बवाल हो गई है ज़िन्दगी

Share Us

8516
बवाल हो गई है ज़िन्दगी
31 Jul 2021
3 min read

Blog Post

कोरोना महामारी के चलते ज़िन्दगी थम सी गयी है। इस कविता के ज़रिये कवि ने कोरोना काल में गुज़रते हुए ज़िन्दगी के हाल को बयां करने की कोशिश की है।

कोरोना के चक्कर में, बवाल हो गई है ज़िन्दगी,
जवाबों के कटघरे में सवाल हो गई है ज़िन्दगी...

धड़कता  दिल, तो  यहां खैरियत  का पैमाना है,
दौर-ए-वक़्त में जैसे इंतकाल हो गई है ज़िन्दगी...

कल तक, चेहरे की खूबसूरती का बोलबाला था,
आज मुंह पर बंधी बस रूमाल हो गई है ज़िन्दगी....

चारदीवारी में अब घर की पल - पल कैसे कटता है,
आज अधूरा लगता कल पर काल हो गई है ज़िन्दगी...

आज़ादी, चैन -ओ- सुकूं का नामोनिशां तक नहीं बचा,
रोज़मर्रा की तकलीफों से मालामाल हो गई है ज़िन्दगी...

 

You May Like

TWN Reviews
TWN Reviews