FIU-IND ने 15 विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म को भेजा नोटिस, जानें क्या है पूरा मामला

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FIU-IND ने 15 विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म को भेजा नोटिस, जानें क्या है पूरा मामला
09 Sep 2026
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News Synopsis

भारत की वित्तीय खुफिया इकाई यानी वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (FIU-IND) Financial Intelligence Unit-India (FIU-IND) ने देश के एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियमों का पालन नहीं करने वाले 15 विदेशी वर्चुअल डिजिटल एसेट सेवा प्रदाताओं को नोटिस जारी किया है। इन कंपनियों को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 के प्रावधानों का पालन नहीं करने के मामले में कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

FIU-IND के अनुसार, यह कार्रवाई उन संस्थाओं के खिलाफ की गई है, जो भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट यानी VDA से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करा रही थीं, लेकिन देश के मनी लॉन्ड्रिंग रोधी ढांचे के तहत जरूरी नियमों का पालन नहीं कर रही थीं।

यह कार्रवाई FIU-IND के निदेशक ने PMLA की धारा 13 के तहत की है। इसका उद्देश्य भारत में वित्तीय लेनदेन को अधिक पारदर्शी बनाना और अवैध धन के इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों को कम करना है।

किन 15 विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म को नोटिस मिला? Which 15 Offshore Crypto Platforms Received Notices?

FIU-IND ने जिन 15 वर्चुअल डिजिटल एसेट सेवा प्रदाताओं को नोटिस जारी किया है, उनमें अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो एक्सचेंज और डिजिटल एसेट प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

नोटिस पाने वाली कंपनियों की सूची List of Entities Named in the Notices

इनमें Weex International Exchange LTD, BLF Global Limited (Blofin), RezorEx, Bitunix LLC, DigiFinex Ltd, Hopeful Technology Co. Ltd. (Toobit) और Fibtc Ltd/XT TECHNICAL PTE. LTD. (XT.com) शामिल हैं।

इसके अलावा LATRADE Ltd (Latoken), Wootech Limited (WOO X), Marketa Trading Inc. (Pionex), CHN Group LLC (ChangeNow) और SimpleSwap LTD को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

सूची में FFGX Group LLC (FixedFloat), UAB Clear White Technologies (WhiteBIT) और FinSeven CZ (Guardarian) भी शामिल हैं।

FIU-IND का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म को भारत में लागू मनी लॉन्ड्रिंग रोधी नियमों के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना आवश्यक था।

ऐप्स और वेबसाइट URL हटाने के लिए भी नोटिस Notices Also Issued to Remove Apps and Website URLs

FIU-IND ने केवल संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। एक संबंधित कदम के तहत FIU-IND के निदेशक ने Information Technology Act, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत नोडल अधिकारी के रूप में काम करते हुए इन संस्थाओं से जुड़े ऐप्स और वेबसाइट URL को हटाने के लिए भी नोटिस जारी किए हैं।

भारत में सार्वजनिक पहुंच रोकने की कोशिश Move to Restrict Public Access in India

इन ऐप्स और URL के जरिए भारत में लोगों को संबंधित क्रिप्टो सेवाओं तक सार्वजनिक पहुंच मिल रही थी। इसलिए FIU-IND ने ऐसी सेवाओं तक भारत में पहुंच उपलब्ध कराने वाले माध्यमों को हटाने की मांग की है।

इस कदम का उद्देश्य उन प्लेटफॉर्म की भारत में उपलब्धता को सीमित करना है, जो देश के लागू एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियमों का पालन किए बिना सेवाएं उपलब्ध करा रहे थे।

भारत में VDA सेवा प्रदाताओं के लिए क्या हैं नियम? What Are the Rules for VDA Service Providers in India?

भारत ने मार्च 2023 में वर्चुअल डिजिटल एसेट सेवा प्रदाताओं को अपने Anti-Money Laundering और Counter Financing of Terrorism यानी AML/CFT ढांचे के दायरे में शामिल किया था। इसके लिए PMLA के प्रावधानों का इस्तेमाल किया गया।

इस व्यवस्था के तहत भारत में काम करने वाले VDA सेवा प्रदाताओं को, चाहे वे भारत में स्थित हों या विदेश में, यदि वे निर्धारित प्रकार की गतिविधियां करते हैं तो उन्हें FIU-IND के साथ Reporting Entity के रूप में पंजीकरण कराना होता है।

किन गतिविधियों पर लागू होता है नियम? Which Activities Come Under the Framework?

