फ्लिपकार्ट और अमेज़न ने भारत में क्विक कॉमर्स का विस्तार किया
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भारत का क्विक कॉमर्स मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है, और कुछ कंपनियों के लिए तो मांग दोगुनी से भी ज़्यादा हो गई है। लेकिन Flipkart और Amazon द्वारा तेज़ डिलीवरी पर ज़ोर देने से इस पहले से ही भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में मुकाबला और कड़ा हो गया है, जहाँ मुनाफ़ा कमाना अभी भी मुश्किल बना हुआ है।
भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक Flipkart ने Blinkit, Swiggy और Zepto जैसे स्थानीय प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले क्विक कॉमर्स में देर से कदम रखा। इस हफ़्ते कंपनी ने 800 से ज़्यादा 'डार्क स्टोर' का आंकड़ा पार कर लिया है, और रिपोर्ट के मुताबिक 2026 के अंत तक कंपनी इस संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत का क्विक कॉमर्स क्षेत्र अब और भी ज़्यादा कड़े मुकाबले के दौर में प्रवेश कर रहा है। हाल के घटनाक्रमों में इस हफ़्ते Swiggy के एक सह-संस्थापक का कंपनी छोड़ना भी शामिल है। इस क्षेत्र की अन्य कंपनियाँ भी बढ़ते मुकाबले और लागत के बीच अपनी रणनीतियों पर फिर से विचार कर रही हैं।
Walmart के स्वामित्व वाली इस कंपनी ने अगस्त 2024 में 'Flipkart Minutes' के साथ क्विक कॉमर्स के क्षेत्र में कदम रखा था, जिसके तहत विभिन्न श्रेणियों के उत्पादों की डिलीवरी मात्र 10 मिनट के भीतर की पेशकश की गई थी। तब से लेकर अब तक इस क्षेत्र का तेज़ी से विस्तार हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक कि वर्तमान में 6,000 से भी ज़्यादा 'डार्क स्टोर' सक्रिय हैं, जिसके चलते प्रमुख शहरों में विभिन्न कंपनियों के बीच भारी टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है, और मुकाबला और भी ज़्यादा तेज़ हो गया है।
बड़े शहरों से आगे
रिपोर्ट के अनुसार भारत में Flipkart का नेटवर्क अभी भी मार्केट लीडर Blinkit से छोटा है, Blinkit के पास 2,200 से ज़्यादा डार्क स्टोर हैं। हालाँकि Flipkart अपनी ग्रोथ बढ़ाने के लिए बड़े शहरों से आगे विस्तार करने पर दांव लगा रहा है। यह Blinkit से अलग है, जो 2027 तक अपने डार्क स्टोर की संख्या बढ़ाकर 3,000 करने की योजना बना रहा है, लेकिन उसका मुख्य ध्यान अपने टॉप 10 शहरों पर ही रहेगा।
Datum Intelligence के फाउंडर सतीश मीणा Satish Meena ने कहा "Flipkart में Walmart का DNA है।" "Walmart का DNA हमेशा यही रहा है, कि वह बाज़ार का विस्तार करके, कुल उपलब्ध अवसरों को बढ़ाकर उस पर अपना दबदबा बनाए।"
रिपोर्ट के मुताबिक Flipkart को बड़े शहरों से बाहर भी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, उसके क्विक कॉमर्स के 25–30% ऑर्डर अब छोटे कस्बों से आ रहे हैं। कि प्रति डार्क स्टोर आने वाले ऑर्डर में भी महीने-दर-महीने लगभग 25% की बढ़ोतरी हुई है।
हालाँकि क्विक कॉमर्स में ग्रोथ अभी भी बड़े शहरों तक ही सीमित है। रिपोर्ट के अनुसार ज़्यादातर मांग अभी भी बड़े शहरों से ही आ रही है, जहाँ ज़्यादा आबादी होने के कारण डिलीवरी तेज़ी से हो पाती है, और डार्क स्टोर का बेहतर इस्तेमाल हो पाता है, भले ही छोटे कस्बों में भी विस्तार की गति अब तेज़ हो रही है।
यही समीकरण मुनाफ़े का आधार भी बनता है। रिपोर्ट के अनुसार भारत के टॉप आठ शहरों में ही पाँच सबसे बड़ी कंपनियों द्वारा चलाए जा रहे 3,800 से ज़्यादा डार्क स्टोर मौजूद हैं, और इनमें से लगभग 3,600 स्टोर में मुनाफ़ा कमाने की क्षमता है।
Elara Capital के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट करण तौरानी Karan Taurani ने कहा “मेट्रो मार्केट में रिटर्न रेश्यो और प्रॉफ़िटेबिलिटी साफ़ तौर पर बेहतर होती है, क्योंकि वहाँ थ्रूपुट ज़्यादा होता है।” “यह बिज़नेस पूरी तरह से ज़्यादा थ्रूपुट पर निर्भर है, और फ़िलहाल यह ज़्यादातर मेट्रो मार्केट से ही आ रहा है।”
