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गूगल डीपमाइंड एक्सेलेरेटर: चार भारतीय स्टार्टअप का AI फॉर द प्लैनेट कार्यक्रम में चयन

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गूगल डीपमाइंड एक्सेलेरेटर: चार भारतीय स्टार्टअप का AI फॉर द प्लैनेट कार्यक्रम में चयन
15 Sep 2026
6 min read

News Synopsis

दिग्गज टेक कंपनी Google ने अपने पहले Google DeepMind Accelerator: AI for the Planet कार्यक्रम के लिए चार भारतीय स्टार्टअप का चयन किया है। ये चारों स्टार्टअप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, सैटेलाइट डेटा, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए कर रहे हैं। चयनित भारतीय स्टार्टअप में Terrastack, Varaha Climate, Farmers for Forests और Climitra Carbon शामिल हैं।

ये चारों कंपनियां एशिया-प्रशांत क्षेत्र से चुनी गई कुल 16 संस्थाओं के समूह का हिस्सा होंगी। अगले तीन महीनों के दौरान इन स्टार्टअप को Google की नई AI तकनीकों और टूल्स तक पहुंच के साथ तकनीकी सहायता और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीकों को आगे बढ़ाना है, जो टिकाऊ खेती, वानिकी, कार्बन हटाने और जैव विविधता जैसे क्षेत्रों में वास्तविक बदलाव ला सकें।

गूगल डीपमाइंड एक्सेलेरेटर 2026 Google DeepMind Accelerator 2026

Google DeepMind के नए कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है? (What Is the Purpose of Google DeepMind’s New Programme?)

Google DeepMind का AI for the Planet कार्यक्रम AI आधारित समाधानों के जरिए पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी समस्याओं का समाधान विकसित करने वाले संगठनों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। इस कार्यक्रम के तहत चुनी गई संस्थाओं को तकनीकी संसाधन, विशेषज्ञों की सलाह और Google के AI ढांचे का समर्थन दिया जाएगा।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र से 16 संस्थाओं का चयन (16 Organisations Selected Across Asia Pacific)

इस शुरुआती समूह में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की 16 संस्थाएं शामिल हैं। इनमें भारत के चार स्टार्टअप भी जगह बनाने में सफल रहे हैं। यह चयन भारत के बढ़ते Climate Tech यानी जलवायु तकनीक क्षेत्र और AI आधारित नवाचार की क्षमता को भी दर्शाता है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल नई तकनीक विकसित करना नहीं है, बल्कि उन समाधानों को बड़े स्तर तक पहुंचाना भी है, जो किसानों, पर्यावरण और जलवायु के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

तीन महीने तक मिलेगा तकनीकी और विशेषज्ञ सहयोग (Three Months of Technical and Expert Support)

चयनित स्टार्टअप को अगले तीन महीनों तक Google के AI संसाधनों, तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञ मार्गदर्शन का लाभ मिलेगा। इससे उन्हें अपने मौजूदा समाधानों को बेहतर बनाने और बड़े स्तर पर लागू करने में मदद मिल सकती है।

Terrastack किसानों के लिए जमीन से जुड़ी जानकारी को बनाएगा बेहतर (Terrastack to Improve Land Intelligence for Farmers)

चयनित भारतीय स्टार्टअप में Terrastack भी शामिल है। यह कंपनी सैटेलाइट और कृषि संबंधी आंकड़ों को एक साथ इस्तेमाल करके छोटे किसानों के लिए खेत और जमीन से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने पर काम कर रही है।

AI और सैटेलाइट डेटा से सटीक कृषि निर्णय (Better Agricultural Decisions with AI and Satellite Data)

Terrastack का समाधान खेत के स्तर पर जमीन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य छोटे किसानों के लिए खेती से संबंधित फैसलों को अधिक सटीक और आसान बनाना है।

सैटेलाइट से प्राप्त जानकारी और कृषि आंकड़ों का विश्लेषण AI की मदद से किया जा सकता है। इससे जमीन की स्थिति, खेती से जुड़ी जरूरतों और संभावित जोखिमों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है।

Varaha Climate किसानों को कार्बन क्रेडिट से जोड़ रहा है (Varaha Climate Connects Farmers with Carbon Credits)

दूसरा भारतीय स्टार्टअप Varaha Climate है। यह कंपनी छोटे किसानों को पुनर्योजी कृषि और कार्बन हटाने जैसी गतिविधियों से कार्बन क्रेडिट अर्जित करने में मदद करने पर काम करती है।

रिमोट सेंसिंग और AI से कार्बन गतिविधियों का सत्यापन (Verifying Carbon Activities Through Remote Sensing and AI)

Varaha Climate रिमोट सेंसिंग और AI का इस्तेमाल करके यह सत्यापित करने में मदद करता है कि खेती में अपनाई जा रही पुनर्योजी कृषि पद्धतियां और कार्बन हटाने की गतिविधियां वास्तव में किस तरह काम कर रही हैं।

इस तरह तकनीक किसानों को पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें कार्बन बाजार से मिलने वाले संभावित आर्थिक लाभ तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।

फार्मर्स फॉर फॉरेस्ट्स ड्रोन की मदद से बढ़ाएगा एग्रोफोरेस्ट्री का दायरा (Farmers for Forests to Scale Agroforestry with Drones)

