैकलिस्ट में भी शामिल किया जा सकता है। इसके बाद टेलीकॉम कंपनियां प्रतिबंध की अवधि के दौरान उसे नए कनेक्शन देने से इनकार कर सकती हैं।
इस प्रावधान का उद्देश्य बार-बार टेलीकॉम नेटवर्क का गलत इस्तेमाल करने वाले लोगों या संस्थाओं के लिए नए कनेक्शन हासिल करना मुश्किल बनाना है।
कॉलर आईडी ऐप्स के लिए भी नए प्रतिबंध New Restrictions on Caller ID Applications
TRAI ने कॉल प्रबंधन से जुड़े ऐप और इसी तरह की सेवाओं के लिए भी नए प्रावधान पेश किए हैं। ऐसे ऐप उन नंबर श्रृंखलाओं से आने वाली कॉल को अपनी ओर से टैग, ब्लॉक या फिल्टर नहीं कर सकेंगे, जिन्हें TRAI या सरकार ने आधिकारिक या व्यावसायिक संचार के लिए निर्धारित किया है।
अधिकृत नंबरों की गलत पहचान रोकने की कोशिश Preventing Misidentification of Authorised Numbers
इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार या नियामक द्वारा अधिकृत संचार के लिए इस्तेमाल की जाने वाली नंबर श्रृंखलाओं को तीसरे पक्ष के कॉल प्रबंधन ऐप गलती से स्पैम या संदिग्ध कॉल के रूप में चिन्हित न करें।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उपभोक्ता अपने फोन पर आने वाली कॉल को नियंत्रित नहीं कर पाएंगे।
निजी फोन पर उपभोक्ताओं का नियंत्रण जारी रहेगा Consumers Retain Control Over Personal Devices
TRAI के नए नियमों के बावजूद उपभोक्ताओं को अपने निजी उपकरणों पर कॉल को नियंत्रित करने का अधिकार बना रहेगा। लोग अपनी पसंद के अनुसार किसी कॉल को ब्लॉक या फिल्टर कर सकते हैं।
इसका अर्थ है कि नए नियमों का उद्देश्य उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत पसंद को खत्म करना नहीं, बल्कि टेलीकॉम नेटवर्क के स्तर पर संदिग्ध और अनचाही व्यावसायिक गतिविधियों की पहचान और रोकथाम को मजबूत करना है।
AI आधारित निगरानी से स्पैम पर नियंत्रण AI-Based Monitoring to Strengthen Spam Control
TRAI के नए कदम स्पैम नियंत्रण के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाते हैं। पहले अनचाही व्यावसायिक कॉल और संदेशों की पहचान में उपभोक्ताओं की शिकायतों की बड़ी भूमिका थी। अब टेलीकॉम कंपनियां अपनी AI और मशीन लर्निंग प्रणालियों से मिले संकेतों के आधार पर भी संदिग्ध गतिविधियों की जांच शुरू कर सकती हैं।
संदिग्ध स्पैमर्स की पहचान होगी तेज Faster Identification of Suspected Spammers
दो घंटे के भीतर सूचना साझा करने की समय सीमा इस पूरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों के बीच जानकारी के आदान-प्रदान में तेजी आने की उम्मीद है।
संदिग्ध भेजने वाले की पहचान होने के बाद संबंधित सेवा प्रदाता उसके टेलीकॉम संसाधनों की जांच कर सकता है और यह निर्धारित कर सकता है कि उसकी गतिविधि नियामकीय कार्रवाई के लिए निर्धारित सीमा में आती है या नहीं।
बार-बार उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई Stricter Action Against Repeat Violations
नए नियमों में कार्रवाई को अलग-अलग स्तरों में बांटा गया है। पहली बार AI आधारित प्रणाली से पहचाने गए उल्लंघन पर आउटगोइंग सेवाओं को 15 दिनों तक रोका जा सकता है। वहीं बार-बार उल्लंघन करने पर टेलीकॉम संसाधनों को एक साल तक बंद, ब्लैकलिस्ट और नए कनेक्शन हासिल करने पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
यह व्यवस्था उन लोगों के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है जो बार-बार अलग-अलग नंबरों या कनेक्शनों के माध्यम से अनचाही व्यावसायिक कॉल और संचार जारी रखते हैं।
उपभोक्ताओं के लिए TRAI के नए नियमों का क्या मतलब है? What Do the New TRAI Rules Mean for Consumers?
उपभोक्ताओं के लिए नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब कार्रवाई शुरू करने के लिए हर मामले में उपभोक्ता शिकायत जरूरी नहीं होगी। टेलीकॉम कंपनियों की AI आधारित निगरानी प्रणालियां संदिग्ध कॉलिंग पैटर्न की पहचान कर सकती हैं और उसके बाद नियामकीय प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
इससे स्पैम की पहचान केवल शिकायत मिलने के बाद करने के बजाय पहले ही करने की कोशिश की जाएगी। साथ ही, उपभोक्ताओं को अपने निजी फोन पर अनचाही कॉल को ब्लॉक या फिल्टर करने का विकल्प भी मिलता रहेगा।
निष्कर्ष: AI से स्पैम नियंत्रण की ओर बढ़ता टेलीकॉम क्षेत्र Conclusion: Telecom Sector Moves Towards AI-Based Spam Control
TRAI के 2026 के संशोधित नियमों से स्पैम और अनचाही व्यावसायिक संचार के खिलाफ कार्रवाई को अधिक सक्रिय बनाने की कोशिश की गई है। AI आधारित पहचान, तेज सूचना साझा करने की व्यवस्था, KYC के माध्यम से पहचान और कड़े दंड इस नए ढांचे के प्रमुख हिस्से हैं।
अब टेलीकॉम कंपनियां केवल उपभोक्ता शिकायतों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी तकनीकी प्रणालियों से पहचानी गई संदिग्ध गतिविधियों पर भी कार्रवाई कर सकेंगी। पहली बार उल्लंघन पर 15 दिन की रोक और बार-बार उल्लंघन पर एक साल तक प्रतिबंध जैसे प्रावधान टेलीकॉम नेटवर्क के दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाए गए हैं।
इन बदलावों के जरिए TRAI ने स्पैम नियंत्रण को शिकायत-आधारित व्यवस्था से आगे बढ़ाकर तकनीक आधारित सक्रिय निगरानी की दिशा में ले जाने की कोशिश की है।


