मारुति सुजुकी ने FY-26 में 23.4 लाख यूनिट्स का रिकॉर्ड बनाया
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मारुति सुजुकी ने FY26 में अपना अब तक का सबसे ज़्यादा सालाना प्रोडक्शन दर्ज किया, जो 23.4 लाख यूनिट्स के पार पहुँच गया। यह देश की सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। कंपनी ने बताया कि भारत में पैसेंजर गाड़ियाँ बनाने वाली यह अकेली ऐसी कंपनी है, जिसने यह पैमाना हासिल किया है, और सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के ग्लोबल नेटवर्क में भी यह अकेली ऐसी फ़ैक्टरी है, जो इतनी बड़ी संख्या में प्रोडक्शन कर पाई है।
प्रोडक्शन में यह तेज़ी मुख्य मॉडल्स के ज़बरदस्त आउटपुट की वजह से आई, इस वित्त वर्ष के दौरान Dzire, Fronx, Swift, Ertiga और Baleno इन सभी मॉडल्स का प्रोडक्शन 2 लाख यूनिट्स के आँकड़े को पार कर गया।
मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO Hisashi Takeuchi ने कहा कि यह उपलब्धि दशकों में तैयार हुए एक मज़बूत इकोसिस्टम को दिखाती है, जिसे कर्मचारियों, वेंडर्स और डीलर्स के आपसी सहयोग के साथ-साथ सरकार की अनुकूल नीतियों का भी समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि कंपनी आने वाले सालों में अपनी प्रोडक्शन क्षमता को बढ़ाकर सालाना लगभग 40 लाख यूनिट्स तक पहुँचाने की योजना बना रही है, जिसके लिए गुजरात में एक नई फ़ैक्टरी लगाने जैसी विस्तार योजनाएँ भी शामिल हैं।
मारुति सुजुकी के फ़िलहाल हरियाणा के गुरुग्राम, मानेसर और खरखौदा में, और साथ ही गुजरात के हंसलपुर में मैन्युफ़ैक्चरिंग प्लांट्स चल रहे हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता लगभग 24 लाख यूनिट्स प्रति वर्ष है।
बदलती मांग के बीच मार्केट शेयर में गिरावट
रिकॉर्ड प्रोडक्शन के बावजूद पैसेंजर व्हीकल (PV) मार्केट में मारुति सुजुकी का दबदबा लगातार कम होता गया। सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के आंकड़ों के अनुसार FY26 में कंपनी का मार्केट शेयर गिरकर 13 साल के निचले स्तर 39.26% पर आ गया, जो लगातार तीसरे साल की गिरावट है।
यह कार निर्माता कंपनी, जिसका एक समय मार्केट में लगभग 50% हिस्सा था, FY20 के बाद से लगभग 12 प्रतिशत अंक गंवा चुकी है।
यह गिरावट ग्राहकों की पसंद में आए बदलाव को दर्शाती है, जो अब स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल्स (SUVs) की ओर झुक रहे हैं, यह एक ऐसा सेगमेंट है, जहाँ मारुति की मौजूदगी अपेक्षाकृत कम है। जहाँ एक ओर कंपनी Wagon R, Swift और Baleno जैसे मॉडल्स के साथ सब-4 मीटर सेगमेंट में अपना दबदबा बनाए हुए है, वहीं इस श्रेणी में विकास दर FY26 में धीमी होकर 2% से भी कम रह गई, जबकि यूटिलिटी व्हीकल्स में विकास दर 11% रही।
कॉम्पिटिटर से बढ़ता कॉम्पिटिशन
मारुति के मार्केट शेयर में कमी के साथ-साथ कॉम्पिटिटर को भी ज़बरदस्त फ़ायदा हुआ है। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने पाँच सालों में अपना मार्केट शेयर दोगुना से भी ज़्यादा बढ़ाकर FY26 में 14.21% कर लिया है। इसकी मुख्य वजह Thar, Bolero और Scorpio जैसे मॉडल्स की ज़बरदस्त माँग रही, जिसके चलते यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी बनकर उभरी है।
इसके बाद Tata Motors का नंबर आता है, जिसका मार्केट शेयर 13% रहा। इसे Nexon, Punch और Safari जैसे मॉडल्स से काफ़ी मदद मिली।
Toyota Motor Corporation के साथ कंपनी की साझेदारी के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। Grand Vitara, जिसे Toyota Urban Cruiser Hyryder के नाम से भी बेचा जाता है, और कई बार अपने Maruti वाले मॉडल से बेहतर प्रदर्शन किया है। यह इस बात का संकेत है, कि कंपनी के भीतर ही आपस में मुकाबला चल रहा है।
प्रीमियम MPV सेगमेंट में Maruti अभी भी पीछे चल रही है। जहाँ Invicto की महीने में लगभग 300–400 यूनिट्स बिकती हैं, वहीं Toyota Innova Hycross की 9,000–11,000 यूनिट्स बिकती हैं। यह इस बात को दिखाता है, कि ऊँचे दर्जे के सेगमेंट्स में कंपनी को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।


