सुपर अल नीनो 2026: भारत में 15,800 अतिरिक्त गर्मी से होने वाली मौतें का अनुमान

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सुपर अल नीनो 2026: भारत में 15,800 अतिरिक्त गर्मी से होने वाली मौतें का अनुमान
23 Sep 2026
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News Synopsis

दुनिया पहले से ही रिकॉर्ड स्तर के तापमान का सामना कर रही है और अब एक शक्तिशाली El Niño की स्थिति आने वाले महीनों में गर्मी से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को और बढ़ा सकती है। University of Chicago के Climate Impact Lab के नए आकलन के अनुसार, सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच सामान्य वर्ष की तुलना में दुनिया भर में लगभग 4,51,000 अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतें हो सकती हैं। इनमें भारत में लगभग 15,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है। इस आंकड़े में करीब 1,600 मौतों का ऊपर-नीचे का अनुमान भी शामिल है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस आकलन का उद्देश्य केवल संभावित मौतों की संख्या बताना नहीं है, बल्कि यह पहचानना भी है कि किन क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी का खतरा अधिक हो सकता है, ताकि सरकारें और स्थानीय प्रशासन समय रहते बचाव के उपाय कर सकें।

भारत में गर्मी का खतरा क्यों बढ़ सकता है? Why Could Heat Risk Increase in India?

भारत उन देशों में शामिल है जहां आने वाले महीनों में गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मौतों का बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है। अध्ययन के अनुसार, भारत में अनुमानित अतिरिक्त मौतों का लगभग आधा हिस्सा दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच हो सकता है। इस अवधि में करीब 7,400 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है। शोधकर्ताओं ने यह भी कहा है कि भारत में गर्मी से जुड़ा जोखिम फरवरी के बाद भी खत्म नहीं हो सकता और देश के 2027 के गर्मी वाले महीनों में मौतों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

भारत की बड़ी आबादी, अलग-अलग जलवायु क्षेत्र और कई इलाकों में पहले से मौजूद गर्मी के जोखिम इसे इस तरह के मौसम संबंधी बदलावों के प्रति संवेदनशील बनाते हैं। खासतौर पर खुले में काम करने वाले श्रमिक, बुजुर्ग, बच्चे और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग अत्यधिक गर्मी के दौरान अधिक जोखिम में रह सकते हैं।

दिसंबर से फरवरी के बीच भी बढ़ सकता है जोखिम Risk Could Also Rise Between December and February

भारत में दिसंबर से फरवरी आमतौर पर गर्मियों की तुलना में ठंडे महीने होते हैं। ऐसे में इस अवधि में गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मौतों का अनुमान विशेष ध्यान आकर्षित करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, भारत में मौतों का असर समय के साथ बढ़ सकता है और यह जोखिम देश के अगले गर्मी के मौसम तक जारी रह सकता है।

दुनिया में 4.51 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान 451,000 Additional Deaths Projected Worldwide

Climate Impact Lab के आकलन के अनुसार, मौजूदा El Niño घटना के शुरुआती छह महीनों में सामान्य वर्ष की तुलना में लगभग 4,51,000 अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतें हो सकती हैं। अध्ययन में सितंबर 2026 से फरवरी 2027 तक की अवधि पर विशेष ध्यान दिया गया है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इसका सबसे बड़ा असर उन क्षेत्रों में पड़ सकता है जहां अत्यधिक गर्मी से बचाव के लिए संसाधन, स्वास्थ्य सेवाएं और मौसम संबंधी चेतावनी प्रणालियां अपेक्षाकृत कमजोर हैं। Global South के कई देशों में इस कारण जोखिम अधिक रहने का अनुमान है।

अध्ययन ने दुनिया के 24,000 से अधिक क्षेत्रों में तापमान और मृत्यु दर के बीच संबंधों का इस्तेमाल किया है। इसके बाद मौसमी तापमान पूर्वानुमानों के आधार पर संभावित अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया।

दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया पर भी असर South and Southeast Asia Could Also Face Significant Impact

भारत के अलावा दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में भी गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है। फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में मिलाकर लगभग 19,400 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। वहीं इंडोनेशिया में लगभग 19,300 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं।

दक्षिण अमेरिका में ब्राजील के लिए लगभग 13,300 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है। अफ्रीका के Sahel क्षेत्र में स्थिति और गंभीर हो सकती है। नाइजीरिया, सूडान, नाइजर और चाड को मिलाकर लगभग 66,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। इनमें अकेले नाइजीरिया में लगभग 31,400 मौतों का अनुमान लगाया गया है।

Global South पर अधिक असर की आशंका Global South Could Face a Larger Burden

रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त मौतों का बड़ा हिस्सा Global South के देशों में केंद्रित हो सकता है। इन क्षेत्रों में कई समुदायों के पास अत्यधिक गर्मी से बचने के लिए पर्याप्त ठंडक की व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं और शुरुआती चेतावनी प्रणाली उपलब्ध नहीं होती।

इसी कारण शोधकर्ताओं ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पहले से संसाधन उपलब्ध कराने और जोखिम वाले इलाकों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई है।

El Niño गर्मी को कैसे बढ़ाता है? How Can El Niño Intensify Heat?

