UPI का नया रिकॉर्ड: अगस्त में हुए 24.51 अरब लेनदेन, ₹29.82 लाख करोड़ का भुगतान
News Synopsis
भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार लगातार तेज हो रहा है। अगस्त में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने मासिक लेनदेन की संख्या के मामले में अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में UPI के माध्यम से 24.51 अरब लेनदेन किए गए, जिनकी कुल कीमत ₹29.82 लाख करोड़ रही।
यह आंकड़ा बताता है कि मोबाइल और डिजिटल माध्यमों से भुगतान अब भारत में रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों का अहम हिस्सा बन चुका है। छोटी दुकानों पर भुगतान से लेकर बिल जमा करने, ऑनलाइन खरीदारी और दूसरे वित्तीय लेनदेन तक UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।
अगस्त में UPI लेनदेन की संख्या में 3.6% बढ़ोतरी UPI Transaction Volume Rises 3.6% in August
अगस्त में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) Unified Payments Interface (UPI) के लेनदेन की संख्या जुलाई के मुकाबले 3.6 प्रतिशत बढ़ी। जुलाई में UPI ने 23.66 अरब लेनदेन दर्ज किए थे, जबकि उनका कुल मूल्य करीब ₹29.88 लाख करोड़ था।
अगस्त में लेनदेन की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया, लेकिन कुल लेनदेन मूल्य जुलाई की तुलना में थोड़ा कम रहा। अब तक UPI पर सबसे अधिक मासिक लेनदेन मूल्य मई में दर्ज किया गया था, जब यह करीब ₹29.9 लाख करोड़ तक पहुंच गया था।
यह अंतर यह भी दिखाता है कि लेनदेन की संख्या बढ़ने का मतलब हमेशा कुल भुगतान मूल्य में उसी अनुपात में वृद्धि होना जरूरी नहीं है। छोटे मूल्य के डिजिटल भुगतान बढ़ने से लेनदेन की संख्या तेजी से ऊपर जा सकती है।
सालाना आधार पर भी UPI की मजबूत वृद्धि UPI Also Records Strong Year-on-Year Growth
अगस्त के आंकड़े सालाना आधार पर भी UPI के मजबूत विस्तार को दिखाते हैं। पिछले वर्ष अगस्त की तुलना में UPI लेनदेन की संख्या में करीब 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि कुल लेनदेन मूल्य लगभग 20 प्रतिशत बढ़ा।
यह वृद्धि बताती है कि डिजिटल भुगतान धीरे-धीरे भारतीय उपभोक्ताओं और कारोबारियों की नियमित वित्तीय गतिविधियों का हिस्सा बन रहा है। किराना दुकानों, रेस्तरां, परिवहन सेवाओं, ऑनलाइन खरीदारी, बिल भुगतान और कई अन्य क्षेत्रों में UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
रोजाना औसतन 79.1 करोड़ UPI लेनदेन Average Daily UPI Transactions Reach 791 Million
अगस्त में UPI पर रोजाना औसतन करीब 79.1 करोड़ लेनदेन हुए। जुलाई में यह औसत लगभग 76.3 करोड़ लेनदेन प्रतिदिन था।
इस दौरान रोजाना होने वाले UPI लेनदेन का औसत मूल्य करीब ₹96,205 करोड़ रहा। इतने बड़े पैमाने पर रोजाना डिजिटल भुगतान होना भारत के डिजिटल वित्तीय ढांचे की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।
UPI बदल रहा है भारत में भुगतान करने का तरीका UPI Is Changing Payment Behaviour in India
UPI के लगातार बढ़ते इस्तेमाल ने भारत में भुगतान करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां नकद भुगतान रोजमर्रा के लेनदेन का प्रमुख माध्यम था, वहीं अब स्मार्टफोन के जरिए कुछ ही सेकंड में बैंक खाते से सीधे भुगतान करना संभव है।
वित्तीय तकनीक क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल लेनदेन में लगातार हो रही बढ़ोतरी लोगों के ऑनलाइन भुगतान पर बढ़ते भरोसे को भी दिखाती है। UPI ने बैंक खाते से बैंक खाते में तुरंत भुगतान को आसान बनाया है और अलग-अलग डिजिटल अनुप्रयोगों के माध्यम से इसे बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाया है।
आने वाले समय में डिजिटल भुगतान की अगली दिशा केवल लेनदेन की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रह सकती। वित्तीय सेवाओं को उन लोगों तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होगा, जो अभी डिजिटल बैंकिंग की पूरी सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।
दूसरे डिजिटल भुगतान माध्यमों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा Other Digital Payment Systems Show Mixed Performance
अगस्त में UPI ने रिकॉर्ड बनाया, लेकिन दूसरे डिजिटल भुगतान माध्यमों में अलग-अलग तरह के रुझान देखने को मिले। कुछ सेवाओं में लेनदेन बढ़े, जबकि कुछ में मामूली गिरावट दर्ज की गई।
IMPS लेनदेन में मामूली गिरावट IMPS Transactions Decline Slightly
इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) के माध्यम से अगस्त में करीब 36 करोड़ लेनदेन हुए। जुलाई में यह आंकड़ा लगभग 36.4 करोड़ था।
IMPS के कुल लेनदेन मूल्य में भी थोड़ी कमी आई और यह अगस्त में करीब ₹7.04 लाख करोड़ रहा। हालांकि IMPS अभी भी तत्काल बैंक भुगतान का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन UPI के बढ़ते इस्तेमाल ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में इसकी भूमिका को प्रभावित किया है।
FASTag लेनदेन में 1.2% वृद्धि FASTag Transactions Rise 1.2%
