एन चन्द्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति: टाटा संस चेयरमैन के रूप में पांच साल और रहेंगे चंद्रशेखरन

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एन चन्द्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति: टाटा संस चेयरमैन के रूप में पांच साल और रहेंगे चंद्रशेखरन
18 Sep 2026
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News Synopsis

Tata Sons के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को कंपनी के कार्यकारी चेयरमैन के रूप में अगले पांच वर्षों के लिए फिर से नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। यह फैसला 17 सितंबर 2026 को मुंबई में हुई बोर्ड बैठक में लिया गया। खास बात यह है कि चंद्रशेखरन ने अगस्त 2026 में घोषणा की थी कि वह फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा इस पद के लिए अपनी दावेदारी नहीं करेंगे। ताजा फैसले के बाद उनकी उस योजना में बदलाव हो गया है।

Tata Sons के अनुसार, बोर्ड की नामांकन और पारिश्रमिक समिति की ओर से चंद्रशेखरन से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद उन्होंने बोर्ड के अनुरोध को स्वीकार किया और बोर्ड ने बहुमत से उन्हें अगले पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त करने का फैसला किया। नया कार्यकाल मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद शुरू होने की उम्मीद है।

चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने का फैसला क्यों बदला। Why Did Chandrasekaran Reconsider His Decision to Step Down?

एन. चंद्रशेखरन N Chandrasekaran के दोबारा Tata Sons की कमान संभालने का फैसला ऐसे समय आया है, जब समूह में नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चा चल रही थी।

अगस्त में चंद्रशेखरन ने संकेत दिया था कि वह फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद आगे इस पद पर बने रहने की इच्छा नहीं रखते। इसके बाद Tata Sons में नए चेयरमैन की तलाश और नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हुई थी।

हालांकि, 3 सितंबर की नामांकन और पारिश्रमिक समिति की बैठक में बोर्ड ने उनसे अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया। रिपोर्टों के अनुसार, बोर्ड ने समूह में उनके योगदान और Tata Group के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए यह आग्रह किया था। बाद में चंद्रशेखरन ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया।

नया कार्यकाल फरवरी 2027 के बाद शुरू होगा New Term Expected to Begin After February 2027

चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होने वाला है। बोर्ड ने इसके बाद अगले पांच वर्षों के लिए उनकी पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी है। हालांकि, इस प्रक्रिया में लागू कॉरपोरेट और नियामकीय प्रक्रियाएं भी महत्वपूर्ण रहेंगी।

Tata Sons में नेतृत्व परिवर्तन की योजना पर लगा विराम Tata Sons Succession Plan Put on Hold

चंद्रशेखरन के पहले पद छोड़ने के फैसले के बाद Tata Sons में उत्तराधिकारी की तलाश को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। रिपोर्टों में Tata Steel के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टीवी नरेंद्रन, Tata Sons के समूह मुख्य वित्तीय अधिकारी सौरभ अग्रवाल और NSE के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष चौहान जैसे नामों का संभावित विकल्प के रूप में उल्लेख किया गया था।

अब चंद्रशेखरन के पांच साल और जारी रहने के फैसले से तत्काल नेतृत्व परिवर्तन की संभावना फिलहाल टल गई है। वह 2017 से Tata Sons का नेतृत्व कर रहे हैं और 2022 में उन्हें दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त किया गया था।

चंद्रशेखरन ने 2017 में रतन टाटा के बाद Tata Sons के चेयरमैन का पद संभाला था। इससे पहले वह Tata Consultancy Services यानी TCS के प्रमुख रह चुके थे।

नोएल टाटा ने पुनर्नियुक्ति के खिलाफ किया मतदान Noel Tata Votes Against Chandrasekaran’s Reappointment

चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के फैसले में Tata Sons के प्रमुख शेयरधारकों के बीच मतभेद भी सामने आया। Tata Trusts के चेयरमैन और Tata Sons के बोर्ड सदस्य नोएल टाटा ने पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। हालांकि, बोर्ड के बाकी सदस्यों के समर्थन से प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया।

