NTA समेत सार्वजनिक परीक्षाओं में होगा सुधार, सरकार ने छात्रों और शिक्षकों से मांगी राय

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NTA समेत सार्वजनिक परीक्षाओं में होगा सुधार, सरकार ने छात्रों और शिक्षकों से मांगी राय
29 Aug 2026
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News Synopsis

केंद्र सरकार ने देश की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी, विश्वसनीय और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। सरकार ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षा से जुड़े अन्य सभी पक्षों से परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव मांगे हैं। यह प्रक्रिया राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं को भी ध्यान में रखकर शुरू की गई है।

इस उद्देश्य के लिए केंद्र सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय कार्य बल (HPTF) का गठन किया है। इस कार्य बल को सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन, सुरक्षा, परीक्षा के स्वरूप और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े व्यापक सुधारों की समीक्षा करके सरकार को सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई 2026 को नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में परीक्षा सुधारों के लिए उच्चस्तरीय कार्य बल के गठन की घोषणा की थी।

परीक्षा व्यवस्था को भविष्य के लिए तैयार करने की योजना। (Plan to Make the Examination System Future-Ready)

उच्चस्तरीय कार्य बल का मुख्य उद्देश्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जो मजबूत, सुरक्षित, पारदर्शी, समान अवसर देने वाली और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो। इसके लिए केवल परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा है, बल्कि पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।

कार्य बल संस्थागत व्यवस्था और प्रक्रियाओं को मजबूत करने, परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने, सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने और उपयुक्त तकनीक के इस्तेमाल जैसे विषयों पर काम कर रहा है। साथ ही, परीक्षा केंद्रों और अन्य जरूरी सुविधाओं को बढ़ाने तथा विद्यार्थियों की सुविधा और मानसिक कल्याण को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

परीक्षा की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर जोर। (Focus on Examination Security and Integrity)

सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल, प्रश्नपत्र से जुड़ी गड़बड़ी, अनुचित साधनों और अन्य अनियमितताओं की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में नई व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा और विश्वसनीयता को मजबूत करना है।

कार्य बल से परीक्षा के संचालन और सुरक्षा, परीक्षा के स्वरूप, मूल्यांकन पद्धति तथा परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों की रोकथाम, पहचान और शिकायतों के समाधान से जुड़े सुझाव मांगे गए हैं।

छात्रों और अभिभावकों से भी मांगी गई राय। (Suggestions Invited from Students and Parents)

इस सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया को केवल सरकारी अधिकारियों या परीक्षा संस्थाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। सरकार ने छात्रों और अभ्यर्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी अपने अनुभव और सुझाव साझा करने का अवसर दिया है।

शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों से भी परीक्षा प्रणाली से जुड़ी समस्याओं तथा उनके संभावित समाधान पर सुझाव मांगे गए हैं। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाएं, विषय विशेषज्ञ, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग संगठन और नागरिक समाज से जुड़े समूह भी इस प्रक्रिया में अपनी राय दे सकते हैं।

इसका उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था को अलग-अलग वर्गों के वास्तविक अनुभवों के आधार पर बेहतर बनाना है।

तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर सुझाव। (Suggestions on Better Use of Technology)

तकनीक आज परीक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। इसलिए कार्य बल ने सुरक्षित कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं और अन्य तकनीकी उपायों को भी सुझावों के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया है।

हितधारक यह बता सकते हैं कि तकनीक की मदद से परीक्षा को अधिक सुरक्षित, निष्पक्ष और सुविधाजनक कैसे बनाया जा सकता है। परीक्षा केंद्रों में तकनीकी सुविधाओं को बढ़ाने और आधुनिक परीक्षा ढांचे के निर्माण पर भी सुझाव दिए जा सकते हैं।

सभी वर्गों के लिए समान अवसर पर ध्यान। (Focus on Equal Opportunities for All)

नई परीक्षा व्यवस्था में पहुंच और समावेशन को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। सरकार चाहती है कि सामाजिक, आर्थिक, क्षेत्रीय और भाषाई कारणों से किसी भी विद्यार्थी को परीक्षा में भाग लेने में अनावश्यक कठिनाई न हो।

