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Entrepreneurship Motivation

जानिए 26 साल की एंटरप्रेन्योर अरुणा चावला की कहानी

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जानिए 26 साल की एंटरप्रेन्योर अरुणा चावला की कहानी

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Post Highlights

आज हम ऐसे शख्शियत के बारे में बात करने जा रहें है जो उम्र से केवल 26 साल की है लेकिन आज भारत में एक अलग पहचान बन गई है। हम बात कर रहें है अरुणा चावला की जिन्होंने अपने नहीं बल्कि दुनिया के बारे में सोचते हुए जनसंख्या पर नियंत्रण पाने के लिए शुरू कि कॉन्डम कंपनी। भारत जैसे देश में एक महिला होने के नाते इस व्यवसाय में करियर बनाना क्या असान रहा होगा इनके लिए?आइए जानते है ।

कॉन्डम ये एक ऐसा शब्द है जिसे लोग खुले आम कहना भी उचित नहीं समझते है। आधुनिकता की बात करें तो हम हमेशा अपने आप को सबसे आगे मानते है लेकिन सेक्स सबंधित जानकारी या कॉन्डम (condom) जिसे गर्भनिरोधक कहते हैं से जुड़ी बातों को बंद कमरे में ही करते हैं। इसलिए भारत में आज बहुत से लोग हैं जिन्हें इसके बारे में ज्ञान ही नहीं है। आखिर क्या ग़लत है इस शब्द में यही सोच रखने वाली 26 साल की महिला अरुणा चावला आज एक बड़ी एंटरप्रेन्योर बन गई है। हमारे भारतीय समाज में ऐसे बिज़नेस के लिए केवल मर्दों को देखा जाता है। ऐसे सेक्टर में अरुणा जैसी लड़कियों या महिलाओं का सामने आना लोगों को काफी अचंभित कर सकता है। इस आधुनिक दौर में जो महिलाएं सचमुच सामने आई हैं वे केवल कॉन्डम बल्कि सेक्स प्रॉडक्ट के बिज़नेस में काफ़ी आगे तक पहुँच चुकी है।

करियर की शुरुआत वकालत से कि

अरुणा चावला Aruna Chawla ने अपने करियर कि शुरुआत क्रिस्ट यूनिवर्सिटी, बेंगलुरू से साल 2013 से 2018 तक वकालत में की थी। जिसके बाद इन्होंने इस प्रोफेशन में आर्ट एंड फैशन लॉयर के तौर पर जॉब भी की लेकिन इससे वे ज्यादा संतुष्ट नहीं थी। फिर उन्होंने कई विषयों पर रिसर्च पढ़ाई करनी शुरू की फिर वे एक साइकोलॉजिस्ट के तौर पर काम करने लगीं और साथ ही साथ में B2B -कॉमर्स बिज़नेस (E-commerce business) के लिए रिसर्च भी करने लगी।उन्होंने अपने क्लाइंट से हेल्थ वेलनेस के सेक्टर के बारे में जाना तो पता चला कि भारत में सिर्फ 5.6 % लोग ही कॉन्डम के उपयोग करते है। उन्होंने इस विषय पर कम से कम 2 महीनें अच्छे से रिसर्च की तब उन्हें एहसास हुआ कि इसे इस्तेमाल करने की वजह उपलब्धता या पैसा नहीं है बल्कि उसे खरीदने के लिए समाजिक सोच की कमी है। अरुणा ने इसके बारे में बड़े-बड़े कॉन्डम निर्माता कंपनियों से बातचित करना शुरू किया।

कैसे आया इस बिज़नेस का आईडिया

जब अरुणा को ये एहसास हो गया कि लोग इसे खरीदने में संकोच करते हैं तो उन्होंने सोचा की अगर वो ऑनलाइन इसे बेचती है तो शायद हमारे समाज के स्त्री या पुरूष किसी के लिए कोई मुश्किल नहीं होगी। इसलिए उन्होंने जून 2020 में इस बिज़नेस में नया स्टार्टअप किया जिसका नाम 'सैलड'( (Salad) रखा गया।

बाकी ब्रांड से है अलग इनका ब्रांड

अरुण का ये ब्रांड पर्यावरण की अनुकूलता को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसकी पैकेजिंग रिसाइकिलेबल है। इन्होंने बताया की इनके इस प्रोडक्ट को खरीदने वाली महिलाओं की सख्यां अभी तक 52 % है। अगर हम सैलड कि पैकेजिंग की बात करें तो इसे वीडियो गेम और तेज कलर्स के साथ डिजाइन किया गया है ताकि ये देखने में भी अजीब लगे।

