RBI FEMA नियम 1 अक्टूबर, 2026 से: निर्यातकों और आयातकों के लिए क्या बदलेगा?

Share Us

47
RBI FEMA नियम 1 अक्टूबर, 2026 से: निर्यातकों और आयातकों के लिए क्या बदलेगा?
29 Sep 2026
7 min read

News Synopsis

भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन से जुड़े निर्यात और आयात नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। Foreign Exchange Management (Export and Import of Goods and Services) Regulations, 2026 का नया ढांचा 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा। RBI ने सितंबर 2026 में इन नियमों में संशोधन करते हुए निर्यात से मिलने वाली रकम को भारत वापस लाने की सामान्य समयसीमा को 15 महीने से घटाकर 9 महीने कर दिया है। भारतीय रुपये में चालान या भुगतान वाले निर्यात के लिए यह अवधि 18 महीने से घटाकर 12 महीने कर दी गई है।

नए नियमों में सेवा निर्यात के लिए Export Declaration Form यानी EDF की व्यवस्था को भी औपचारिक बनाया गया है। इसके अलावा आयात भुगतान की निगरानी को संबंधित कारोबारी अनुबंध में तय भुगतान अवधि से जोड़ा गया है। छोटे मूल्य के लेन-देन के लिए EDPMS और IDPMS में प्रविष्टियां बंद करने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है।

निर्यातकों को अब 9 महीने में रकम भारत लानी होगी Exporters Will Generally Have Nine Months to Repatriate Proceeds

माल और सेवा निर्यात के लिए अलग आधार Different Starting Points for Goods and Services

RBI के नए नियमों के तहत माल के निर्यात की रकम सामान्य रूप से शिपमेंट की तारीख से 9 महीने के भीतर प्राप्त करके भारत वापस लानी होगी। सेवा निर्यात के मामले में यह अवधि इनवॉइस जारी होने की तारीख से गिनी जाएगी।

विदेश स्थित गोदाम में भेजे गए माल के लिए अवधि गोदाम से माल की बिक्री की तारीख से जुड़ी होगी। वहीं, परियोजना निर्यात के मामले में भुगतान की समयसीमा संबंधित अनुबंध में तय शर्तों के अनुसार होगी।

भारतीय रुपये में निर्यात के लिए 12 महीने Twelve Months for Exports Invoiced or Settled in Indian Rupees

यदि निर्यात का चालान भारतीय रुपये में बनाया गया है या भुगतान रुपये में हुआ है, तो पूरी निर्यात राशि को प्राप्त करने और भारत वापस लाने के लिए 12 महीने की अवधि होगी। यह पहले निर्धारित 18 महीने की अवधि से कम है।

इस बदलाव के कारण विदेशी ग्राहकों से भुगतान प्राप्त करने वाले कारोबारों को अपने भुगतान चक्र और बकाया राशि की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से करनी होगी।

देरी होने पर AD बैंक से मिल सकती है अतिरिक्त समयसीमा AD Banks Can Allow Extensions for Delayed Payments

कारण बताना होगा Exporters Must Provide Reasons for Delay

यदि किसी निर्यातक को तय अवधि में भुगतान नहीं मिलता है, तो वह अपने Authorised Dealer यानी AD बैंक से अतिरिक्त समय की मांग कर सकता है। बैंक निर्यातक द्वारा बताए गए कारणों की समीक्षा करने के बाद समय बढ़ाने की अनुमति दे सकता है।

इस व्यवस्था से AD बैंक की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। बैंक को निर्यात से जुड़ी बकाया रकम की निगरानी करनी होगी और जरूरत पड़ने पर भुगतान में देरी के मामलों को संभालना होगा।

सेवा निर्यात के लिए EDF रिपोर्टिंग जरूरी Formal EDF Reporting for Service Exports

महीने के आधार पर जमा किया जा सकेगा EDF Monthly Consolidated EDF Filing

नए FEMA नियमों में सेवा निर्यात के लिए Export Declaration Form (EDF) को औपचारिक रिपोर्टिंग व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। सेवा निर्यातक को सामान्य रूप से उस महीने की समाप्ति के 30 दिनों के भीतर EDF जमा करना होगा, जिस महीने सेवा का इनवॉइस जारी किया गया हो।

