यूपीआई भुगतान में वृद्धि: सितंबर में UPI लेनदेन में 23% की बढ़ोतरी, जानिए पूरी खबर
News Synopsis
भारत में डिजिटल भुगतान के सबसे प्रमुख माध्यमों में शामिल यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के इस्तेमाल में सितंबर में एक बार फिर मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में UPI के जरिए किए गए लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 23 प्रतिशत बढ़कर 24.07 अरब हो गई।
इसी अवधि में UPI लेनदेन का कुल मूल्य भी 18 प्रतिशत बढ़कर 29.37 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। आंकड़े बताते हैं कि देश में रोजमर्रा के भुगतान के लिए डिजिटल माध्यमों पर निर्भरता लगातार बनी हुई है। UPI के जरिए छोटे और बड़े दोनों तरह के भुगतान किए जा रहे हैं और इसकी पहुंच व्यापारियों तथा ग्राहकों के बीच व्यापक बनी हुई है।
सितंबर में UPI ने रोजाना 80.2 करोड़ लेनदेन किए UPI Processed 802 Million Transactions Daily in September
NPCI के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में UPI ने औसतन हर दिन लगभग 80.2 करोड़ लेनदेन किए। इस दौरान रोजाना किए गए UPI लेनदेन का औसत मूल्य करीब 97,913 करोड़ रुपये रहा।
इससे पता चलता है कि सितंबर के दौरान UPI के जरिए बड़ी संख्या में भुगतान प्रतिदिन किए गए। मोबाइल फोन और डिजिटल भुगतान माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच UPI लोगों के लिए भुगतान करने का एक महत्वपूर्ण साधन बना हुआ है।
अगस्त के मुकाबले सितंबर में क्या बदला? What Changed in September Compared with August?
अगस्त में UPI लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 24.51 अरब हो गई थी। इसी महीने UPI के जरिए किए गए लेनदेन का कुल मूल्य 20 प्रतिशत बढ़कर 29.82 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया था।
सितंबर में लेनदेन की संख्या अगस्त की तुलना में कुछ कम रही। हालांकि, सालाना आधार पर सितंबर में भी UPI लेनदेन की वृद्धि दर मजबूत रही। अगस्त और सितंबर के आंकड़े यह दिखाते हैं कि UPI के माध्यम से होने वाले डिजिटल भुगतान का स्तर काफी ऊंचा बना हुआ है।
IMPS के जरिए लेनदेन का मूल्य 7.06 लाख करोड़ रुपये IMPS Transaction Value Reaches Rs 7.06 Lakh Crore
UPI के अलावा सितंबर में तत्काल भुगतान सेवा यानी Immediate Payment Service (IMPS) के आंकड़ों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। NPCI के अनुसार, सितंबर में IMPS के जरिए किए गए लेनदेन का कुल मूल्य 7.06 लाख करोड़ रुपये रहा।
यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। सितंबर में IMPS के जरिए रोजाना औसतन 1.18 करोड़ लेनदेन किए गए। वहीं, इन लेनदेन का औसत दैनिक मूल्य करीब 23,530 करोड़ रुपये रहा।
डिजिटल भुगतान के कई माध्यमों का इस्तेमाल Multiple Digital Payment Methods Continue to Be Used
UPI और IMPS दोनों भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। जहां UPI का इस्तेमाल बड़ी संख्या में रोजमर्रा के भुगतान के लिए किया जा रहा है, वहीं IMPS भी तत्काल बैंकिंग लेनदेन के लिए उपयोग में बना हुआ है।
सितंबर के आंकड़ों में UPI और IMPS दोनों के माध्यम से भुगतान गतिविधियों में बढ़ोतरी दिखाई देती है। इससे देश में तत्काल और डिजिटल भुगतान सेवाओं के व्यापक इस्तेमाल का संकेत मिलता है।
2 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘No UPI Day’ का आह्वान वापस Call for ‘No UPI Day’ on October 2 Withdrawn
इस बीच UPI से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में प्रमुख व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ मनाने के अपने आह्वान को वापस ले लिया है। यह फैसला नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया।
लगभग 20 व्यापार प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी UPI लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत शुल्क को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं।