El Niño एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसके कारण दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तापमान, बारिश और वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव हो सकता है।

Climate Impact Lab के आकलन के अनुसार, मौजूदा El Niño के दौरान दुनिया की भूमि का औसत तापमान सामान्य से लगभग 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। इसके साथ सामान्य वर्ष की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक बेहद गर्म दिन देखने को मिल सकते हैं।

बारिश के बदलते पैटर्न का असर खेती, जल उपलब्धता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ सकता है। इससे पहले से गर्मी और पानी की कमी का सामना कर रहे समुदायों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

अत्यधिक गर्मी से स्वास्थ्य पर असर Extreme Heat Can Increase Health Risks

लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी में रहने से शरीर पर गंभीर दबाव पड़ सकता है। इससे शरीर में पानी की कमी, हीट स्ट्रोक और गर्मी से संबंधित अन्य समस्याएं हो सकती हैं। अत्यधिक तापमान पहले से मौजूद हृदय और सांस संबंधी बीमारियों को भी गंभीर बना सकता है।

जिन लोगों के पास घर में पर्याप्त ठंडक, स्वास्थ्य सेवाओं या गर्मी से बचाव की जानकारी तक आसान पहुंच नहीं है, उनके लिए खतरा अधिक हो सकता है। खुले में काम करने वाले लोगों को भी गर्मी के लंबे समय तक संपर्क में रहना पड़ सकता है।

समय रहते उठाए जा सकते हैं बचाव के कदम Early Heat-Response Measures Can Save Lives

शोधकर्ताओं का कहना है कि इन अनुमानों का इस्तेमाल सरकारें और स्थानीय संस्थाएं पहले से तैयारी करने के लिए कर सकती हैं। संभावित उपायों में गर्मी की चेतावनी प्रणाली, Cooling Centres, पानी और Hydration Stations, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, खुले में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की अतिरिक्त क्षमता शामिल हैं।

जो इलाके सबसे ज्यादा जोखिम में हो सकते हैं, वहां आपातकालीन संसाधन पहले पहुंचाने से गर्मी के स्वास्थ्य प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

ये आंकड़े निश्चित मौतों की भविष्यवाणी नहीं हैं The Figures Are Estimates, Not Confirmed Deaths

यह समझना जरूरी है कि भारत के लिए 15,800 और दुनिया के लिए 4,51,000 का आंकड़ा निश्चित मौतों की संख्या नहीं है। यह जलवायु और मृत्यु दर से जुड़े मॉडल के आधार पर निकाला गया अनुमान है।

वास्तविक स्थिति El Niño की तीव्रता, तापमान कितने समय तक सामान्य से ऊपर रहता है, बारिश के पैटर्न, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, चेतावनी प्रणालियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।

El Niño भविष्य के जलवायु जोखिम की चेतावनी El Niño Offers a Warning About Future Climate Risks

Climate Impact Lab के शोधकर्ताओं ने मौजूदा El Niño को भविष्य की जलवायु परिस्थितियों की एक झलक के रूप में बताया है। उनका आकलन है कि आने वाले वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण आज की असामान्य गर्म परिस्थितियां कुछ क्षेत्रों में अधिक सामान्य हो सकती हैं।

इसलिए केवल आपातकालीन प्रतिक्रिया पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। गर्मी से बचाव की बेहतर योजना, स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी, चेतावनी प्रणालियों का विस्तार और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए लंबे समय की रणनीति भी जरूरी होगी।

निष्कर्ष Conclusion

University of Chicago के Climate Impact Lab का यह आकलन बताता है कि शक्तिशाली El Niño और पहले से बढ़े हुए वैश्विक तापमान के कारण आने वाले महीनों में गर्मी से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। भारत में लगभग 15,800 अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतों और दुनिया में 4,51,000 अतिरिक्त मौतों का अनुमान गंभीर चिंता का संकेत है, लेकिन इन्हें निश्चित परिणाम नहीं माना जाना चाहिए।

इन अनुमानों का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य समय रहते तैयारी करना है। गर्मी की चेतावनी, ठंडक की सुविधाएं, पर्याप्त पानी, स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी और खुले में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा जैसे कदम संभावित जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।