LPG सिलेंडर के दाम फिर बढ़े, 7 जून से लागू ₹29 की बढ़ोतरी

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LPG सिलेंडर के दाम फिर बढ़े, 7 जून से लागू ₹29 की बढ़ोतरी
08 Jun 2026
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News Synopsis

घरेलू उपभोक्ताओं पर एक बार फिर महंगाई का असर पड़ा है, क्योंकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 7 जून से घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में ₹29 की बढ़ोतरी कर दी है। यह पिछले तीन महीनों में दूसरी बार हुई बढ़ोतरी है, जिससे पहले से ही बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

देशभर में LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी

देशभर के घरों को अब खाना पकाने के लिए गैस पर अधिक भुगतान करना होगा, क्योंकि घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में संशोधन किया गया है। उद्योग सूत्रों के अनुसार दिल्ली में 14.2 किलो वाले मानक घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹913 से बढ़कर ₹942 हो गई है।

यह नवीनतम संशोधन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) द्वारा घरेलू LPG खंड में हो रहे घाटे को कम करने के प्रयासों का हिस्सा है। वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण यह दबाव लगातार बना हुआ है।

तीन महीनों में दूसरी बढ़ोतरी

₹29 की यह नई बढ़ोतरी 7 मार्च को घोषित ₹60 की बढ़ोतरी के बाद आई है। इसका मतलब है, कि सिर्फ तीन महीनों में घरेलू LPG कीमतों में दूसरी बार वृद्धि की गई है।

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार इन संशोधनों के बावजूद ईंधन रिटेलर्स अभी भी भारी नुकसान झेल रहे हैं, क्योंकि कई मामलों में LPG को लागत से कम कीमत पर बेचा जा रहा है।

नवीनतम बढ़ोतरी से पहले तेल कंपनियों को प्रति सिलेंडर लगभग ₹703 का घाटा हो रहा था।

ईंधन कीमतों में व्यापक वृद्धि का असर

LPG की कीमतों में बढ़ोतरी देश में ईंधन कीमतों में व्यापक वृद्धि के रुझान का हिस्सा है। पिछले कुछ हफ्तों में:

  • पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है
  • CNG की कीमतों में लगभग ₹6 प्रति किलो की वृद्धि हुई है

इन बढ़ोतरी ने परिवहन और घरेलू खर्चों पर अतिरिक्त बोझ डाला है, जिससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

परिवहन ईंधनों में भी भारी घाटा

उद्योग सूत्रों के अनुसार केवल LPG ही नहीं बल्कि परिवहन ईंधनों में भी तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है।

अनुमानित घाटे इस प्रकार हैं:

  • पेट्रोल पर लगभग ₹11 प्रति लीटर का घाटा
  • डीजल पर लगभग ₹33.6 प्रति लीटर का घाटा

ये आंकड़े बताते हैं, कि वैश्विक बाजार के दबाव और सरकारी नियंत्रण के कारण ईंधन कीमतें लागत से कम बनी हुई हैं।

सरकार की रणनीति और वैश्विक ऊर्जा प्रभाव

सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है। इसके बजाय सरकारी तेल कंपनियां कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए कुछ लागत खुद वहन कर रही हैं।

इस नीति का उद्देश्य उपभोक्ताओं को अचानक कीमतों में उछाल से बचाना है, लेकिन इससे तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है।

LPG पर अभी भी उच्च घाटा

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि घरेलू LPG पर घाटा अभी भी काफी अधिक है।

उन्होंने कहा कि घरेलू LPG सिलेंडर पर अभी भी लगभग ₹700 प्रति सिलेंडर का घाटा बना हुआ है।

LPG आपूर्ति सुधारने के सरकारी प्रयास

सरकार LPG आपूर्ति को स्थिर रखने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कई कदम उठा रही है, जैसे:

  • घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाना
  • आयात व्यवस्था को मजबूत करना
  • वितरण प्रणाली में सुधार करना

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एक दिन में लगभग 54 TMT LPG घरेलू स्रोतों से निकाला गया, जो आपूर्ति को संतुलित रखने में मदद करता है।

LPG मांग में बदलाव

अधिकारियों ने बताया कि हाल के समय में LPG की मांग में कुछ कमी देखी गई है। इसके कारण हैं:

  • व्यावसायिक और औद्योगिक उपयोग में कमी
  • बुकिंग चक्र में बदलाव
  • डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड आधारित सिस्टम

इन बदलावों से कुल मांग में थोड़ी नरमी आई है।

वैश्विक तनाव के बावजूद आपूर्ति स्थिर

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत में ऊर्जा आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। सरकार ने बताया कि कच्चा तेल, LPG और प्राकृतिक गैस की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है।

सुजाता शर्मा ने कहा कि:

  • पेट्रोल, डीजल और LPG का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है
  • रिफाइनरी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं
  • आपूर्ति श्रृंखला स्थिर बनी हुई है

घरेलू बजट पर असर

LPG की कीमतों में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर घरेलू बजट को प्रभावित करेगी। विशेषकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर इसका असर अधिक होगा।

खाना पकाने की गैस जैसी आवश्यक वस्तु के दाम बार-बार बढ़ने से मासिक खर्चों में बढ़ोतरी तय है।

निष्कर्ष:

घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में ₹29 की बढ़ोतरी वैश्विक ऊर्जा लागत और घरेलू घाटों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को दर्शाती है। सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश कर रही है, लेकिन लगातार बढ़ती लागत और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण समय-समय पर मूल्य संशोधन जरूरी हो रहा है।