गूगल का बाल सुरक्षा कदम, भारत में सीधे रिपोर्ट होगी यौन शोषण से जुड़ी सामग्री

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गूगल का बाल सुरक्षा कदम, भारत में सीधे रिपोर्ट होगी यौन शोषण से जुड़ी सामग्री
22 Sep 2026
8 min read

News Synopsis

गूगल ने भारत से जुड़े Child Sexual Abuse Material (CSAM) मामलों की रिपोर्ट सीधे भारतीय अधिकारियों को करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह बदलाव उस प्रक्रिया से अलग है, जिसमें ऐसे मामलों की रिपोर्ट पहले अमेरिका स्थित लापता और शोषित बच्चों के लिए राष्ट्रीय केंद्र (एनसीएमईसी) National Center for Missing & Exploited Children (NCMEC) के माध्यम से संबंधित देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंचती थी।

गूगल का यह कदम भारत सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद सामने आया है। इससे पहले Meta ने भी भारत से जुड़े बाल सुरक्षा मामलों की जानकारी सीधे भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने की दिशा में इसी तरह का बदलाव किया था। भारतीय अधिकारियों ने तकनीकी कंपनियों से ऐसे मामलों में रिपोर्टिंग प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत पर जोर दिया था, खासकर उन परिस्थितियों में जहां किसी बच्चे को तत्काल खतरा हो सकता है। एक समाचार स्रोत के अनुसार, Google ने कहा है कि यह बदलाव भारत सरकार के साथ जारी बातचीत का हिस्सा है और कंपनी CSAM की पहचान, उसे हटाने और रिपोर्ट करने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगी।

भारत में सीधे रिपोर्टिंग की जरूरत क्यों महसूस हुई? Why Is India Seeking Direct Reporting?

भारत सरकार की मुख्य चिंता यह है कि बाल यौन शोषण से जुड़ी किसी गंभीर सामग्री या मामले की जानकारी संबंधित भारतीय एजेंसियों तक पहुंचने में अनावश्यक देरी न हो। पहले भारत से जुड़े कई मामलों में रिपोर्टिंग की प्रक्रिया अमेरिका स्थित National Center for Missing & Exploited Children (NCMEC) के जरिए आगे बढ़ती थी।

सरकार की ओर से Google और Microsoft जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों से भारत से जुड़े मामलों की जानकारी सीधे घरेलू अधिकारियों को देने का आग्रह किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों में सूचना के आदान-प्रदान को तेज करना और जरूरत पड़ने पर भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जल्द कार्रवाई का अवसर देना है। Reuters के अनुसार, भारत सरकार का मानना है कि तत्काल खतरे वाले मामलों में स्थानीय स्तर पर तेज प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है।

पुराने सिस्टम में कैसे होती थी रिपोर्टिंग? How Did the Earlier Reporting System Work?

लंबे समय से Google और कई अन्य बड़ी तकनीकी कंपनियां संदिग्ध CSAM की रिपोर्ट अमेरिका स्थित NCMEC को करती रही हैं। NCMEC का CyberTipline दुनिया भर से प्राप्त बाल यौन शोषण से संबंधित रिपोर्टों को संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंचाने में भूमिका निभाता है।

Google ने पहले बताया है कि उसकी पहचान प्रक्रिया पूरी होने के बाद अमेरिकी कानून के तहत CSAM से जुड़ी रिपोर्ट NCMEC को भेजी जाती है। इसके बाद NCMEC मामले का मूल्यांकन कर सकता है और जरूरत पड़ने पर संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसी को इसकी जानकारी भेज सकता है।

Google CSAM की पहचान कैसे करता है? How Does Google Detect CSAM?

Google ने बताया है कि वह बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री की पहचान के लिए तकनीक और प्रशिक्षित विशेषज्ञों का इस्तेमाल करता है। इसमें मुख्य रूप से हैश मैचिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI और मानव समीक्षा शामिल है।

हैश मैचिंग ऐसी तकनीक है जिसमें पहले से पहचानी गई अवैध तस्वीर या वीडियो की एक डिजिटल पहचान बनाई जाती है। जब किसी नई फाइल का डिजिटल निशान पहले से मौजूद रिकॉर्ड से मेल खाता है, तो सिस्टम उस सामग्री को पहचान सकता है। Google के अनुसार, वह NCMEC और Internet Watch Foundation जैसे विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त हैश का भी इस्तेमाल करता है।

AI और मानव विशेषज्ञों की भी भूमिका Role of AI and Human Reviewers

सिर्फ पहले से पहचानी गई सामग्री ही नहीं, बल्कि ऐसी नई सामग्री की पहचान के लिए भी AI आधारित सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे पहले डेटाबेस में दर्ज नहीं किया गया है। Google के अनुसार, इन सिस्टम से संदिग्ध सामग्री की पहचान होने के बाद प्रशिक्षित विशेषज्ञ उसकी समीक्षा करते हैं।

इस मानव समीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी सिस्टम से मिली जानकारी की पुष्टि की जाए और गलत पहचान की संभावना को कम रखा जा सके। Google ने कहा है कि उसके विशेषज्ञों को बाल सुरक्षा, कानून और साइबर जांच जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है।

गूगल के चाइल्ड सेफ्टी टूल्स भी मौजूद हैं Google’s Child Safety Tools

Google केवल अपने प्लेटफॉर्म पर सामग्री की पहचान तक सीमित नहीं है। कंपनी अन्य योग्य संगठनों और साझेदारों को भी बाल सुरक्षा से जुड़ी तकनीक उपलब्ध कराती है।