फिर भी, कुछ एनालिस्ट बड़े शहरों से बाहर भी लंबे समय के लिए मौके देख रहे हैं। Datum के सतीश मीणा ने कहा “अगर कंपनियाँ ग्रॉसरी से आगे बढ़कर और भी कई तरह की चीज़ें ज़्यादा तेज़ी से पहुँचाना शुरू कर दें, तो नॉन-मेट्रो (छोटे शहरों) में भी ज़बरदस्त उछाल आ सकता है।” “Flipkart इसी पर दाँव लगा रही है।”
इसके बावजूद, बड़े शहरों से बाहर बिज़नेस को बढ़ाना एक लंबा काम है। हांगकांग की ब्रोकरेज फर्म CLSA के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट आदित्य सोमन ने बताया कि फ़िलहाल क्विक कॉमर्स लगभग 125 शहरों में ही फ़ायदेमंद है, डार्क स्टोर को पूरी तरह से तैयार होने और प्रॉफ़िटेबल बनने में आमतौर पर 6 से 12 महीने का समय लगता है। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों में खुले कई नए स्टोर अभी भी शुरुआती दौर में ही हैं।
Amazon, जिसने Flipkart के आने के कुछ ही समय बाद 2024 के आखिर में भारत के क्विक कॉमर्स मार्केट में कदम रखा था, वह भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक इस ई-कॉमर्स दिग्गज ने अब तक लगभग 450–500 डार्क स्टोर खोले हैं, जिनमें से लगभग 330–370 स्टोर अभी चालू हालत में हैं, कंपनी का मकसद तेज़ी से डिलीवरी की बढ़ती माँग का फ़ायदा उठाना है।
मौजूदा कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है।
Flipkart मुकाबले के लिए सिर्फ़ डार्क-स्टोर के विस्तार पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि आक्रामक कीमतों का भी सहारा ले रहा है। कंपनी इस सेगमेंट में सबसे ज़्यादा डिस्काउंट दे रही है, पिछले महीने Jefferies द्वारा विश्लेषण की गई एक सैंपल बास्केट के आधार पर सभी कैटेगरी में लगभग 23–24% — क्योंकि वह ऐसे बाज़ार में यूज़र्स को आकर्षित करना चाहती है, जहाँ कीमत और सुविधा ही मांग के मुख्य चालक हैं।
इन रणनीतियों से पड़ने वाला दबाव असरदार साबित होता दिख रहा है। ब्रोकरेज फर्म JM Financial ने हाल ही में चेतावनी दी थी, कि Swiggy का क्विक कॉमर्स बिज़नेस "विकास बनाम मुनाफ़े की दुविधा" में फंसा हुआ है, और इससे शेयरधारकों की संपत्ति को नुकसान पहुँचने का खतरा है, साथ ही उसने यह भी कहा कि किसी बड़ी और ज़्यादा पूंजी वाली कंपनी द्वारा इसका अधिग्रहण निवेशकों के लिए सबसे अच्छा नतीजा हो सकता है।
Blinkit की मालिक कंपनी Eternal के शेयर इस साल अब तक लगभग 15% गिर चुके हैं, जबकि Swiggy के शेयरों में 29% से ज़्यादा की गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर Zepto इस साल के आखिर में भारतीय शेयर बाज़ारों में अपना IPO लाने की तैयारी कर रहा है।
Flipkart और Amazon जैसी बड़ी कंपनियों के इस क्षेत्र में आने और अपने कारोबार का विस्तार करने से इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का माहौल पूरी तरह बदल रहा है। रिटेल कंसल्टेंसी फर्म Technopak Advisors के सीनियर पार्टनर Ankur Bisen ने कहा "क्विक कॉमर्स अब सिर्फ़ स्टार्टअप तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह बड़ी कंपनियों के बीच का खेल बन गया है।"
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की आर्थिक स्थिति और कंपनियों के बीच बहुत ज़्यादा अंतर न होने के कारण भविष्य में इस क्षेत्र में कंपनियों का आपस में विलय या एकीकरण देखने को मिल सकता है, ऐसा इसलिए होगा क्योंकि भारी-भरकम डिस्काउंट वाले इस बाज़ार में सभी कंपनियाँ ग्राहकों के एक ही समूह को अपनी ओर खींचने के लिए आपस में होड़ कर रही हैं।
Amazon, Flipkart और Swiggy ने इस मामले पर टिप्पणी करने के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया। Eternal ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जबकि Zepto ने कहा कि IPO के लिए आवेदन करने के बाद लागू 'साइलेंट पीरियड' के चलते वह इस समय कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।