यह नियम उन VDA सेवा प्रदाताओं पर लागू होते हैं जो निर्धारित प्रकार की डिजिटल एसेट सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।

इन गतिविधियों में शामिल हैं।

  • वर्चुअल डिजिटल एसेट को सामान्य मुद्रा यानी Fiat Currency के साथ बदलना।

  • एक व्यक्ति या संस्था से दूसरे व्यक्ति या संस्था को वर्चुअल डिजिटल एसेट का हस्तांतरण करना।

  • वर्चुअल डिजिटल एसेट की सुरक्षा या सुरक्षित रख-रखाव करना।

  • ऐसे डिजिटल साधनों का प्रबंधन करना, जिनके जरिए वर्चुअल डिजिटल एसेट पर नियंत्रण हासिल किया जा सकता है।

भारत में भौतिक कार्यालय होना जरूरी नहीं Physical Presence in India Is Not Required for the Rules to Apply

FIU-IND ने स्पष्ट किया है कि VDA सेवा प्रदाताओं पर लागू होने वाले ये दायित्व गतिविधि आधारित हैं। यानी नियम इस बात पर निर्भर नहीं करते कि किसी कंपनी का भारत में कोई भौतिक कार्यालय या मौजूदगी है या नहीं।

यदि कोई विदेशी यानी Offshore VDA सेवा प्रदाता भारत के लोगों को ऐसी निर्धारित सेवाएं उपलब्ध कराता है, जो PMLA के दायरे में आती हैं, तो केवल विदेश में स्थित होने के आधार पर वह इन नियमों से बाहर नहीं हो सकता।

पंजीकृत सेवा प्रदाताओं की जिम्मेदारियां Responsibilities of Registered Service Providers

जो VDA सेवा प्रदाता FIU-IND के साथ पंजीकृत हैं, उन्हें PMLA और उसके तहत बनाए गए नियमों में निर्धारित कई जिम्मेदारियों का पालन करना होता है।

इनमें वित्तीय गतिविधियों की रिपोर्टिंग, रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और अन्य अनुपालन संबंधी दायित्व शामिल हैं। इन नियमों का उद्देश्य संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की पहचान करने और मनी लॉन्ड्रिंग तथा अवैध धन के प्रवाह से जुड़े जोखिमों को कम करना है।

FIU-IND ने क्रिप्टो निवेशकों को भी चेताया FIU-IND Also Warns Crypto Investors

FIU-IND ने आम लोगों को क्रिप्टो उत्पादों और Non-Fungible Tokens यानी NFTs से जुड़े जोखिमों के बारे में भी चेतावनी दी है।

वित्तीय खुफिया इकाई के अनुसार, क्रिप्टो उत्पाद और NFTs फिलहाल अनियंत्रित यानी Unregulated हो सकते हैं और इनमें निवेश या लेनदेन काफी जोखिम भरा हो सकता है।

नुकसान होने पर नियामकीय मदद सीमित हो सकती है Regulatory Recourse May Be Limited for Losses

FIU-IND ने कहा है कि क्रिप्टो या NFT से जुड़े लेनदेन में नुकसान होने पर निवेशकों को हमेशा नियामकीय राहत या सहायता उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है।

इसलिए लोगों को ऐसे डिजिटल एसेट में लेनदेन करने से पहले उससे जुड़े जोखिमों को अच्छी तरह समझना चाहिए। केवल किसी प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता या ऑनलाइन उपलब्धता को उसकी विश्वसनीयता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

भारत के एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग ढांचे को मजबूती Strengthening India’s Anti-Money Laundering Framework

15 विदेशी VDA सेवा प्रदाताओं के खिलाफ FIU-IND की कार्रवाई यह संकेत देती है कि भारत डिजिटल एसेट क्षेत्र में एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियमों के अनुपालन को गंभीरता से लागू कर रहा है।

क्रिप्टो और अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट का वैश्विक स्तर पर विस्तार होने के साथ इनसे जुड़े वित्तीय अपराधों और अवैध धन के इस्तेमाल के जोखिम भी चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे में भारत का AML/CFT ढांचा डिजिटल एसेट क्षेत्र में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

FIU-IND की यह कार्रवाई यह भी स्पष्ट करती है कि किसी विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म के लिए भारत में भौतिक कार्यालय न होना उसे भारतीय मनी लॉन्ड्रिंग रोधी नियमों से स्वतः बाहर नहीं करता। यदि उसकी गतिविधियां निर्धारित VDA सेवाओं के अंतर्गत आती हैं, तो उसे संबंधित अनुपालन आवश्यकताओं का पालन करना पड़ सकता है।

निष्कर्ष Conclusion

FIU-IND द्वारा 15 Offshore क्रिप्टो प्लेटफॉर्म को जारी किए गए नोटिस भारत में डिजिटल एसेट क्षेत्र के लिए बढ़ती नियामकीय निगरानी को दर्शाते हैं। PMLA के तहत VDA सेवा प्रदाताओं के लिए पंजीकरण, रिपोर्टिंग और रिकॉर्ड रखने जैसी जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण हैं।

भारत में काम करने वाले या भारतीय ग्राहकों को निर्धारित VDA सेवाएं देने वाले प्लेटफॉर्म केवल इसलिए नियमों से बच नहीं सकते क्योंकि वे विदेश में स्थित हैं। FIU-IND की कार्रवाई के साथ-साथ ऐप्स और वेबसाइट URL हटाने के लिए जारी नोटिस यह दिखाते हैं कि सरकार डिजिटल एसेट क्षेत्र में नियमों के अनुपालन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

साथ ही, आम निवेशकों के लिए FIU-IND की चेतावनी भी महत्वपूर्ण है। क्रिप्टो और NFTs में जोखिम काफी अधिक हो सकता है और नुकसान होने की स्थिति में नियामकीय राहत उपलब्ध न होने की संभावना रहती है। इसलिए किसी भी डिजिटल एसेट लेनदेन से पहले उसके जोखिम और संबंधित नियमों को समझना जरूरी है।