Tata Trusts के पास Tata Sons में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ट्रस्ट की ओर से इस प्रस्ताव की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। Tata Trusts का कहना है कि कंपनी के Articles of Association में ट्रस्ट के नामित निदेशकों की भूमिका से जुड़े प्रावधान हैं और पुनर्नियुक्ति के मामले में उनकी सहमति जरूरी है।

दूसरी ओर, Tata Sons के बोर्ड ने प्रस्ताव को बहुमत से मंजूरी दी है। इस कारण चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति को लेकर कंपनी के भीतर शासन व्यवस्था से जुड़ा विवाद सामने आया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, आगे इस मामले पर शेयरधारकों की बैठक में भी चर्चा हो सकती है।

Tata Sons की लिस्टिंग का मुद्दा भी महत्वपूर्ण Tata Sons Listing Issue Gains Importance

चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के साथ Tata Sons की संभावित शेयर बाजार में लिस्टिंग का मुद्दा भी चर्चा में है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने Tata Sons के उस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया, जिसमें कंपनी ने अपनी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी यानी NBFC से जुड़ा पंजीकरण वापस लेने की मांग की थी। इस घटनाक्रम के बाद कंपनी पर लागू नियामकीय जरूरतों और संभावित लिस्टिंग को लेकर चर्चा फिर तेज हुई।

17 सितंबर की बोर्ड बैठक में Tata Sons ने RBI से जुड़े नियामकीय निर्देशों का पालन करने और आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित पक्षों से मार्गदर्शन लेने की बात कही। बोर्ड ने कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की दिशा में आगे बढ़ने का भी फैसला किया है।

मार्केटिंग को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और एसपी ग्रुप के अलग-अलग रुख Different Positions of Tata Trusts and SP Group on Listing

Tata Sons की संभावित लिस्टिंग को लेकर प्रमुख शेयरधारकों के बीच भी अलग-अलग राय सामने आई है। Tata Trusts की ओर से कंपनी को निजी और गैर-सूचीबद्ध रखने की इच्छा व्यक्त की गई है। वहीं, Shapoorji Pallonji Group, जिसकी Tata Sons में करीब 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है, लंबे समय से अपनी हिस्सेदारी के मूल्य को बढ़ाने और लिस्टिंग के विकल्प का समर्थन करता रहा है।

इस मुद्दे पर आगे होने वाली चर्चा Tata Sons की स्वामित्व संरचना और भविष्य की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

Tata Group में चंद्रशेखरन की भूमिका Chandrasekaran’s Role in the Tata Group

एन. चंद्रशेखरन ने 1987 में Tata Consultancy Services से अपने करियर की शुरुआत की थी। बाद में वह TCS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने और 2017 में Tata Sons के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली।

उनके कार्यकाल में Tata Group ने तकनीक, ऑटोमोबाइल, विमानन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और डिजिटल कारोबार जैसे कई क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां आगे बढ़ाई हैं।

Tata Sons, Tata Group की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। इसके तहत TCS, Tata Motors, Tata Steel और Air India जैसी बड़ी कंपनियां आती हैं। समूह के अंतर्गत 30 से अधिक कंपनियां हैं।

चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल का क्या मतलब है। What Does Chandrasekaran’s Third Term Mean for Tata Sons?

चंद्रशेखरन की पांच साल के लिए पुनर्नियुक्ति Tata Sons में नेतृत्व की निरंतरता बनाए रखेगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब कंपनी को RBI से जुड़े नियामकीय मामलों, संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग और प्रमुख शेयरधारकों के बीच मतभेद जैसे मुद्दों पर आगे बढ़ना है।

हालांकि, उनकी पुनर्नियुक्ति के बाद नेतृत्व परिवर्तन का तत्काल सवाल पीछे चला गया है, लेकिन Tata Sons की स्वामित्व संरचना, लिस्टिंग और बोर्ड की भूमिका से जुड़े मुद्दे अभी भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

इस तरह 17 सितंबर 2026 का बोर्ड फैसला चंद्रशेखरन के भविष्य को लेकर कुछ समय से चल रही अनिश्चितता को एक नई दिशा देता है। वहीं, Tata Sons की लिस्टिंग और कंपनी के शासन ढांचे को लेकर अलग-अलग पक्षों की राय आगे भी चर्चा का विषय बनी रह सकती है।