इसके Content Safety API का इस्तेमाल संभावित रूप से आपत्तिजनक सामग्री की पहचान और समीक्षा को प्राथमिकता देने में किया जा सकता है। Google की CSAI Match तकनीक पहले से पहचानी गई वीडियो सामग्री की दोबारा पहचान करने में मदद करती है। कंपनी ने बताया है कि उसके Child Safety Toolkit का उद्देश्य विभिन्न संगठनों को ऑनलाइन बाल शोषण से जुड़ी सामग्री की पहचान और रोकथाम में मदद करना है।

Meta ने भी उठाया है ऐसा ही कदम Meta Has Taken a Similar Step

Google का यह फैसला Meta के समान कदम के बाद आया है। Meta ने भी भारत से जुड़े बाल सुरक्षा मामलों की रिपोर्ट सीधे संबंधित भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को करने की दिशा में बदलाव किया है।

इन घटनाक्रमों से यह संकेत मिलता है कि भारत में ऑनलाइन बाल सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म की रिपोर्टिंग व्यवस्था को लेकर सरकार और बड़ी तकनीकी कंपनियों के बीच समन्वय बढ़ रहा है। भारत में बड़ी संख्या में लोग Google और Meta की सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए इन कंपनियों की सुरक्षा और रिपोर्टिंग व्यवस्था का देश में व्यापक प्रभाव पड़ता है।

भारत में गूगल और मेटा का का बड़ा उपयोगकर्ता आधार India Has a Large User Base for Google and Meta

भारत दुनिया के बड़े इंटरनेट बाजारों में शामिल है। YouTube और Google की अन्य सेवाओं का देश में व्यापक इस्तेमाल होता है। इसी तरह Facebook और Instagram सहित Meta के प्लेटफॉर्म भी बड़ी संख्या में भारतीय उपयोगकर्ताओं तक पहुंचते हैं।

इतने बड़े उपयोगकर्ता आधार के कारण ऑनलाइन अवैध सामग्री की पहचान और उसकी रिपोर्टिंग डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। भारत सरकार अब ऐसे मामलों में घरेलू कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक सूचना जल्द पहुंचाने पर जोर दे रही है।

दुनिया भर में बाल यौन शोषण सामग्री की बड़ी चुनौती The Global Challenge of Child Sexual Abuse Material

यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब ऑनलाइन बाल शोषण से जुड़ी सामग्री की समस्या वैश्विक स्तर पर बड़ी चुनौती बनी हुई है। Reuters के अनुसार, NCMEC के CyberTipline को 2025 में संदिग्ध बाल यौन शोषण और शोषण से जुड़ी 2.13 करोड़ से अधिक रिपोर्टें मिली थीं। ये रिपोर्टें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आई थीं।

इतनी बड़ी संख्या में रिपोर्ट आने से तकनीकी कंपनियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने सामग्री की पहचान, रिपोर्टिंग और कार्रवाई के बीच बेहतर तालमेल बनाने की चुनौती भी बढ़ती है।

सीधे रिपोर्ट करने से क्या बदल सकता है? What Could Direct Reporting Change?

भारत के लिए प्रस्तावित बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत से जुड़े संदिग्ध मामलों की जानकारी सीधे संबंधित भारतीय अधिकारियों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार होगा। इससे पहले इस्तेमाल होने वाली अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग श्रृंखला पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है।

विशेष रूप से ऐसे मामलों में जहां किसी बच्चे को तत्काल खतरा होने की आशंका हो, सूचना जल्द मिलने से स्थानीय एजेंसियों को समय पर कार्रवाई का अवसर मिल सकता है। हालांकि, नई व्यवस्था की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि रिपोर्टिंग प्रणाली कैसे लागू होती है, मामलों की समीक्षा किस तरह होती है और कानून प्रवर्तन एजेंसियां प्राप्त जानकारी पर कितनी तेजी से कार्रवाई करती हैं।

Google और भारत सरकार के बीच बातचीत जारी Google and Indian Government Continue Discussions

Google ने इस बदलाव को एक अलग और अचानक लिया गया फैसला नहीं बताया है। कंपनी के अनुसार, भारत से जुड़े CSAM मामलों की रिपोर्टिंग में बदलाव भारत सरकार के साथ चल रही बातचीत का हिस्सा है।

Google ने पहले भी कहा है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री की पहचान करने, उसे हटाने और उचित अधिकारियों को रिपोर्ट करने के लिए लगातार तकनीक और प्रक्रियाओं में निवेश कर रहा है। कंपनी ने AI आधारित पहचान, हैश मैचिंग और मानव समीक्षा को अपनी बाल सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बताया है।

भारत में ऑनलाइन बाल सुरक्षा के प्रयासों का नया चरण A New Phase for Online Child Safety in India

Google का भारत से जुड़े CSAM मामलों की रिपोर्टिंग को सीधे भारतीय अधिकारियों तक पहुंचाने का कदम ऑनलाइन बाल सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह बदलाव Meta की इसी तरह की पहल और भारतीय अधिकारियों की तेज रिपोर्टिंग की मांग के बाद सामने आया है।

NCMEC की अंतरराष्ट्रीय भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है और दुनिया के कई देशों में CSAM रिपोर्टिंग के लिए उसका सिस्टम इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन भारत में सीधे रिपोर्टिंग की दिशा में बढ़ता कदम इस बात पर जोर देता है कि गंभीर और तत्काल मामलों में स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक जानकारी तेजी से पहुंचे।

आगे इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि Google और भारतीय अधिकारी नई रिपोर्टिंग प्रक्रिया को किस तरह लागू करते हैं और संदिग्ध मामलों में सूचना मिलने के बाद कितनी तेजी से आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाती है।