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सिलाई की राह, व्यवसाय की नई चाह

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सिलाई की राह, व्यवसाय की नई चाह
31 Aug 2021
6 min read
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दुनिया भले ही कितनी आधुनिक क्यों ना हो गयी हो, चाहे अधिकतम सारे काम मशीनों के माध्यम से होने लगे हो, परन्तु कुछ काम हाथों के इस्तेमाल के बिना मुमकिन नहीं है। ऐसे में लोगों की जरूरत और उनके फैशन को अपना व्यवसाय बना लेना बड़ा लाभकारी सिद्ध हो जाता है। हाथ की कला से हम अपने लिए ऐसा भविष्य सुनिश्चित करते हैं जिसमें हमारा मन भी  प्रसन्न रहता है।   

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वैश्वीकरण के इस दौर में मशीनों के इस्तेमाल ने मनुष्य को किसी काम को करने में आसानी तो दी परन्तु साथ में मनुष्य को शारीरिक तौर पर आलसी भी बना दिया है। हमारी यही इच्छा रहती है कि हम खुद को इतनी सुविधाओं से ढक लें कि हमारे शरीर को ज्यादा मेहनत ना करना पड़े। इसमें ही हमें मानसिक सुख मिलता है। आज के दौर में हमारा हर काम मशीनों के माध्यम से हो जाता है परन्तु कुछ कामों में आज भी मशीनें अपनी जगह नहीं बना पायी हैं। इनके स्थान पर आज भी हाथ से काम किये जाने पर उसकी खूबसूरती निखर के आती है। ऐसे कई काम है जो कितना भी मशीनों से किये जाएं पर उनकी पूर्णता हाथों के माध्यम से ही की जाती है और इसी से उस काम की महानता और पहचान बाहर निकल कर आती है। कढ़ाई, बुनाई, सिलाई यह सब ऐसे काम हैं जो इसी पंक्ति में आते हैं। मनुष्य कितना भी आधुनिक हो जाये परन्तु इन कामों के लिए तो मनुष्य को खुद को सक्रीय करना ही पड़ता है। आज भी ऐसे कई लोग हैं जो केवल हाथ से सिले कपड़ों (किसी टेलर से कपड़े सिलवाकर पहनने) को ही प्राथमिकता देते हैं। यदि हम इसे व्यवसाय के परिपेक्ष में देखें तो सिलाई का काम एक अच्छा व्यवसाय का साधन बन सकता है, जिसमें कोई व्यक्ति अपने हाथ की कलाकारी से अपने लिए एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित दुनिया का निर्माण कर सकता है।  

छोटे स्तर पर शुरू करें व्यवसाय 

कपड़े मनुष्य की वो जरुरत हैं जिसे जीवन भर उसके साथ ही चलना है। जिस तरह खाना हमारे लिए आवश्यक है उसी तरह लिबास भी हमारे लिए उतना ही आवश्यक है। इस तरह हम कह सकते हैं कि इसका व्यवसाय करने का विचार कभी घाटे का सौदा नहीं साबित हो सकता है। हाँ मनुष्य को वक़्त-वक़्त पर अपने कपड़ो में कई विविधताएं चाहिए होती हैं, जो किसी भी सिलाई करने वाले व्यक्ति के लिए कर पाना कोई मुश्किल काम नहीं है। इस व्यवसाय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे केवल बड़े स्तर पर ही नहीं बल्कि छोटे स्तर पर भी हम शुरू कर सकते हैं। अर्थात इसके लिए ज्यादा पूँजी की आवश्यकता नहीं होती है। बहुत ही कम पूँजी और अपने हुनर के साथ सिलाई का व्यवसाय कोई भी शुरू कर सकता है। यह एक ऐसा काम है जिसके लिए हमें किसी डिग्री की जरूरत नहीं, बस एक हुनर जो अभ्यास करने से निखरता है, ही काफी होता है। 