तीसरा भारतीय स्टार्टअप Farmers for Forests है। यह कंपनी AI आधारित ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल छोटे किसानों की agroforestry यानी कृषि-वनीकरण गतिविधियों को बड़े स्तर पर मापने और उनके प्रभाव को दर्ज करने के लिए कर रही है।

कार्बन और जैव विविधता पर ध्यान (Focus on Carbon and Biodiversity)

कृषि-वनीकरण में खेती के साथ पेड़ और अन्य वनस्पतियों को बढ़ावा दिया जाता है। इससे जमीन की उत्पादकता, कार्बन अवशोषण और जैव विविधता को लाभ मिल सकता है।

Farmers for Forests AI संचालित ड्रोन के जरिए इन गतिविधियों को मापने योग्य बनाने पर काम कर रहा है। इससे छोटे किसानों की गतिविधियों को कार्बन और जैव विविधता से जुड़े बड़े प्रयासों से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

Climitra Carbon Geo-AI से कार्बन हटाने पर काम कर रहा है (Climitra Carbon Uses Geo-AI for Carbon Removal)

चौथा भारतीय स्टार्टअप Climitra Carbon है। यह कंपनी Geo-AI यानी भौगोलिक आंकड़ों और AI के संयोजन का इस्तेमाल जमीन की बहाली और कार्बन से जुड़े समाधानों के लिए कर रही है।

आक्रामक प्रजातियों को बायोचार में बदलने की पहल (Turning Invasive Species into Biochar)

Climitra Carbon का समाधान ऐसी वनस्पतियों की पहचान और हटाने के सत्यापन पर केंद्रित है, जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। हटाई गई वनस्पतियों को बायोचार में बदलने की प्रक्रिया को भी इससे जोड़ा जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य भूमि बहाली को कार्बन समाधान के साथ जोड़ना है, ताकि पर्यावरण सुधार के काम को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया जा सके।

भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा के लिए Google की चार नई पहलें (Four New Google Initiatives for India’s Clean Energy Transition)

भारतीय Climate Tech स्टार्टअप को समर्थन देने के अलावा Google ने भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा को तेज करने के लिए चार अन्य पहलों की भी घोषणा की है। इनका फोकस सौर ऊर्जा, कृषि, जलवायु तकनीक और अनुसंधान एवं नवाचार पर है।

30 करोड़ भारतीय छतों तक Solar API का विस्तार (Expanding Solar API Across 300 Million Indian Rooftops)

Google अपने AI आधारित Solar API को भारत की 30 करोड़ छतों तक विस्तारित करने की योजना पर काम कर रहा है। इसका इस्तेमाल छतों का सर्वेक्षण और सौर पैनल के संभावित लेआउट तैयार करने जैसी प्रक्रियाओं को स्वचालित करने के लिए किया जा सकता है।

इससे घरों और अन्य इमारतों की छतों पर सौर ऊर्जा की संभावनाओं का आकलन अधिक तेज और आसान बनाया जा सकता है।

ReNew Power के साथ 150 मेगावाट सौर परियोजना (150 MW Solar Project with ReNew Power)

Google ने राजस्थान में 150 मेगावाट की उपयोगिता-स्तर की सौर ऊर्जा परियोजना के लिए ReNew Power के साथ दीर्घकालिक समझौते की भी घोषणा की है। यह समझौता भारत में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने और Google के ऊर्जा उपयोग को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में एक कदम है।

तेलंगाना के किसानों के लिए मिट्टी लैब्स के साथ पहल (Initiative with Mitti Labs for Telangana Farmers)

Google ने Mitti Labs के साथ मिलकर तेलंगाना के छोटे किसानों को ऐसी कृषि पद्धति अपनाने में मदद करने की पहल की है, जिसमें खेतों में पानी को एक निश्चित तरीके से देना और निकालना शामिल है।

धान की खेती में मीथेन उत्सर्जन कम करने पर जोर (Focus on Reducing Methane Emissions from Rice Farming)

इस पद्धति को Alternate Wetting and Drying यानी AWD कहा जाता है। इसका उद्देश्य धान के खेतों में लगातार पानी भरे रहने की स्थिति को कम करना है। इससे मीथेन बनाने वाले सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को कम करने में मदद मिल सकती है।

यह पहल कृषि उत्पादकता और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है।

अनुसंधान और नवाचार के लिए Manthan मंच का इस्तेमाल (Using the Manthan Platform for Research and Innovation)

Google ने भारत के Manthan मंच पर अनुसंधान और नवाचार से जुड़े प्रस्तावों के लिए नए अवसर खोलने की भी घोषणा की है। इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं और नवाचार से जुड़े लोगों को ऐसे समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों का समाधान कर सकें।

कुल मिलाकर, Google की ये पहलें दिखाती हैं कि AI का इस्तेमाल केवल डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं रह गया है। कृषि, कार्बन प्रबंधन, जैव विविधता, सौर ऊर्जा और भूमि संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। चार भारतीय स्टार्टअप का Google DeepMind के पहले AI for the Planet Accelerator में चयन भारत के Climate Tech क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। तकनीकी सहायता, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और AI संसाधनों के जरिए इन कंपनियों को अपने समाधानों को बड़े स्तर पर ले जाने में मदद मिल सकती है।