इसलिए कार्य बल से ऐसी समावेशी परीक्षा व्यवस्था विकसित करने के सुझाव मांगे गए हैं, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों और परिस्थितियों से आने वाले विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सके।

भाषा और क्षेत्रीय विविधता को महत्व। (Importance of Linguistic and Regional Diversity)

भारत में विद्यार्थी अलग-अलग भाषाई और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि से आते हैं। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया में भाषा से जुड़ी सुविधाओं और क्षेत्रीय जरूरतों को ध्यान में रखना भी जरूरी है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुझाव अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में भेजे जा सकते हैं। इससे अधिक से अधिक लोग अपनी बात अपनी सुविधाजनक भाषा में सरकार तक पहुंचा सकेंगे।

शिकायत समाधान और पारदर्शिता भी सुधार का हिस्सा। (Transparency and Grievance Redressal Also Part of Reforms)

परीक्षा से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए पारदर्शी और प्रभावी शिकायत व्यवस्था की जरूरत होती है। कार्य बल ने पारदर्शिता, शिकायत निवारण और परीक्षा से जुड़े पक्षों के साथ बेहतर संवाद को भी सुधार के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल किया है।

विद्यार्थियों को परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और परिणाम के बाद यदि कोई समस्या आती है, तो उसके समाधान के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। इस संबंध में हितधारक अपने अनुभव और सुझाव कार्य बल के साथ साझा कर सकते हैं।

छात्रों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी ध्यान। (Focus on Students’ Mental and Emotional Well-being)

परीक्षाओं का दबाव विद्यार्थियों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों के कल्याण को भी सुधार के एजेंडे में शामिल किया है।

इस क्षेत्र में छात्र तनाव कम करने, परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सहज बनाने और विद्यार्थियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने से जुड़े सुझाव दिए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनाना है, जिसमें केवल परिणाम पर नहीं बल्कि विद्यार्थी के समग्र अनुभव पर भी ध्यान दिया जाए।

13 सितंबर 2026 तक भेजें सुझाव। (Submit Suggestions by September 13, 2026)

उच्चस्तरीय कार्य बल ने सभी संबंधित पक्षों से सक्रिय और रचनात्मक भागीदारी की अपील की है। सुझाव 13 सितंबर 2026 तक भेजे जा सकते हैं। प्राप्त सुझावों का इस्तेमाल कार्य बल सरकार को दी जाने वाली अपनी सिफारिशें तैयार करने में करेगा।

सुझाव आधिकारिक परीक्षा सुधार पोर्टल के माध्यम से भेजे जा सकते हैं।
परीक्षा सुधार सुझाव पोर्टल

इसके अलावा, सुझाव देने के लिए 1800-180-4747 पर फोन किया जा सकता है। व्हाट्सऐप पर “hptf” लिखकर +91 78270 42830 पर भेजा जा सकता है। सुझाव ExamReformsTaskforce@dopt.gov.in पर ईमेल के माध्यम से भी भेजे जा सकते हैं।

परीक्षा सुधारों से क्या बदल सकता है। (What Could Change Through Examination Reforms)

प्रस्तावित सुधारों का असर देश की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था के कई हिस्सों पर पड़ सकता है। परीक्षा की सुरक्षा मजबूत होने से अनियमितताओं को रोकने में मदद मिल सकती है। बेहतर तकनीकी व्यवस्था से परीक्षा संचालन अधिक व्यवस्थित हो सकता है। मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली विद्यार्थियों की समस्याओं का समय पर समाधान करने में सहायक हो सकती है।

इसके अलावा, समावेशी व्यवस्था से अलग-अलग सामाजिक, आर्थिक, क्षेत्रीय और भाषाई पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिए परीक्षा में भाग लेना आसान बनाया जा सकता है।

निष्कर्ष। (Conclusion)

नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय कार्य बल के माध्यम से केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस पहल में परीक्षा की सुरक्षा से लेकर तकनीक, मूल्यांकन, पारदर्शिता, शिकायत समाधान और विद्यार्थियों के कल्याण तक कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने इस प्रक्रिया में छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों को सीधे अपनी राय देने का अवसर दिया है। इन सुझावों के आधार पर तैयार होने वाली सिफारिशें भविष्य में देश की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, निष्पक्ष, पारदर्शी और विद्यार्थियों के अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।