भारत की कंपनियां कमा रही हैं, लेकिन निवेश नहीं कर रहीं: CEA की चिंता

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भारत की कंपनियां कमा रही हैं, लेकिन निवेश नहीं कर रहीं: CEA की चिंता
04 May 2026
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News Synopsis

भारत की कॉरपोरेट दुनिया ने कोविड-19 के बाद मुनाफे में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की है, लेकिन यह बढ़ोतरी निवेश में दिखाई नहीं दे रही है। इस पर चिंता जताते हुए भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार V Anantha Nageswaran ने निजी क्षेत्र से आत्ममंथन करने को कहा है।

उन्होंने कहा कि कंपनियों का निवेश न बढ़ना अर्थव्यवस्था में मांग (डिमांड) की अनिश्चितता को बढ़ा सकता है।

कॉरपोरेट मुनाफा बढ़ा, लेकिन निवेश नहीं (Corporate Profits Surge, But Investment Lags)

टॉप कंपनियों की कमाई में तेजी (Strong Earnings Growth in Top Companies)

Ashoka University में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन Chief Economic Advisor V Anantha Nageswaran ने कहा:

“Post Covid, if you look at BSE 500 or NSE 500 companies, corporate profits grew at 30.8% per annum. But still, our overall capital formation rates from the private sector have been disappointing.”

"कोविड के बाद, अगर आप BSE 500 या NSE 500 कंपनियों को देखें, तो कॉर्पोरेट मुनाफ़ा सालाना 30.8% की दर से बढ़ा है। लेकिन फिर भी, निजी क्षेत्र से हमारी कुल पूंजी निर्माण दरें निराशाजनक रही हैं।"

यह दिखाता है कि मुनाफा बढ़ने के बावजूद कंपनियां निवेश नहीं कर रही हैं।

कैश जमा करना, निवेश से दूरी (Cash Accumulation Over Real Investment)

पैसा बचाने पर ज्यादा ध्यान (Shift Towards Financial Preservation)

CEA के अनुसार, कई कंपनियां और नई पीढ़ी के उद्यमी मुनाफे को निवेश करने के बजाय जमा कर रहे हैं।

“Corporates and the second or third generation entrepreneurs chose to accumulate those cash profits and probably set up family offices elsewhere rather than investing in real assets on the ground.”

"कॉर्पोरेट्स और दूसरी या तीसरी पीढ़ी के उद्यमियों ने ज़मीनी स्तर पर वास्तविक संपत्तियों में निवेश करने के बजाय, उन नकद मुनाफ़ों को जमा करना और शायद कहीं और 'फ़ैमिली ऑफ़िस' स्थापित करना चुना।"

उद्योग को आत्ममंथन की जरूरत (Need for Industry Introspection)

उन्होंने कहा कि केवल सरकार को दोष देना सही नहीं है:

“So, it’s always easier to point a finger at the government but sometimes the gaze also has to be reversed on the part of the industry,” Nageswaran said.

"इसलिए, सरकार पर उंगली उठाना हमेशा आसान होता है, लेकिन कभी-कभी इंडस्ट्री को भी अपनी नज़र खुद पर डालनी पड़ती है," नागेश्वरन ने कहा।

वैश्विक चुनौतियों का असर (Global Challenges Impacting Investment Decisions)

बाहरी माहौल ज्यादा सख्त (Restrictive External Environment)

CEA ने बताया कि वैश्विक स्तर पर व्यापार और सप्लाई चेन के नियम कड़े हो रहे हैं, खासकर अमेरिका और चीन में। इससे कंपनियों के फैसले प्रभावित हो रहे हैं।

चीन की नीतियां और असर (China’s Policy Moves and Global Implications)

सप्लाई चेन पर नियंत्रण (Supply Chain Restrictions)

चीन की नई नीतियों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा:

“In Hotel California, you said you can check out but not leave. But China is saying you can neither check out nor leave,” Nageswaran said on Saturday.

"होटल कैलिफ़ोर्निया में आपने कहा था कि आप चेक-आउट तो कर सकते हैं, लेकिन वहाँ से जा नहीं सकते। लेकिन चीन कह रहा है कि आप न तो चेक-आउट कर सकते हैं और न ही वहाँ से जा सकते हैं," नागेश्वरन ने शनिवार को कहा।

इसका मतलब है कि कंपनियों के लिए चीन छोड़ना मुश्किल होता जा रहा है।

भारत के लिए अवसर (India’s Strategic Opportunity)

करेंसी और व्यापार (Currency and Trade Dynamics)

भारतीय रुपये और चीनी युआन के बीच अंतर कम होने से भारत के लिए निर्यात बढ़ाने का मौका बन सकता है।

हाल ही में रुपया 95.34 प्रति डॉलर तक गिर गया, जिससे निर्यात सस्ता और आयात महंगा हो सकता है।

FTA का सही उपयोग जरूरी (Leveraging Free Trade Agreements)

कम उपयोग एक समस्या (Underutilisation of Trade Benefits)

CEA ने कहा:

“One of the problems is the free trade agreement utilisation by India is very poor compared to other countries. So, the industry association and bodies have to do a much better job of talking about them,” Nageswaran said.

"एक समस्या यह है कि दूसरे देशों की तुलना में भारत में मुक्त व्यापार समझौते का इस्तेमाल बहुत कम होता है। इसलिए, उद्योग संघों और संस्थाओं को इस बारे में बात करने का काम और भी बेहतर तरीके से करना होगा," नागेश्वरन ने कहा।

इसका मतलब है कि भारत को अपने व्यापार समझौतों का बेहतर इस्तेमाल करना होगा।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की स्थिति (Manufacturing Sector: Stability or Stagnation?)

स्थिरता या ठहराव (Maintaining Share Despite Competition)

भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी भी GDP में 17–18% योगदान दे रहा है।

“So, it is not therefore a story of failure. It’s probably a story of stability or stagnation, depending on the eye of the beholder.”

नीति सुझाव (Policy Recommendations for India)

मजबूत ढांचा बनाना जरूरी (Strengthening Institutional Frameworks)

CEA ने सुझाव दिए:

मुख्य सुझाव (Key Suggestions)

  • सप्लाई चेन सुरक्षा ढांचा बनाना
  • विदेशी निवेश की समीक्षा प्रणाली विकसित करना
  • बाजार का उपयोग निवेश आकर्षित करने के लिए करना

निष्कर्ष (Conclusion)

भारत की कंपनियों का मुनाफा बढ़ा है, लेकिन निवेश में कमी चिंता का विषय है। अगर निजी क्षेत्र आगे बढ़कर निवेश नहीं करता, तो आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

CEA के अनुसार, सरकार और उद्योग दोनों को मिलकर काम करना होगा ताकि भारत वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थान बना सके।