सोने पर आयात शुल्क 15% होने से ज्वेलरी शेयरों में गिरावट

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सोने पर आयात शुल्क 15% होने से ज्वेलरी शेयरों में गिरावट
13 May 2026
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News Synopsis

भारत में ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली, जब सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने की घोषणा की। यह कदम आयात को नियंत्रित करने और रुपये को स्थिर करने के उद्देश्य से उठाया गया है, लेकिन इससे घरेलू कीमतों में वृद्धि और उपभोक्ता मांग कमजोर होने की चिंता बढ़ गई है, खासकर शादी और त्योहारों के सीजन के दौरान।

ज्वेलरी शेयरों पर दबाव

उच्च आयात शुल्क की घोषणा के बाद प्रमुख ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को आशंका है कि इसका असर मांग और कंपनियों की लाभप्रदता पर पड़ेगा।

NSE पर इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान Kalyan Jewellers का शेयर लगभग 5.8% तक गिर गया, जबकि Senco Gold में करीब 3.4% की गिरावट आई। अन्य कंपनियों जैसे Sky Gold and Diamond, P N Gadgil और Thangamayil Jewellery के शेयरों में भी 3.6% से 4.5% तक की कमजोरी देखी गई।

वहीं, भारत की सबसे बड़ी संगठित ज्वेलरी रिटेल कंपनियों में से एक Titan Company का शेयर लगभग 1.5% फिसल गया। तुलना में, व्यापक बाजार सूचकांक NSE Nifty50 शुरुआती कारोबार में केवल 0.14% की मामूली गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था, जिससे साफ है कि बिकवाली मुख्य रूप से ज्वेलरी सेक्टर तक सीमित रही।

सरकार ने आयात शुल्क बढ़ाकर 15% किया

केंद्र सरकार ने सोने और चांदी पर कुल आयात शुल्क को पहले के 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। इसमें शामिल हैं:

  • 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी
  • 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC)

यह फैसला सोने के आयात को कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि इससे भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और विदेशी मुद्रा भंडार पर बड़ा असर पड़ता है। इसके अलावा इस कदम से कमजोर हो रहे भारतीय रुपये को भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।

घरेलू सोने की कीमतों पर असर

विश्लेषकों का मानना है, कि ड्यूटी बढ़ने से घरेलू बाजार में सोने की कीमतें और बढ़ सकती हैं। यह ऐसे समय में हुआ है, जब वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें पहले से ही ऊंचे स्तर पर हैं, और भारतीय रुपये पर दबाव बना हुआ है।

हालांकि हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है, लेकिन रुपये की कमजोरी के कारण भारत में घरेलू कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब बनी हुई हैं। बढ़े हुए आयात शुल्क से वैश्विक और स्थानीय कीमतों के बीच अंतर और बढ़ जाएगा, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सोना और महंगा हो जाएगा।

शादी और त्योहारों के सीजन में मांग पर असर

सोने की ऊंची कीमतों का असर विशेष रूप से कीमत-संवेदनशील उपभोक्ताओं की मांग पर पड़ने की आशंका है। भारत में शादी और त्योहारों का सीजन पारंपरिक रूप से ज्वेलरी खरीदारी का बड़ा समय माना जाता है, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहक गैर-जरूरी खर्चों को टाल सकते हैं।

Titan Company, Kalyan Jewellers, Senco Gold और PC Jeweller जैसी संगठित ज्वेलरी कंपनियों को बिक्री मात्रा बनाए रखने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विश्लेषकों का कहना है, कि अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं तो फुटफॉल और रेवेन्यू ग्रोथ दोनों पर असर पड़ सकता है।

ज्वेलरी इंडस्ट्री के सामने कई चुनौतियां

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ड्यूटी बढ़ोतरी ही एकमात्र चिंता नहीं है। सेक्टर पहले से ही इन समस्याओं से जूझ रहा है:

  • वैश्विक सोने की कीमतों में तेज उछाल
  • भारतीय रुपये में कमजोरी
  • उपभोक्ता भावना में गिरावट

Equinomics Research के Founder और CEO G Chokkalingam के अनुसार ड्यूटी बढ़ोतरी ज्वेलरी बाजार के खरीदारों और विक्रेताओं दोनों के लिए “तीसरा बड़ा झटका” है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक कीमतों में थोड़ी नरमी के बावजूद घरेलू कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे मांग पर लगातार दबाव बना रहेगा। इन सभी कारकों का निकट भविष्य में ज्वेलरी कंपनियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