थोड़ी लागत अधिक मुनाफ़ा 

आपके पास सिलाई करने की मशीन, धागे, 2-3 अलमारी, कैंची, कुछ हैंगर्स और एक छोटे से कमरे का किराया (यदि आपके पास अपना खुद का कमरा नहीं है) लेने भर की पूँजी हो तो बस आप अपनी कला से बढ़िया काम करके पैसे कमा सकते हैं। अपने व्यसाय के लिए आकर्षित करने वाले साइन बोर्ड के साथ अपने काम की शुरुआत करिये। यह सारे सामान खरीदने में ज्यादा खर्च नहीं आता है। यदि आपका हुनर लाज़वाब है तो आप अपनी लगाई पूँजी को एक महीने से दो महीने के अंदर ही कमा सकते हैं। आप किसी कपड़े बनाने वाली कम्पनी के साथ साझेदारी कर सकते हैं, इससे आपकी सिलाई को बड़े स्तर पर पहचान मिलेगी। इसके साथ ही आप ग्राहकों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ सकते हैं, इससे भी आप अपने व्यवसाय को लम्बे समय तक चला सकते हैं।   

ग्राहक का आप पर विश्वास ज़रुरी 

इस काम में हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हम जब तक कपड़े तैयार करके देने की बात करते हैं, हमें उस समय तक कपड़े तैयार करके दे देना चाहिए। साथ में हमें इसे भी अपने ज़हन में रखना चाहिए कि हम वैसे ही कपड़े तैयार करें जैसा कि ग्राहक की मांग है। इससे ग्राहकों में हमारे लिए विश्वनीयता बढ़ेगी। यह अपने व्यवसाय को प्रचारित करने का बेहतर तरीका है। टेलर का विनम्र स्वभाव भी लोगों को उसके काम की ओर आकर्षित करता है, उसके बाद आपकी दक्षता ग्राहक को आपसे दूर नहीं जाने देगी। इसके साथ ही आप यह काम तभी कर सकते हैं जब आपका इसमें मन लगे क्योंकि तभी आप अपने ग्राहक को उनके मनपसंदी कपड़े सिल कर दे सकते हैं। आपके लगन में आयी थोड़ी सी कमी आपके व्यवसाय को नुकसान पहुंचा सकती है।

बहुत कम खर्च में ज्यादा फायदा   

हम सब जानते हैं कि आज कल कपड़ों की कीमत कितनी ज्यादा होती है। ऐसे में सिलाई कितनी महँगी होती है इसका अंदाज़ा हम सब लगा सकते हैं। चाहे कंपनी के साथ मिलकर काम करें या फिर अकेले, सिलाई की कीमत हमेशा उतनी ही रहती है और हमें उतना ही मुनाफा होता है। हम 500 रूपये का ख़रीद के, चाहे 2000 रूपये का ख़रीद के कपड़े सिलवाएं सिलाई की कीमत उतनी ही रहती है, ऊपर से उसमें कुछ ज्यादा कारीगरी का काम हो गया तो उसके अलग से पैसे जुड़ जाते हैं। एक सामान्य सलवार-सूट की सिलाई 500-600 रूपये आती है, जिसमें लागत केवल आपकी मेहनत और कुछ धागे की होती है, और बाकि सामान तो लम्बे समय तक चलने वाले इस्तेमाल किये जाते हैं। इससे हम और आप समझ सकते हैं कि इस व्यवसाय में हमें कितने फायदा हो सकता है।    

बड़े स्तर व्यवसाय के लिए पंजीकरण आवश्यक 

इस व्यवसाय में आपकी आमदनी रोज के हिसाब से रहेगी, इसके लिए आपको महीने भर इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। यदि यह व्यवसाय आप बड़े स्तर पर शुरू करना चाहते हैं तो आपको जिला उद्योग केंद्र से अपने व्यवसाय के लिए पंजीकरण कराना आवश्यक होगा अन्यथा छोटे स्तर पर आप बिना पंजीकरण के भी इसे शुरू कर सकते हैं।