भारत GM उत्पादों और मांसाहारी डेयरी आयात को मंजूरी नहीं देगा: पीयूष गोयल

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भारत GM उत्पादों और मांसाहारी डेयरी आयात को मंजूरी नहीं देगा: पीयूष गोयल
04 Nov 2026
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News Synopsis

भारत अपने मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) में डेयरी, समुद्री उत्पादों और आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की रक्षा जारी रखेगा। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यह बात कही है। प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से पहले उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार भारतीय किसानों, मछुआरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी।

दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में आयोजित यंग लीडर्स डिस्कोर्स फोरम में बोलते हुए पीयूष गोयल ने भारत की व्यापार प्राथमिकताओं, निर्यात की संभावनाओं और घरेलू उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच दिलाने के प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य केवल विदेशी व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि घरेलू उद्योगों और उनसे जुड़े लोगों के हितों को सुरक्षित रखना भी है।

व्यापार समझौतों में संवेदनशील क्षेत्रों को खुला नहीं छोड़ेगा भारत (India Will Not Open Sensitive Sectors in Trade Agreements)

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल Union Minister of Commerce and Industry Piyush Goyal ने कहा कि भारत ने अपने मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों में संवेदनशील क्षेत्रों के लिए सुरक्षा उपाय बनाए रखे हैं। भविष्य में होने वाले व्यापार समझौतों में भी इसी नीति को अपनाया जाएगा।

उन्होंने विशेष रूप से डेयरी, समुद्री उत्पादों और GM उत्पादों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों का भारत की अर्थव्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था और बड़ी आबादी की आजीविका से सीधा संबंध है।

किसानों, मछुआरों और छोटे कारोबारियों के हितों की सुरक्षा (Protection of Farmers, Fishermen and Small Businesses)

मंत्री ने बताया कि व्यापार समझौतों का उद्देश्य केवल आयात और निर्यात बढ़ाना नहीं होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के कारण घरेलू उद्योगों और उनसे जुड़े समुदायों पर पड़ने वाले प्रभावों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि विदेशी बाजारों में भारतीय कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा हों, लेकिन इसके साथ किसानों, मछुआरों और MSMEs के हित भी सुरक्षित रहें।

डेयरी और GM उत्पादों के आयात पर भारत सतर्क क्यों है? (Why Is India Cautious About Dairy and GM Product Imports?)

भारत ने डेयरी उत्पादों के आयात को लेकर अपनी अलग नीति बनाए रखी है। पीयूष गोयल ने इसके पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़ी संवेदनशीलताओं का उल्लेख किया।

डेयरी उत्पादन में पशु-आधारित सामग्री का इस्तेमाल (Use of Animal-Derived Ingredients in Dairy Production)

मंत्री के अनुसार, कई देशों में पनीर और चीज बनाने की प्रक्रिया में पशुओं से प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के लिए, कुछ प्रकार की चीज बनाने में बछड़े से प्राप्त रेनेट नामक एंजाइम का उपयोग होता है। इसके अलावा, कुछ देशों में पशुओं के चारे में भी पशु-आधारित पोषक तत्व मिलाए जाते हैं।

भारत में बड़ी संख्या में लोग शाकाहारी भोजन करते हैं और धार्मिक मान्यताओं के कारण पशुओं से प्राप्त कुछ सामग्रियों के इस्तेमाल को लेकर उनकी विशेष भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इसलिए सरकार डेयरी उत्पादों से संबंधित व्यापार को संवेदनशील मानती है।

GM उत्पादों पर भी सरकार का सावधानीपूर्ण रुख (Government's Cautious Approach Towards GM Products)

भारत आनुवंशिक रूप से संशोधित उत्पादों के मामले में भी सावधानी बरत रहा है। इसके पीछे घरेलू कृषि व्यवस्था, किसानों की आजीविका और खेती से जुड़े हितों की सुरक्षा प्रमुख कारण हैं। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के विस्तार के दौरान इन मुद्दों पर उचित ध्यान देना जरूरी है।

भारतीय उद्योगों के लिए निर्यात के नए अवसर तलाश रहा भारत (India Seeks Better Export Opportunities Across Key Industries)

संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के साथ-साथ भारत अपने निर्यात कारोबार को बढ़ाने के लिए भी प्रयास कर रहा है। पीयूष गोयल ने कई ऐसे क्षेत्रों का उल्लेख किया, जिनमें भारतीय कारोबारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आगे बढ़ने की अच्छी संभावनाएं हैं।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं।

  • प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद: खाद्य पदार्थों की प्रोसेसिंग, बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग के माध्यम से विदेशों में बिक्री बढ़ाना।

  • कृषि और बागवानी: भारतीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना और उनकी मांग बढ़ाना।

  • कपड़ा और परिधान उद्योग: मलेशिया, इंडोनेशिया और चीन जैसे देशों के निर्यातकों के मुकाबले भारतीय उत्पादों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना।

  • चमड़ा और फुटवियर: घरेलू निर्माताओं के लिए नए विदेशी बाजारों और कारोबार के अवसर तैयार करना।

  • दवा उद्योग: अंतरराष्ट्रीय दवा बाजारों में भारत की भागीदारी बढ़ाना।

  • रत्न और आभूषण: भारतीय निर्माताओं और व्यापारियों के निर्यात के अवसरों का विस्तार करना।

सरकार इन क्षेत्रों के लिए बेहतर व्यापार शर्तें और विदेशी बाजारों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है।