व्यापार संगठनों का कहना था कि इस तरह का शुल्क छोटे और मध्यम कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकता है। उनका यह भी तर्क था कि इससे व्यापारियों के बीच डिजिटल भुगतान को अपनाने की गति प्रभावित हो सकती है।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रवीण खंडेलवाल ने किया Delegation Led by Praveen Khandelwal
व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चांदनी चौक से सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने किया।
बैठक में व्यापारियों की ओर से प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को वित्त मंत्री के सामने रखा गया। इसके बाद प्रमुख व्यापार संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ मनाने का अपना आह्वान वापस ले लिया।
2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर MDR नहीं No MDR on UPI Transactions Up to Rs 2,000
नई व्यवस्था के तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) केवल उन व्यक्ति-से-व्यापारी यानी पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांसफर पर लागू होगा, जिनकी राशि 2,000 रुपये से अधिक है।
वहीं, 2,000 रुपये तक के P2M लेनदेन पर MDR शून्य रहेगा। इसका मतलब है कि इन लेनदेन पर MDR के कारण GST से जुड़ा कोई प्रभाव भी नहीं होगा।
96 प्रतिशत से अधिक व्यापारी UPI लेनदेन 2,000 रुपये तक More Than 96% of Merchant UPI Transactions Are Up to Rs 2,000
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2,000 रुपये तक के लेनदेन UPI के व्यापारी लेनदेन की कुल संख्या के 96 प्रतिशत से अधिक हैं।
इसका अर्थ है कि UPI के माध्यम से होने वाले व्यापारी भुगतान का बहुत बड़ा हिस्सा प्रस्तावित MDR के दायरे में नहीं आएगा। ऐसे लेनदेन पर MDR नहीं होने के कारण MDR से संबंधित GST का भी सवाल नहीं उठेगा।
यह व्यवस्था छोटे मूल्य के डिजिटल भुगतानों को प्रभावित होने से बचाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि व्यापारियों और ग्राहकों के बीच बड़ी संख्या में UPI भुगतान 2,000 रुपये तक की राशि के होते हैं।
1 लाख रुपये तक मासिक UPI प्राप्तियों वाले व्यापारियों को भी राहत Merchants with Monthly UPI Receipts up to Rs 1 Lakh Also Exempt
सरकार के अनुसार, जिन व्यापारियों की मासिक UPI प्राप्तियां 1 लाख रुपये तक हैं, उन पर भी MDR लागू नहीं होगा। इसलिए ऐसे व्यापारियों के लिए MDR से जुड़े GST का मुद्दा भी नहीं बनता।
इस प्रावधान का सीधा संबंध छोटे कारोबारियों से है, जिनकी मासिक UPI प्राप्तियां अपेक्षाकृत कम होती हैं। इस तरह प्रस्तावित व्यवस्था में छोटे मूल्य के लेनदेन और कम मासिक UPI प्राप्तियों वाले व्यापारियों को MDR से बाहर रखा गया है।
UPI का बढ़ता इस्तेमाल और शुल्क को लेकर चर्चा Growing UPI Usage and the Debate Over Charges
सितंबर के आंकड़ों में UPI लेनदेन की संख्या 24.07 अरब तक पहुंचना भारत में डिजिटल भुगतान के बड़े पैमाने को दर्शाता है। हालांकि, व्यापारी संगठनों की ओर से 2,000 रुपये से अधिक के P2M लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR को लेकर चिंता जताई गई है।
एक ओर UPI का इस्तेमाल लगातार बड़े स्तर पर हो रहा है, वहीं दूसरी ओर व्यापारी संगठनों और सरकार के बीच शुल्क व्यवस्था को लेकर चर्चा भी जारी है। सितंबर के आंकड़े यह बताते हैं कि डिजिटल भुगतान भारत के भुगतान तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
कुल मिलाकर, सितंबर में UPI ने 24.07 अरब लेनदेन और 29.37 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन मूल्य के साथ मजबूत गतिविधि दर्ज की। साथ ही, IMPS के आंकड़ों में भी वृद्धि देखी गई। दूसरी ओर, 2 अक्टूबर के प्रस्तावित ‘No UPI Day’ को वापस लिए जाने और MDR से जुड़े नियमों पर हुई चर्चा ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था में व्यापारियों की भूमिका और उनकी चिंताओं को भी सामने रखा है।