सोने की खपत में गिरावट

हालिया आंकड़े मांग पर बढ़ते दबाव को दर्शाते हैं। World Gold Council के अनुसार कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत में सोने की ज्वेलरी की खपत साल-दर-साल आधार पर 19% गिरकर 66.1 टन रह गई।

यह गिरावट ऊंची कीमतों और आर्थिक अनिश्चितता के बीच उपभोक्ताओं के सतर्क व्यवहार को दर्शाती है। नई ड्यूटी बढ़ोतरी इस ट्रेंड को और तेज कर सकती है, जिससे ज्वेलर्स की बिक्री मात्रा में और कमी आ सकती है।

मार्जिन पर दबाव और कारोबारी दृष्टिकोण

विश्लेषकों का मानना है, कि बढ़ती लागत और कमजोर मांग के कारण ज्वेलरी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। कई बार कंपनियां बढ़ी हुई लागत पूरी तरह ग्राहकों पर नहीं डाल पातीं, जिससे उन्हें लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन करना पड़ता है।

WealthMills Securities के Equity Strategist Krnthi Bathini ने कहा कि सरकार का यह कदम अल्प और मध्यम अवधि में कंपनियों के रेवेन्यू और मुनाफे दोनों को प्रभावित कर सकता है।

निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी गई है। कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है, कि ज्वेलरी शेयरों में करीब 10% और गिरावट आने के बाद ही नए निवेश पर विचार करना बेहतर होगा।

गोल्ड फाइनेंस कंपनियों को मिला फायदा

ज्वेलरी शेयरों के विपरीत, गोल्ड फाइनेंस कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली। Muthoot Finance, Manappuram Finance और IIFL Finance जैसी कंपनियों को बढ़ती सोने की कीमतों का लाभ मिला।

Muthoot Finance के शेयर लगभग 4% चढ़े, जबकि Manappuram Finance और IIFL Finance में क्रमशः करीब 3.9% और 7.1% की बढ़त दर्ज की गई।

सोने की ऊंची कीमतों से लोन के लिए गिरवी रखे गए सोने की वैल्यू बढ़ जाती है, जिससे loan-to-value ratio बेहतर होता है और इन कंपनियों के कारोबार को समर्थन मिलता है।

गोल्ड लोन सेक्टर के लिए जोखिम

हालांकि फिलहाल गोल्ड फाइनेंस कंपनियों को फायदा मिल रहा है, लेकिन विश्लेषकों ने चेतावनी दी है, कि यह लाभ सीमित हो सकता है। यदि सोने की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो लोग ज्वेलरी खरीदना कम कर सकते हैं, जिससे भविष्य में गिरवी रखने के लिए सोने की उपलब्धता घट सकती है।

इसके अलावा सोने की कीमतों में अस्थिरता गिरवी प्रबंधन और स्थिर लेंडिंग ऑपरेशंस बनाए रखने में जोखिम पैदा कर सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है, कि निवेशकों को ज्वेलरी मांग के रुझानों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर गोल्ड लोन कंपनियों की लंबी अवधि की ग्रोथ को प्रभावित करता है।

सरकार की व्यापक आर्थिक रणनीति

ड्यूटी बढ़ोतरी सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करना और भारत के व्यापार घाटे को प्रबंधित करना है। सोने का आयात देश के कुल आयात बिल का बड़ा हिस्सा होता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi पहले भी नागरिकों से विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए सोने की खरीद कम करने की अपील कर चुके हैं। ताजा नीति कदम भी उसी उद्देश्य के अनुरूप माना जा रहा है, जिसका लक्ष्य आर्थिक स्थिरता और उपभोक्ता मांग के बीच संतुलन बनाना है।

निष्कर्ष:

सोने पर आयात शुल्क को 15% तक बढ़ाने के फैसले का असर ज्वेलरी और वित्तीय दोनों सेक्टर्स पर देखने को मिला है। जहां ज्वेलरी कंपनियां बढ़ती लागत और मांग की चिंताओं के कारण दबाव में हैं, वहीं गोल्ड फाइनेंस कंपनियों को अल्पावधि में फायदा हुआ है।

हालांकि कुल मिलाकर बाजार का दृष्टिकोण सतर्क बना हुआ है। ऊंची कीमतें, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और बदलता उपभोक्ता व्यवहार भारत के गोल्ड मार्केट की भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।