FY27 में 1 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य (India Targets $1 Trillion in Exports in FY27)

पीयूष गोयल ने भारत के निर्यात से जुड़ी महत्वाकांक्षी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में 1 ट्रिलियन डॉलर के कुल निर्यात का लक्ष्य रखा है।

अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच निर्यात प्रदर्शन (Export Performance Between April and September 2026)

मंत्री के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच भारत का निर्यात लगभग 480 अरब डॉलर रहा। वार्षिक लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार को वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 520 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात हासिल करना होगा।

उन्होंने अक्टूबर 2026 में भी भारत के निर्यात प्रदर्शन को उत्साहजनक बताया।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वस्तुओं और सेवाओं, दोनों के निर्यात में लगातार वृद्धि जरूरी होगी। इसके साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारी मजबूत करना, विदेशी बाजारों तक बेहतर पहुंच बनाना और भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना भी महत्वपूर्ण होगा।

कृषि निर्यात में वैल्यू एडिशन की बड़ी संभावनाएं (Agriculture Exports Offer Huge Value-Addition Potential)

पीयूष गोयल ने बताया कि भारत का मौजूदा कृषि निर्यात लगभग 5 लाख करोड़ रुपये का है। इसमें प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने की काफी संभावनाएं मौजूद हैं।

कच्चे उत्पादों के बजाय तैयार खाद्य पदार्थों पर जोर (Focus on Processed Food Products)

मंत्री ने कहा कि भारत को केवल कच्चे कृषि उत्पादों के निर्यात तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय ऐसे उत्पादों को बढ़ावा देना चाहिए, जिनकी प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग करके अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर कीमत प्राप्त की जा सके।

इससे किसानों और खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों को अधिक लाभ मिल सकता है। साथ ही, भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहचान मजबूत होगी और खाद्य निर्यात से जुड़े कारोबार में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में निर्यात की नई संभावनाएं (Defence and Space Emerging as Important Export Sectors)

पीयूष गोयल ने रक्षा निर्माण और अंतरिक्ष तकनीक को भारत के लिए निर्यात के महत्वपूर्ण उभरते क्षेत्र बताया।

इन क्षेत्रों में भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता घरेलू कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी जगह बनाने में मदद कर सकती है। विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने से भी इन उद्योगों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

सरकार का ध्यान देश में निर्माण क्षमता बढ़ाने और नई तकनीकों के विकास पर है। इससे रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र भविष्य में भारत के निर्यात कारोबार में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

घरेलू निर्माण और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर जोर (India Focuses on Domestic Manufacturing and Supply Chain Security)

चीन के साथ व्यापारिक संबंधों पर चर्चा करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि यदि भविष्य में कोई नई बाधा उत्पन्न नहीं होती है, तो दोनों देशों के संबंध बेहतर हो सकते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत को उन जरूरी उपकरणों और सामग्रियों के लिए घरेलू विकल्प विकसित करने चाहिए, जिनकी विदेशी आपूर्ति किसी कारण से प्रभावित हो सकती है।

विदेशी निर्भरता कम करने की तैयारी (Steps to Reduce Foreign Dependence)

टनल बोरिंग मशीनों और रेयर अर्थ यानी दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति का उदाहरण देते हुए मंत्री ने कहा कि भारत घरेलू स्तर पर इनके विकल्प विकसित करने की दिशा में काम करेगा।

इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आने वाली रुकावटों के कारण घरेलू उद्योगों को प्रभावित होने से बचाना है। यह नीति आत्मनिर्भरता, तकनीकी विकास और मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने के सरकार के प्रयासों को भी दर्शाती है।

पर्यटन और स्टार्टअप को आर्थिक सहायता देना सरकार की प्राथमिकता (Tourism and Startup Funding Remain Government Priorities)

पीयूष गोयल ने पर्यटन क्षेत्र से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए बताया कि सरकार विमान निर्माण कंपनियों Embraer, Airbus और Boeing के साथ मिलकर विमानों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए काम कर रही है।

विमानों की संख्या बढ़ने से हवाई संपर्क बेहतर हो सकता है। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों में पर्यटन को बढ़ावा देने और यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

छोटे शहरों के स्टार्टअप को भी मिलेगा सहयोग (Support for Startups in Smaller Cities)

मंत्री ने Fund of Funds 2.0 के तहत स्टार्टअप कंपनियों को दी जा रही आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस पहल के अंतर्गत 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिबद्धताएं पहले ही की जा चुकी हैं।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार स्टार्टअप को बढ़ावा देना जारी रखेगी। खासतौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों में काम करने वाले नए कारोबारों को आर्थिक सहायता और विकास के अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा।

निष्कर्ष (Conclusion)

भारत की व्यापार नीति का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक हितों की रक्षा करना है। पीयूष गोयल के बयान से स्पष्ट होता है कि सरकार डेयरी, कृषि और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर सतर्क रुख बनाए रखना चाहती है।

इसके साथ ही, वित्त वर्ष 2026-27 में 1 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, कपड़ा, दवा, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में नए अवसर तलाशे जा रहे हैं। बेहतर विदेशी बाजार पहुंच, घरेलू निर्माण, मजबूत सप्लाई चेन और स्टार्टअप को आर्थिक सहायता भारत की भविष्य की व्यापार रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से बने रहेंगे।