इस ब्रांड को लॉन्च करने में इन अरुणा को मुसीबतों का करना पड़ा सामना

हमारे समाज में महिलाओं का इस फ़ील्ड में आगे बढ़ना असान हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। अरुणा के लिए भी सैलड को लॉन्च करना आसान नहीं था। शुरुआत में जब ये ब्रांड लोगों के सामने आया तो बहुत से लोगों ने अरुणा को सोशल मीडिया में बहुत गंदे मेसेज और अश्लील फोटोज़ भेजना शुरू कर दी जिस कारण उन्हें अपने सोशल मीडिया में सारे फोटोज़ डिलीट कर दिए। यही नहीं सबसे बड़ी परेशानी तो इस ब्रांड की मैन्यूफैक्चरिंग के दौरान हुई। भारत देश कॉन्डम कि मैनुफैक्चरिंग के लिए टॉप पर आता है लेकिन अरुणा का महिला होने की वजह से कोई उनके इस प्रोडक्ट को बनाने के लिए तैयार नहीं था। वह जब भी इस विषय को लेकर किसी मैनुफैक्चरिंग कंपनी के सदस्यों से बात करती तो उन्हें हमेशा ये सुनाया जाता था कि आप अपने पति या पिता से बात करवा दो हम औरतों के साथ इन चीजों के बारे में बात नहीं करते। ऐसे हालतों में अरुणा के लिए ये कार्य शुरू करना किसी चुनोती से कम नहीं था लेकिन अरुणा ने हार नहीं मानी और इतनी चुनोतियों का सामना करने के बाद भी अरुणा कि ये खोज 2021 में पूरी हो ही गई।

खास है इनकी पैकेजिंग

जी हां सैलड की पैकेजिंग खास है क्योंकि इनकी पैकेजिंग क्यूआर कोड है। इसे स्कैन करने पर आप इसकी वेबसाइट पर पहुंच जाएंगे जहां इसकी पूरी जानकारी दी गई है जैसे इसे कैसे और किन किन सामग्रियों के साथ तैयार किया गया है, इसके क्या फ़ायदे है आदि के बारे में सब कुछ दिया गया है।

ऐसे की इसकी मार्केटिंग

लोगों तक सैलड की जानकारी पहुचाने के लिए अरुणा चावला ने किन माध्यमों का इस्तेमाल नहीं किया। इन्होंने इसकी जानकारी देने के लिए सबसे पहले माउथ मार्केटिंग का उपयोग किया। सैलड के सैंपल फ्री में बांटे और लोगों को सेक्स एडुकेशन (sex education) देने के लिए सेमिनार और पार्टियां आदि आयोजित कि। अरुणा ने विज्ञापनों में पैसा लगाने के वजाए अपनी website को ऐसे तैयार किया कि इसे यूज करने वाले व्यक्तियों को इसकी सारी जानकारी वेबसाइट से मिल जाए।

अंत में दोस्तों अरुणा ने इतनी मुसीबतों के बाद भी जो सोचा वो कर भी दिखाया। वो कहते हैं जब भी हम अपनी जिंदगी में कुछ बढ़ा हासिल करने का प्रयास और हिमत रखतें है तो बीच में रुकावटें भी बड़ी आती है तो हमें उस समय हार नहीं माननी चाहिए। अरुणा चावला के जीवन में सबसे बड़ी रुकावट थी समाज जहां उन्होंने 25 साल की उम्र में इतनी बड़ी एंटरप्रेन्योर बनकर समाज को एक नई सीख दे दी।

कॉन्डम ये एक ऐसा शब्द है जिसे लोग खुले आम कहना भी उचित नहीं समझते है। आधुनिकता की बात करें तो हम हमेशा अपने आप को सबसे आगे मानते है लेकिन सेक्स सबंधित जानकारी या कॉन्डम (condom) जिसे गर्भनिरोधक कहते हैं से जुड़ी बातों को बंद कमरे में ही करते हैं। इसलिए भारत में आज बहुत से लोग हैं जिन्हें इसके बारे में ज्ञान ही नहीं है। आखिर क्या ग़लत है इस शब्द में यही सोच रखने वाली 26 साल की महिला अरुणा चावला आज एक बड़ी एंटरप्रेन्योर बन गई है। हमारे भारतीय समाज में ऐसे बिज़नेस के लिए केवल मर्दों को देखा जाता है। ऐसे सेक्टर में अरुणा जैसी लड़कियों या महिलाओं का सामने आना लोगों को काफी अचंभित कर सकता है। इस आधुनिक दौर में जो महिलाएं सचमुच सामने आई हैं वे केवल कॉन्डम बल्कि सेक्स प्रॉडक्ट के बिज़नेस में काफ़ी आगे तक पहुँच चुकी है।

करियर की शुरुआत वकालत से कि

अरुणा चावला Aruna Chawla ने अपने करियर कि शुरुआत क्रिस्ट यूनिवर्सिटी, बेंगलुरू से साल 2013 से 2018 तक वकालत में की थी। जिसके बाद इन्होंने इस प्रोफेशन में आर्ट एंड फैशन लॉयर के तौर पर जॉब भी की लेकिन इससे वे ज्यादा संतुष्ट नहीं थी। फिर उन्होंने कई विषयों पर रिसर्च पढ़ाई करनी शुरू की फिर वे एक साइकोलॉजिस्ट के तौर पर काम करने लगीं और साथ ही साथ में B2B -कॉमर्स बिज़नेस (E-commerce business) के लिए रिसर्च भी करने लगी।उन्होंने अपने क्लाइंट से हेल्थ वेलनेस के सेक्टर के बारे में जाना तो पता चला कि भारत में सिर्फ 5.6 % लोग ही कॉन्डम के उपयोग करते है। उन्होंने इस विषय पर कम से कम 2 महीनें अच्छे से रिसर्च की तब उन्हें एहसास हुआ कि इसे इस्तेमाल करने की वजह उपलब्धता या पैसा नहीं है बल्कि उसे खरीदने के लिए समाजिक सोच की कमी है। अरुणा ने इसके बारे में बड़े-बड़े कॉन्डम निर्माता कंपनियों से बातचित करना शुरू किया।

