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IndiGo ने 1,000 पायलटों को हायर करने की योजना बनाई

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IndiGo ने 1,000 पायलटों को हायर करने की योजना बनाई
14 Feb 2026
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News Synopsis

देश की बड़ी एयरलाइन कंपनियों में से एक IndiGo का समय बीते कुछ समय से अच्छा नहीं चल रहा है, दिसंबर के महीने में फ्लाइट कैंसिलेशन के मसले पर इंडिगो को काफी आलोचना झेलनी पड़ी, यहां तक की रेगुलेटर की ओर से जांच के आदेश तक जारी कर दिए हैं, वहीं करोड़ का फाइन तक लग चुका है, पायलट्स की कमी और फ्लाइट्स ऑपरेशन को लेकर समस्या लगातार बनी हुई थी, जिसकी वजह से कंपनी को कई स्लॉट छोड़ने पड़े, सालों बाद देखने को मिला कि डॉमेस्टिक एविएशन सेक्टर में अपनी बादशाहत रखने वाला इंडिगो किस तरह से डगमगा रहा है, एक बार फिर से इंडिगो ने अपनी बादशाहत को कायम करने के लिए बड़ा फैसला लिया है, कंपनी एक हजार से ज्यादा पायलट्स की भर्ती करने जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी का सामना ना तो पैसेंजर्स को करना पड़े और ना ही कंपनी को।

1000 पायलट्स का होगा रिक्रूटमेंट

IndiGo 1,000 से अधिक पायलटों की भर्ती करने की योजना बना रही है, जो किसी भारतीय एविएशन कंपनी द्वारा किए जा रहे सबसे बड़े रिक्रूटमेंट कैंपेन में से एक है, भारत की सबसे बड़ी एविएशन कंपनी को दिसंबर में सात दिनों के भीतर 5,000 से अधिक उड़ानें कैंसिल करनी पड़ीं, क्योंकि पायलटों के लिए नए विश्राम नियमों के लागू होने के बाद चालक दल की कमी हो गई थी, भर्ती में ट्रेनी फर्स्ट ऑफिसर, सीनियर फर्स्ट ऑफिसर और कप्तान शामिल हैं, एक भर्ती सूचना के अनुसार एयरलाइन उन पायलटों को भी भर्ती करने के लिए तैयार है, जिनके पास एयरबस ए320 विमान पर उड़ान का अनुभव नहीं है, जिसका उपयोग एयरलाइन मुख्य रूप से करती है, नए नियमों के तहत पायलट द्वारा रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच की जाने वाली लैंडिंग की संख्या सीमित कर दी गई है, साथ ही साप्ताहिक विश्राम की आवश्यकताएं भी बढ़ा दी गई हैं।

दिसंबर में क्यों बढ़ा था, प्रेशर?

नागरिक उड्डयन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की जांच में पाया गया कि एयरलाइन ने नए नियमों के लिए पर्याप्त भर्ती नहीं की और न ही ट्रेनिंग में तेजी लाई, जिससे पायलटों पर बार-बार ट्रांसफर, लंबे वर्किंग डेज और लंबे समय तक खाली उड़ान (जहां वे यात्रियों के रूप में यात्रा करके दूसरे स्थानों पर उड़ानें संचालित करते हैं) के कारण अत्यधिक दबाव बढ़ गया, एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि एयरलाइन अपने विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पायलटों की निरंतर भर्ती के लिए सक्रिय रूप से तैयारी कर रही है, इसके अलावा एयरलाइन के इंटरनल ट्रेनिंग सिस्टम भी मजबूत है, जिसके तहत प्रति माह लगभग 20-25 फर्स्ट ऑफिसर को कप्तान के पद पर पदोन्नत किया जाता है, एयरलाइन औसतन प्रति माह लगभग चार नए विमान शामिल करती है।

कब बनाया जाता विमान का कप्तान

पायलटों की संख्या में वृद्धि के कारण एयरलाइनों में निरंतर ट्रेनिंग प्रोसेस की आवश्यकता होती है, क्योंकि ट्रेनी फर्स्ट ऑफिसर्स को फर्स्ट ऑफिसर बनने से पहले छह महीने की ट्रेनिंग लेनी होती है, केवल कम से कम 1,500 घंटे का उड़ान अनुभव रखने वाले फर्स्ट ऑफिसर ही कप्तान के पद पर प्रमोट होने के पात्र होते हैं, जबकि अलग-अलग एयरलाइनों में यह सीमा अधिक हो सकती है, नियामक DGCA के अनुसार एयरलाइनों को प्रति विमान एक कप्तान और एक फर्स्ट ऑफिसर सहित पायलटों के तीन समूह रखने होते हैं, हालांकि इंडिगो के लिए यह आवश्यकता दोगुने से भी अधिक हो जाती है, क्योंकि एयरलाइन विमानों का बहुत अधिक उपयोग करती है।

DGCA की जांच में क्या-क्या मिला

दिसंबर में हुए विमान संकट की DGCA की जांच में पाया गया कि इंडिगो को 2,422 कप्तानों की आवश्यकता थी, लेकिन एयरलाइन के अनुसार उसके पास केवल 2,357 कप्तान ही थे, संकट के बाद रेगुलेटर को 10 फरवरी तक रात्रिकालीन ड्यूटी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट देनी पड़ी, एयरलाइन अपने नेटवर्क का पुनर्गठन भी कर रही है, ताकि उड़ानों के बीच अधिक अंतराल रखा जा सके, दिसंबर में यह अंतराल नगण्य था, लेकिन फरवरी में बढ़कर 3 फीसदी हो गया है, जबकि स्टैंडबाय क्रू का लेवल न्यूनतम 15 फीसदी तक बढ़ा दिया गया है।

अपनी जांच में DGCA ने कहा था, कि क्रू, विमान और नेटवर्क संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर ही मुख्य ध्यान केंद्रित किया गया था, जिससे रोस्टर बफर मार्जिन में काफी कमी आई, क्रू रोस्टर को ड्यूटी अवधि को अधिकतम करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जिसमें खाली उड़ानों, टेल स्वैप, विस्तारित ड्यूटी पैटर्न और न्यूनतम रिकवरी मार्जिन पर अधिक निर्भरता थी, DGCA ने कहा कि जिसकी वजह से रोस्टर पूरी तरह से लागू नहीं हो सका और ऑपरेशनल कैपेसिटी पर इसका बुरा असर देखने को मिला।