यदि किसी सेवा निर्यातक ने एक ही महीने में कई ग्राहकों को सेवाएं दी हैं, तो वह निर्धारित शर्तों के तहत उन निर्यातों के लिए एक ही EDF जमा कर सकता है। सेवा निर्यात के कुछ मामलों में भुगतान प्राप्त होने की तारीख तक EDF जमा करने की सुविधा भी दी गई है।

सेवा निर्यात की निगरानी होगी आसान Greater Visibility Over Service Exports

नई व्यवस्था से बैंक और संबंधित संस्थाओं को सेवा निर्यात से जुड़ी जानकारी अधिक व्यवस्थित तरीके से मिल सकेगी। सेवा क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों, सॉफ्टवेयर निर्यातकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को इनवॉइस, भुगतान और बैंक रिकॉर्ड के बीच सही तालमेल रखना होगा।

यह व्यवस्था खास तौर पर उन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जिनके कई विदेशी ग्राहक हैं और हर महीने बड़ी संख्या में सेवा इनवॉइस जारी होते हैं।

आयात भुगतान को अनुबंध से जोड़ा गया Import Payments Linked More Closely to Commercial Contracts

भुगतान अवधि अनुबंध के अनुसार होगी Payment Period Will Follow the Underlying Contract

नए नियमों में आयात भुगतान की निगरानी को संबंधित कारोबारी अनुबंध में तय अवधि से जोड़ा गया है। AD बैंक आयात से जुड़ी प्रविष्टियों की निगरानी करेगा और यह देखेगा कि भारतीय आयातक ने अनुबंध में तय अवधि के भीतर विदेशी आपूर्तिकर्ता को भुगतान किया है या नहीं।

यदि भुगतान में देरी होती है, तो आयातक AD बैंक से अतिरिक्त समय मांग सकता है। इसके लिए देरी का कारण बताना होगा और बैंक कारणों से संतुष्ट होने पर अतिरिक्त समय की अनुमति दे सकता है।

कारोबारों को मिलेगी अधिक व्यावसायिक सुविधा Greater Flexibility for Businesses

इस बदलाव से उन कंपनियों को सुविधा मिल सकती है जिनके विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ लंबे भुगतान चक्र वाले अनुबंध हैं। खरीद, उत्पादन, माल की डिलीवरी और भुगतान के बीच लंबा अंतर होने वाले कारोबारों के लिए अनुबंध आधारित व्यवस्था अधिक उपयोगी हो सकती है।

₹10 लाख तक के लेन-देन में आसान प्रक्रिया Simplified Process for Transactions Up to Rs 10 Lakh

EDPMS और IDPMS में आसान क्लोजर Easier Closure in EDPMS and IDPMS

नए FEMA ढांचे में ₹10 लाख तक के छोटे मूल्य वाले निर्यात और आयात लेन-देन के लिए EDPMS और IDPMS में प्रविष्टियां बंद करने की सरल व्यवस्था दी गई है।

निर्यात के मामले में संबंधित शिपिंग बिल या इनवॉइस का मूल्य ₹10 लाख तक होने पर निर्यातक की घोषणा के आधार पर प्रविष्टि बंद की जा सकती है। आयात के मामले में भी निर्धारित सीमा के भीतर आयातक की घोषणा के आधार पर IDPMS प्रविष्टि बंद की जा सकती है। ऐसी घोषणाओं को कुछ परिस्थितियों में तिमाही आधार पर एक साथ जमा करने की सुविधा भी है।

निर्यात मूल्य में कमी की प्रक्रिया भी आसान Simpler Treatment of Reduced Export Value

यदि किसी निर्यातक को पूरी निर्यात राशि प्राप्त नहीं होती है या निर्यात मूल्य में कमी करनी पड़ती है, तो AD बैंक निर्धारित शर्तों के तहत इसकी अनुमति दे सकता है। ₹10 लाख तक के निर्यात मूल्य वाले शिपिंग बिल या सेवा इनवॉइस में निर्यातक की घोषणा के आधार पर कमी या पूरी राशि प्राप्त न होने के मामले को भी स्वीकार किया जा सकता है।

कारोबारों पर क्या होगा असर? What Will the New FEMA Rules Mean for Businesses?