अगस्त में FASTag के इस्तेमाल में भी मामूली वृद्धि दर्ज की गई। FASTag लेनदेन की संख्या करीब 1.2 प्रतिशत बढ़कर 35.1 करोड़ हो गई।
इन लेनदेन का कुल मूल्य भी बढ़कर करीब ₹7,185 करोड़ पहुंच गया, जबकि जुलाई में यह ₹7,143 करोड़ था।
सड़क परिवहन में इलेक्ट्रॉनिक टोल भुगतान की सुविधा के कारण FASTag का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। दैनिक उपयोग में भी अगस्त के दौरान सुधार देखा गया, जो देशभर में डिजिटल टोल भुगतान की स्वीकार्यता को दर्शाता है।
AePS में लेनदेन बढ़े, लेकिन कुल मूल्य घटा AePS Records Higher Volume but Lower Value
आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) के आंकड़ों में अगस्त में अलग तस्वीर देखने को मिली। AePS के लेनदेन की संख्या करीब 4 प्रतिशत बढ़कर 10.4 करोड़ हो गई।
हालांकि, इन लेनदेन का कुल मूल्य लगभग 5 प्रतिशत घटकर ₹26,035 करोड़ रह गया। इसका मतलब है कि लेनदेन की संख्या बढ़ी, लेकिन औसतन किए गए भुगतान का आकार कम रहा।
AePS खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जिन्हें बैंकिंग और भुगतान सेवाएं आधार आधारित पहचान के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं।
छोटे शहर और ग्रामीण क्षेत्र होंगे अगली वृद्धि का आधार Smaller Cities and Rural Areas Could Drive the Next Phase of Growth
भारत में डिजिटल भुगतान की अगली बड़ी वृद्धि छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने की उम्मीद की जा रही है।
बड़े शहरों में स्मार्टफोन आधारित डिजिटल भुगतान पहले ही व्यापक हो चुका है, लेकिन देश की आबादी का एक हिस्सा अभी भी डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक पूरी पहुंच नहीं रखता। इंटरनेट की उपलब्धता, स्मार्टफोन की कीमत, डिजिटल जानकारी और तकनीकी समझ जैसी चीजें इसके पीछे महत्वपूर्ण कारण हो सकती हैं।
ऐसे में डिजिटल भुगतान को देश के दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचाना वित्तीय समावेशन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
सहायक भुगतान सेवाएं निभा सकती हैं बड़ी भूमिका Assisted Payments Could Support Financial Inclusion
ऐसी भुगतान सेवाएं जिनमें ग्राहक को किसी एजेंट या स्थानीय सेवा केंद्र की सहायता मिलती है, डिजिटल वित्तीय व्यवस्था को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद कर सकती हैं।
जहां स्मार्टफोन या इंटरनेट का इस्तेमाल सीमित है, वहां सहायक भुगतान सेवाओं के माध्यम से लोगों को बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से जोड़ा जा सकता है। इससे उन लोगों को भी औपचारिक वित्तीय व्यवस्था का हिस्सा बनने में मदद मिलेगी, जो अभी इससे पूरी तरह नहीं जुड़े हैं।
डिजिटल भुगतान का लक्ष्य अब केवल संख्या बढ़ाना नहीं The Goal Is No Longer Just Higher Transaction Numbers
UPI के रिकॉर्ड लेनदेन यह जरूर दिखाते हैं कि भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन आगे की चुनौती इस वृद्धि को अधिक समावेशी बनाना होगी।
भविष्य में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि डिजिटल भुगतान की सुविधा छोटे कारोबारियों, ग्रामीण परिवारों, बुजुर्गों और डिजिटल साधनों तक सीमित पहुंच रखने वाले लोगों तक कितनी आसानी से पहुंचती है।
भारत का डिजिटल भुगतान ढांचा लगातार मजबूत हो रहा है India’s Digital Payment Ecosystem Continues to Expand
अगस्त के आंकड़े भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था की तेज रफ्तार को स्पष्ट करते हैं। UPI के 24.51 अरब मासिक लेनदेन का नया रिकॉर्ड बनाना इस बात का संकेत है कि यह भुगतान प्रणाली देश की अर्थव्यवस्था में कितनी महत्वपूर्ण हो चुकी है।
दूसरी ओर, IMPS, FASTag और AePS के आंकड़े बताते हैं कि भारत में अलग-अलग डिजिटल भुगतान माध्यम अपनी-अपनी जरूरतों के अनुसार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
आने वाले समय में छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ाना, आसान भुगतान विकल्प उपलब्ध कराना और सहायक सेवाओं को मजबूत करना भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और अधिक व्यापक बनाने में मदद कर सकता है।
निष्कर्ष Conclusion
अगस्त में UPI ने 24.51 अरब लेनदेन के साथ अब तक का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड बनाया। कुल लेनदेन का मूल्य करीब ₹29.82 लाख करोड़ रहा। जुलाई की तुलना में लेनदेन की संख्या 3.6 प्रतिशत बढ़ी, जबकि सालाना आधार पर इसमें करीब 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
UPI के साथ-साथ FASTag और AePS जैसी सेवाओं में भी अलग-अलग स्तर पर वृद्धि देखने को मिली, जबकि IMPS लेनदेन में मामूली गिरावट आई। हालांकि भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र ने मजबूत विस्तार किया है, लेकिन अगली बड़ी चुनौती इस सुविधा को छोटे शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों और डिजिटल सेवाओं से कम जुड़े लोगों तक पहुंचाना होगी। इससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी और मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।


