डोनाल्ड ट्रंप को लगा बड़ा झटका, 16 लाख करोड़ लौटाने का आदेश

Share Us

48
डोनाल्ड ट्रंप को लगा बड़ा झटका, 16 लाख करोड़ लौटाने का आदेश
05 Mar 2026
7 min read

News Synopsis

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप Donald Trump की व्यापारिक नीतियों को कानूनी मोर्चे पर एक ऐसा करारा झटका लगा है, जिसकी गूंज पूरी दुनिया के बाजारों में सुनाई दे रही है, अमेरिका के व्यापारिक इतिहास में शायद पहली बार इतनी बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल रही है, जहां सरकार को अपनी ही नीतियों के कारण अरबों डॉलर का रिफंड चुकाना पड़ सकता है, मामला सिर्फ एक राजनीतिक हार का नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर उन तमाम कंपनियों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला है, जो अमेरिका के साथ व्यापार करते हैं, आइए विस्तार से समझते हैं, कि आखिर ये पूरा मामला क्या है, और इससे वैश्विक कारोबारी दुनिया कैसे प्रभावित होने वाली है।

कंपनियों के लिए बड़ी राहत

न्यूयॉर्क के एक फेडरल जज रिचर्ड ईटन ने हाल ही में एक बेहद अहम फैसला सुनाया है, उन्होंने स्पष्ट किया है, कि जिन भी कंपनियों ने सरकार द्वारा लगाए गए अमान्य टैरिफ (आयात शुल्क) का भुगतान किया है, वे सभी अपना पैसा वापस पाने की हकदार हैं, यह पूरा विवाद 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) के तहत लगाए गए भारी-भरकम टैक्स से जुड़ा है।

पिछले महीने ही अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के इस डबल-डिजिट आयात शुल्क को असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया था, अब जज ईटन ने यह साफ कर दिया है, कि रिफंड का दायरा सिर्फ अदालत का दरवाजा खटखटाने वाली कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह उन सभी आयातकों पर समान रूप से लागू होगा जिन्होंने इस आपातकालीन कानून के तहत ड्यूटी चुकाई है।

सरकारी खजाने पर 16 लाख करोड़ की भारी चपत

इस अदालती फैसले का वित्तीय प्रभाव हैरान करने वाला है, आंकड़ों पर गौर करें तो अमेरिकी सरकार ने दिसंबर के मध्य तक इन विवादित टैरिफ के जरिए करीब 130 अरब डॉलर (लगभग 12 लाख करोड़ रुपये) की भारी-भरकम रकम वसूली थी, अनुमान लगाया जा रहा है, कि दिसंबर के बाद की गई वसूली को मिला दें, तो कुल रिफंड का यह आंकड़ा 175 अरब डॉलर यानी करीब 16.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

टेनेसी स्थित फिल्टर निर्माता कंपनी ‘एटमस फिल्ट्रेशन’ के मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने यह आदेश दिया है, ट्रंप प्रशासन ने इस रिफंड प्रक्रिया को धीमा करने की पूरी कानूनी कोशिश की थी, लेकिन अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स ने सरकार की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया और मामले को तेजी से निपटाने के निर्देश दिए।

ट्रंप प्रशासन का पलटवार, 15% टैक्स का नया हथियार

अदालत से मिली इस रणनीतिक हार के बाद सरकार भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं, कि प्रशासन अपने रुख को और सख्त करने जा रहा है, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने जो 10% का नया यूनिवर्सल टैरिफ लागू किया था, उसे अब बढ़ाकर 15 फीसदी करने की तैयारी चल रही है।

बेसेंट के मुताबिक इसी हफ्ते इस नए टैक्स स्लैब का ऐलान किया जा सकता है, हालांकि मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत यह नया टैरिफ ढांचा केवल 150 दिनों तक ही प्रभाव में रह सकता है।

क्या फिर से लौटेंगे पुराने कड़े नियम?

अमेरिकी अधिकारियों के पास अब केवल पांच महीने का वक्त है, इस अवधि में वे पुरानी टैरिफ दरों को वापस लागू करने के लिए नए कानूनी विकल्प तलाश रहे हैं, ट्रेजरी सेक्रेटरी का मानना है, कि ‘सेक्शन 301’ और ‘सेक्शन 232’ के तहत लगाए जाने वाले टैरिफ की प्रक्रिया भले ही थोड़ी धीमी हो, लेकिन कानूनी रूप से वे ज्यादा मजबूत हैं।