कैसे आया इस बिज़नेस का आईडिया

जब अरुणा को ये एहसास हो गया कि लोग इसे खरीदने में संकोच करते हैं तो उन्होंने सोचा की अगर वो ऑनलाइन इसे बेचती है तो शायद हमारे समाज के स्त्री या पुरूष किसी के लिए कोई मुश्किल नहीं होगी। इसलिए उन्होंने जून 2020 में इस बिज़नेस में नया स्टार्टअप किया जिसका नाम 'सैलड'( (Salad) रखा गया।

बाकी ब्रांड से है अलग इनका ब्रांड

अरुण का ये ब्रांड पर्यावरण की अनुकूलता को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसकी पैकेजिंग रिसाइकिलेबल है। इन्होंने बताया की इनके इस प्रोडक्ट को खरीदने वाली महिलाओं की सख्यां अभी तक 52 % है। अगर हम सैलड कि पैकेजिंग की बात करें तो इसे वीडियो गेम और तेज कलर्स के साथ डिजाइन किया गया है ताकि ये देखने में भी अजीब लगे।

इस ब्रांड को लॉन्च करने में इन अरुणा को मुसीबतों का करना पड़ा सामना

हमारे समाज में महिलाओं का इस फ़ील्ड में आगे बढ़ना असान हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। अरुणा के लिए भी सैलड को लॉन्च करना आसान नहीं था। शुरुआत में जब ये ब्रांड लोगों के सामने आया तो बहुत से लोगों ने अरुणा को सोशल मीडिया में बहुत गंदे मेसेज और अश्लील फोटोज़ भेजना शुरू कर दी जिस कारण उन्हें अपने सोशल मीडिया में सारे फोटोज़ डिलीट कर दिए। यही नहीं सबसे बड़ी परेशानी तो इस ब्रांड की मैन्यूफैक्चरिंग के दौरान हुई। भारत देश कॉन्डम कि मैनुफैक्चरिंग के लिए टॉप पर आता है लेकिन अरुणा का महिला होने की वजह से कोई उनके इस प्रोडक्ट को बनाने के लिए तैयार नहीं था। वह जब भी इस विषय को लेकर किसी मैनुफैक्चरिंग कंपनी के सदस्यों से बात करती तो उन्हें हमेशा ये सुनाया जाता था कि आप अपने पति या पिता से बात करवा दो हम औरतों के साथ इन चीजों के बारे में बात नहीं करते। ऐसे हालतों में अरुणा के लिए ये कार्य शुरू करना किसी चुनोती से कम नहीं था लेकिन अरुणा ने हार नहीं मानी और इतनी चुनोतियों का सामना करने के बाद भी अरुणा कि ये खोज 2021 में पूरी हो ही गई।

खास है इनकी पैकेजिंग

जी हां सैलड की पैकेजिंग खास है क्योंकि इनकी पैकेजिंग क्यूआर कोड है। इसे स्कैन करने पर आप इसकी वेबसाइट पर पहुंच जाएंगे जहां इसकी पूरी जानकारी दी गई है जैसे इसे कैसे और किन किन सामग्रियों के साथ तैयार किया गया है, इसके क्या फ़ायदे है आदि के बारे में सब कुछ दिया गया है।

ऐसे की इसकी मार्केटिंग

लोगों तक सैलड की जानकारी पहुचाने के लिए अरुणा चावला ने किन माध्यमों का इस्तेमाल नहीं किया। इन्होंने इसकी जानकारी देने के लिए सबसे पहले माउथ मार्केटिंग का उपयोग किया। सैलड के सैंपल फ्री में बांटे और लोगों को सेक्स एडुकेशन (sex education) देने के लिए सेमिनार और पार्टियां आदि आयोजित कि। अरुणा ने विज्ञापनों में पैसा लगाने के वजाए अपनी website को ऐसे तैयार किया कि इसे यूज करने वाले व्यक्तियों को इसकी सारी जानकारी वेबसाइट से मिल जाए।

अंत में दोस्तों अरुणा ने इतनी मुसीबतों के बाद भी जो सोचा वो कर भी दिखाया। वो कहते हैं जब भी हम अपनी जिंदगी में कुछ बढ़ा हासिल करने का प्रयास और हिमत रखतें है तो बीच में रुकावटें भी बड़ी आती है तो हमें उस समय हार नहीं माननी चाहिए। अरुणा चावला के जीवन में सबसे बड़ी रुकावट थी समाज जहां उन्होंने 25 साल की उम्र में इतनी बड़ी एंटरप्रेन्योर बनकर समाज को एक नई सीख दे दी।




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