निर्यातकों के लिए मुख्य बदलाव Key Changes for Exporters

  • सामान्य निर्यात राशि को 9 महीने के भीतर प्राप्त कर भारत वापस लाना होगा।

  • भारतीय रुपये में चालान या भुगतान वाले निर्यात के लिए अवधि 12 महीने होगी।

  • सेवा निर्यात के लिए EDF रिपोर्टिंग व्यवस्था लागू होगी।

  • देरी की स्थिति में AD बैंक से अतिरिक्त समय मांगा जा सकेगा।

  • ₹10 लाख तक के छोटे निर्यात लेन-देन के लिए सरल घोषणा आधारित प्रक्रिया उपलब्ध होगी।

  • निर्यात मूल्य में कमी या पूरी रकम प्राप्त न होने के कुछ मामलों को भी आसान प्रक्रिया से निपटाया जा सकेगा।

आयातकों के लिए मुख्य बदलाव Key Changes for Importers

  • आयात भुगतान की निगरानी संबंधित कारोबारी अनुबंध में तय अवधि के आधार पर होगी।

  • भुगतान में देरी होने पर AD बैंक से अतिरिक्त समय मांगा जा सकता है।

  • ₹10 लाख तक के पात्र आयात लेन-देन में IDPMS प्रविष्टि बंद करने के लिए सरल घोषणा का उपयोग किया जा सकता है।

कारोबारों को 1 अक्टूबर से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए? What Should Businesses Do Before October 1?

निर्यात और आयात से जुड़े कारोबारों को नए नियम लागू होने से पहले अपने भुगतान कार्यक्रम, विदेशी ग्राहकों और आपूर्तिकर्ताओं से जुड़े अनुबंध, इनवॉइस तथा बैंक रिकॉर्ड की समीक्षा करनी चाहिए।

निर्यातकों को विशेष रूप से यह देखना चाहिए कि उनकी बकाया विदेशी रकम तय 9 महीने की अवधि के भीतर प्राप्त हो रही है या नहीं। सेवा निर्यात करने वाली कंपनियों को EDF जमा करने की समयसीमा और दस्तावेजों पर विशेष ध्यान देना होगा।

आयातकों को अपने विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ तय भुगतान शर्तों की समीक्षा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भुगतान की जानकारी बैंक के रिकॉर्ड और कारोबारी अनुबंध से मेल खाती हो।

निष्कर्ष Conclusion

RBI के नए FEMA निर्यात-आयात नियम 1 अक्टूबर 2026 से भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े कारोबारों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएंगे। सबसे बड़ा बदलाव निर्यात राशि की सामान्य प्राप्ति और भारत वापसी की अवधि में है, जिसे संशोधित नियमों के तहत 9 महीने किया गया है। भारतीय रुपये में किए गए निर्यात के लिए यह अवधि 12 महीने होगी।

इसके साथ ही सेवा निर्यात के लिए EDF रिपोर्टिंग को औपचारिक बनाया गया है और आयात भुगतान की निगरानी को कारोबारी अनुबंध की शर्तों से जोड़ा गया है। ₹10 लाख तक के छोटे लेन-देन के लिए EDPMS और IDPMS में सरल घोषणा आधारित प्रक्रिया भी अनुपालन को आसान बना सकती है।

इसलिए निर्यातकों और आयातकों के लिए जरूरी है कि वे 1 अक्टूबर 2026 से पहले अपने भुगतान चक्र, दस्तावेज और बैंकिंग प्रक्रियाओं की समीक्षा करें और नए FEMA नियमों के अनुसार अपनी आंतरिक व्यवस्था तैयार रखें।